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Zoho founder Sridhar Vembu announces Arattai will remove username accounts following India’s messaging platform security concerns.
Arattai में भी बंद होगा यूजरनेम फीचर, WhatsApp पर सरकार की सख्ती के बाद Zoho के श्रीधर वेम्बु का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Government Notice
सरकार ने WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर भेजा नोटिस

नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर अपनी सख्ती बढ़ाते हुए WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal को भी उनके यूजरनेम (Username) फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और संभावित जोखिमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है।   यूजरनेम फीचर पर सरकार की बढ़ी चिंता   सरकार का कहना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग में मोबाइल नंबर छिपा रहता है, जिससे फर्जी पहचान , ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण कंपनियों से पूछा गया है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं।   WhatsApp को पहले ही दिया जा चुका है निर्देश   इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को निर्देश दिया था कि भारत में WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर का रोलआउट फिलहाल रोका जाए। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर इस फीचर और इसके सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जवाब मांगा गया था।   Telegram और Signal से भी मांगी गई रिपोर्ट   सरकारी सूत्रों के अनुसार, Telegram और Signal से भी पूछा गया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं। दोनों कंपनियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।   डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने और साइबर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब सभी की नजर कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
UBTech UWORLD U1 humanoid robot with lifelike human appearance, emotional AI, and male and female versions unveiled in China.
UWORLD U1: चीन ने लॉन्च किया इंसानों जैसा ह्यूमनॉइड रोबोट, महिला-पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा, समझेगा भावनाएं और आंखों में देखकर करेगा बात

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया में चीन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी UBTech ने 30 जून को शेन्जेन में अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट UWORLD U1 लॉन्च किया। यह रोबोट पारंपरिक औद्योगिक मशीनों से बिल्कुल अलग है। इसे फैक्ट्रियों में काम कराने के बजाय इंसानों के साथ रहने, बातचीत करने और उन्हें भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। UWORLD U1 का डिजाइन और रूप-रंग काफी हद तक इंसानों जैसा है। इसमें सिलिकॉन स्किन, अत्याधुनिक इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑन-डिवाइस डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रोबोट लोगों के साथ प्राकृतिक तरीके से संवाद कर सकता है और समय के साथ उनके व्यवहार और पसंद को समझते हुए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। इंसानों का साथी बनने के लिए तैयार किया गया UBTech के अनुसार, UWORLD U1 को ऐसे वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंसानों के साथ लगातार संवाद की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल बुजुर्गों की देखभाल, शिक्षा, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, रिसेप्शन सेवाओं, प्रीमियम होम सर्विस और अन्य ग्राहक-केंद्रित कार्यों में किया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बातचीत के दौरान सामने वाले की भावनाओं को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी रखता है। तीन वेरिएंट में उपलब्ध UWORLD U1 को तीन अलग-अलग मॉडल में पेश किया गया है। U1 Lite U1 Pro U1 Ultra फिलहाल इसकी बिक्री केवल चीन में शुरू की गई है। कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 119,800 युआन (करीब 14 लाख रुपये) है, जबकि हाई-एंड Ultra मॉडल की कीमत 990,000 युआन (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जाती है। महिला और पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा UWORLD U1 की एक खास विशेषता यह है कि इसे पुरुष और महिला दोनों रूपों में तैयार किया गया है। पुरुष मॉडल की लंबाई लगभग 183 सेंटीमीटर है। महिला मॉडल की लंबाई लगभग 168 सेंटीमीटर रखी गई है। रोबोट में कुल 88 सर्वो जॉइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह इंसानों की तरह सिर, हाथ, गर्दन और शरीर की कई स्वाभाविक गतिविधियां कर सकता है। इसके पूरे बाहरी हिस्से पर सिलिकॉन कोटिंग की गई है ताकि बातचीत के दौरान यह अधिक वास्तविक महसूस हो। 20 से ज्यादा भावनाओं को पहचान सकता है UWORLD U1 की सबसे बड़ी ताकत इसका Emotional AI System है। कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 20 से अधिक प्रकार की मानवीय भावनाओं को पहचान सकता है। बातचीत के दौरान यह सामने वाले व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखता है, चेहरे के भावों को समझता है और पिछली बातचीत को याद रखते हुए भविष्य में अधिक व्यक्तिगत जवाब देता है। यानी अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस रोबोट से बातचीत करता है, तो समय के साथ यह उसकी पसंद, व्यवहार और बातचीत के तरीके को समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है। क्लाउड पर नहीं, डिवाइस में ही सुरक्षित रहेगा डेटा UBTech ने प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए UWORLD U1 में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया है। इसका इमोशनल AI मॉडल Rockchip RK3588 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होती है और क्लाउड सर्वर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। यूजर का व्यक्तिगत डेटा क्लाउड पर अपलोड होने के बजाय रोबोट में ही सुरक्षित रहता है। कंपनी के अनुसार इसमें तीन-स्तरीय प्राइवेसी आर्किटेक्चर दिया गया है, जिसमें लोकल-फर्स्ट प्रोसेसिंग, सीमित क्लाउड उपयोग और यूजर कंट्रोल्ड हार्डवेयर सिक्योरिटी शामिल है। इसका उद्देश्य AI डिवाइसों से जुड़ी बढ़ती गोपनीयता संबंधी चिंताओं को कम करना है। सिर्फ वयस्कों के लिए उपलब्ध UBTech ने स्पष्ट किया है कि UWORLD U1 को किसी इंडस्ट्रियल रोबोट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विशेष रूप से वयस्क खरीदारों के लिए विकसित किया गया है, जहां स्वाभाविक संवाद, साथ और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
A smartphone displaying the WhatsApp logo alongside a government notice symbolizing regulatory scrutiny over the platform's proposed username feature in India.
WhatsApp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस; तीन दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
US AI policy
अमेरिका ने Anthropic के उन्नत AI मॉडल पर लगे निर्यात प्रतिबंध हटाए, सुरक्षा शर्तों के साथ मिली मंजूरी

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic के उन्नत AI मॉडल Fable 5 और Mythos 5 पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंध को हटा दिए हैं। यह फैसला कंपनी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने के बाद लिया गया है।   जून में लगाए गए थे प्रतिबंध   अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने 12 जून को इन AI मॉडलों पर अस्थायी निर्यात नियंत्रण लगाया था। सरकार को आशंका थी कि मॉडल की सुरक्षा प्रणाली को बायपास कर उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इस कारण विदेशी उपयोगकर्ताओं और कई संस्थाओं की पहुंच सीमित कर दी गई थी।   सुरक्षा सुधार के बाद मिली राहत   Anthropic ने सरकार के निर्देशों के अनुसार अपने AI मॉडल में नए सुरक्षा फीचर जोड़े, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की व्यवस्था बनाई और संभावित दुरुपयोग रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा तंत्र लागू किया है। इन सुधारों के बाद अमेरिकी सरकार ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया है।   जरूरत पड़ने पर फिर लग सकते हैं प्रतिबंध   अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने कहा कि यदि भविष्य में कंपनी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती या किसी नए खतरे की जानकारी मिलती है, तो सरकार दोबारा निर्यात प्रतिबंध लगाने का अधिकार सुरक्षित रखती है।   AI उद्योग के लिए अहम संकेत   विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका की AI नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इससे अमेरिकी AI कंपनियों को वैश्विक बाजार में राहत मिलेगी, लेकिन साथ ही उन्नत AI तकनीकों पर सरकारी निगरानी भी जारी रहेगी।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Old smartphones and laptops stored in a drawer, highlighting data security concerns and growing e-waste issues.
पुराने फोन को बेचने से क्यों बचते हैं लोग? रिसर्च में सामने आईं बड़ी वजहें, ज्यादातर यूजर्स करते हैं यही गलती

