Nohkalikai Falls Meghalaya: मानसून के मौसम में अगर आप प्रकृति का सबसे खूबसूरत रूप देखना चाहते हैं, तो मेघालय का नोहकलिकाई फॉल्स बेहतरीन विकल्प हो सकता है। करीब 340 मीटर ऊंचा यह झरना अपनी रहस्यमयी कहानी, प्राकृतिक सुंदरता और बादलों के बीच बनने वाले अद्भुत दृश्य के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मानसून में क्यों खास है नोहकलिकाई फॉल्स? भारत में मानसून के दौरान घूमने के लिए कई खूबसूरत जगहें हैं, लेकिन मेघालय के चेरापूंजी (सोहरा) में स्थित नोहकलिकाई फॉल्स सबसे अलग अनुभव देता है। बारिश के मौसम में यहां का झरना अपने पूरे वेग से बहता है और चारों ओर फैले घने बादल, हरी-भरी पहाड़ियां और धुंध ऐसा दृश्य बनाते हैं, जिसे देखकर हर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाता है। करीब 340 मीटर (1,115 फीट) की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना भारत के सबसे ऊंचे प्लंज वॉटरफॉल्स में गिना जाता है। क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक तथ्य? विशेषज्ञों के अनुसार, चेरापूंजी दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं खासी पहाड़ियों से टकराती हैं, जिससे ओरोग्राफिक वर्षा (Orographic Rainfall) होती है। यही कारण है कि मानसून में नोहकलिकाई फॉल्स का जलप्रवाह कई गुना बढ़ जाता है और यहां लगातार बादल और धुंध का अनोखा नजारा देखने को मिलता है। क्या है इस जगह से जुड़ी रहस्यमयी और धार्मिक मान्यता? स्थानीय खासी जनजाति की लोककथा के अनुसार, इस झरने का नाम 'नोह का लिकाई' से पड़ा है, जिसका अर्थ है "लिकाई की छलांग"। मान्यता है कि लिकाई नाम की एक महिला ने दुखद परिस्थितियों में इसी चट्टान से छलांग लगा दी थी। तभी से यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। हालांकि, यह कथा लोकविश्वास पर आधारित है और इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून (जून से सितंबर): झरना अपने सबसे भव्य रूप में दिखाई देता है। अक्टूबर से नवंबर: मौसम साफ रहता है और फोटोग्राफी के लिए शानदार समय माना जाता है। कैसे पहुंचे? निकटतम एयरपोर्ट: शिलांग (उमरोई) और गुवाहाटी एयरपोर्ट निकटतम रेलवे स्टेशन: गुवाहाटी सड़क मार्ग: शिलांग से लगभग 55 किलोमीटर और गुवाहाटी से करीब 150 किलोमीटर अनुमानित यात्रा बजट (प्रति व्यक्ति) गुवाहाटी/शिलांग से टैक्सी या साझा कैब: ₹800–₹2,500 होटल (1 रात): ₹1,500–₹4,000 भोजन: ₹500–₹1,000 एंट्री टिकट व अन्य खर्च: ₹100–₹300 कुल अनुमानित बजट: ₹3,500–₹8,000 (2 दिन की यात्रा) यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान बारिश से बचने के लिए रेनकोट और वाटरप्रूफ जूते साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर सावधानी से चलें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। प्राकृतिक स्थल को स्वच्छ रखने में सहयोग करें। ध्यान दें: नोहकलिकाई फॉल्स से जुड़ी लोककथा स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। वहीं वैज्ञानिक तथ्य इस क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और भारी वर्षा से जुड़े हैं।
IIT Delhi AI Certificate Course 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने Applied Quantum Computing and AI में नया 6.5 महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं है। यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो नई तकनीकों में अपने कौशल को बेहतर बनाकर करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। IIT Delhi ने जारी किया आधिकारिक नोटिस IIT दिल्ली ने अपने नोटिस में बताया है कि Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग-उन्मुख स्किल्स भी सिखाई जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक उम्मीदवार इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 6.5 महीने का ऑनलाइन प्रोग्राम यह कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के साथ भी इसे आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रतिभागियों को IIT Delhi कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे संस्थान के अकादमिक वातावरण और विशेषज्ञों के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। किन लोगों के लिए है यह कोर्स? यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिजाइन किया गया है जो: AI और Quantum Computing में नई स्किल्स सीखना चाहते हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड और एडवांस तकनीकी ज्ञान हासिल करना चाहते हैं। नौकरी के साथ ऑनलाइन सीखने का विकल्प चाहते हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: IIT Delhi CEP के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme चुनें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। कोर्स की मुख्य विशेषताएं संस्थान: IIT Delhi कोर्स: Applied Quantum Computing and AI अवधि: 6.5 महीने मोड: ऑनलाइन कैंपस इमर्शन का अवसर JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2026 AI और Quantum Computing आने वाले वर्षों की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हैं। ऐसे में IIT Delhi का यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम उन प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर हो सकता है जो भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।
