TTP

Afghan civilians inspect damage after alleged Pakistani airstrikes in border provinces amid rising tensions.
पाकिस्तान पर अफगानिस्तान का बड़ा आरोप, हवाई हमलों में 13 लोगों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव

  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए। तालिबान प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि इस कार्रवाई में 14 महिलाएं घायल हुई हैं। तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाया हवाई क्षेत्र उल्लंघन का आरोप जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया। तालिबान प्रशासन ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे हमले में प्रभावित लोगों की हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा पार संघर्ष को लेकर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर देखने को मिला है। 2025 के बाद और बिगड़े संबंध विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीमा पार सैन्य गतिविधियों और हवाई हमलों को लेकर स्थिति और अधिक गंभीर हो गई थी। इसके बाद कई सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़पों और विस्थापन की घटनाएं सामने आईं। पाकिस्तान की चिंता क्या है? पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर उसके खिलाफ हमले करते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि तालिबान प्रशासन इन समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। रिश्तों में बढ़ती खाई एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था, लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। सीमा सुरक्षा, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते गए हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो सीमा क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Pakistani security forces conduct anti-terror operation in Balochistan targeting militant hideouts and armed groups.
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बड़ा ऑपरेशन, 35 आतंकवादी ढेर

Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Damage at Afghan university after cross-border shelling amid renewed Afghanistan Pakistan border tensions
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष फिर भड़का, यूनिवर्सिटी पर हमले से टूटा भरोसा

कुनार में भीषण हमला, कई नागरिकों की मौत अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालिया युद्धविराम एक बार फिर गंभीर संकट में पड़ गया है। अफगान तालिबान सरकार ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने सोमवार को पूर्वी कुनार प्रांत में मोर्टार और मिसाइल हमले किए, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन हमलों में असदाबाद शहर और उसके आसपास के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, सैयद जमालुद्दीन अफगानी विश्वविद्यालय भी हमले की चपेट में आ गया, जिससे उसके भवनों को भारी नुकसान पहुंचा। छात्रों और शिक्षकों में दहशत अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि घायलों में करीब 30 छात्र और प्रोफेसर शामिल हैं। विश्वविद्यालय परिसर में मची अफरा-तफरी के बाद स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया। तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने इस हमले को "नागरिकों और शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ अक्षम्य युद्ध अपराध" करार दिया। पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने किसी विश्वविद्यालय को निशाना नहीं बनाया। सरकार ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान केवल सटीक और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करता है। हालांकि, उसने अफगान सीमा के भीतर किसी अन्य सैन्य कार्रवाई से स्पष्ट इनकार नहीं किया। युद्धविराम के बावजूद सीमा पर गोलाबारी दोनों देशों के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि औपचारिक युद्धविराम लागू होने के बावजूद सीमा पर लगातार गोलीबारी जारी है। कुनार, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से लगा एक संवेदनशील प्रांत है, जहां तनाव लगातार बना हुआ है। इस ताजा घटना ने हाल ही में चीन के उरुमकी में हुई शांति वार्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। TTP बना सबसे बड़ा विवाद पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। इस आतंकी संगठन ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में कई हमलों को अंजाम दिया है। हालांकि, अफगानिस्तान इन आरोपों को लगातार नकारता आया है। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। चीन की मध्यस्थता भी नहीं ला सकी समाधान अप्रैल की शुरुआत में चीन की मेजबानी में उरुमकी में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करेंगे और किसी लिखित समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, तब तक स्थायी शांति की संभावना बेहद कम है। क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराया खतरा कतर, तुर्किये, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों की मध्यस्थता के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सीमा पर हर नई घटना युद्धविराम को और कमजोर कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कोई विश्वसनीय समाधान नहीं निकाला गया, तो दोनों देशों के बीच संघर्ष और गहरा सकता है।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0