नई दिल्ली: अगर आपके घर की किसी दराज में सालों पुराना स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट रखा हुआ है, तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल बंद करने के बाद भी उन्हें बेचने, दान करने या रीसाइक्लिंग के लिए नहीं देते। हालिया रिसर्च के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ तकनीकी कारण नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा, मनोवैज्ञानिक सोच और जानकारी की कमी जैसी कई अहम वजहें जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग सही तरीके से डेटा मिटाने और अधिकृत रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के बारे में जागरूक हों, तो ई-वेस्ट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डेटा चोरी का डर सबसे बड़ी वजह रिसर्च के अनुसार सबसे बड़ा कारण निजी डेटा के लीक होने का डर है। कई लोगों को लगता है कि पुराने फोन या लैपटॉप से फोटो, वीडियो, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और निजी दस्तावेज पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि वे डिवाइस बेचने या किसी और को देने के बजाय घर में ही सुरक्षित रखना बेहतर समझते हैं। रीसाइक्लिंग की जानकारी का अभाव कई लोग यह भी नहीं जानते कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रीसाइक्लिंग कहां और कैसे कराई जाए। जानकारी की कमी के कारण वे पुराने गैजेट वर्षों तक घर में ही संभालकर रखते हैं। कुछ लोगों को यह प्रक्रिया कठिन लगती है, जबकि आज कई अधिकृत ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर और एक्सचेंज प्रोग्राम उपलब्ध हैं, जिनसे यह काम पहले की तुलना में काफी आसान हो चुका है। पुराने फोन को बैकअप समझकर रखते हैं कई यूजर्स अपने पुराने स्मार्टफोन या लैपटॉप को भविष्य के लिए बैकअप डिवाइस मानकर रखते हैं। उन्हें लगता है कि यदि नया फोन खराब हो जाए या किसी जरूरी फाइल की जरूरत पड़े, तो पुराना डिवाइस काम आ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बिना इस्तेमाल पड़े रहने से डिवाइस की बाजार कीमत लगातार घटती रहती है। साथ ही बैटरी और हार्डवेयर भी खराब होने लगते हैं, जिससे बाद में उसे बेचना या दोबारा इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है। पुराना फोन बेचने से पहले क्या करें? यदि आप अपना पुराना स्मार्टफोन या लैपटॉप बेचना, दान करना या रीसाइक्लिंग के लिए देना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें— सभी जरूरी डेटा का बैकअप लें। डिवाइस का Factory Reset करके पूरा डेटा मिटाएं। अपने Google या Apple अकाउंट से डिवाइस को Remove करें। SIM कार्ड और मेमोरी कार्ड निकाल लें। केवल अधिकृत रीसाइक्लिंग सेंटर या भरोसेमंद खरीदार को ही डिवाइस दें। इन सावधानियों से आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी और नया उपयोगकर्ता भी डिवाइस का बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सकेगा। ई-वेस्ट कम करने में मिलेगी मदद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोगों में डेटा सुरक्षा और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को लेकर जागरूकता बढ़े, तो लाखों पुराने स्मार्टफोन और लैपटॉप दोबारा उपयोग या रीसाइक्लिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा, पर्यावरण को फायदा मिलेगा और मूल्यवान संसाधनों का दोबारा इस्तेमाल संभव हो सकेगा।  

surbhi जून 29, 2026 0
Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition featuring carbon fiber design and AMOLED display
प्रीमियम डिजाइन के साथ लॉन्च हुआ Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition, 6500mAh बैटरी और 144Hz AMOLED डिस्प्ले से लैस

नई दिल्ली: स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Infinix ने भारतीय बाजार में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition लॉन्च कर दिया है। यह डिवाइस अपने शानदार डिजाइन, दमदार हार्डवेयर और एडवांस फीचर्स के कारण चर्चा में है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को मशहूर इटालियन डिजाइन हाउस Pininfarina के सहयोग से तैयार किया है, जिससे इसे एक लग्जरी और स्पोर्टी लुक मिला है। फोन में कार्बन फाइबर फिनिश, एयरोस्पेस-ग्रेड एल्युमिनियम फ्रेम, हाई-रिफ्रेश रेट AMOLED डिस्प्ले, पावरफुल प्रोसेसर और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस स्टाइल और परफॉर्मेंस का बेहतरीन संयोजन पेश करता है। Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition की कीमत और उपलब्धता भारत में Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition की कीमत 37,999 रुपये रखी गई है। यह स्मार्टफोन 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट में उपलब्ध होगा। कंपनी इसे Torino Black कलर ऑप्शन में बाजार में उतार रही है। इस स्मार्टफोन की बिक्री 29 जून से दोपहर 12 बजे शुरू होगी। प्रीमियम डिजाइन और लिमिटेड एडिशन अपील के कारण यह डिवाइस टेक प्रेमियों और डिजाइन-केंद्रित यूजर्स को आकर्षित कर सकता है। प्रीमियम डिजाइन बना रहा है खास फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजाइन है। इसमें Carbon Fibre फिनिश के साथ 360-डिग्री Aerospace-Grade Aluminium Frame दिया गया है। डिवाइस पर मौजूद लाल रंग की एक्सेंट लाइन्स इसे स्पोर्ट्स कार जैसी प्रीमियम फील देती हैं। फोन के रियर पैनल पर Active Matrix Display भी दिया गया है, जो नोटिफिकेशन और अन्य अलर्ट के दौरान आकर्षक लाइट इफेक्ट्स दिखाता है। इसके अलावा कंपनी इस स्पेशल एडिशन स्मार्टफोन को एक यूनिक और प्रीमियम रिटेल बॉक्स के साथ पेश कर रही है। शानदार AMOLED डिस्प्ले Infinix Note 60 Pro Pininfarina Edition में 6.78 इंच का LTPS 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 144Hz तक के अडैप्टिव रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है, जिससे गेमिंग, स्क्रॉलिंग और वीडियो देखने का अनुभव काफी स्मूथ हो जाता है। डिस्प्ले को Corning Gorilla Glass 7i की सुरक्षा दी गई है। साथ ही 4,500 निट्स की पीक ब्राइटनेस के कारण तेज धूप में भी स्क्रीन आसानी से देखी जा सकती है। दमदार प्रोसेसर और परफॉर्मेंस स्मार्टफोन में Qualcomm Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो मल्टीटास्किंग, गेमिंग और AI आधारित फीचर्स को बेहतर तरीके से संभालने में सक्षम है। इसके साथ 8GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है, जिससे यूजर्स को पर्याप्त स्टोरेज स्पेस और तेज परफॉर्मेंस मिलती है। कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए फोन में ड्यूल रियर कैमरा सिस्टम दिया गया है। 50MP प्राइमरी कैमरा OIS (Optical Image Stabilization) सपोर्ट ऑटोफोकस फीचर 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13MP फ्रंट कैमरा मौजूद है। OIS सपोर्ट के कारण कम रोशनी में भी बेहतर फोटो और स्थिर वीडियो रिकॉर्डिंग की उम्मीद की जा सकती है। बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग फोन में 6,500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक उपयोग का दावा करती है। चार्जिंग फीचर्स की बात करें तो इसमें: 90W फास्ट चार्जिंग 30W वायरलेस चार्जिंग 7.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग 5W वायरलेस रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। यानी यूजर इस फोन की मदद से अन्य डिवाइसेस को भी चार्ज कर सकते हैं। धूल और पानी से सुरक्षा फोन को IP64 रेटिंग दी गई है, जो इसे धूल और पानी की हल्की छींटों से सुरक्षित रखने में मदद करती है। हालांकि इसे पूरी तरह वाटरप्रूफ नहीं माना जा सकता।  

