US Military

Donald Trump announces joint US-Nigeria operation killing senior ISIS commander in Nigeria
नाइजीरिया में ISIS का बड़ा आतंकी ढेर, ट्रंप बोले- मेरे निर्देश पर चला ऑपरेशन

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि आतंकवादी संगठन Islamic State के वैश्विक स्तर के दूसरे सबसे बड़े कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को अमेरिकी और नाइजीरियाई सेनाओं के संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि यह मिशन उनके निर्देश पर बेहद गुप्त और जटिल तरीके से अंजाम दिया गया। ‘अफ्रीका में छिपने की कोशिश कर रहा था’ ट्रंप ने कहा कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी अफ्रीका में छिपकर ISIS के वैश्विक नेटवर्क को संचालित करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और लोकेशन को ट्रैक कर लिया। उन्होंने लिखा, “दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादियों में से एक को खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना और नाइजीरिया की सशस्त्र सेनाओं ने बेहद सटीक और कठिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।” ISIS के ग्लोबल ऑपरेशन को बड़ा झटका ट्रंप के अनुसार, अबू-बिलाल अल-मिनुकी ISIS के वैश्विक संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था और वह अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की साजिशों में भी शामिल था। उन्होंने कहा, “उसकी मौत के बाद ISIS के वैश्विक ऑपरेशन को बड़ा नुकसान पहुंचा है।” नाइजीरिया सरकार को दिया धन्यवाद ट्रंप ने इस अभियान में सहयोग के लिए Nigeria सरकार और वहां की सेना का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। लंबे समय से तलाश में था आतंकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबू-बिलाल अल-मिनुकी लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी में था। वह अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि वह ISIS के नेटवर्क को फिर से संगठित करने और नए हमलों की योजना बनाने में जुटा हुआ था। वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिका का बड़ा संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति के तहत एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। मध्य पूर्व और अफ्रीका में ISIS की गतिविधियों को लेकर हाल के महीनों में चिंता बढ़ी थी। ऐसे में इस कार्रवाई को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump speaking to media amid rising US-Iran tensions and military conflict debate
“ये अमेरिकी कायर हैं...”, ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, आलोचकों पर साधा निशाना

Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump warning Iran amid rising tensions over Hormuz Strait and global oil supply concerns
“धरती से मिटा देंगे…” डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र

Iran–US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा बयान देकर हालात को और गरमा दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे “धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्या है पूरा मामला? अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों को निशाना बनाया। ये जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड के “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत सुरक्षित मार्ग से गुजर रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि हमलों में एक दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज भी शामिल था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने सात छोटी नौकाओं को निशाना बनाने की कार्रवाई की बात कही है। ट्रंप का शक्ति प्रदर्शन ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास अत्याधुनिक हथियार, व्यापक सैन्य अड्डे और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “हम जरूरत पड़ने पर अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे।” साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया जैसे देशों से इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से यह मार्ग प्रभावी रूप से बाधित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत समेत कई देशों में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। तेल बाजार पर असर युद्ध से पहले जहां कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद रहता है, तो ऊर्जा संकट और गंभीर हो सकता है। शिपिंग कंपनियों को भी चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने शिपिंग कंपनियों को भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कंपनी ने होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया, तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईरान की ओर से जहाजों से टोल वसूलने की कोशिश को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीजफायर के बावजूद जारी टकराव हालांकि 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच सीमित सीजफायर लागू है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय बयानबाजी और रणनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि मध्य पूर्व में शांति अभी दूर है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। क्या बढ़ेगा खतरा? ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव आगे किस दिशा में जाता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
North Korea ballistic missile launch with cluster munition warhead amid rising tensions on Korean Peninsula.
उत्तर कोरिया का मिसाइल परीक्षण: क्लस्टर बम वारहेड्स से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता, सियोल सतर्क