Color Changing Mountain: ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) अपनी बदलती रंगत के लिए दुनिया भर में मशहूर है। सूरज की रोशनी के साथ इसका रंग बदलता हुआ नजर आता है। वहीं भारत में भी एक ऐसा पर्वत है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पहाड़ों की रंगत बदलती हुई दिखाई देती है। दिनभर क्यों बदलता है इस पहाड़ का रंग? जानिए इसके पीछे का विज्ञान और आस्था दुनिया में कई पहाड़ अपनी ऊंचाई, बर्फ से ढकी चोटियों या प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का उलुरु (Uluru) एक ऐसी प्राकृतिक धरोहर है, जो दिनभर बदलती रंगत के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुबह की पहली किरणों में यह हल्का गुलाबी दिखाई देता है, दोपहर में चमकीला नारंगी और शाम ढलते-ढलते इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी आभा लिए नजर आने लगता है। ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित यह विशाल बलुआ पत्थर (Sandstone) का पर्वत अपनी अनोखी रंग बदलने वाली विशेषता के कारण विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि, चट्टान का वास्तविक रंग नहीं बदलता, बल्कि सूर्य की बदलती रोशनी और इसके खनिजों की संरचना के कारण ऐसा दृश्य दिखाई देता है। क्यों बदलता है उलुरु का रंग? विशेषज्ञों के अनुसार, उलुरु में मौजूद आयरन (लौह) युक्त खनिज समय के साथ ऑक्सीकरण (Oxidation) की प्रक्रिया से लाल रंग के हो गए हैं। सूरज की किरणें अलग-अलग कोणों से पड़ने पर यह चट्टान अलग-अलग रंगों का भ्रम पैदा करती है। दिनभर में इसकी रंगत कुछ इस तरह नजर आती है— सूर्योदय के समय हल्का गुलाबी सुबह सुनहरा नारंगी दोपहर में गहरा जंग जैसा लाल सूर्यास्त के समय लाल, बैंगनी और मैरून रंग आस्था से भी जुड़ा है यह पर्वत उलुरु केवल प्राकृतिक अजूबा ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी अनांगु (Anangu) समुदाय के लिए बेहद पवित्र स्थल भी माना जाता है। हजारों वर्षों से यह स्थान उनकी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत में कौन-सा पर्वत बदलता है रंग? अगर भारत की बात करें, तो कंचनजंगा पर्वत (सिक्किम) भी सूरज की रोशनी के साथ अपनी रंगत बदलता हुआ दिखाई देता है। सूर्योदय के समय इसकी बर्फीली चोटियां सुनहरी और गुलाबी आभा से चमक उठती हैं, जबकि सूर्यास्त के समय नारंगी और हल्के लाल रंग का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इसी वजह से इसे देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय उलुरु (ऑस्ट्रेलिया): मई से सितंबर के बीच मौसम सबसे सुहावना रहता है और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय रंग बदलने का नजारा सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। कंचनजंगा (सिक्किम, भारत): अक्टूबर से दिसंबर और मार्च से मई का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इन महीनों में आसमान साफ रहता है और पर्वत की बदलती रंगत स्पष्ट दिखाई देती है। ध्यान दें: पर्वतों की रंगत में बदलाव मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी, मौसम और वातावरण की स्थिति पर निर्भर करता है। यह एक प्राकृतिक प्रकाशीय प्रभाव (Optical Effect) है।
रांची। झारखंड के जेल महानिरीक्षक (आईजी) और 2006 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुदर्शन मंडल की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के कोकर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक चिकित्सीय जांच में उन्हें हार्ट अटैक आने की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। फिलहाल उनकी स्थिति पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। परिजनों के अनुसार परिजनों के अनुसार, सोमवार को अचानक सीने में तकलीफ और स्वास्थ्य बिगड़ने की शिकायत के बाद सुदर्शन मंडल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने आवश्यक जांच की, जिसमें हृदयाघात की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में शिफ्ट कर विशेष उपचार शुरू किया गया। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया जारी है। सुदर्शन मंडल झारखंड कैडर के 2006 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में राज्य के जेल महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्यरत हैं। अपने लंबे प्रशासनिक और पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस मुख्यालय में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी पहचान एक कुशल, अनुशासित और अनुभवी पुलिस अधिकारी के रूप में रही है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में चिंता का माहौल है। कई वरिष्ठ अधिकारी और शुभचिंतक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है और आवश्यक जांच व उपचार किए जा रहे हैं। फिलहाल सुदर्शन मंडल की हालत पर चिकित्सकों की कड़ी निगरानी है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले कुछ घंटे उनके स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन और उनके परिवार को उम्मीद है कि उपचार के बाद उनकी स्थिति में जल्द सुधार होगा।
Malana Village Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में बसा मलाणा गांव अपनी अनोखी परंपराओं, प्राचीन स्वशासन व्यवस्था और सख्त सामाजिक नियमों के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। क्यों चर्चा में रहता है मलाणा गांव? हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में लगभग 8,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित मलाणा भारत के सबसे अनोखे गांवों में गिना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह गांव अपनी अलग संस्कृति, पारंपरिक स्वशासन प्रणाली और सदियों पुरानी मान्यताओं के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। मलाणा को अक्सर "लिटिल ग्रीस ऑफ द हिमालय" भी कहा जाता है। स्थानीय लोककथाओं में गांव के लोगों का संबंध सिकंदर महान की सेना से भी जोड़ा जाता है, हालांकि इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यहां क्यों हैं सख्त नियम? मलाणा में आने वाले पर्यटकों को स्थानीय परंपराओं का पालन करना जरूरी माना जाता है। गांव में कई जगहों पर बाहरी लोगों को मंदिर परिसर या धार्मिक स्थलों को छूने की अनुमति नहीं होती। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इन नियमों का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गांव के आराध्य देवता जमलू देवता यहां के सामाजिक और धार्मिक जीवन के केंद्र हैं। गांव की पारंपरिक व्यवस्था आज भी इन्हीं मान्यताओं के आधार पर संचालित होती है। मलाणा की प्राचीन स्वशासन व्यवस्था मलाणा अपनी पारंपरिक ग्राम परिषद के लिए भी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यहां सदियों से स्थानीय परिषद गांव के प्रशासन और विवादों का निपटारा करती आ रही है। यह व्यवस्था भारत की सबसे पुरानी स्थानीय स्वशासन प्रणालियों में से एक मानी जाती है। मलाणा में क्या देखें? पारंपरिक लकड़ी के खूबसूरत घर और प्राचीन वास्तुकला दूर से जमलू देवता मंदिर और रेनुका देवी मंदिर के दर्शन पार्वती घाटी और हिमालय की शानदार प्राकृतिक वादियां स्थानीय संस्कृति और सदियों पुरानी जीवनशैली यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें। मंदिरों और धार्मिक स्थलों को बिना अनुमति स्पर्श न करें। फोटोग्राफी से पहले स्थानीय लोगों की अनुमति लें। स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें। ध्यान दें: मलाणा से जुड़ी कई बातें स्थानीय लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
लातेहार। झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाएगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देशानुसार इस अवधि में जंगल सफारी, वाहनों की आवाजाही और पार्क के भीतर होने वाली सभी इको-टूरिज्म गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। वन विभाग के अनुसार यह निर्णय मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पर्यटक अब 1 अक्टूबर से दोबारा जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस वन अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में अधिकांश जंगली जानवरों का प्रजनन काल होता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियों से उनकी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही मानसून के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे सफारी वाहनों के फंसने और हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तीन महीने तक केवल वन विभाग के अधिकारी और पेट्रोलिंग टीम को ही जंगल में प्रवेश की अनुमति रहेगी। पार्क बंद