Tehran

Mehbooba Mufti and members of the Indian delegation pay tribute to former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei during funeral ceremonies in Tehran.
ईरान पहुंचीं महबूबा मुफ्ती, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अयातुल्लाह अली खामेनेई को दी श्रद्धांजलि

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह की शुरुआत से पहले जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचीं। उन्होंने अन्य प्रतिनिधियों के साथ खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लिए आयोजित सलात-अल-जनाज़ा (अंतिम संस्कार की नमाज़) में हिस्सा लिया। महबूबा मुफ्ती के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद सहित कई भारतीय शिया समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दुआ की। 4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार के कार्यक्रम अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े छह दिवसीय कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो गए हैं। ईरानी सरकार के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 9 जुलाई तक जारी रहेंगे। इसके बाद खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान में करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना है। राजधानी समेत पूरे ईरान में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह खामेनेई के पोस्टर व बैनर लगाए गए हैं। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे तेहरान खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल समारोह में हिस्सा ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में क्यों नहीं हुए शामिल? ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, पूर्व निर्धारित विदेशी दौरों और आधिकारिक कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बन सके। उनकी जगह भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को ईरान भेजा है। 36 वर्षों तक रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा और क्षेत्र में सैन्य संघर्ष छिड़ गया। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा और कई देशों में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोम और मशहद में भी होंगे विशेष कार्यक्रम ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रम 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा मशहद पहुंचेगी, जहां 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि छह दिनों तक चलने वाले शोक कार्यक्रमों में देशभर से करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf and Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi pay emotional tribute to former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla.
खामेनेई को अंतिम विदाई: गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद

तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेता भावुक नजर आए। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी श्रद्धांजलि के दौरान भावुक हो गए। तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में खामेनेई का ताबूत अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसे ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से सजाया गया था। श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग और वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। विदाई सभा में उमड़ा जनसैलाब श्रद्धांजलि समारोह में गालिबाफ और अराघची समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता और सैन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रार्थना के दौरान गालिबाफ हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिए और अंतिम विदाई देते समय भावुक हो गए। अराघची, जो हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में ईरान का प्रमुख चेहरा रहे हैं, भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान गहरे शोक में दिखाई दिए। गालिबाफ की जनता से अपील श्रद्धांजलि सभा के दौरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की उपस्थिति दुनिया को यह संदेश देगी कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता की विरासत के साथ खड़ा है। छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम सरकारी कार्यक्रम के अनुसार खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े आयोजन छह दिनों तक जारी रहेंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि इन कार्यक्रमों में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसे देखते हुए तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। तेहरान से मशहद तक निकलेगा अंतिम यात्रा का काफिला कार्यक्रम के तहत: तेहरान की सड़कों पर अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा। 9 जुलाई को पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर मशहद ले जाया जाएगा। वहीं इमाम रज़ा दरगाह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इसके अलावा पड़ोसी देश इराक के शिया धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान बड़ी भीड़ और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए पूरे देश में हाई सिक्योरिटी अलर्ट लागू किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों और जुलूस मार्गों पर विशेष निगरानी रख रही हैं।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Mourners gather around the flag-draped coffin of Iran's Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla ahead of the state funeral.
खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, 14 महीने की नातिन के साथ 9 जुलाई को होंगे सुपुर्द-ए-खाक

