Mouni Roy और उनके पति Suraj Nambiar को लेकर सोशल मीडिया पर तलाक की अफवाहें तेज हो गई हैं। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने की खबरों ने फैंस को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mouni Roy और Suraj Nambiar ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया है। इतना ही नहीं, अभिनेत्री ने कथित तौर पर अपने प्रोफाइल से पति के साथ कई तस्वीरें और शादी की फोटोज भी हटा दी हैं। हालांकि अब तक दोनों की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चाएं दोनों की सोशल मीडिया एक्टिविटी सामने आने के बाद फैंस लगातार सवाल पूछ रहे हैं। कई यूजर्स ने Suraj Nambiar की पोस्ट पर कमेंट कर रिश्ते को लेकर चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा कि “हर परफेक्ट तस्वीर के पीछे एक इंसान होता है, जिसकी जिंदगी कैमरे से अलग होती है।” वहीं दूसरे यूजर ने सवाल किया कि क्या दोनों जल्द तलाक लेने वाले हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Disha Patani ने भी सूरज नांबियार को अनफॉलो कर दिया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फैंस पहले से लगा रहे थे कयास? कुछ हफ्ते पहले भी फैंस सोशल मीडिया पर पूछ रहे थे कि दोनों साथ में तस्वीरें क्यों पोस्ट नहीं कर रहे। ऐसे में अब इंस्टाग्राम अनफॉलो की खबरों ने अटकलों को और तेज कर दिया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों के बीच वास्तव में कोई परेशानी है या यह सिर्फ सोशल मीडिया गतिविधि तक सीमित मामला है। 2022 में हुई थी शादी Mouni Roy और Suraj Nambiar की पहली मुलाकात 2019 में दुबई में न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई थी। करीब तीन साल तक डेट करने के बाद दोनों ने 27 जनवरी 2022 को गोवा में शादी की थी। उनकी शादी मलयाली और बंगाली रीति-रिवाजों के मिश्रण के साथ काफी चर्चा में रही थी। Cannes 2026 में नजर आएंगी Mouni Roy वर्कफ्रंट की बात करें तो Mouni Roy जल्द ही Cannes Film Festival के रेड कार्पेट पर नजर आने वाली हैं। इसके अलावा वह Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai में दिखाई देंगी, जिसे David Dhawan डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में उनके साथ Varun Dhawan भी नजर आएंगे। इसके बाद अभिनेत्री The Wives में भी दिखाई देंगी, जिसका निर्देशन Madhur Bhandarkar कर रहे हैं।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता Varun Dhawan की अपकमिंग फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। फैंस जिस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उसकी रिलीज डेट में बदलाव किया गया है। पहले यह फिल्म 22 मई 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसे आगे बढ़ाकर 5 जून 2026 कर दिया है। IPL के बाद रिलीज का फैसला फिल्म की रिलीज डेट बदलने के पीछे एक बड़ा कारण Indian Premier League का सीजन माना जा रहा है। मेकर्स का मानना है कि IPL खत्म होने के बाद दर्शकों का फोकस फिल्मों की ओर ज्यादा रहेगा, जिससे बॉक्स ऑफिस पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। रोमांस और कॉमेडी का फुल डोज यह फिल्म एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें रोमांस, कॉमेडी और हल्का-फुल्का ड्रामा देखने को मिलेगा। Mrunal Thakur Pooja Hegde दोनों एक्ट्रेसेस फिल्म में Varun Dhawan के साथ लीड रोल में नजर आएंगी। इस तिकड़ी को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच काफी चर्चा है। David Dhawan की वापसी फिल्म का निर्देशन David Dhawan ने किया है, जो अपनी कॉमिक टाइमिंग और एंटरटेनिंग फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। लंबे समय बाद वह एक बार फिर दर्शकों के लिए फुल-ऑन कॉमेडी और फैमिली ड्रामा लेकर आ रहे हैं। क्या है खास प्रोडक्शन: Tips Films Limited को-प्रोडक्शन: Maximillian Films (UK) जॉनर: फैमिली एंटरटेनर फिल्म की रिलीज आगे बढ़ने से फैंस को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ेगा, लेकिन उम्मीद है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल मचाएगी।
हिंदी सिनेमा की चर्चित वॉर फ्रेंचाइजी ‘बॉर्डर’ अब अपने अगले अध्याय की ओर बढ़ रही है। Border 3 को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है कि फिल्म पर काम शुरू हो चुका है और इसे 2027 के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक बनाने की तैयारी की जा रही है। Sunny Deol एक बार फिर इस फ्रेंचाइजी का चेहरा बने रहेंगे, और उनकी देशभक्ति वाली छवि को इस बार और भी बड़े स्तर पर पेश करने की योजना है। वहीं, Varun Dhawan के साथ आई पिछली फिल्म Border 2 की सफलता ने इस फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाई दी है। फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर जबरदस्त सफलता हासिल की थी, जिससे मेकर्स का भरोसा और मजबूत हुआ है। सनी देओल की इमेज पर खास फोकस मेकर्स इस बार सनी देओल की ‘देशभक्त हीरो’ वाली छवि को और भव्य तरीके से पेश करने की तैयारी में हैं। Nidhi Dutta इस प्रोजेक्ट को लेकर खास रणनीति बना रही हैं और फिल्म की कहानी व लेखन में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। वॉर