रहने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी भी पहले से अधिक सख्त की जाएगी तथा वॉच टावरों पर वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाएगी। रेस्ट हाउस खुले रहेंगे, आसपास के पर्यटन स्थलों का उठा सकेंगे आनंद हालांकि पार्क के भीतर प्रवेश और सफारी बंद रहेगी, लेकिन पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस, कैंटीन और अन्य सुविधाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी। बेतला आने वाले सैलानी आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे केचकी संगम, पलामू किला, मंडल डैम, सतनदिया, ततहा झरना, मिर्चईया फॉल, कोयल व्यू, सुग्गा बांध और लोध फॉल का भ्रमण कर सकेंगे। बेतला रेंज के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि पार्क बंद रखने के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।
ढाका/नई दिल्ली: भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा सेवा दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने गुरुवार को ढाका स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 28 जून से बांग्लादेशी नागरिक फिर से भारत आने के लिए टूरिस्ट वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह फैसला दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पिछले लगभग दो वर्षों से बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा सेवा बंद थी। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से मुलाकात के बाद हुई घोषणा इस घोषणा से पहले भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन से शिष्टाचार मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के लिए वीजा सेवाओं को फिर से शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार, 28 जून से पर्यटक वीजा के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बंद हुई थी सेवा 5 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन और उसके बाद दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव के चलते भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करना बंद कर दिया था। इस दौरान मेडिकल और बिजनेस वीजा जारी किए जाते रहे। अब करीब दो साल बाद पर्यटक वीजा सेवा भी बहाल कर दी गई है। इन चार केंद्रों से जारी होंगे पर्यटक वीजा दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि बांग्लादेश में स्थित ढाका, राजशाही, चटगांव और खुलना के भारतीय वीजा आवेदन केंद्रों से पर्यटक वीजा जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बेनापोल सीमा के रास्ते यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा और दोनों देशों के बीच आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। अप्रैल में बने थे भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को अप्रैल में बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय राजनेता हैं। उनसे पहले वरिष्ठ राजनयिक प्रणय वर्मा इस पद पर कार्यरत थे। भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की दिशा में अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटक वीजा सेवा की बहाली से दोनों देशों के बीच पर्यटन, व्यापार, चिकित्सा यात्रा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इसे भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौता होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हवाई यात्रियों को अभी सस्ती फ्लाइट टिकट का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार महीनों तक विमान किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। इस तिमाही में किराया घटने की उम्मीद कम एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक अधिकांश एयरलाइंस आने वाले कुछ महीनों के लिए अपनी ऑपरेशनल लागत पहले ही तय कर चुकी हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में गिरावट का सीधा असर तुरंत टिकटों पर नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी भी आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि विमान किराया भी उतना ही घट जाएगा। अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं ATF के दाम इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती लागत के कारण दुनिया भर की कई एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करने और किराए बढ़ाने पड़े थे। अब जबकि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भी ईंधन की कीमतों को पुराने स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है ईंधन एविएशन उद्योग में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। नए विमानों वाली एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा ATF पर खर्च होता है। पुराने विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए यह खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर सीधे पड़ता है। अभी टिकट सस्ते करने का दबाव नहीं युद्ध के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा एयरलाइंस ने खुद वहन किया, जबकि बाकी भार यात्रियों पर बढ़े हुए किराए के रूप में डाला गया। अब कई एयरलाइंस को टिकट कीमतें घटाने की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा समय में यात्री ऊंचे किराए पर भी यात्रा करने को तैयार हैं। तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगेगा समय विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई तेल कुओं और संबंधित सुविधाओं को बंद कर दिया गया था। इन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने, रिफाइनरियों को सक्रिय करने और सप्लाई नेटवर्क को सामान्य बनाने में समय लगेगा। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से दूर चले गए तेल टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क को भी पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। कब मिल सकती है राहत? अगर वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो वर्ष की अगली तिमाही में हवाई किराए में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यात्रियों को महंगे टिकट के साथ ही यात्रा करनी पड़ सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Rail Minister Ashwini Vaishnaw) ने एलान किया है कि आगामी 15 जुलाई तक आईआरसीटीसी (IRCTC) की एक नई और बेहद एडवांस वेबसाइट लॉन्च कर दी जाएगी। इस नई वेबसाइट के आने से यात्रियों को टिकट बुक करते समय होने वाली दिक्कतों से निजात मिल जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह ऐलान किया है। जयपुर के MNIT में छात्रों के बीच किया एलान यह महत्वपूर्ण घोषणा रेल मंत्री ने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान की। इस संवाद कार्यक्रम में मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग की छात्रा लभिशा मीना ने टिकट बुकिंग में परेशानी बताई। उसने कहा कि “IRCTC पोर्टल पर टिकट बुक करते समय ओटीपी (OTP) या कैप्चा (Captcha) वेरिफिकेशन में बहुत ज्यादा समय लगता है। कई बार तो इस तकनीकी खराबी के कारण तत्काल टिकट या सामान्य टिकट बुक ही नहीं हो पाते और सीटें फुल हो जाती हैं।” शिकायत सुनते ही रेल मंत्री का ‘स्पॉट एक्शन’... छात्रों की इस जायज परेशानी को सुनते ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने मंच से ही IRCTC के वरिष्ठ अधिकारियों को फोन लगाया और इस गंभीर तकनीकी खामी पर चर्चा की। अधिकारियों से बात करने के तुरंत बाद उन्होंने छात्रों और देश की जनता को आश्वस्त किया कि 15 जुलाई तक एक नई और उन्नत (Upgraded) वेबसाइट लाइव कर दी जाएगी, जिसमें ये सभी कमियां नहीं मिलेंगी। IRCTC की नई वेबसाइट में क्या होंगे बदलाव? रेल मंत्री के अनुसार, नई वेबसाइट में बड़े सुधार देखने को मिलेंगे, जो इस प्रकार हैः फास्ट ओटीपी और कैप्चा वेरिफिकेशन: अब टिकट बुकिंग के समय OTP और Captcha लोड होने में समय नहीं लगेगा। हैंग-फ्री बुकिंग एक्सपीरियंस: भारी ट्रैफिक (विशेषकर तत्काल टिकट बुकिंग के समय) के दौरान भी वेबसाइट क्रैश या स्लो नहीं होगी। यूजर फ्रेंडली इंटरफेस: आम नागरिकों के लिए टिकट बुक करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित होगा। रेल मंत्री ने दी ‘RailOne’ ऐप इस्तेमाल करने की सलाहः जब छात्रों ने ऐप के धीमे होने की बात कही, तो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें ‘RailOne’ (रेलवन) ऐप का उपयोग करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे द्वारा विकसित यह ऐप बेहद सुचारू रूप से काम करता है और इसके जरिए टिकट बुकिंग व अन्य रेलवे सेवाओं का लाभ आसानी से उठाया जा सकता है। ट्रेनों में Breastfeeding के लिए बनेगा स्पेशल केबिन! इसी कार्यक्रम में एक अन्य छात्रा, नाज बानो ने महिला सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रेनों में सफर के दौरान महिलाओं को स्तनपान कराते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए हर कोच में इसके लिए एक समर्पित या प्राइवेट स्पेस (Dedicated Space) होना चाहिए। रेल मंत्री ने इस सुझाव की सराहना करते हुए अपनी टीम को इस पर तुरंत काम करने और नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत की विदेशी पर्यटन नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि विदेशों में पर्यटन प्रचार (टूरिज्म मार्केटिंग) के बजट में भारी कटौती करने से भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक इस फैसले का सीधा असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर पड़ा और देश अरबों डॉलर के संभावित राजस्व से वंचित रह गया। इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे अपने लेख में अमिताभ कांत ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में पर्यटन ऐसा क्षेत्र है, जो विदेशी मुद्रा अर्जित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का सबसे तेज माध्यम बन सकता है। 