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी तेहरान में जगह-जगह बैनर लगाकर लोगों से अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की जा रही है। ईरानी सरकार का अनुमान है कि शनिवार से शुरू होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लाखों लोग शामिल होंगे। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह जनसैलाब वर्ष 1989 में अयातुल्ला रूहुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार की याद ताजा कर सकता है। ग्रैंड मोसल्ला में रखे गए ताबूत तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अयातुल्ला अली खामेनेई का ताबूत ईरानी राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर रखा गया है। उनके साथ उन परिजनों के ताबूत भी रखे गए हैं, जिनकी हालिया संघर्ष के दौरान इजरायली हवाई हमलों में मौत हुई थी। इनमें उनके दामाद, सबसे बड़ी बेटी, 14 महीने की नातिन और नए सर्वोच्च नेता घोषित किए गए अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई की पत्नी भी शामिल हैं। श्रद्धांजलि देने पहुंचे धार्मिक और विदेशी प्रतिनिधि देश-विदेश से पहुंचे धार्मिक नेताओं, सरकारी प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों ने ताबूत के पास जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य बैंड ने शोक धुन बजाई, जबकि कई श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार अपने स्कार्फ और अन्य वस्तुओं को ताबूत से स्पर्श कराकर श्रद्धा व्यक्त की। 'या हुसैन' वाला लाल झंडा बना आकर्षण खामेनेई के ताबूत पर लाल रंग का झंडा भी रखा गया है, जिस पर सफेद अक्षरों में "या हुसैन" लिखा हुआ है। शिया परंपरा में यह झंडा अन्याय के खिलाफ संघर्ष और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। सरकार के लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर विश्लेषकों के अनुसार, यह अंतिम संस्कार केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि हालिया संघर्ष के बाद सरकार के लिए जनसमर्थन दिखाने का बड़ा अवसर भी है। ईरान इस समय अमेरिका के साथ युद्धविराम और शांति वार्ता के दौर से गुजर रहा है। वहीं, इजरायल के साथ तनाव भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में यह आयोजन राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य नेतृत्व भी रहा मौजूद कार्यक्रम में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल अहमद वाहिदी समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सरकारी प्रतिनिधि, धार्मिक नेता और विभिन्न देशों के मेहमान शामिल हुए। मुजतबा खामेनेई की मौजूदगी पर सस्पेंस ईरान के नए सर्वोच्च नेता घोषित किए गए अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया संघर्ष के दौरान उनके घायल होने की चर्चा है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे अपने पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल होंगे या नहीं। ईरान की कड़ी चेतावनी मुजतबा खामेनेई को लेकर इजरायल की ओर से सामने आई कथित धमकियों के बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की, तो उसका "कड़ा और निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार ईरानी सरकार के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की औपचारिक शुरुआत शनिवार से होगी। उनकी पार्थिव देह को श्रद्धांजलि के लिए ईरान और पड़ोसी इराक के विभिन्न शहरों में ले जाया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें उनकी 14 महीने की नातिन समेत अन्य दिवंगत परिजनों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Ali Khamenei Funeral
ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़, कई देशों के प्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

तेहरान, एजेंसियां। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को राजधानी तेहरान में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। छह दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार की शुरुआत के साथ देशभर में शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ईरानी सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता और श्रद्धांजलि का प्रतीक बताया है।   विदेशी प्रतिनिधियों ने भी दी श्रद्धांजलि   अंतिम संस्कार समारोह में रूस, चीन, पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारी भी समारोह में मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है।   छह दिनों तक चलेगा राजकीय अंतिम संस्कार   सरकारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम दर्शन और शोक सभाओं के बाद अंतिम यात्रा तेहरान, क़ोम और अन्य प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी। इसके बाद 9 जुलाई को अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सरकार का दावा है कि अंतिम संस्कार में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Security personnel and mourners gather in Tehran as preparations continue for the funeral of Iran's Supreme Leader, with heightened security surrounding the event.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मोजतबा! सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक कार्यक्रम से दूरी की संभावना

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां जारी हैं। इस बीच उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत स्थित प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने कहा है कि सुरक्षा कारणों से मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना बेहद कम है। सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक उपस्थिति पर जताई चिंता इंडिया टुडे से बातचीत में आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मौजूदा हालात में मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि मोजतबा लोगों के बीच जाकर उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी अनुमति नहीं दे रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस समय उनकी सार्वजनिक मौजूदगी सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है। तेहरान रवाना होने से पहले दिया बयान नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से तेहरान रवाना होने से पहले इलाही ने कहा कि पिछले सप्ताह उनकी ईरान यात्रा के दौरान उन लोगों से मुलाकात हुई थी, जो मोजतबा खामेनेई के संपर्क में थे। उन्हीं से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने यह बात साझा की। ईरान में कई दिनों तक चलेगा राजकीय शोक आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में कई दिनों तक राजकीय शोक और अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य इस्लामिक गणराज्य के प्रति जनता की एकजुटता और समर्थन को प्रदर्शित करना है। देशभर में शोक का माहौल उन्होंने कहा कि खामेनेई के निधन से पूरे ईरान में गहरा शोक है। बड़ी संख्या में लोग उन्हें देश का मजबूत नेतृत्वकर्ता और प्रेरणा का स्रोत मानते थे। उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी कमी की भरपाई करना आसान नहीं होगा। इलाही ने कहा कि ईरान के विभिन्न प्रांतों के अलावा कई अन्य देशों से भी लोग तेहरान पहुंच रहे हैं, ताकि दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। अंतिम संस्कार में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार में कई देशों के प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं। फिलहाल मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर अंतिम निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के आधार पर लिया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Salman Ali Khurshid
खामेनेई के अंतिम संस्कार में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगे सलमान खुर्शीद, तेहरान जाएंगे वरिष्ठ नेता