जोन से आगे, अब वायुसेना और फैंटेसी पर फोकस रिपोर्ट्स के अनुसार, जेपी फिल्म्स अब पारंपरिक वॉर जोन से आगे बढ़ते हुए भारतीय वायुसेना पर आधारित एक नई फिल्म भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही एक बड़े बजट की फैंटेसी एडवेंचर फ्रेंचाइजी पर भी काम चल रहा है, जो स्टूडियो के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सनी देओल के लिए नया दौर Gadar 2 की ऐतिहासिक सफलता के बाद सनी देओल का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। अब उनके पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स की लाइन है, जिनमें Ramayanam भी शामिल है, जहां वह ‘हनुमान’ के किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा Jaat 2 और Lahore 1947 जैसे प्रोजेक्ट्स भी चर्चा में हैं। जल्द होगी कास्टिंग की घोषणा फिल्म की शूटिंग देश के अलग-अलग हिस्सों में की जाएगी और उम्मीद है कि आने वाले महीनों में ‘बॉर्डर 3’ की आधिकारिक कास्टिंग और बाकी डिटेल्स का ऐलान कर दिया जाएगा।
बॉलीवुड अभिनेता Varun Dhawan और अभिनेत्री Mrunal Thakur की बहुप्रतीक्षित फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से चर्चा में बनी इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म का फर्स्ट लुक 13 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट में भी अहम बदलाव किया है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। फिल्म के फर्स्ट लुक में Varun Dhawan का एनर्जेटिक अंदाज और Mrunal Thakur की फ्रेश स्क्रीन प्रेजेंस देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर इस झलक को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। फिल्म का टोन हल्का-फुल्का, मनोरंजक और पूरी तरह फैमिली एंटरटेनमेंट वाला नजर आ रहा है। इस फिल्म की एक और बड़ी खासियत है कि इसका निर्देशन दिग्गज फिल्ममेकर David Dhawan ने किया है। इससे पहले Varun Dhawan और David Dhawan की जोड़ी ‘मैं तेरा हीरो’ और ‘जुड़वा 2’ जैसी सफल फिल्मों में साथ काम कर चुकी है। यह उनकी तीसरी फिल्म है, जिससे दर्शकों को एक बार फिर हिट कॉमेडी की उम्मीद है। फिल्म में Pooja Hegde और Mouni Roy भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे फिल्म का स्टार पावर और बढ़ गया है। रिलीज डेट में बदलाव पहले यह फिल्म 12 जून 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसे प्रीपोन कर दिया है। नई घोषणा के अनुसार, Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai अब 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यानी दर्शकों को अब इस फिल्म के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा। फर्स्ट लुक और रिलीज डेट में बदलाव के साथ ही फिल्म ने रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत चर्चा बना ली है। अब देखना होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है।
फिल्म धुरंधर 2 की सफलता ने कई कलाकारों के करियर को नई दिशा दी है, और उनमें सबसे चर्चित नाम है Rakesh Bedi का। ‘जमील जमाली’ के किरदार से दर्शकों का दिल जीतने वाले राकेश बेदी अब दो नए प्रोजेक्ट्स के साथ फिर से सुर्खियों में हैं। ‘धुरंधर 2’ से मिली नई पहचान निर्देशक Aditya Dhar की फिल्म धुरंधर 2 में राकेश बेदी ने पाकिस्तानी नेता ‘जमील जमाली’ का किरदार निभाया, जो फिल्म का अहम हिस्सा बना। फिल्म की सफलता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि असली मेहनत निर्देशक की होती है, जबकि कलाकार अपने हिस्से का काम निभाते हैं। किरदार के लिए की कड़ी मेहनत राकेश बेदी ने बताया कि हर किरदार के पीछे गहरी तैयारी होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे Virat Kohli का छक्का लगाना देखने में आसान लगता है, लेकिन असल में उसके पीछे कड़ी मेहनत होती है, वैसे ही हर रोल को निभाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। फिल्म में उनका किरदार Ranveer Singh के किरदार को सपोर्ट और बचाने वाला था, जो कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ‘धुरंधर 3’ नहीं बनेगी फैंस के लिए एक निराशाजनक खबर यह है कि राकेश बेदी ने साफ कर दिया है कि धुरंधर 3 पर फिलहाल कोई योजना नहीं है। यानी इस सफल फ्रेंचाइज़ी का अगला भाग फिलहाल नहीं आएगा। कॉमेडी से निगेटिव रोल तक का सफर कॉमेडी के लिए मशहूर राकेश बेदी ने इस फिल्म में एक अलग तरह का विलेन निभाया। उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक खलनायक नहीं था, बल्कि एक चालाक और संवादों से प्रभाव डालने वाला किरदार था। IIT छोड़कर बने अभिनेता अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि वह IIT करें, लेकिन खुद को उस दिशा में उपयुक्त न पाकर उन्होंने अभिनय को चुना। आज वही फैसला उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बन गया। आने वाले प्रोजेक्ट्स राकेश बेदी जल्द ही दो नए प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगे: Varun Dhawan की फिल्म है जवानी तो इश्क होना है प्राइम वीडियो पर आने वाली वेब सीरीज राख दोनों प्रोजेक्ट्स की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही रिलीज डेट का ऐलान हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।