Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।
आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।
अधिक मास के कारण इस बार खास है ज्येष्ठ महीना वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में अधिक मास पड़ने की वजह से दो ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग के चलते इस बार भक्तों को एक नहीं बल्कि चार प्रमुख एकादशी व्रत करने का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और इसी दौरान अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी के व्रत किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ माह में कब-कब पड़ेगी एकादशी? इस बार ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ मास के दौरान कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी शामिल हैं। अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026: दुर्लभ व्रत का महत्व पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। तिथि प्रारंभ: 26 मई सुबह 5:10 बजे तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 6:21 बजे पारण समय: सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। परमा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। तिथि प्रारंभ: 11 जून रात 12:57 बजे तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे पारण समय: सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक धर्म ग्रंथों में परमा एकादशी को मोक्षदायिनी और विशेष पुण्य देने वाली एकादशी बताया गया है। निर्जला एकादशी 2026: साल की सबसे कठिन एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को पड़ेगी। इसे सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है क्योंकि इस व्रत में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता। तिथि प्रारंभ: 24 जून शाम 6:12 बजे तिथि समाप्त: 25 जून रात 8:09 बजे पारण समय: 26 जून सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एकादशी व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में समय-समय पर आने वाले विशेष महीनों का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से खास महत्व होता है। इन्हीं में से एक है मलमास, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। साल 2026 में मलमास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है, जो 15 जून 2026 तक रहेगा। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की भक्ति और साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना जाता है। क्या होता है मलमास? हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता, तब उस अवधि को अधिक मास या मलमास कहा जाता है। यह समय खगोलीय संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह सांसारिक और भौतिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। क्यों रुक जाते हैं शुभ कार्य? मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को टालने की परंपरा है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल अपेक्षित नहीं मिलता और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए लोग इस पूरे महीने को धार्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए समर्पित करते हैं। मलमास में क्या करें? यह महीना भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दौरान: रोजाना विष्णु पूजा और व्रत करना शुभ होता है “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है दान-पुण्य, कथा श्रवण और भजन-कीर्तन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है विशेष योग बना रहे हैं मलमास को खास इस बार का अधिक मास और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दो गुरु पुष्य योग का संयोग बन रहा है। आमतौर पर एक महीने में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस बार दो बार यह शुभ योग बनना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद लाभकारी माना जा रहा है। दुर्लभ संयोग, अगली बार 2037 में ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ है। ऐसा योग अब 2037 में देखने को मिलेगा। इसलिए इस बार मलमास को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और हर महीने दो बार–कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष–में आता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। मई 2026 में दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ रहे हैं–अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी। आइए जानते हैं इनकी सही तिथि, शुभ समय और महत्व। मई 2026 की एकादशी तिथियां अपरा एकादशी (अचला एकादशी) तिथि: 13 मई 2026, बुधवार एकादशी प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 02:52 बजे एकादशी समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 01:30 बजे पारण (व्रत खोलने का समय): 14 मई, सूर्योदय के बाद अपरा एकादशी को “अचला एकादशी” भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। पद्मिनी एकादशी (कमला एकादशी) तिथि: 27 मई 2026, बुधवार एकादशी प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे पारण: 28 मई को शुभ मुहूर्त में पद्मिनी एकादशी को “कमला एकादशी” भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत का महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार: एकादशी का व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है पापों का नाश और पुण्य की वृद्धि होती है जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और कथा सुनना विशेष फलदायी माना जाता है। एकादशी व्रत के नियम व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से ही मानी जाती है सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित करें चावल का सेवन वर्जित होता है क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें द्वादशी तिथि में शुभ समय पर पारण करना जरूरी होता है ध्यान रखें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, लेकिन पूजा में पहले से रखे तुलसी दल का उपयोग किया जा सकता है। महत्वपूर्ण जानकारी पंचांग के अनुसार तिथियों में स्थान के हिसाब से थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारी से समय की पुष्टि कर लेना बेहतर होता है।