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान में आयोजित अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। गुरुवार को उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह कांग्रेस की ओर से तेहरान जाकर अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके बयान के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए अपना आधिकारिक प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है।   कई भारतीय नेताओं को मिला निमंत्रण मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह, इमरान अंसारी सहित कई प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को भी आमंत्रित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं को भी निमंत्रण भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।   4 जुलाई से शुरू होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे। श्रद्धांजलि समारोह राजधानी तेहरान के अलावा कोम और मशहद जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में भी आयोजित किए जाएंगे। 7 जुलाई को कोम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जबकि 9 जुलाई को मशहद में अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासन ने इन कार्यक्रमों के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।   भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम आयोजन सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भारत के शीर्ष नेतृत्व को भी इस राजकीय समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया था। इसे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयातुल्ला अली खामेनेई ने करीब 36 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया। उनके निधन के बाद आयोजित होने वाला यह राजकीय अंतिम संस्कार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है, जिसमें विभिन्न देशों के राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf speaks during a televised interview, accusing Israel of trying to derail a reported Iran-US agreement amid ongoing regional tensions.
ईरान का दावा- इजरायल बिगाड़ना चाहता है अमेरिका से हुई डील, गालिबाफ बोले- ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

  तेहरान: ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद मौजूद हैं। स्विट्जरलैंड की यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले "इस्लामाबाद समझौते" को लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इजरायल इसके रास्ते में बाधा डाल रहा है। 'इजरायल समझौते से घबराया हुआ है' ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि यह समझौता लेबनान में युद्ध समाप्त करने, विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने जैसे प्रावधानों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इस समझौते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह उसके और अमेरिका के लिए "हार का दस्तावेज" साबित होगा। गालिबाफ ने कहा कि समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं, ताकि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो। लेबनान की संप्रभुता पर दिया जोर ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के अनुसार लेबनान की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार के पास होगी और देश की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने का अधिकार मिलना चाहिए और कब्जा किए गए इलाकों से सैन्य बलों की वापसी होनी चाहिए। 'अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद' गालिबाफ ने दावा किया कि समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और उपराष्ट्रपति JD Vance का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों की कुछ गतिविधियां इस समझौते की भावना के अनुरूप नहीं थीं। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian officials amid conflicting claims over possible US-Iran talks in Doha.
ट्रंप का दावा- दोहा में बैठक के लिए ईरान ने किया अनुरोध, तेहरान ने किया खंडन

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संभावित वार्ता को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस सप्ताह किसी भी तरह की बैठक या वार्ता तय नहीं है। ट्रंप बोले- ईरान ने मांगी बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और यह बैठक अगले दिन दोहा में आयोजित होगी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पर हो सकती है चर्चा यदि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में वार्ता होती है तो उसका मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को कम करना हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिकी अधिकारी का दावा- सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रह सकती है। ईरान ने बैठक की खबरों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया है। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा कि इस सप्ताह किसी भी कार्य समूह की बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर के साथ नियमित संपर्क और परामर्श जारी है, लेकिन दोहा में किसी तकनीकी बैठक की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर सहमत होंगे। कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में कतर लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है और विभिन्न माध्यमों से बातचीत की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। विरोधाभासी दावों से बनी असमंजस की स्थिति ट्रंप के दावे और ईरान के आधिकारिक खंडन के बाद संभावित वार्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर अमेरिका बैठक होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी निर्धारित वार्ता से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Indian Minister of State for External Affairs Pabitra Margherita and Bihar Governor Lt Gen (Retd) Syed Ata Hasnain set to represent India at Ayatollah Ali Khamenei’s state funeral in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधिमंडल होगा शामिल, बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री जाएंगे ईरान

  नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा शामिल होंगे। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था। प्रधानमंत्री के पूर्व निर्धारित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के कारण भारत ने उनके स्थान पर वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है।  4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम सूत्रों के मुताबिक, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से ईरान में शुरू होंगे। इन समारोहों के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचकर भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। भारत-ईरान संबंधों का महत्वपूर्ण संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजना भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक एवं रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। भारत ईरान को अपने विस्तारित पड़ोस (Extended Neighbourhood) की नीति के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।  कौन हैं भारतीय प्रतिनिधि? लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं और सैन्य एवं सामरिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, पबित्र मार्गेरिटा विदेश राज्य मंत्री के रूप में भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक पहल का प्रतिनिधित्व करते हैं।  कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना ईरान में आयोजित होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारत के अलावा रूस, चीन, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।   

