UPI

RBI headquarters with digital banking icons representing UPI expansion, eRupee and financial reforms under Utkarsh 2029 vision
RBI का ‘उत्कर्ष 2029’ विजन: सस्ता लोन, ग्लोबल UPI और eRupee से बदलेगी भारत की आर्थिक तस्वीर

नई दिल्ली: भारत की वित्तीय व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने अपनी मीडियम-टर्म रणनीति ‘उत्कर्ष 2029’ पेश की है। गवर्नर Sanjay Malhotra के नेतृत्व में तैयार इस फ्रेमवर्क का लक्ष्य है - लोन को सस्ता और आसान बनाना, UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देना और eRupee को आम लेनदेन का हिस्सा बनाना। यह रणनीति 2026 से 2029 के बीच लागू होगी, जिसमें कुल 49 लक्ष्यों को छह बड़े स्तंभों में बांटा गया है। इसका उद्देश्य भारत के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक आधुनिक, सरल और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है। क्या बदलने वाला है? RBI की बड़ी तैयारी RBI का फोकस सिर्फ नीतियां बनाने पर नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी बनाने पर है। इसके तहत: पुराने नियमों और सर्कुलर को सरल और आधुनिक बनाया जाएगा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा जोखिम प्रबंधन (Risk Assessment) को और बेहतर किया जाएगा मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑटोमेशन और सेंट्रल क्लियरिंग को बढ़ावा मिलेगा डिजिटल और टेक्नोलॉजी क्षमताओं का विस्तार किया जाएगा अब लोन लेना होगा आसान और सस्ता RBI का सबसे बड़ा फोकस आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज को आसान बनाना है। इसके लिए Unified Lending Interface (ULI) का विस्तार किया जाएगा। कम कागजी प्रक्रिया तेज अप्रूवल कम लागत पर लोन किसानों और छोटे व्यापारियों तक आसान पहुंच इससे फाइनेंसिंग का लोकतंत्रीकरण होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। UPI और रुपया बनेगा ग्लोबल UPI को दुनिया भर में फैलाने की योजना इस विजन का अहम हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में UPI का उपयोग व्यापार में भारतीय रुपये की हिस्सेदारी बढ़ाना डॉलर पर निर्भरता कम करना इससे विदेशी लेनदेन की लागत घटेगी और भारत की आर्थिक ताकत वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी। eRupee: डिजिटल करेंसी का अगला चरण eRupee (CBDC) को लेकर RBI की योजना काफी महत्वाकांक्षी है: दो देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सीधे ट्रांजैक्शन रियल-टाइम और सस्ता अंतरराष्ट्रीय भुगतान बिना इंटरनेट के भी भुगतान की सुविधा सरकारी सब्सिडी और योजनाओं में लक्षित उपयोग eRupee डिजिटल कैश की तरह काम करेगा - सुरक्षित, तेज और ट्रैक करने में आसान। आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर असर लोन सस्ता और जल्दी मिलेगा छोटे व्यापारियों और किसानों को बड़ा फायदा विदेशी व्यापार में लागत घटेगी रुपये की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मजबूत होगा 

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
ICICI Bank CEO Sandeep Bakhshi addressing IIM Jammu convocation on India economic growth
भारत ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ में: मजबूत ग्रोथ और ग्लोबल भरोसे का संकेत – ICICI CEO संदीप बख्शी

  ICICI बैंक के CEO संदीप बख्शी ने कहा है कि भारत इस समय एक “गोल्डीलॉक्स मोमेंट” में है—यानी ऐसा दौर जहां आर्थिक विकास, स्थिरता और वैश्विक भरोसा संतुलित रूप से एक साथ नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह बात IIM जम्मू के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। क्या है ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’? ऐसा आर्थिक माहौल जो न ज्यादा गर्म (ओवरहीटेड) हो और न ठंडा (सुस्त) संतुलित ग्रोथ, नियंत्रित महंगाई और स्थिर अर्थव्यवस्था निवेश और विकास के लिए आदर्श स्थिति डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना गेमचेंजर बख्शी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की, जिसमें शामिल हैं: आधार (Aadhaar) UPI (Unified Payments Interface) इनके जरिए वित्तीय समावेशन बढ़ा कार्यकुशलता में सुधार हुआ इनोवेशन को बढ़ावा मिला   IIM जम्मू में 520 छात्रों को डिग्री दीक्षांत समारोह में कुल 520 छात्रों को डिग्रियां दी गईं: MBA: 289 छात्र MBA (Healthcare): 77 Executive MBA: 31 IPM: 123 यह संस्थान और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। युवाओं के लिए संदेश संदीप बख्शी ने कहा: भारत में अवसरों की कमी नहीं है लेकिन सफलता के लिए जरूरी है: दृढ़ता (Resilience) अनुकूलनशीलता (Adaptability) सही नजरिया (Right Mindset) AI और इंडस्ट्री पर जोर IIM जम्मू के चेयरमैन मिलिंद पी. कांबले ने कहा: भारत सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बनना चाहता बल्कि मजबूत उद्योग AI साक्षरता शिक्षा और राष्ट्रीय जरूरतों के बीच तालमेल पर भी फोकस कर रहा है  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
RBI bank holiday notice for 1 April 2026 showing which states banks are open or closed.
Bank Holiday 1 April 2026: नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन क्या बैंक खुले हैं या बंद? जानिए RBI की गाइडलाइन