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए इस सप्ताह कई नए हथियारों का परीक्षण किया है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ गया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, तीन दिनों तक चले इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ क्लस्टर-बम वारहेड्स, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, कथित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियार और कार्बन-फाइबर बमों का प्रदर्शन शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये परीक्षण सोमवार से शुरू हुए और गुरुवार को सार्वजनिक किए गए। इससे एक दिन पहले दक्षिण कोरिया की सेना ने पुष्टि की थी कि उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तटीय क्षेत्र से कई मिसाइलें दागी हैं। ये मिसाइलें 240 से 700 किलोमीटर तक की दूरी तय कर समुद्र में गिरीं। उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी KCNA ने दावा किया कि इन मिसाइलों में “क्लस्टर म्यूनिशन वारहेड” लगाए गए थे, जो 6.5 से 7 हेक्टेयर क्षेत्र को पूरी तरह तबाह करने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें Hwasong-11 श्रेणी की हैं, जिनकी डिजाइन रूस की इस्कंदर मिसाइलों से मिलती-जुलती बताई जाती है, और ये कम ऊंचाई पर उड़कर रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम हैं। हालांकि, दक्षिण कोरिया की सेना ने उत्तर कोरिया के इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं जापान और अमेरिका ने कहा कि इन परीक्षणों से फिलहाल उनके देशों या सहयोगियों को कोई सीधा खतरा नहीं है। इन घटनाओं ने उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच पहले से ही खराब रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को “सबसे शत्रुतापूर्ण देश” बताते हुए बातचीत की कोशिशों का मजाक उड़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु-सक्षम मिसाइल कार्यक्रम को लगातार मजबूत कर रहा है, खासकर 2019 में अमेरिका के साथ वार्ता विफल होने के बाद। इसके साथ ही, वह रूस और चीन जैसे देशों के साथ अपने संबंध भी मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। इसी बीच, चीन के विदेश मंत्री वांग यी के उत्तर कोरिया दौरे की भी खबर है, जिसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Donald Trump delivering a strong statement on Iran amid rising US military tensions in the Middle East.
ईरान पर सख्त रुख: ‘समझौता पूरा नहीं हुआ तो सेना तैनात रहेगी’ - डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान के साथ हुआ समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना ईरान के आसपास तैनात रहेगी। ट्रंप की सीधी चेतावनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य बल ईरान के भीतर और आसपास मौजूद रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौते का किसी भी तरह उल्लंघन होता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया “अब तक की सबसे बड़ी, मजबूत और घातक” होगी। परमाणु मुद्दे पर सख्त रुख ट्रंप ने दोहराया कि Iran को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह अमेरिका की नीति का प्रमुख हिस्सा है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा बयान ट्रंप ने यह भी कहा कि Strait of Hormuz पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसके बंद होने की आशंकाएं “फर्जी” हैं। ‘अमेरिका इज बैक’ - सैन्य तैयारी का संकेत अपने बयान के अंत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना लगातार खुद को और मजबूत कर रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने ‘America is back’ लिखते हुए यह संदेश दिया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक राजनीति और कूटनीति में और तेज़ी देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Drone attack at Kuwait airport causing fire as Middle East conflict escalates with US and Iran tensions
कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव; इराक में अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और व्यापक होता दिख रहा है। जंग के 26वें दिन मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। कुवैत में हाई अलर्ट, कई ड्रोन मार गिराए गए कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के मुताबिक, अगर लोगों को धमाके सुनाई दे रहे हैं तो वह एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई का नतीजा है। कुवैत नेशनल गार्ड ने भी पुष्टि की है कि उसने अपने क्षेत्र में कम से कम 5 ड्रोन मार गिराए हैं। नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है। इराक में अमेरिका के ठिकानों पर 23 हमलों का दावा वहीं, इराक के उग्रवादी संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जंग का मानवीय असर गहराया ईरान में जारी हमलों का असर बेहद गंभीर होता जा रहा है। अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत और 18,551 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग शामिल करीब 200 महिलाओं की मौत 28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की जान गई 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत लेबनान और इजराइल में भी हमले तेज दक्षिणी लेबनान में इजराइल की एयरस्ट्राइक में 9 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, हिजबुल्लाह ने इजराइल पर करीब 30 रॉकेट दागे, जिससे उत्तरी इलाकों में सायरन बजने लगे। अमेरिका की सैन्य तैयारी तेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 पैराट्रूपर्स भेजने का फैसला किया है। ये सैनिक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं, जो तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। इसे संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। कूटनीतिक हल की कोशिशें भी जारी इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हालात पर चिंता जताई और युद्ध खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा और व्यापार पर।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0