Vimag Labs

Jnanpith awardee R. Vairamuthu speaking at a literary event in New Delhi, highlighting the need for wider translation of Tamil literature into Indian and global languages.
ज्ञानपीठ सम्मान के बाद वैरामुथु बोले- अनुवाद की कमी से दुनिया तक नहीं पहुंच पा रहा तमिल साहित्य

नई दिल्ली: 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तमिल के प्रख्यात साहित्यकार, गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु ने भारतीय भाषाओं, खासकर तमिल साहित्य की वैश्विक पहचान को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि तमिल साहित्य का समृद्ध खजाना अनुवाद की कमी के कारण दुनिया तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे कई महान रचनाकारों को उनका उचित सम्मान नहीं मिल पाता। पीटीआई के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह के बाद वैरामुथु ने कहा कि तमिल भाषा का विशाल साहित्य न तो पर्याप्त रूप से दूसरी भारतीय भाषाओं में अनुवादित हुआ है और न ही विदेशी भाषाओं में। इसी वजह से तमिल साहित्य की उत्कृष्ट कृतियां अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक नहीं पहुंच पाती हैं। चार दशक के साहित्यिक योगदान का मिला सम्मान आर. वैरामुथु को 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके चार दशक से अधिक लंबे साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उन्होंने कविता, उपन्यास, निबंध और फिल्मी गीतों के माध्यम से तमिल साहित्य को नई पहचान दिलाई है। साहित्य के साथ-साथ सिनेमा में भी उनके योगदान को व्यापक सराहना मिली है। 'कल्लिक्कट्टू एथिकासम' से मिली विशेष पहचान ज्ञानपीठ सम्मान के दौरान उनकी चर्चित कृति 'कल्लिक्कट्टू एथिकासम' (Kallikattu Ithikasam) का विशेष उल्लेख किया गया। यह उपन्यास ग्रामीण जीवन, विस्थापन और मानवीय संघर्ष की संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करता है। इसी कृति के लिए वैरामुथु को वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था। इसे आधुनिक तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में गिना जाता है। भारतीय भाषाओं के अनुवाद पर फिर शुरू हुई बहस वैरामुथु के बयान के बाद भारतीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लंबे समय से साहित्यकार यह मांग करते रहे हैं कि भारतीय भाषाओं की उत्कृष्ट रचनाओं का बड़े पैमाने पर अनुवाद किया जाए, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पाठकों तक पहुंच सकें। वैश्विक पहचान के लिए अनुवाद जरूरी वैरामुथु का मानना है कि यदि तमिल सहित सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य का व्यवस्थित और व्यापक अनुवाद किया जाए, तो भारतीय साहित्य को वैश्विक स्तर पर कहीं अधिक पहचान और सम्मान मिल सकता है। उनके अनुसार, भाषा नहीं बल्कि अनुवाद की कमी भारतीय साहित्य की अंतरराष्ट्रीय पहुंच में सबसे बड़ी बाधा है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Bengaluru startup Vimag Labs showcases a rare earth-free electric vehicle motor designed without permanent magnets for future EVs.
चीन की रेयर अर्थ पकड़ को चुनौती देगा भारत! बेंगलुरु के स्टार्टअप ने बनाया बिना मैग्नेट वाला EV मोटर