Deepshikha जून 30, 2026 0
Iranian President Masoud Pezeshkian invites PM Narendra Modi to attend Ayatollah Ali Khamenei’s state funeral ceremonies.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे पीएम मोदी? ईरान के राष्ट्रपति ने भेजा विशेष निमंत्रण

  तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता रहे Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा है। भारत सरकार की ओर से अब तक इस निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 5 से 9 जुलाई तक होंगे अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार से संबंधित धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों का आयोजन तेहरान, कोम और मशहद सहित कई प्रमुख शहरों में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और कोम में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी, जबकि अंतिम और सबसे बड़ा कार्यक्रम 9 जुलाई को मशहद में रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है। तीन दशक तक ईरान की राजनीति के केंद्र में रहे खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली नेता रहे। उनकी अगुवाई में ईरान ने कई क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त सैन्य हमले के दौरान उनकी मृत्यु हुई थी। इसके बाद से देश में राजनीतिक संक्रमण और नई नेतृत्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएं जारी हैं। भारत-ईरान संबंधों पर टिकी निगाहें विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो यह भारत और ईरान के संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जाएगा। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से रणनीतिक सहयोग रहा है। अंतिम निर्णय भारत सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम और कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदला क्षेत्रीय माहौल इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए अंतरिम समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होता दिखाई दे रहा है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही भी फिर से शुरू हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लागू कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का लाइसेंस जारी किया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। पीएम मोदी की मौजूदगी पर बनी रहेगी नजर अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के इस विशेष निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों में भारत और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों में से एक माना जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
US President Donald Trump discusses Iran missile policy after signing the US-Iran Islamabad MoU agreement.
ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर

  पेरिस/वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के पास सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रहने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम भंडार और जमी हुई ईरानी संपत्तियों को लेकर भी अपेक्षाकृत नरम बयान दिए हैं। ट्रंप का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल दोनों ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की बात कर रहे थे। ‘दूसरे देशों के पास हैं तो ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें हो सकती हैं’ फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान के पास भी सीमित संख्या में ऐसी मिसाइलें होना पूरी तरह अनुचित नहीं है। ट्रंप ने कहा, “अगर दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान के पास कुछ मिसाइलें होने से उन्हें पूरी तरह रोकना थोड़ा अनुचित होगा।” उन्होंने सऊदी अरब और कतर का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें रहने दी जा सकती हैं। ‘मिसाइलें समस्या नहीं, परमाणु हथियार ज्यादा खतरनाक’ ट्रंप ने मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु हथियारों के बीच अंतर करते हुए कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, “मिसाइलें किसी छोटे इलाके को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे दुनिया को तबाह नहीं करतीं, जैसा कि परमाणु हथियार कर सकते हैं।” युद्ध के दौरान था मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने का लक्ष्य 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट रुख था कि ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम दोनों को कमजोर करना आवश्यक है। उस समय ट्रंप ने कहा था कि: ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह नष्ट किया जाएगा। परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। ताजा बयान संकेत देता है कि वॉशिंगटन अब इस मुद्दे पर पहले जैसी कठोर स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि अगले 60 दिनों तक चलने वाली वार्ताओं में मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी। यूरेनियम भंडार तुरंत सौंपने की शर्त नहीं एमओयू के अनुसार, ईरान को अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम भंडार को तत्काल सौंपने की बाध्यता नहीं दी गई है। समझौते में कहा गया है कि: इस मुद्दे का समाधान अगले 60 दिनों में तैयार किए जाने वाले अलग तंत्र के तहत होगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। ट्रंप ने इस मुद्दे को भी अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा, “यह सामग्री अब उतनी मूल्यवान नहीं है, लेकिन मनोवैज्ञानिक तौर पर हम उसे हासिल करना चाहेंगे।” उन्होंने दावा किया कि पहले हुए हमलों के बाद संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब चुकी है और उसे कोई छू भी नहीं सकता। जमी हुई ईरानी संपत्तियों को लौटाने के संकेत ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका को ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियां वापस करनी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा, “हमने उनका काफी पैसा रोका हुआ है। वह उनका अपना पैसा है। मुझे लगता है कि हमें उसे वापस करना होगा।” ट्रंप के अनुसार, यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है तो वैश्विक निवेशकों का डॉलर पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। 300 अरब डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन फंड को मिली मान्यता अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ने ईरान के प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण (Reconstruction) फंड को मान्यता दे दी है। हालांकि इस फंड के वित्तपोषण और धन के स्रोत को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। राष्ट्रपतियों ने समझौते पर किए हस्ताक्षर फ्रांस के वर्साय पैलेस में डील पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटों बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि एमओयू के अंतिम मसौदे पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने आधिकारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, “इस्लामाबाद एमओयू का पाठ राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है। अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा शुरू होगी।” इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटल रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी निगरानी स्वयं डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। समझौते के बाद बदलते संकेत ट्रंप के ताजा बयानों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका-ईरान संबंधों में टकराव की जगह अब चरणबद्ध कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ने की कोशिश हो रही है। बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत को लेकर आने वाले 60 दिनों की बातचीत इस समझौते की वास्तविक दिशा तय करेगी।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Iranian officials respond to reports of a possible US-Iran agreement amid ongoing diplomatic negotiations.
ट्रंप के समझौता दावे को ईरान ने नकारा, कहा- अभी किसी अंतिम डील पर फैसला नहीं

  अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान बोला- समझौते की खबरें अटकलों पर आधारित ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते को लेकर सामने आ रही खबरें केवल अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है और मसौदे का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बघाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी बघाई ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी निर्धारित "रेड लाइन्स" से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि वार्ता जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चिंता ईरानी प्रवक्ता ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने किया था समझौते का दावा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हस्ताक्षर समारोह यूरोप में आयोजित किया जा सकता है और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। भारतीय जहाज पर हमले को लेकर अमेरिका पर आरोप इस बीच ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले और उसमें भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे पर भी ईरान ने अमेरिका की आलोचना की है। इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में अमेरिकी कार्रवाई को "राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती" और "सशस्त्र लूट" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां वॉशिंगटन समझौते को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं तेहरान का कहना है कि बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि दोनों देश वास्तव में किसी व्यापक समझौते के करीब हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks, nuclear concerns, and a possible diplomatic agreement.
ट्रंप बोले- समझौते से हो या सैन्य कार्रवाई से, अंत में अमेरिका ही जीतेगा

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव और वार्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का अंत चाहे कूटनीतिक समझौते से हो या सैन्य ताकत के जरिए, नतीजा अमेरिका के पक्ष में ही रहेगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत का उद्देश्य कई महीनों से चल रहे संकट को समाप्त करना है। खामेनेई से मुलाकात के संकेत ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei से संभावित मुलाकात को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा, "अगर समझौता होता है और मुलाकात का अवसर मिलता है तो मुझे उनसे मिलकर खुशी होगी। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी मुलाकात किसी संभावित समझौते की स्थिति में ही संभव हो सकती है। एनरिच्ड यूरेनियम पर अमेरिका की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अमेरिका उस पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो उस सामग्री पर नियंत्रण हासिल कर सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप के अनुसार यूरेनियम सुरक्षित स्थान पर है और उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। समझौते के लिए अमेरिका की दो प्रमुख शर्तें ट्रंप ने संभावित समझौते की दो मुख्य शर्तें भी सामने रखीं। ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। Strait of Hormuz को पूरी तरह से खोला जाए। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। तेहरान का जवाब- मसौदे में कई बातें अब भी अस्पष्ट ईरान की ओर से बातचीत को लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है। खामेनेई के सलाहकार Mohsen Rezaee ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु अब भी स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी शर्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान की चिंताओं और मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं? तेहरान ने स्थायी शांति समझौते के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं: अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना। तेल और गैस निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना। विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों को जारी करना। भविष्य में सैन्य हमलों के खिलाफ सुरक्षा गारंटी देना। युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा तंत्र बनाना। क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना। ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा तभी होगी जब युद्ध और नाकाबंदी से जुड़े मुद्दों का समाधान हो जाएगा। संघर्षविराम के बावजूद पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हालात दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से संघर्षविराम लागू है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मध्य पूर्व के कई हिस्सों में अस्थिरता बनी हुई है और समय-समय पर सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वार्ता प्रक्रिया में प्रगति हुई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी भी गहरे हैं। कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति ट्रंप के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर वार्ता और समझौते की संभावना खुली रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी रखे हुए है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बातचीत इस बात का फैसला कर सकती है कि संकट का समाधान कूटनीतिक रास्ते से निकलता है या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

  अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान को संवेदनशील तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप में अमेरिकी-ईरानी कारोबारी जमशीद घोमी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने वर्षों तक अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े उपकरण ईरान तक पहुंचाए। संघीय अधिकारियों के अनुसार, 63 वर्षीय घोमी कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट कोस्ट के निवासी हैं और तेहरान स्थित तकनीकी कंपनी फराज परदाज रायानेह (FPR) के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। निर्यात प्रतिबंधों को दरकिनार करने का आरोप अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, घोमी पर इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) समेत कई संघीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के संवेदनशील अमेरिकी तकनीक ईरान भेजने के लिए एक संगठित तंत्र तैयार किया था। यूएई बना कथित ट्रांजिट हब अभियोजन पक्ष के अनुसार, उपकरणों को सीधे ईरान भेजने के बजाय पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित कंपनियों और बिचौलियों तक पहुंचाया जाता था। वहां से उन्हें आगे ईरान भेजा जाता था। अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल वास्तविक खरीदारों और अंतिम उपयोगकर्ताओं की पहचान छिपाने के लिए किया गया। ऑनलाइन खरीदारी से शुरू हुआ ऑपरेशन जांच में सामने आया है कि शुरुआती दौर में कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान सेवाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में तकनीकी उपकरण खरीदे गए। बाद में अमेरिकी सप्लायरों से सीधे खरीदारी की गई और कई कंपनियों का उपयोग कर लेनदेन की वास्तविक प्रकृति को छिपाने का प्रयास किया गया। भारी मात्रा में हार्डवेयर भेजने का दावा संघीय जांच एजेंसियों का आरोप है कि कई वर्षों के दौरान बड़ी मात्रा में तकनीकी हार्डवेयर दुबई के रास्ते ईरान पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, शिपिंग रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कथित रूप से गलत जानकारी दर्ज कर अंतिम गंतव्य को छिपाया गया। रक्षा और परमाणु संस्थानों तक पहुंचे उपकरण अदालती दस्तावेजों में दावा किया गया है कि भेजे गए कुछ उपकरण ईरान के परमाणु और रक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों तक पहुंचे। अभियोजकों के अनुसार, इन संस्थाओं को नेटवर्किंग, संचार और एन्क्रिप्शन तकनीक उपलब्ध कराई गई हो सकती है। इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। पैसों के लेनदेन की भी जांच अमेरिकी एजेंसियां इस मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं। आरोप है कि धन के प्रवाह को छिपाने के लिए शेल कंपनियों, जटिल कारोबारी संरचनाओं और कथित फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। साथ ही आय और कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को लेकर भी जांच जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है। विभाग का कहना है कि संवेदनशील तकनीक को प्रतिबंधित देशों तक पहुंचने से रोकना उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत में साबित होंगे आरोप जमशीद घोमी के खिलाफ आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उन्हें अमेरिकी संघीय कानूनों के तहत लंबी जेल की सजा हो सकती है। कानूनी सिद्धांतों के अनुसार अदालत में दोष साबित होने तक उन्हें निर्दोष माना जाएगा।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf addresses lawmakers amid rising tensions with the United States
अमेरिका पर बरसे गालिबफ, बोले- अधिकारों से नहीं करेंगे समझौता, नाकाम होंगे US के मंसूबे