2019 के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया भारत अमिताभ कांत के अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत का विदेशी पर्यटन मार्केटिंग बजट लगभग समाप्त कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में भारत में करीब 99 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जो कोविड-19 महामारी से पहले वर्ष 2019 के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कम है। उन्होंने दावा किया कि भारत के कई प्रतिस्पर्धी देश महामारी से पहले के स्तर को पार कर चुके हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। एक विदेशी पर्यटक से मिलता है ज्यादा आर्थिक लाभ कांत के अनुसार एक विदेशी पर्यटक भारत की जीडीपी में औसतन 3,000 डॉलर (करीब 2.87 लाख रुपये) का योगदान देता है, जबकि एक घरेलू पर्यटक का योगदान केवल 75 डॉलर (करीब 7,000 रुपये) के आसपास होता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत विदेशी पर्यटन प्रचार पर 200 मिलियन डॉलर का निवेश करे, तो लगभग 10 लाख अतिरिक्त विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इससे— 3.6 अरब डॉलर की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होगी। लगभग 400 मिलियन डॉलर का GST संग्रह होगा। करीब 2.83 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। अमिताभ कांत के मुताबिक मार्केटिंग पर खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर पर लगभग 18 गुना रिटर्न प्राप्त हो सकता है। दूसरे देशों के उदाहरण भी दिए अपने लेख में उन्होंने कई देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन प्रचार में निवेश बढ़ाने से वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में तेजी आई। मलेशिया मार्केटिंग बजट: 7 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटक: 31% वृद्धि के साथ 2.73 करोड़ राजस्व: 22 अरब डॉलर थाईलैंड मार्केटिंग बजट: 12 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटक: 26% वृद्धि के साथ 3.55 करोड़ राजस्व: 48 अरब डॉलर ब्राजील मार्केटिंग खर्च: 9 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटकों में 22% की वृद्धि सऊदी अरब लगभग 3 करोड़ अतिरिक्त पर्यटक 41 अरब डॉलर का राजस्व अमेरिका Brand USA अभियान के तहत 24 करोड़ डॉलर का निवेश हर एक डॉलर पर लगभग 25 डॉलर का रिटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारत की मौजूदगी कमजोर अमिताभ कांत ने कहा कि आज वैश्विक पर्यटन उद्योग सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट पर आधारित हो चुका है, लेकिन भारत इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि "Incredible India" के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर्स तो हैं, लेकिन एंगेजमेंट काफी कम है। इसके मुकाबले कई अन्य देश डिजिटल प्रचार के जरिए करोड़ों लोगों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। क्या दिए सुझाव? अमिताभ कांत ने पर्यटन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव दिए— होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए नियमों को सरल बनाया जाए। मल्टीपल लाइसेंस व्यवस्था की जगह यूनिफाइड लाइसेंस सिस्टम लागू किया जाए। ऑटोमैटिक रिन्यूअल व्यवस्था शुरू की जाए। ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को रणनीतिक साझेदार माना जाए। उनका मानना है कि किसी वास्तविक यात्री का अनुभव साझा करने वाला वीडियो, पारंपरिक सरकारी विज्ञापनों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होता है।