भारत का एक स्टार्टअप इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो भविष्य में चीन पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। बेंगलुरु स्थित Vimag Labs ने एक ऐसा इलेक्ट्रिक मोटर तैयार किया है, जिसमें रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets) की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनी का दावा है कि यह मोटर सॉफ्टवेयर की मदद से पारंपरिक मैग्नेट की तरह काम करता है और प्रदर्शन के मामले में मौजूदा तकनीक को कड़ी टक्कर दे सकता है। कोरोना काल की समस्या से जन्मा नया आइडिया Vimag Labs के सह-संस्थापक और CEO मनीष सेठ के अनुसार, वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान कंपनी के मोटर प्रोटोटाइप के लिए जरूरी मैग्नेट शंघाई पोर्ट पर कई महीनों तक फंसे रहे। इस अनुभव ने उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने की प्रेरणा दी, जिससे भविष्य में विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम की जा सके। इसके बाद कंपनी ने पूरी तरह मैग्नेट-फ्री और रेयर अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोटर विकसित करने पर काम शुरू किया। क्यों जरूरी हैं रेयर अर्थ मैग्नेट? आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस मोटरों में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) जैसे रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग किया जाता है। ये मोटर की ताकत, दक्षता, टॉर्क और बैटरी की रेंज बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इन मैग्नेट की सप्लाई पर चीन का दबदबा है। रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया के अधिकांश रेयर अर्थ मिनरल्स और उनसे बनने वाले मैग्नेट की सप्लाई चीन के नियंत्रण में है। ऐसे में किसी भी तरह की निर्यात पाबंदी या सप्लाई बाधित होने पर पूरी EV इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है। सॉफ्टवेयर से तैयार होता है 'वर्चुअल मैग्नेट' Vimag Labs की सबसे बड़ी खासियत इसकी Software-Defined Magnet तकनीक है। इस तकनीक में पारंपरिक स्थायी मैग्नेट की जगह कॉपर कॉइल और स्टील का उपयोग किया जाता है। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम के जरिए मोटर के अंदर आवश्यक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) तैयार किया जाता है। कंपनी का कहना है कि इस तकनीक से मोटर का प्रदर्शन पारंपरिक Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) के बराबर या कई परिस्थितियों में उससे बेहतर हो सकता है। बैटरी की बचत और बेहतर रेंज का दावा कंपनी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर के जरिए चुंबकीय क्षेत्र को लगातार नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मोटर अधिक दक्षता के साथ काम करता है और वाहन की बैटरी पर कम दबाव पड़ता है। इसका सीधा फायदा वाहन की ड्राइविंग रेंज बढ़ने और बैटरी की लागत कम होने के रूप में मिल सकता है। साथ ही, भविष्य में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए मोटर के प्रदर्शन में सुधार भी किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक मैग्नेट वाले मोटरों में ऐसा संभव नहीं होता। भारत में ही हो सकता है पूरा निर्माण इस मोटर के निर्माण में मुख्य रूप से कॉपर, स्टील और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसका उत्पादन पूरी तरह भारत में किया जा सकता है और रेयर अर्थ मैटेरियल पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। कंपनी का मानना है कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ इस तकनीक की लागत भी भविष्य में और कम होगी। कई कंपनियों के साथ चल रही है टेस्टिंग Vimag Labs फिलहाल इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर फोकस कर रही है। कंपनी ने कई प्रमुख वाहन निर्माताओं के साथ अपनी तकनीक की टेस्टिंग शुरू कर दी है। इसके अलावा, एक प्रमुख कमर्शियल थ्री-व्हीलर पावरट्रेन सप्लायर और भारत की अग्रणी यात्री वाहन कंपनियों के साथ भी तकनीकी सहयोग पर काम चल रहा है। कंपनी यूरोप के ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ भी इस तकनीक को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस साल हजारों मोटर सप्लाई करने की तैयारी कंपनी का लक्ष्य इस वर्ष अपने उत्पादन को बढ़ाकर 1,000 से 10,000 मोटर तक पहुंचाने का है। इसके लिए Vimag Labs निवेश जुटाने की तैयारी भी कर रही है। कंपनी इससे पहले लगभग 5 मिलियन डॉलर की Series A फंडिंग हासिल कर चुकी है। भविष्य की योजना में शामिल है अपना चिप Vimag Labs भविष्य में अपने मोटर के लिए विशेष Application-Specific Integrated Circuit (ASIC) विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। कंपनी का दावा है कि इससे मोटर के इलेक्ट्रॉनिक्स की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और वैश्विक चिप सप्लाई पर निर्भरता भी घटेगी। साथ ही कंपनी इलेक्ट्रिक ट्रक, बसों और रक्षा क्षेत्र में इस तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। भारत के लिए क्यों अहम है यह तकनीक? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में आयातित रेयर अर्थ मैग्नेट पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी, उत्पादन लागत घटेगी और देश की डीप-टेक एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री को नई गति मिल सकती है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0