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने अमेरिका पर आर्थिक दबाव और मीडिया प्रचार के जरिए देश को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा. गालिबफ ने दावा किया कि तेहरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की अमेरिकी रणनीति कभी सफल नहीं होगी. आर्थिक दबाव और प्रचार के जरिए फूट डालने का आरोप रविवार को संसद के नए सत्र को संबोधित करते हुए गालिबफ ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य मोर्चे पर मिली असफलताओं की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों और मीडिया अभियान के जरिए करना चाहते हैं. उनका उद्देश्य ईरान की राष्ट्रीय एकता को कमजोर करना और देश के भीतर विभाजन पैदा करना है. उन्होंने कहा कि युद्ध के नए दौर में विरोधी ताकतें आर्थिक दबाव और प्रचार तंत्र के सहारे ईरान को झुकाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन यह उनका भ्रम है और यह रणनीति सफल नहीं होगी. 'ईरान और इस्लाम को कमजोर करने की कोशिश' गालिबफ ने कहा कि देश एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. उन्होंने दावा किया कि ईरानी जनता उन ताकतों का मजबूती से सामना कर रही है, जो ईरान और इस्लाम को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां इस दौर को देश की संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा के संघर्ष के रूप में याद रखेंगी. उनके अनुसार, यह समय राष्ट्रीय एकता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज होगा. संघर्ष के चार मोर्चों का किया जिक्र ईरानी संसद अध्यक्ष ने मौजूदा हालात को व्यापक संघर्ष बताते हुए चार प्रमुख मोर्चों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सैन्य, कूटनीतिक, जनसहभागिता और जनसेवा के क्षेत्र में समन्वित प्रयासों से ही देश अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकता है. गालिबफ ने दावा किया कि मिसाइल कार्यक्रम समेत ईरान की सैन्य उपलब्धियां जनता के समर्थन और सहयोग का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि अब इन उपलब्धियों को राजनीतिक और कूटनीतिक सफलता में बदलने की जिम्मेदारी नीति निर्माताओं की है. समझौते पर रखा स्पष्ट रुख विदेशी शक्तियों के साथ संभावित समझौतों पर गालिबफ ने कहा कि ईरान केवल उन्हीं प्रस्तावों को स्वीकार करेगा, जिनसे देश के अधिकार और जनता के हित सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा कि केवल आश्वासनों या बयानों के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा. ईरान ठोस और व्यावहारिक परिणामों को प्राथमिकता देता है और ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचे. संसद के नए सत्र में दिया संबोधन गालिबफ ने ये टिप्पणियां ईरान की 12वीं संसद के तीसरे वर्ष के पहले सत्र के दौरान कीं. यह बैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में सांसदों ने भाग लिया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों तथा रणनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद कायम हैं.  

surbhi जून 1, 2026 0
Injured Mojtaba Khamenei amid Iran power shift as IRGC generals take control
ईरान में सत्ता का नया समीकरण: गंभीर रूप से घायल मोजतबा खामेनेई, सैन्य जनरलों के हाथ में फैसले

देश की कमान अब जनरलों के नेटवर्क के इर्द-गिर्द ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े मोजतबा खामेनेई की गंभीर चोटों के बाद देश की निर्णय प्रक्रिया पर सेना का प्रभाव तेजी से बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब महत्वपूर्ण फैसले सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शीर्ष जनरलों की सलाह और सहमति से लिए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा हालात में सरकार का मुख्य काम केवल आंतरिक स्थिरता बनाए रखना, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना और रोजमर्रा के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाना रह गया है। गंभीर चोटों के बाद इलाज जारी, कई सर्जरी हो चुकी हैं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई को पहले हुए हमलों में गंभीर चोटें आई हैं। उनकी एक टांग पर अब तक तीन बार सर्जरी हो चुकी है और आगे चलकर उन्हें कृत्रिम पैर (prosthetic leg) की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, उनके हाथ की भी सर्जरी की गई है और उसमें धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। चेहरे और होंठों पर गंभीर जलन के निशान बताए गए हैं, जिससे बोलने में कठिनाई हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भविष्य में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। देश से अलग-थलग, सिर्फ मेडिकल टीम से संपर्क जानकारी के अनुसार, सुरक्षा कारणों से वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेता अब सीधे मोजतबा से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। उनका इलाज स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। ईरान के राष्ट्रपति, जो स्वयं एक डॉक्टर हैं, भी उनकी देखभाल प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वे सार्वजनिक रूप से बोलने से बच रहे हैं और केवल लिखित संदेशों के जरिए ही संवाद कर रहे हैं। सैन्य नेतृत्व के हाथ में सत्ता का संतुलन ईरान की सत्ता संरचना में इस समय बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स देश की सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार पहले के मुकाबले अब अलग नेताओं के पास स्थानांतरित हो गए हैं। संसद प्रमुख और कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय रणनीति में ज्यादा प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। सरकार सीमित भूमिका में, जनरल्स का बढ़ता प्रभाव ईरान की निर्वाचित सरकार फिलहाल केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नजर आ रही है। खाद्य आपूर्ति, ईंधन व्यवस्था और घरेलू स्थिरता जैसे कार्य सरकार के मुख्य दायित्व बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में देश के भीतर शक्ति का संतुलन स्पष्ट रूप से सैन्य नेतृत्व की ओर झुका हुआ है। हालांकि, ईरानी व्यवस्था में अलग-अलग शक्ति केंद्रों का अस्तित्व पहले से ही रहा है। अस्थिर समय में सत्ता का बदलता ढांचा ईरान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति एक असाधारण मोड़ पर दिखाई दे रही है, जहां घायल नेतृत्व, सीमित प्रशासनिक भूमिका और मजबूत सैन्य प्रभाव मिलकर एक नया शक्ति समीकरण बना रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश का राजनीतिक ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Residents in Tehran amid rising US-Iran tensions and uncertainty after failed peace talks.
US-Iran तनाव के बीच बढ़ी चिंता: शांति वार्ता नाकाम, जंग की आशंका से डरे ईरानी नागरिक

  मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के विफल होने के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर भी खतरा मंडराने लगा है। युद्धविराम पर संकट, सैन्य गतिविधियां तेज अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और संभावित नाकेबंदी के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। आम लोगों में डर और अनिश्चितता ईरान के शहर करज और राजधानी तेहरान में रहने वाले लोगों के बीच गहरी चिंता देखी जा रही है। एक स्थानीय युवक ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि बातचीत से हल निकलेगा, लेकिन अब उसे लगता है कि युद्ध कभी भी दोबारा शुरू हो सकता है। वहीं, एक युवती ने उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा। इंटरनेट बंदी से बढ़ी मुश्किलें ईरान में पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिससे लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर हमलों से बचाव के लिए उठाया गया है, लेकिन आम नागरिकों और व्यवसायों को इससे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कंटेंट क्रिएटर और छोटे कारोबारी खासतौर पर प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “कोई भी इस संघर्ष में नहीं जीत रहा है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी जरूर मुश्किल हो गई है।” आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता युद्ध और प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। लोगों का कहना है कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते जीवन आसान नहीं होगा। कुछ नागरिकों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीतिक कारणों से सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे समझौते की संभावना और कम हो गई है। शांति वार्ता के अगले दौर की कोई तारीख तय नहीं हुई है। ऐसे में ईरान के लोग अनिश्चितता, डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Iranian Foreign Ministry spokesperson Esmail Baghaei addressing media amid rising Middle East tensions
ईरान की पड़ोसी देशों से अपील: अमेरिका-इजरायल का साथ न दें, क्षेत्र की शांति पर सवाल

  तेहरान: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए पड़ोसी देशों से अहम अपील की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहे हैं और उन्हें यहां के लोगों की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। ‘हमले के लिए अपनी जमीन न दें’ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा कि पड़ोसी देश अपनी जमीन, समुद्र या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ देशों ने “अनजाने में” अपनी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल होने दिया है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। ‘अमेरिका-इजरायल से शांति को खतरा’ ईरान का आरोप है कि पिछले 40 दिनों की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका और इजरायल की नीतियां क्षेत्र में शांति के बजाय तनाव बढ़ाने वाली हैं। तेहरान ने दोहराया कि वह अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध और संप्रभुता के सम्मान में विश्वास रखता है, लेकिन किसी भी तरह की सैन्य साझेदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पाकिस्तान के जरिए बातचीत की कोशिश तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से हुई। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का नया रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप का रुख सख्त वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, हालांकि उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जताई है। डिप्लोमैटिक सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा अपडेट सामने आ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ सैन्य तनाव बना हुआ है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या क्षेत्र में टकराव और गहराता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
ईरान की बड़ी चेतावनी: ‘सत्ता परिवर्तन की कोशिश हुई तो डिमोना परमाणु केंद्र पर होगा हमला’

अमेरिका-इजराइल के साथ जंग के छठे दिन तेहरान का सख्त संदेश मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर इस्लामिक गणराज्य में सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई, तो वह इजराइल के डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बनाएगा। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Iranian Students' News Agency (आईएसएनए) ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य अधिकारी ने साफ कहा कि यदि अमेरिका और इजराइल ईरान की मौजूदा व्यवस्था को हटाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो जवाब में इजराइल के परमाणु ठिकाने डिमोना को निशाना बनाया जाएगा। डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को इजराइल के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों में गिना जाता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में हालात पहले से ही बेहद तनावपूर्ण हैं। इजराइल पर मिसाइलों की बौछार, लाखों लोग बंकरों में गुरुवार तड़के ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों की नई खेप दागी। हमले के बाद इजराइल के कई शहरों में सायरन बजने लगे और लाखों लोगों को बम शेल्टर में शरण लेनी पड़ी। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान की जंग छठे दिन में प्रवेश कर चुकी है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। छठे दिन भी जारी संघर्ष मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका के समर्थन से इजराइल की कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने हालात को और गंभीर बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता ईरान की डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। परमाणु स्थलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश से बड़े पैमाने पर विनाश और पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहां हालात तेजी से बदल रहे हैं और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0