surbhi जून 25, 2026 0
Flexible hydrogel generator producing electricity from air moisture and human sweat for wearable devices
हवा की नमी और पसीने से बनेगी बिजली! वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा हाइड्रोजेल जनरेटर, बिना चार्जर चल सकेंगे स्मार्ट डिवाइस

नई दिल्ली: कल्पना कीजिए कि आपकी स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या हेल्थ मॉनिटर को कभी चार्ज करने की जरूरत ही न पड़े। वे सिर्फ हवा की नमी या आपके शरीर के पसीने से खुद ही ऊर्जा बनाकर काम करते रहें। यह सुनने में भले भविष्य की तकनीक लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है। शोधकर्ताओं ने एक नया फ्लेक्सिबल हाइड्रोजेल मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर विकसित किया है, जो वातावरण में मौजूद नमी और मानव शरीर से निकलने वाले पसीने को सोखकर सीधे बिजली उत्पन्न कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में वियरेबल डिवाइस और मेडिकल सेंसर की दुनिया बदल सकती है। क्यों खास है यह नई तकनीक? आज स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, वायरलेस ईयरबड्स और मेडिकल सेंसर जैसे उपकरणों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बैटरी है। इन्हें बार-बार चार्ज करना पड़ता है और समय के साथ बैटरी खराब होने पर इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी बढ़ता है। वैश्विक स्तर पर ई-वेस्ट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुद ऊर्जा पैदा करने में सक्षम बना सकें। नया हाइड्रोजेल जनरेटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हवा की नमी से कैसे बनती है बिजली? यह मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapor) को अवशोषित करता है और उसे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है। इसका मतलब है कि: त्वचा पर लगाए गए हेल्थ सेंसर फिटनेस बैंड स्मार्ट पैच फेस मास्क आधारित सेंसर मेडिकल मॉनिटर भविष्य में बाहरी चार्जर या बड़ी बैटरी के बिना भी काम कर सकते हैं। नई तकनीक कैसे काम करती है? इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष प्रकार का हाइड्रोजेल है। शोधकर्ताओं ने: पानी और ग्लिसरॉल आधारित चिपकने वाला हाइड्रोजेल तैयार किया। इसे लिक्विड मेटल और स्ट्रेचेबल सिल्वर इलेक्ट्रोड से जोड़ा। ग्लिसरॉल की मदद से हाइड्रोजेल और इलेक्ट्रोड के बीच मजबूत संपर्क बनाया। इससे डिवाइस के अंदर विद्युत प्रवाह लगातार बना रहता है, चाहे उसे मोड़ा जाए, खींचा जाए या पहनकर इस्तेमाल किया जाए। हजारों बार मोड़ने पर भी नहीं हुआ खराब इस तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में इसकी मजबूती शामिल है। परीक्षण के दौरान: डिवाइस को 8,000 बार मोड़ा गया। 80% तक खींचकर 1,000 बार टेस्ट किया गया। 180 डिग्री तक मोड़ने और खींचने के बाद भी इसकी कार्यक्षमता बरकरार रही। यानी यह रोजमर्रा के उपयोग के लिए काफी लचीला और टिकाऊ साबित हुआ। 85% नमी में लगातार 9 दिन तक बिजली टेस्टिंग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि: 85% आर्द्रता (Humidity) में यह लगभग 0.94 वोल्ट बिजली उत्पन्न करने में सक्षम रहा। डिवाइस ने लगातार 220 घंटे यानी 9 दिन से अधिक समय तक स्थिर बिजली उत्पादन किया। हालांकि यह किसी स्मार्टफोन चार्जर जितनी ऊर्जा नहीं बनाता, लेकिन छोटे सेंसर और वियरेबल डिवाइस चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। किन क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग? विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। संभावित उपयोग: स्वास्थ्य सेवाएं ECG मॉनिटर हार्ट रेट सेंसर सांसों की निगरानी करने वाले उपकरण फिटनेस और स्पोर्ट्स फिटनेस ट्रैकर्स एथलीट परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग बुजुर्गों की देखभाल निरंतर स्वास्थ्य निगरानी आपातकालीन स्वास्थ्य सेंसर दूरस्थ चिकित्सा (Telemedicine) ऐसे क्षेत्रों में मेडिकल मॉनिटरिंग जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है क्या स्मार्टवॉच और ईयरबड्स बिना चार्जर चलेंगे? फिलहाल यह तकनीक शुरुआती शोध चरण में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले: लंबे समय तक परीक्षण सुरक्षित पैकेजिंग बड़े आकार के प्रोटोटाइप व्यावसायिक उत्पादन जैसे चरण पूरे करने होंगे। हालांकि यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक बाजार में आती है, तो भविष्य में स्मार्टवॉच, हेल्थ बैंड और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी पर निर्भरता काफी कम हो सकती है। तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह शोध सिर्फ एक नई ऊर्जा तकनीक नहीं बल्कि ई-वेस्ट कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि छोटे उपकरण वातावरण की नमी से स्वयं ऊर्जा पैदा कर सकें, तो बैटरी बदलने और चार्जिंग की जरूरत काफी हद तक घट सकती है।  

surbhi जून 25, 2026 0
CRED founder Kunal Shah after being appointed as the new global CEO of WhatsApp.
CRED से बनाई अरबों की दौलत, अब WhatsApp के CEO बने ₹15,000 करोड़ के मालिक कुणाल शाह

नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Infosys Chairman Nandan Nilekani discusses AI opportunities and dismisses concerns about job losses in the IT sector.
Infosys & AI: ‘इंफोसिस का कुछ नहीं बिगाड़ सकता AI’, नौकरियों पर खतरे के डर को नंदन नीलेकणि ने किया खारिज

