इस्लामाबाद: पाकिस्तान क्रिकेट टीम में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण टेस्ट कप्तान Shan Masood की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Salman Ali Agha को पाकिस्तान की टेस्ट टीम का नया कप्तान बनाया जा सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन Mohsin Naqvi इस बदलाव को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। शान मसूद का कप्तानी रिकॉर्ड बना चिंता का कारण दिसंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद शान मसूद को टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई थी। लेकिन उनके नेतृत्व में पाकिस्तान का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। कप्तान के रूप में 16 टेस्ट मैच 12 मैचों में हार हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ लगातार चौथी टेस्ट हार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पाकिस्तान सबसे निचले स्थानों में रहा सबसे चिंताजनक बात यह रही कि टेस्ट क्रिकेट के प्रमुख देशों में शान मसूद ऐसे कप्तान बन गए जिन्होंने अपने शुरुआती 12 टेस्ट मैचों में जीत का स्वाद नहीं चखा। मोहसिन नकवी बदलाव के मूड में रिपोर्ट्स के मुताबिक, शान मसूद ने नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें मौका देने की अपील की है। हालांकि PCB नेतृत्व टीम के खराब प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। सूत्रों का दावा है कि आगामी चुनौतीपूर्ण विदेशी दौरों को देखते हुए बोर्ड नए नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहता है। पाकिस्तान को जल्द ही वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के कठिन दौरे पर जाना है, जहां टीम को पांच महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबले खेलने हैं। क्यों आगे हैं सलमान आगा? 32 वर्षीय सलमान अली आगा पिछले कुछ समय से पाकिस्तान टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। मार्च 2025 से वह टी20 टीम की कप्तानी भी संभाल रहे हैं। टेस्ट करियर की बात करें तो: 25 टेस्ट मैच 1663 रन 3 शतक 12 अर्धशतक सर्वोच्च स्कोर 132* रन उनकी नेतृत्व क्षमता और लगातार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें टेस्ट टीम की कमान सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है। बल्लेबाजी में भी संघर्ष कर रहे हैं मसूद कप्तानी के अलावा शान मसूद का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी सवालों के घेरे में है। हालिया टेस्ट श्रृंखला में वह चार पारियों में केवल एक अर्धशतक ही लगा सके। ऐसे में टीम में उनकी जगह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। कोचिंग स्टाफ में भी हो सकते हैं बदलाव रिपोर्ट्स के अनुसार: Sarfaraz Ahmed मुख्य कोच बने रह सकते हैं। Umar Gul गेंदबाजी कोच के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकते हैं। बल्लेबाजी कोच के पद पर नया चेहरा लाया जा सकता है। पूर्व कप्तान Mohammad Hafeez को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट निदेशक बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से लगातार नेतृत्व और प्रबंधन में बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में यदि शान मसूद की कप्तानी जाती है, तो यह पाकिस्तान क्रिकेट में एक और बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा।
भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच का आगाज मुल्लांपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह क्रिकेट स्टेडियम में हो गया है। कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। इस मुकाबले में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन संतुलित और आक्रामक नजर आ रही है, जिसमें एक नए खिलाड़ी को डेब्यू का मौका मिला है। मानव सुथार ने किया टेस्ट डेब्यू इस मैच का सबसे खास पल तब आया जब राजस्थान के युवा स्पिन ऑलराउंडर मानव सुथार को भारत की टेस्ट कैप सौंपी गई। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाने वाले मानव को अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव ने डेब्यू कैप देकर सम्मानित किया। रविंद्र जडेजा की अनुपस्थिति में मानव सुथार के पास अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से प्रभाव छोड़ने का बड़ा अवसर है। यशस्वी और राहुल के जिम्मे ओपनिंग भारतीय पारी की शुरुआत युवा स्टार यशस्वी जायसवाल और अनुभवी केएल राहुल करेंगे। वहीं नंबर-3 पर साई सुदर्शन को मौका दिया गया है, जिन पर मुख्य कोच गौतम गंभीर ने पहले ही भरोसा जताया था। कप्तान शुभमन गिल नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते नजर आएंगे। ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल दोनों को मिली जगह टीम इंडिया ने इस मुकाबले में दो विकेटकीपर बल्लेबाजों के साथ उतरने का फैसला किया है। ऋषभ पंत विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि युवा बल्लेबाज ध्रुव जुरेल को भी प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है। इससे भारत की बल्लेबाजी को अतिरिक्त मजबूती मिली है। गेंदबाजी में अनुभव और युवा जोश का मिश्रण तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा के कंधों पर होगी। वहीं स्पिन विभाग में कुलदीप यादव, वॉशिंगटन सुंदर और डेब्यू कर रहे मानव सुथार अहम भूमिका निभाएंगे। अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की प्लेइंग इलेवन केएल राहुल यशस्वी जायसवाल साई सुदर्शन शुभमन गिल (कप्तान) ऋषभ पंत (विकेटकीपर) ध्रुव जुरेल वॉशिंगटन सुंदर मानव सुथार कुलदीप यादव मोहम्मद सिराज प्रसिद्ध कृष्णा भारत की यह प्लेइंग इलेवन अनुभव और युवा प्रतिभा का शानदार मिश्रण मानी जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि शुभमन गिल की कप्तानी में टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करती है।
भारतीय क्रिकेट को एक और युवा सितारा मिल गया है। राजस्थान के 23 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर और ऑलराउंडर मानव सुथार ने भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया। कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिला, जबकि मैच से पहले स्टार स्पिनर कुलदीप यादव ने उन्हें टेस्ट कैप सौंपी। सालों का सपना हुआ पूरा बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति ने पहली बार मानव सुथार को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया था। डेब्यू के साथ ही इस युवा खिलाड़ी का भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना साकार हो गया। नेट्स में विराट और रोहित को किया था परेशान मानव सुथार लंबे समय से चयनकर्ताओं की नजर में थे। 2023 वनडे विश्व कप से पहले बेंगलुरु में भारतीय टीम के कैंप के दौरान उन्हें नेट गेंदबाज के रूप में बुलाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपनी स्पिन गेंदबाजी से रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को काफी परेशान किया था। उनकी गेंदों में मौजूद टर्न और नियंत्रण ने सीनियर खिलाड़ियों को भी प्रभावित किया था। उस समय यह माना गया था कि रेड-बॉल क्रिकेट में मानव भविष्य के बड़े मैच विनर बन सकते हैं। घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड मानव सुथार ने फरवरी 2022 में आंध्र प्रदेश के खिलाफ राजस्थान के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। तब से अब तक उन्होंने 29 फर्स्ट क्लास मैचों में 129 विकेट अपने नाम किए हैं। उनकी इकोनॉमी 2.94 रही है, जो उनकी निरंतरता को दर्शाती है। बल्लेबाजी में भी उन्होंने अहम योगदान दिया है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 945 रन हैं, जिसमें एक शतक और छह अर्धशतक शामिल हैं। जनवरी में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने 120 रन की शानदार पारी खेली थी और मैच में कुल सात विकेट भी लिए थे। सफेद गेंद क्रिकेट में भी प्रभावशाली प्रदर्शन 25 लिस्ट-ए मैच: 34 विकेट 28 टी20 मैच: 25 विकेट आईपीएल 2026: गुजरात टाइटंस की ओर से 4 मैचों में 2 विकेट इसके अलावा मानव सुथार फरवरी में नामीबिया के खिलाफ टी20 विश्व कप वॉर्म-अप मैच में इंडिया ए टीम का भी हिस्सा रहे थे। भारत की प्लेइंग इलेवन केएल राहुल यशस्वी जायसवाल साई सुदर्शन शुभमन गिल (कप्तान) ऋषभ पंत (विकेटकीपर) ध्रुव जुरेल वाशिंगटन सुंदर मानव सुथार कुलदीप यादव मोहम्मद सिराज प्रसिद्ध कृष्णा युवा ऑलराउंडर मानव सुथार के पास अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने का सुनहरा मौका है। भारतीय क्रिकेट फैंस को उम्मीद होगी कि वह घरेलू क्रिकेट की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दोहराएंगे।
न्यू चंडीगढ़, एजेंसियां। भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर बैटिंग करने का फैसला लिया है। शनिवार को मैच का पहला दिन है और पहले सेशन का खेल जारी है। टीम इंडिया ने पहली पारी में बिना नुकसान के 15 रन बना लिए हैं। यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल क्रीज पर हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।