एयरलाइंस के लिए राहत भरी खबर पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती ईंधन लागत से जूझ रही भारतीय एयरलाइंस को बड़ी राहत मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की कटौती कर दी है। वहीं घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में लगातार दूसरे महीने कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस फैसले से भारतीय एयरलाइंस को परिचालन लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ATF कीमतों में आई समानता ताजा कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमत घटकर लगभग 1,100 डॉलर प्रति किलोलीटर रह गई है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 1.05 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के बराबर है। अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की कीमत लगभग घरेलू उड़ानों के समान स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरलाइंस को काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही थी। अप्रैल में हुआ था भारी इजाफा अप्रैल 2026 में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों में सीमित वृद्धि की अनुमति दी थी, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वैश्विक बाजार के अनुरूप पूरी कीमत बढ़ोतरी लागू की गई थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF कीमतों में करीब 73,000 रुपये प्रति किलोलीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे एयरलाइंस की लागत में भारी उछाल आया था और कई कंपनियों ने यात्रियों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज भी लगाया था। सरकार ने घरेलू यात्रियों को राहत दी सरकारी अधिकारियों के अनुसार, घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों को नियंत्रित रखने का उद्देश्य यात्रियों को अचानक किराया वृद्धि से बचाना था। जानकारी के मुताबिक, तेल कंपनियां घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन बेचते समय प्रति लीटर करीब 30 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। यदि पूरी लागत एयरलाइंस पर डाली जाती, तो घरेलू ATF की कीमत लगभग 1.35 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच सकती थी। एयरलाइंस लंबे समय से कर रही थीं मांग भारतीय एयरलाइंस लंबे समय से सरकार से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन मूल्य निर्धारण में समानता लाने की मांग कर रही थीं। एयरलाइंस का तर्क था कि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर बढ़ी हुई ईंधन लागत उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा उन्होंने ATF मूल्य निर्धारण में "क्रैक स्प्रेड बैंड" जैसी व्यवस्था दोबारा लागू करने की भी मांग की थी, जिससे ईंधन कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित किया जा सके। Air India पर पड़ा सबसे ज्यादा असर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस पहले से दबाव में हैं। इसका सबसे ज्यादा असर Air India पर पड़ा है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करने वाली एयर इंडिया को लंबा और वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गए हैं। कंपनी पहले ही जून से अगस्त के बीच अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में सैकड़ों साप्ताहिक उड़ानों की कटौती का ऐलान कर चुकी है। इसके अलावा घरेलू उड़ानों की संख्या में भी कमी की गई है। क्या सस्ते हो सकते हैं हवाई टिकट? विशेषज्ञों का मानना है कि ATF कीमतों में कमी से एयरलाइंस की लागत पर कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन इसका सीधा लाभ यात्रियों को कब मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में एयरलाइंस पश्चिम एशिया संकट, लंबी उड़ान दूरी और परिचालन चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में ईंधन लागत में आई राहत का बड़ा हिस्सा इन अतिरिक्त खर्चों को संतुलित करने में इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि यदि वैश्विक तेल कीमतें स्थिर रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले महीनों में टिकट कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। उद्योग को मिली अस्थायी राहत एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF कीमतों में 27 प्रतिशत की कटौती भारतीय एयरलाइंस के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आई है। इससे विदेशी मार्गों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और कंपनियों को परिचालन बनाए रखने में कुछ राहत मिल सकती है।
हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए हालिया वैश्विक हालात चिंता बढ़ा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जेट फ्यूल की सप्लाई पर पड़े असर के चलते कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द करनी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में लुफ्थांसा जैसी बड़ी एयरलाइंस ने भी हजारों फ्लाइट्स कैंसिल करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा असर यात्रियों की यात्रा योजनाओं और बजट दोनों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर आपकी फ्लाइट अचानक कैंसिल हो जाए तो क्या करें, और अपने पैसे व नई उड़ान कैसे सुनिश्चित करें। फ्लाइट कैंसिल होने पर सबसे पहले क्या करें? विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिलते ही घबराने के बजाय तुरंत एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉगइन करें। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, खासकर अमेरिकी कंपनियां, ऐप के जरिए तुरंत रीबुकिंग की सुविधा देती हैं अन्य एयरलाइंस में कस्टमर केयर या एयरपोर्ट डेस्क से संपर्क करना पड़ सकता है यात्रियों को आमतौर पर दो विकल्प मिलते हैं– अगली उपलब्ध फ्लाइट में रीबुकिंग टिकट का पूरा रिफंड लेना क्या पूरा पैसा वापस मिलेगा? ज्यादातर मामलों में, अगर एयरलाइन खुद फ्लाइट कैंसिल करती है तो यात्री को पूरा रिफंड मिलने का अधिकार होता है। इसमें शामिल हो सकते हैं: बेस टिकट राशि अतिरिक्त सेवाओं का शुल्क (बैगेज, सीट चयन आदि) यूरोप में नियम अधिक सख्त हैं। वहां एयरलाइंस को केवल रिफंड ही नहीं, बल्कि यात्रियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था (Duty of Care) भी करनी होती है। वहीं अमेरिका और एशिया में नियम थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए यात्रियों को अपने संबंधित क्षेत्र के पैसेंजर राइट्स की जानकारी लेना जरूरी है। मुआवजे के लिए जरूरी सावधानियां विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को हर दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए, जैसे– बोर्डिंग पास कैंसिलेशन ईमेल एयरलाइन से बातचीत के स्क्रीनशॉट साथ ही, एयरलाइन से लिखित में कैंसिलेशन का कारण मांगना भी जरूरी है। यह भविष्य में मुआवजा क्लेम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यात्रा को आसान बनाने के जरूरी टिप्स हमेशा एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से सीधे टिकट बुक करें दिन की पहली फ्लाइट चुनने की कोशिश करें, ताकि वैकल्पिक विकल्प मिल सके फ्लाइट ट्रैकिंग और अलर्ट ऐप्स का उपयोग करें पास के वैकल्पिक एयरपोर्ट का विकल्प भी ध्यान में रखें
होली पर्व समाप्त होने के बाद बिहार से दूसरे राज्यों में लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिल रही है। ट्रेनों में सीटों की भारी मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए 28 होली स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्टेशनों पर उमड़ी यात्रियों की भीड़ होली के बाद कामकाज के लिए दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और अन्य शहरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। पटना जंक्शन समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। स्लीपर और एसी कोच में भी सीटें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। स्टेशनों पर जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ क्विक रिस्पांस टीम को भी तैनात किया गया है। मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, राजेंद्र नगर-एलटीटी, पटना-हटिया, पटना-धनबाद और दानापुर-सिकंदराबाद जैसी ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। रेलवे अधिकारियों ने दी जानकारी पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए पहले से चल रही कई स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि पटना-नई दिल्ली स्पेशल सहित कुल 28 होली स्पेशल ट्रेनों को 31 मार्च तक चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि यात्रियों को सफर में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इन ट्रेनों की अवधि बढ़ाई गई गाड़ी संख्या 03293 पटना–नई दिल्ली स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03294 नई दिल्ली–पटना स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03257 दानापुर–आनंद विहार स्पेशल – 15 मार्च से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03258 आनंद विहार–दानापुर स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रत्येक सोमवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03697 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होगी। गाड़ी संख्या 03698 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक मंगलवार, बुधवार, शनिवार और रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 02397 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 22 और 29 मार्च को चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 02398 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 23 और 30 मार्च को संचालित होगी। रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई परिचालन अवधि से होली के बाद घर लौट रहे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।