Infosys Chairman on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। इसी बीच इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने AI से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट और मजबूत राय रखी है। उनका कहना है कि AI पारंपरिक आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। AI से नहीं खत्म होंगी आईटी कंपनियां इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में बोलते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि जेनरेटिव AI के आने से पारंपरिक आईटी सर्विसेज मॉडल खत्म होने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि: "AI हमारी जैसी कंपनियों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन संगठनों की ताकत बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव के साथ खुद को ढालते हैं और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।" नीलेकणि के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है। इसमें डोमेन नॉलेज, सुरक्षा, टेस्टिंग, सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसी कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं, जिन्हें केवल AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ऑटोमेशन के बीच क्यों बढ़ा है डर? दुनियाभर में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि AI और ऑटोमेशन के कारण कोडिंग, आउटसोर्सिंग और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है। खासकर भारत के 300 अरब डॉलर से अधिक के तकनीकी उद्योग के लिए यह चिंता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, नंदन नीलेकणि का मानना है कि AI खतरा नहीं बल्कि अवसर है। पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर रहा AI इंफोसिस चेयरमैन ने बताया कि AI की मदद से कंपनियां अपने दशकों पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में सबसे बड़ा अवसर AI मॉडल और एजेंट्स को कंपनियों के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने में होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंफोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। 2030 तक 400 बिलियन डॉलर का हो सकता है बाजार इंफोसिस ने हाल ही में अपना AI-First Value Framework लॉन्च किया है। कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI-फर्स्ट सर्विसेज का वैश्विक बाजार 300 से 400 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच सकता है। नंदन नीलेकणि के बयान से यह संकेत मिलता है कि इंफोसिस AI को चुनौती नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का सबसे बड़ा अवसर मान रही है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Nothing Phone 4b teaser showcasing rear design with camera module and Glyph interface.
Nothing Phone 4b की लॉन्च डेट हुई कन्फर्म, Phone 4a से भी सस्ता होगा नया मॉडल

Nothing अपने स्मार्टफोन पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए अब एक नई 'b' सीरीज लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि इस सीरीज का पहला स्मार्टफोन Nothing Phone 4b होगा, जिसे बजट सेगमेंट के ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि यह मॉडल मौजूदा Nothing Phone 4a से भी कम कीमत में उपलब्ध कराया जा सकता है। Nothing के पोर्टफोलियो में शामिल होगी नई 'b' सीरीज कंपनी के CEO Carl Pei के नेतृत्व में Nothing लगातार नए प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। सोमवार को Nothing India के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट Akis Evangelidis ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए नई 'b' सीरीज के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सीरीज कंपनी की लोकप्रिय 'a' सीरीज से नीचे के प्राइस सेगमेंट में रखी जाएगी। उनके अनुसार, b Series को उन ग्राहकों के लिए डिजाइन किया गया है जो कम कीमत में Nothing का एक्सपीरियंस चाहते हैं। नामकरण रणनीति भी समझाई Akis Evangelidis ने Nothing की प्रोडक्ट नामकरण प्रणाली को भी स्पष्ट किया। उनके मुताबिक, डिवाइस के नाम में दिया गया नंबर उसकी जनरेशन को दर्शाता है, जबकि अंत में जुड़ा अक्षर (जैसे a या b) उसके सेगमेंट की पहचान बताता है। कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे उसका पोर्टफोलियो बढ़ेगा, यह सिस्टम ग्राहकों के लिए अलग-अलग डिवाइसेज़ को समझना आसान बनाएगा। 7 जुलाई को भारत में होगा लॉन्च Nothing ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि Nothing Phone 4b को भारत में 7 जुलाई को दोपहर 3:30 बजे (IST) लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च से पहले जारी किए गए टीजर में फोन के रियर डिजाइन की झलक दिखाई गई है। फोन में पिल-शेप्ड कैमरा मॉड्यूल और LED फ्लैश दिया गया है। मिल सकता है Glyph Bar इंटरफेस टीजर से संकेत मिलते हैं कि Nothing Phone 4b में हॉरिजॉन्टल Glyph Bar इंटरफेस भी देखने को मिल सकता है। यह डिजाइन हाल ही में लॉन्च हुए Nothing Phone 4a से प्रेरित माना जा रहा है, जो फोन को प्रीमियम और अलग पहचान देने में मदद करता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक फोन के प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी और कीमत जैसी अन्य स्पेसिफिकेशंस का खुलासा नहीं किया है। उम्मीद है कि लॉन्च के करीब आने के साथ कंपनी और जानकारियां साझा करेगी।  

surbhi जून 24, 2026 0
Commodore Callback 8020 flip phone featuring dual displays and retro-inspired design.
Commodore Callback 8020: ना स्मार्टफोन, ना फीचर फोन; दोनों के बीच की नई तकनीक, चलेंगे एंड्रॉयड ऐप्स

Commodore Callback 8020: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक अनोखा फ्लिप फोन चर्चा का विषय बना हुआ है। कमोडोर का नया Callback 8020 ऐसा डिवाइस है, जो पारंपरिक फीचर फोन और आधुनिक स्मार्टफोन के बीच की कड़ी साबित हो सकता है। यह फोन उन लोगों के लिए खास है जो पुराने फ्लिप फोन का अनुभव चाहते हैं, लेकिन साथ ही कुछ आधुनिक सुविधाओं से भी समझौता नहीं करना चाहते। यह डिवाइस Jolla के Sailfish OS पर आधारित है, जो एक यूरोपीय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है। खास बात यह है कि इसमें गूगल मैप्स को छोड़कर कई एंड्रॉयड ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। सोशल मीडिया और ईमेल ऐप्स नहीं Commodore Callback 8020 को डिजिटल डिस्ट्रैक्शन कम करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसमें पहले से सोशल मीडिया ऐप्स, वेब ब्राउजर, ईमेल या ऑफिस ऐप्स नहीं दिए गए हैं। फोन में एक खास डोम LED नोटिफिकेशन सिस्टम दिया गया है, जो इसे अन्य डिवाइस से अलग बनाता है। इसके अलावा, यह दुनियाभर के सिम कार्ड्स को सपोर्ट करता है। 48 मेगापिक्सल का कैमरा और 3.5mm हेडफोन जैक फोन में Sony सेंसर के साथ 48MP का रियर कैमरा दिया गया है, जिसमें ऑटोफोकस और फ्लैश की सुविधा भी मौजूद है। म्यूजिक प्रेमियों के लिए इसमें 3.5mm हेडफोन जैक भी दिया गया है, जिससे हाई-क्वालिटी वायर्ड ईयरफोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, इसमें रेडियो सपोर्ट भी मिलता है। बदली जा सकेगी बैटरी Callback 8020 की एक बड़ी खासियत इसकी रिमूवेबल बैटरी है। यूजर्स जरूरत पड़ने पर बैटरी और बैक कवर आसानी से बदल सकते हैं। इसके अलावा, इसमें क्लासिक Commodore 64 गेम्स का एक विशेष कलेक्शन भी मिलेगा। डिस्प्ले और प्रोसेसर फोन में: 3.25 इंच की इंटरनल डिस्प्ले (480×640 पिक्सल) 1.77 इंच की एक्सटर्नल स्क्रीन MediaTek Helio G81 प्रोसेसर 4GB रैम 64GB स्टोरेज माइक्रोSD कार्ड सपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi, Bluetooth, GPS और LTE सपोर्ट दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग फोन में 1,550mAh की रिमूवेबल बैटरी दी गई है। चार्जिंग के लिए इसमें आधुनिक USB Type-C पोर्ट मिलता है। कीमत कितनी है? Commodore Callback 8020 को पांच रंगों में पेश किया जाएगा। इसकी प्री-ऑर्डर बुकिंग 30 जून से शुरू होगी। स्टैंडर्ड वेरिएंट: 499.99 डॉलर (करीब 41,700 रुपये) Starlight Edition: 549.99 डॉलर (करीब 46,200 रुपये) Founders Edition: 640 डॉलर (करीब 53,800 रुपये) Founders Edition में 24 कैरेट गोल्ड प्लेटेड C= बटन दिया गया है। फिलहाल इस फोन की भारत में लॉन्चिंग को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Humanoid robot Xiao Gai operates an automated retail store without any human employees in Hong Kong.
Robot Store: बिना कर्मचारियों के चल रही अनोखी दुकान, अकेला ह्यूमनॉइड रोबोट संभाल रहा पूरा कारोबार