1 अप्रैल 2026 से भारत में नया वित्तीय वर्ष FY 2026-27 शुरू हो चुका है। इस दिन को लेकर हर साल की तरह इस बार भी ग्राहकों के मन में सवाल है कि बैंक खुले हैं या बंद। Reserve Bank of India (RBI) की गाइडलाइन के अनुसार, 1 अप्रैल को देश के अधिकांश राज्यों में बैंक बंद रहते हैं, क्योंकि यह दिन “Annual Closing of Accounts” के लिए निर्धारित होता है। किन राज्यों में बैंक बंद और कहां खुले? इस बार भी अधिकतर राज्यों में बैंक शाखाएं बंद हैं। हालांकि, कुछ राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले हैं: मिजोरम सिक्किम नागालैंड झारखंड मेघालय हिमाचल प्रदेश इन राज्यों में ग्राहक बैंक जाकर सामान्य लेन-देन कर सकते हैं, जबकि बाकी राज्यों में शाखा सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी। क्या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं चलेंगी? भले ही बैंक शाखाएं बंद हों, लेकिन ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। ATM UPI मोबाइल बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग सभी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। हालांकि, चेक क्लियरेंस और कुछ बैंकिंग प्रोसेस में देरी हो सकती है। हर महीने कब-कब बंद रहते हैं बैंक? RBI के नियमों के मुताबिक: दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक खुले रहते हैं (यदि कोई विशेष अवकाश न हो) अप्रैल 2026 में अन्य प्रमुख बैंक छुट्टियां अप्रैल महीने में अलग-अलग राज्यों में कई त्योहारों और अवसरों पर बैंक बंद रहेंगे, जैसे: मौंडी थर्सडे गुड फ्राइडे डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती बैसाखी / बोहाग बिहू / तमिल न्यू ईयर अक्षय तृतीया 

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
25 साल में एक भी छुट्टी नहीं: कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने पीएम मोदी की कार्यशैली की खुलकर सराहना की

सिडनी सेमिनार में बोले – ‘पीएम मोदी बेहद समर्पित और अलग सोच वाले नेता’ कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की कार्यशैली और समर्पण की खुलकर प्रशंसा की है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित एक सेमिनार के दौरान कार्नी ने कहा कि मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सिडनी में Lowy Institute द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कार्नी ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से हुई अपनी मुलाकात के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मोदी का काम के प्रति समर्पण और ऊर्जा उन्हें दुनिया के अन्य नेताओं से अलग बनाती है। ‘मोदी बेहद मेहनती और लक्ष्य पर केंद्रित नेता’ कार्नी ने कहा कि चाहे वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल रहा हो या फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, मोदी लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कहा, “वह बेहद अलग तरह के नेता हैं। पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। सप्ताहांत पर भी वह अक्सर जनसभाओं में शामिल होते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग उनकी रैलियों में पहुंचते हैं।” UPI और वित्तीय सुधारों की भी सराहना कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था में हुए बदलावों की भी तारीफ की। उन्होंने विशेष रूप से Unified Payments Interface (UPI) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता पहुंचाने में मदद मिली है। कार्नी के अनुसार, मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की गड़बड़ी या रिसाव न हो। इस दिशा में डिजिटल भुगतान प्रणाली और वित्तीय सुधारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। भारत-कनाडा संबंधों में ‘नई शुरुआत’ कार्नी की हालिया भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देना था। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आई ठंडक के बाद अब सहयोग के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में तकनीक, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर कार्नी ने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि कनाडा की कंपनी Cameco ने भारत को दीर्घकालिक आधार पर यूरेनियम आपूर्ति करने के लिए समझौता किया है। इसके साथ ही दोनों देश रक्षा सहयोग समझौते को भी फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक संबंध कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्ते हैं। उनके अनुसार, कनाडा में लगभग 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं और हर साल हजारों लोग दोनों देशों के बीच यात्रा करते हैं। इन गहरे सामाजिक और आर्थिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0