हॉन्गकॉन्ग: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब इसका असर रिटेल सेक्टर में भी साफ दिखाई देने लगा है। हॉन्गकॉन्ग में एक ऐसा अनोखा स्टोर शुरू किया गया है, जहां किसी इंसानी कर्मचारी की जरूरत नहीं पड़ती। इस पूरी दुकान का संचालन सिर्फ एक ह्यूमनॉइड रोबोट कर रहा है, जिसका नाम "शाओ गाई" (Xiao Gai) है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह 24 घंटे संचालित होने वाला अपनी तरह का पहला पॉप-अप स्टोर है। इस पोर्टेबल कैप्सूल स्टोर को बीजिंग स्थित गैलबॉट कंपनी ने विकसित किया है। क्या-क्या कर सकता है यह रोबोट? करीब 5 फीट 6 इंच लंबा शाओ गाई अपने लंबे रोबोटिक हाथों की मदद से शेल्फ पर रखे सामान को व्यवस्थित कर सकता है, ग्राहकों के लिए उत्पाद चुन सकता है और चेकआउट काउंटर का काम भी संभाल सकता है। यह रोबोट कई भाषाओं में ग्राहकों से बातचीत करने में सक्षम है और दोस्ताना तरीके से लोगों की सहायता करता है। स्टोर में स्नैक्स, दैनिक जरूरत का सामान और दवाइयों समेत कई उत्पाद उपलब्ध हैं। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। क्या रोबोट इंसानों की नौकरियां छीन लेंगे? रोबोट आधारित यह मॉडल जितना आकर्षक दिखाई देता है, उतने ही बड़े सवाल भी खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसी दिशा में जापान एयरलाइंस ने भी टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर सामान ढोने और प्रबंधन के लिए रोबोटिक सहायकों का इस्तेमाल शुरू किया है। गैलबॉट कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में 10 शहरों में ऐसे 100 स्टोर्स शुरू करने का है। अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं रोबोट हालांकि, रोबोटिक तकनीक अभी भी विकास के दौर में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले कुछ मामलों में रोबोट नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और गलतियां भी कर चुके हैं। एक उदाहरण में, स्टॉकहोम की एक AI-आधारित कॉफी शॉप ने गलत ऑर्डर देकर अपना पूरा बजट समय से पहले खत्म कर दिया था। इसी तरह कुछ रोबोट्स के व्यवहार में तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आ चुकी हैं। यानी फिलहाल रोबोट इंसानों की मदद जरूर कर रहे हैं, लेकिन पूरी तरह इंसानों की जगह लेना अभी दूर की बात मानी जा रही है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Can Propane ACs Work Without Electricity?
Propane Cooling Technology: रसोई गैस से चलने वाला AC! बिना बिजली के भी मिलेगी ठंडी हवा, जानिए कैसे काम करती है यह नई तकनीक

नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर अब सिर्फ ठंडक ही नहीं, बल्कि बढ़ते बिजली बिल और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी कारण बनते जा रहे हैं। ऐसे में एक नई कूलिंग तकनीक तेजी से चर्चा में है, जिसे प्रोपेन कूलिंग टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके कुछ मॉडल बिना बिजली के भी काम कर सकते हैं, जबकि अन्य मॉडल पारंपरिक AC की तुलना में कम बिजली खर्च करते हैं। क्या है प्रोपेन कूलिंग टेक्नोलॉजी? प्रोपेन कूलिंग तकनीक मुख्य रूप से दो प्रकार के एयर कंडीशनर में इस्तेमाल होती है। 1. एब्जॉर्प्शन AC (Absorption AC) ये ऐसे एयर कंडीशनर होते हैं जो बिजली के बजाय प्रोपेन गैस या अन्य हीट सोर्स की मदद से चलते हैं। इनमें पारंपरिक AC की तरह इलेक्ट्रिक कंप्रेसर नहीं होता, बल्कि एक थर्मल सिस्टम काम करता है। इस प्रक्रिया में अमोनिया और पानी के मिश्रण को प्रोपेन की गर्मी से गर्म किया जाता है, जिससे रेफ्रिजरेंट गैस बनती है और कूलिंग पैदा होती है। इन AC का उपयोग लंबे समय से ऑफ-ग्रिड घरों, होटल, बड़े औद्योगिक प्लांट और RV (Recreational Vehicle) में किया जाता रहा है। 2. R290 प्रोपेन गैस वाले एडवांस AC यह तकनीक सामान्य एयर कंडीशनर जैसी ही होती है, लेकिन इनमें पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस R22 या R410A की जगह R290 (शुद्ध प्रोपेन) का इस्तेमाल किया जाता है। R290 एक प्राकृतिक रेफ्रिजरेंट है, जो: कम बिजली खर्च करता है। तेजी से कूलिंग प्रदान करता है। पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाता है। कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, R290 आधारित AC पारंपरिक मॉडल की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बिजली की बचत कर सकते हैं। क्या प्रोपेन AC में आग लगने का खतरा होता है? प्रोपेन एक ज्वलनशील गैस है, लेकिन आधुनिक AC को विशेष सुरक्षा मानकों के साथ डिजाइन किया जाता है। इनमें गैस की मात्रा सीमित रखी जाती है और यूनिट को पूरी तरह सील और लीक-प्रूफ बनाया जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना बेहद कम हो जाती है। पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प दुनियाभर में हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) गैसों को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी वजह से R290 जैसी प्राकृतिक गैसों पर आधारित तकनीकों को बढ़ावा मिल रहा है। भारत में भी कई कंपनियां, खासकर गोदरेज, R290 रेफ्रिजरेंट वाले एयर कंडीशनर को बढ़ावा दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारतीय बाजार में और तेजी से लोकप्रिय हो सकती है। क्या सच में बिना बिजली के घर बन जाएगा "कश्मीर"? हालांकि एब्जॉर्प्शन AC बिना बिजली के काम कर सकते हैं, लेकिन यह तकनीक फिलहाल घरेलू उपयोग में बहुत आम नहीं है। वहीं R290 आधारित AC बिजली का उपयोग करते हैं, लेकिन कम ऊर्जा खर्च के साथ बेहतर कूलिंग देने का दावा करते हैं। इसलिए यह कहना कि हर प्रोपेन AC पूरी तरह बिना बिजली के चलता है, सही नहीं होगा। तकनीक के प्रकार के अनुसार इसकी कार्यप्रणाली अलग होती है।  

surbhi जून 20, 2026 0
Hisense E8S ULED Mini-LED Smart TV showcasing premium display with 144Hz refresh rate and AI features.
Hisense E8S ULED Mini-LED TV भारत में लॉन्च, 144Hz डिस्प्ले और AI फीचर्स के साथ कीमत ₹57,990 से शुरू

भारतीय स्मार्ट टीवी बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए-नए फीचर्स वाले प्रीमियम मॉडल पेश कर रही हैं। इसी कड़ी में Hisense ने भारत में अपनी नई E8S ULED Mini-LED TV सीरीज लॉन्च कर दी है। यह नई सीरीज हाई रिफ्रेश रेट, AI आधारित पिक्चर प्रोसेसिंग और प्रीमियम ऑडियो अनुभव के साथ आती है, जिससे यह गेमिंग और एंटरटेनमेंट दोनों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है। कंपनी ने इस सीरीज को Mini-LED तकनीक के साथ पेश किया है, जो बेहतर ब्राइटनेस, गहरे ब्लैक लेवल और शानदार कॉन्ट्रास्ट प्रदान करती है। Hisense E8S सीरीज फिलहाल केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। ULED Mini-LED पैनल और फुल-अरे लोकल डिमिंग Hisense E8S सीरीज में ULED Mini-LED डिस्प्ले दिया गया है। इसके साथ Full-Array Local Dimming तकनीक मिलती है, जो स्क्रीन के अलग-अलग हिस्सों की बैकलाइट को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित करती है। इसका फायदा यह होता है कि डार्क सीन में ब्लैक कलर ज्यादा गहरा और ब्राइट हिस्से अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं। Pantone कलर एक्यूरेसी और 144Hz रिफ्रेश रेट टीवी में Pantone-Validated Color Accuracy और Hi-QLED तकनीक दी गई है, जिससे रंग अधिक प्राकृतिक और वास्तविक नजर आते हैं। गेमर्स और स्पोर्ट्स कंटेंट पसंद करने वाले यूजर्स के लिए इसमें 144Hz का नैटिव रिफ्रेश रेट दिया गया है, जो स्मूथ विजुअल अनुभव प्रदान करता है। AI इंजन करेगा पिक्चर क्वालिटी को बेहतर Hisense ने इस सीरीज में अपना Hi-View AI Engine शामिल किया है, जो कंटेंट के अनुसार रियल टाइम में कॉन्ट्रास्ट, कलर और शार्पनेस को ऑटोमैटिक रूप से एडजस्ट करता है। वहीं, 85 इंच वाले प्रीमियम मॉडल में Hi-View AI Engine Pro दिया गया है, जो और अधिक एडवांस प्रोसेसिंग क्षमता के साथ आता है। दमदार ऑडियो और स्मार्ट फीचर्स बेहतर साउंड अनुभव के लिए टीवी में Devialet द्वारा ट्यून किया गया बिल्ट-इन सबवूफर मौजूद है। स्मार्ट फीचर्स के लिए इसमें VIDAA Smart OS दिया गया है। यह टीवी HDR10+ Adaptive, Dolby Vision IQ और Filmmaker Mode जैसे लोकप्रिय HDR फॉर्मेट्स को सपोर्ट करता है। इसके अलावा AI RGB Light Sensor कमरे की रोशनी के अनुसार पिक्चर सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट करता है। हैंड्स-फ्री वॉइस कंट्रोल की सुविधा भी इसमें उपलब्ध है। Hisense E8S ULED Mini-LED TV की कीमत स्क्रीन साइज कीमत 55 इंच ₹57,990 65 इंच ₹76,990 75 इंच ₹99,990 85 इंच ₹1,59,990 उपलब्धता और लॉन्च ऑफर्स Hisense E8S सीरीज को Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खरीदा जा सकेगा। कंपनी ग्राहकों के लिए No-Cost EMI विकल्प के साथ शुरुआती खरीद पर विशेष डिस्काउंट ऑफर भी दे रही है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Google AI ethics controversy as senior executive resigns over Pentagon defense agreement concerns
Google के वरिष्ठ अधिकारी ने दिया इस्तीफा, Pentagon-AI समझौते पर उठाए गंभीर सवाल

अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ AI समझौते से बढ़ा विवाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह कंपनी का अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के साथ किया गया वह समझौता है, जिसके तहत Google की AI तकनीक का उपयोग गोपनीय और रक्षा संबंधी कार्यों में किया जा सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर Google के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नौ साल बाद कंपनी छोड़ी Google में Android Platform Security के निदेशक रहे रिने मेयरहोफर (René Mayrhofer) ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भेजे विदाई पत्र में कहा कि जिस Google को उन्होंने 2017 में जॉइन किया था, वह अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार कंपनी की नीतियों और मूल्यों में बड़ा बदलाव आया है। मेयरहोफर ने कहा कि उनके लिए इस्तीफा देना आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला “अनिवार्य” हो गया था। AI के सैन्य इस्तेमाल का किया विरोध अपने पत्र में मेयरहोफर ने स्पष्ट कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सैन्य अभियानों, विशेषकर आक्रामक युद्ध गतिविधियों, का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने खुद को शांतिवादी (Pacifist) बताते हुए कहा कि वह ऐसी किसी तकनीक का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसका उपयोग लोगों को नुकसान पहुंचाने या युद्ध संचालन में किया जाए। उनका मानना है कि Google द्वारा Pentagon को AI तकनीक उपलब्ध कराना कंपनी के पुराने नैतिक सिद्धांतों के विपरीत है। Google पर नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप इस्तीफा पत्र में उन्होंने Google प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इन पर कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी उन्हें भी आंतरिक माध्यमों से नहीं मिली। कर्मचारियों में पहले भी दिख चुका है विरोध यह पहला मौका नहीं है जब Google के भीतर Pentagon से जुड़े AI प्रोजेक्ट्स का विरोध हुआ हो। इससे पहले भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सैन्य उद्देश्यों के लिए AI तकनीक उपलब्ध कराने का विरोध किया था। Google DeepMind के कुछ शोधकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर असहमति जताई थी। निगरानी और गोपनीयता को लेकर चिंता मेयरहोफर ने अपने पत्र में भविष्य में AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) के लिए किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें डर है कि AI आधारित सिस्टम का उपयोग आम लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अगस्त तक कंपनी में रहेंगे हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी मेयरहोफर अगस्त 2026 के अंत तक नोटिस अवधि पूरी करने के लिए Google से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे, लेकिन Pentagon समझौते से जुड़े किसी भी AI कार्य से दूरी बनाए रखेंगे। AI नैतिकता पर फिर छिड़ी बहस Google के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस सीमा तक और किन उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे इसके नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बहस भी तेज होती जा रही है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Elon Musk discusses AI-driven future economy after his wealth surpasses one trillion dollars
दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने एलन मस्क, बोले- भविष्य में पैसे की अहमियत खत्म हो सकती है

स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Person turning off an air conditioner with a remote to protect the AC compressor.
AC ऐसे बंद करेंगे तो कंप्रेसर आपको कहेगा- धन्यवाद, जानिए सही तरीका

गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। लोग घंटों एसी चलाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि एसी को सही तरीके से बंद करना भी उतना ही जरूरी है जितना उसे चलाना। विशेषज्ञों के अनुसार, एसी को गलत तरीके से बंद करने की आदत लंबे समय में उसकी कार्यक्षमता और उम्र दोनों पर असर डाल सकती है। गलत तरीके से AC बंद करना क्यों पड़ सकता है भारी? एयर कंडीशनर के भीतर फैन, कंप्रेसर और अन्य कई महत्वपूर्ण हिस्से एक साथ काम करते हैं। यदि एसी को सीधे मुख्य स्विच से बंद कर दिया जाए या अचानक बिजली काट दी जाए, तो सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। लगातार ऐसा होने से कंप्रेसर की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जो एसी का सबसे महंगा और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रिमोट से AC बंद करना क्यों है बेहतर? विशेषज्ञों का मानना है कि एसी को बंद करने का सबसे सुरक्षित तरीका रिमोट का इस्तेमाल करना है। रिमोट से बंद करने पर मशीन के सभी हिस्से क्रमबद्ध तरीके से काम करना बंद करते हैं, जिससे सिस्टम को अचानक झटका नहीं लगता और अंदर के यांत्रिक हिस्से सुरक्षित रहते हैं। अगर लंबे समय तक एसी का इस्तेमाल नहीं करना है, तो पहले रिमोट से एसी बंद करें और उसके बाद मुख्य स्विच ऑफ करें। सीजन खत्म होने पर क्या करें? गर्मी का मौसम समाप्त होने के बाद यदि कई महीनों तक एसी का उपयोग नहीं होना है, तो रिमोट से बैटरियां निकाल देना चाहिए। लंबे समय तक बैटरियां लगी रहने से लीकेज का खतरा बढ़ जाता है, जिससे रिमोट खराब हो सकता है। इसके अलावा समय-समय पर एसी की सफाई और सर्विसिंग करवाना भी जरूरी है, ताकि उसकी कूलिंग क्षमता और कार्यक्षमता बनी रहे। इन्वर्टर और नॉन-इन्वर्टर AC में क्या अंतर है? पारंपरिक नॉन-इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर बार-बार चालू और बंद होता है, जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है। वहीं इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर लगातार चलता रहता है और आवश्यकता के अनुसार अपनी गति कम या ज्यादा करता है। इससे तापमान स्थिर बना रहता है और बिजली की बचत होती है। बिजली बिल कम करने में भी मददगार है इन्वर्टर तकनीक इन्वर्टर एसी में कमरे का निर्धारित तापमान हासिल होने के बाद कंप्रेसर पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि धीमी गति से चलता रहता है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और लगातार बेहतर कूलिंग मिलती है। यही कारण है कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्वर्टर एसी अधिक किफायती माना जाता है। यदि आप अपने एयर कंडीशनर की उम्र बढ़ाना चाहते हैं और महंगे मरम्मत खर्च से बचना चाहते हैं, तो सिर्फ सही तरीके से एसी बंद करने की आदत भी बड़ा फर्क ला सकती है।  

surbhi जून 11, 2026 0
Motorola Edge 70 Pro+ and Vivo V70 smartphones compared with premium features under ₹50,000.
Motorola Edge 70 Pro+ vs Vivo V70: ₹50,000 से कम में कौन सा स्मार्टफोन है बेहतर?

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मोटोरोला और वीवो के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। ₹45,000 से ₹50,000 के प्रीमियम सेगमेंट में अब Motorola Edge 70 Pro+ और Vivo V70 एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग और 50MP कैमरा जैसे आकर्षक फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, दोनों की खूबियां अलग-अलग हैं। अगर आप इस बजट में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि कौन सा फोन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। डिस्प्ले और डिजाइन: Motorola का बड़ा फायदा Motorola Edge 70 Pro+ में 6.8 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। दूसरी तरफ Vivo V70 में 6.59 इंच का AMOLED पैनल मिलता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 5,000 निट्स ब्राइटनेस दी गई है। अगर आप गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और आउटडोर विजिबिलिटी को महत्व देते हैं, तो Motorola का डिस्प्ले ज्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है। वहीं, Vivo V70 का कॉम्पैक्ट डिजाइन उन यूजर्स को पसंद आएगा जो हल्का और आसानी से पकड़ में आने वाला फोन चाहते हैं। कैमरा: ZEISS बनाम पेरिस्कोप जूम Motorola Edge 70 Pro+ में 50MP Sony LYT-710 प्राइमरी कैमरा के साथ 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम और 50x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा सभी कैमरों से 4K 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, Vivo V70 में ZEISS ट्यूनिंग वाला 50MP कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो प्राकृतिक रंगों और शानदार पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए जाना जाता है। जूम फोटोग्राफी पसंद है? Motorola बेहतर विकल्प। पोर्ट्रेट और कलर साइंस महत्वपूर्ण है? Vivo V70 मजबूत दावेदार। परफॉर्मेंस और गेमिंग: Motorola को बढ़त Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर और बड़ा वेपर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जिससे हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर Vivo V70 में Snapdragon 7 Gen 4 चिपसेट मिलता है, जो सामान्य उपयोग और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। रॉ परफॉर्मेंस के मामले में Motorola Edge 70 Pro+ थोड़ा आगे दिखाई देता है। बैटरी और चार्जिंग दोनों स्मार्टफोन में: 6,500mAh बैटरी 90W फास्ट चार्जिंग की सुविधा मिलती है। हालांकि Motorola Edge 70 Pro+ में अतिरिक्त 15W वायरलेस चार्जिंग भी दी गई है, जो इसे एक अतिरिक्त बढ़त देती है। सॉफ्टवेयर अपडेट: Vivo का फायदा Vivo V70: 4 बड़े Android अपडेट Motorola Edge 70 Pro+: 3 बड़े Android अपडेट अगर आप फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो Vivo V70 का लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। कौन सा फोन खरीदना चाहिए? Motorola Edge 70 Pro+ चुनें अगर: आपको बेहतर डिस्प्ले चाहिए हैवी गेमिंग करते हैं वायरलेस चार्जिंग चाहते हैं जूम कैमरा आपके लिए महत्वपूर्ण है Vivo V70 चुनें अगर: ZEISS कैमरा एक्सपीरियंस पसंद है बेहतर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी चाहते हैं लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्राथमिकता है कॉम्पैक्ट डिजाइन पसंद करते हैं

surbhi जून 10, 2026 0
Smartphone privacy settings screen showing location permissions for apps on Android and iPhone devices.
क्या ऐप्स ट्रैक कर रहे हैं आपकी लोकेशन? ऐसे करें बंद, बैटरी और प्राइवेसी दोनों रहेंगी सुरक्षित

आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन कई मोबाइल ऐप्स ऐसे भी हैं जो आपकी जानकारी के बिना बैकग्राउंड में लगातार आपकी लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं। इससे न केवल आपकी निजी जानकारी कंपनियों तक पहुंचती है, बल्कि फोन की बैटरी और मोबाइल डेटा की खपत भी बढ़ जाती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सेटिंग्स की मदद से आप अपनी प्राइवेसी पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं। ऐप्स को लोकेशन की जरूरत क्यों पड़ती है? कुछ ऐप्स के लिए लोकेशन एक्सेस वास्तव में जरूरी होती है। उदाहरण के लिए— मैप्स ऐप्स को रास्ता बताने के लिए कैब बुकिंग ऐप्स को पिकअप लोकेशन जानने के लिए मौसम से जुड़े ऐप्स को स्थानीय जानकारी देने के लिए लेकिन कई सोशल मीडिया, शॉपिंग और विज्ञापन आधारित ऐप्स भी आपकी लोकेशन डेटा एकत्र करते हैं। इस जानकारी का उपयोग आपकी पसंद, यात्रा की आदतों और खरीदारी के व्यवहार को समझने के लिए किया जाता है, ताकि आपको टारगेटेड विज्ञापन दिखाए जा सकें। एंड्रॉयड फोन में ऐसे बंद करें लोकेशन ट्रैकिंग अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें— Settings खोलें। Location सेक्शन में जाएं। App Location Permissions पर टैप करें। देखें कौन-कौन से ऐप्स लोकेशन एक्सेस कर रहे हैं। जिन ऐप्स को हमेशा लोकेशन की जरूरत नहीं है, उन्हें "Only While Using the App" पर सेट करें या परमिशन पूरी तरह बंद कर दें। इसके अलावा Privacy Dashboard के जरिए आप यह भी देख सकते हैं कि हाल ही में किन ऐप्स ने आपकी लोकेशन एक्सेस की है। iPhone यूजर्स इन सेटिंग्स पर दें ध्यान iPhone उपयोगकर्ता इन स्टेप्स को अपनाएं— Settings में जाएं। Privacy & Security विकल्प खोलें। Location Services पर टैप करें। ऐप्स की सूची में जाकर देखें किस ऐप को कौन-सी परमिशन मिली हुई है। "Always" की जगह "While Using the App" या "Never" का विकल्प चुनें। Apple एक अतिरिक्त फीचर "Precise Location" भी देता है। इसे बंद करने पर ऐप्स को आपकी सटीक लोकेशन की बजाय केवल अनुमानित क्षेत्र की जानकारी मिलती है। समय-समय पर परमिशन की जांच करना जरूरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नई ऐप इंस्टॉल करने या फोन अपडेट के बाद लोकेशन परमिशन की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। अगर कोई साधारण गेम, टॉर्च ऐप या शॉपिंग ऐप बार-बार लोकेशन मांग रहा है, तो यह समझना जरूरी है कि उसे वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं। अक्सर यूजर्स जल्दबाजी में सभी परमिशन स्वीकार कर लेते हैं और बाद में उन्हें भूल जाते हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से सेटिंग्स की जांच करना डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सिर्फ प्राइवेसी नहीं, बैटरी भी बचेगी लोकेशन ट्रैकिंग को सीमित करने का फायदा केवल आपकी प्राइवेसी तक सीमित नहीं है। बैकग्राउंड में चलने वाली लोकेशन सर्विसेज कम होंगी। बैटरी की खपत घटेगी। मोबाइल डेटा की बचत होगी। फोन की परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहेगी। अगर आप चाहते हैं कि आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहे और स्मार्टफोन की बैटरी लंबे समय तक चले, तो आज ही अपनी लोकेशन सेटिंग्स की जांच करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Apple CEO presenting AI-powered Siri and iOS 27 updates during the WWDC 2026 keynote event.
Apple WWDC 2026: Siri AI से iOS 27 तक, Apple ने किए 7 बड़े ऐलान

Apple ने अपने सालाना डेवलपर इवेंट WWDC 2026 में कई बड़े अपडेट्स का ऐलान किया। इस बार कंपनी का पूरा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रहा। नए Siri AI, iOS 27, macOS Golden Gate और कई ऐप्स में AI इंटीग्रेशन के जरिए Apple ने अपने इकोसिस्टम को पहले से अधिक स्मार्ट और यूजर-फ्रेंडली बनाने की कोशिश की है। आइए जानते हैं WWDC 2026 के 7 सबसे बड़े ऐलान। 1. Siri AI हुआ पहले से ज्यादा स्मार्ट WWDC 2026 की सबसे बड़ी घोषणा नए Siri AI को लेकर रही। अब Siri सिर्फ वॉयस असिस्टेंट नहीं रहेगा, बल्कि यूजर्स के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को समझकर बेहतर सुझाव भी देगा। नए Siri में ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस, इन-ऐप एक्शन और बेहतर कन्वर्सेशन जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं। अब यह ट्रिप प्लानिंग, आइडिया जनरेट करने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद करेगा। Siri Dynamic Island के अंदर भी दिखाई देगा। 2. Siri के लिए अलग ऐप लॉन्च Apple ने Siri के लिए एक नया डेडिकेटेड ऐप भी पेश किया है। इस ऐप में पुरानी बातचीत की हिस्ट्री दिखाई देगी और यूजर्स आसानी से नई चैट शुरू कर सकेंगे। यह ऐप iPhone, iPad, Apple Watch, Vision Pro और Mac सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। 3. कैमरा ऐप में आया AI सपोर्ट अब iPhone का कैमरा ऐप भी Siri AI के साथ काम करेगा। यूजर किसी वस्तु, दस्तावेज या खाने की तस्वीर पर कैमरा पॉइंट करके उससे जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा बिल स्कैनिंग, खर्च बांटने और खाने की न्यूट्रिशन डिटेल्स बताने जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं। 4. macOS Golden Gate पेश Apple ने अपने नए macOS 27 "Golden Gate" की घोषणा की है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि अब नए macOS अपडेट Intel प्रोसेसर वाले Macs को सपोर्ट नहीं करेंगे। हालांकि पुराने Intel Mac यूजर्स को अगले तीन वर्षों तक सिक्योरिटी अपडेट मिलते रहेंगे, लेकिन नए फीचर्स सिर्फ Apple Silicon आधारित डिवाइसेज़ में उपलब्ध होंगे। 5. iOS 27 में बेहतर स्पीड और नया अनुभव Apple ने iOS 27 को भी पेश किया है, जिसमें इंटरफेस को पहले से अधिक स्मूद और ऑप्टिमाइज किया गया है। कंपनी के अनुसार: ऐप्स लगभग 30 प्रतिशत तेजी से खुलेंगे। फोटो लोडिंग स्पीड में करीब 70 प्रतिशत सुधार होगा। पिछले साल पेश किए गए Liquid Glass डिजाइन को और बेहतर बनाया गया है। यह अपडेट 2026 की तीसरी तिमाही तक सपोर्टेड iPhones में रोलआउट किया जाएगा। 6. Messages, Mail और Phone ऐप में AI फीचर्स Apple Intelligence के तहत कई ऐप्स को AI से अपग्रेड किया गया है। Messages ऐप बातचीत के अनुसार फोटो सुझाव देगा। Phone ऐप कॉल के दौरान जरूरी जानकारी अपने आप दिखाएगा। Mail ऐप स्मार्ट सुझाव और कैलेंडर मैनेजमेंट में सहायता करेगा। Image Playground में फोटो एडिटिंग के नए AI टूल्स जोड़े गए हैं। 7. Safari ब्राउजर हुआ और स्मार्ट Safari में AI आधारित नया "Notify Me" फीचर जोड़ा गया है। यह किसी वेबसाइट पर होने वाले बदलावों पर नजर रखेगा और जैसे ही कोई प्रोडक्ट उपलब्ध होगा या अपडेट आएगा, यूजर को तुरंत सूचना देगा। इसके अलावा Safari अब खुले हुए टैब्स को विषय के अनुसार ऑर्गनाइज भी कर सकेगा, जिससे ब्राउजिंग अनुभव पहले से बेहतर होगा। Apple का AI पर बड़ा दांव WWDC 2026 से साफ हो गया है कि Apple अब AI रेस में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। Siri AI और Apple Intelligence के जरिए कंपनी अपने सभी डिवाइसेज़ के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत और स्मार्ट बनाने पर जोर दे रही है।  

surbhi जून 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0