आज 1 मई, शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है, इसलिए इसे “माधव मास” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, दान और भगवान विष्णु के नामों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष फल मिलता है भगवान विष्णु की उपासना से सुख-समृद्धि बढ़ती है पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है कहा जाता है कि इस दिन किया गया जप और पुण्य कई गुना फल देता है। 108 नामों के जाप का महत्व भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मन को शांति मिलती है नकारात्मक विचार दूर होते हैं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि नाम-जप से भगवान नारायण शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान विष्णु के 108 पवित्र नाम नीचे भगवान विष्णु के 108 नाम दिए जा रहे हैं, जिनका जाप आज के दिन विशेष फलदायी माना गया है: ऊँ श्री विष्णवे नमः ऊँ श्री परमात्मने नमः ऊँ श्री विराट पुरुषाय नमः ऊँ श्री क्षेत्र-क्षेत्रज्ञाय नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नमः ऊँ श्री ईश्वराय नमः ऊँ श्री हृषीकेशाय नमः ऊँ श्री पद्मनाभाय नमः ऊँ श्री विश्वकर्मणे नमः ऊँ श्री कृष्णाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नमः ऊँ श्री सर्वेश्वराय नमः ऊँ श्री अच्युताय नमः ऊँ श्री वासुदेवाय नमः ऊँ श्री पुण्डरीकाक्षाय नमः ऊँ श्री नर-नारायणाय नमः ऊँ श्री जनार्दनाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री चतुर्भुजाय नमः ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री माधवाय नमः ऊँ श्री महाबलाय नमः ऊँ श्री गोविन्दाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री विश्वात्मने नमः ऊँ श्री सहस्राक्षाय नमः ऊँ श्री नारायणाय नमः ऊँ श्री सिद्धसंकल्पाय नमः ऊँ श्री महेन्द्राय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री अनन्तजिते नमः ऊँ श्री महीधराय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नमः ऊँ श्री दामोदराय नमः ऊँ श्री कमलापतये नमः ऊँ श्री परमेश्वराय नमः ऊँ श्री धनेश्वराय नमः ऊँ श्री मुकुन्दाय नमः ऊँ श्री आनन्दाय नमः ऊँ श्री सत्यधर्माय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री चक्रगदाधराय नमः ऊँ श्री भगवते नमः ऊँ श्री शान्तिदाय नमः ऊँ श्री गोपतये नमः ऊँ श्री श्रीपतये नमः ऊँ श्री श्रीहरये नमः ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नमः ऊँ श्री कपिलेश्वराय नमः ऊँ श्री वाराहाय नमः ऊँ श्री नरसिंहाय नमः ऊँ श्री रामाय नमः ऊँ श्री हयग्रीवाय नमः ऊँ श्री शोकनाशनाय नमः ऊँ श्री विशुद्धात्मने नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री धनंजयाय नमः ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः ऊँ श्री यदुश्रेष्ठाय नमः ऊँ श्री लोकनाथाय नमः ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नमः ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नमः ऊँ श्री एकपदे नमः ऊँ श्री सुलोचनाय नमः ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नमः ऊँ श्री सप्तवाहनाय नमः ऊँ श्री वंशवर्धनाय नमः ऊँ श्री योगिने नमः ऊँ श्री धनुर्धराय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री अक्रूराय नमः ऊँ श्री दुःस्वप्ननाशनाय नमः ऊँ श्री भूभवे नमः ऊँ श्री प्राणदाय नमः ऊँ श्री देवकीनन्दनाय नमः ऊँ श्री शंखभृते नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री कमलनयनाय नमः ऊँ श्री जगतगुरवे नमः ऊँ श्री सनातनाय नमः ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नमः ऊँ श्री द्वारकानाथाय नमः ऊँ श्री दानवेन्द्रविनाशकाय नमः ऊँ श्री दयानिधये नमः ऊँ श्री एकात्मने नमः ऊँ श्री शत्रुजिते नमः ऊँ श्री घनश्यामाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री जरामरणवर्जिताय नमः ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः ऊँ श्री विराटपुरुषाय नमः ऊँ श्री यशोदानन्दनाय नमः ऊँ श्री परमधार्मिकाय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री प्रभवे नमः ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताय नमः ऊँ श्री गगनसदृशाय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री हंसाय नमः ऊँ श्री व्यासाय नमः ऊँ श्री प्रकटाय नमः
हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी 2026 सही तारीख साल 2026 में मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल (सोमवार) को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि शुरू: 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे उदया तिथि (सूर्योदय के अनुसार) के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा मुहूर्त: सुबह 9:02 बजे से 10:40 बजे तक व्रत पारण (व्रत खोलने का समय) पारण तिथि: 28 अप्रैल 2026 समय: सुबह 5:43 बजे से 8:21 बजे तक पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप) सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा/तस्वीर स्थापित करें भगवान को स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं चंदन तिलक लगाएं, धूप-दीप जलाएं तुलसी दल, फल, नारियल, मिठाई अर्पित करें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें अंत में आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें क्या है धार्मिक मान्यता? मोहिनी एकादशी का संबंध उस कथा से है जब भगवान विष्णु ने “मोहिनी” रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों को भ्रमित किया। यह दिन बुराइयों, मोह और गलत संगति से मुक्ति पाने का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा का संदेश एक कथा के अनुसार, एक पापी युवक ने ऋषि के कहने पर यह व्रत किया और उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। इससे यह सीख मिलती है कि सही समय पर किया गया एक अच्छा कर्म इंसान की दिशा बदल सकता है। क्यों खास है यह व्रत? सहस्र गौदान के बराबर पुण्य पापों से मुक्ति बुद्धि और विवेक में वृद्धि जीवन की समस्याओं से छुटकारा जीवन के लिए सीख मोहिनी अवतार हमें सिखाता है कि केवल ताकत ही नहीं, बल्कि सही समय पर लिया गया समझदारी भरा निर्णय ही असली जीत दिलाता है। मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सही निर्णय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पर्व है।
हिंदू धर्म में Mohini Ekadashi का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान Vishnu को समर्पित होता है और इसे श्रद्धा व नियमों के साथ करने से पापों से मुक्ति और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। इसी घटना के कारण इस एकादशी को ‘मोहिनी एकादशी’ कहा जाता है। तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष मोहिनी एकादशी की तिथियां इस प्रकार हैं: एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026, शाम 06:06 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे व्रत (मुख्य दिन): 27 अप्रैल 2026 पारण (व्रत तोड़ने का समय): 28 अप्रैल 2026, सुबह 05:43 से 08:21 बजे के बीच पूजा विधि मोहिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, अधिमानतः पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, पंचामृत और धूप-दीप अर्पित करें। तुलसी दल भगवान को अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में इसे अवश्य शामिल करें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी पत्ते न तोड़ें-पहले से तोड़े हुए पत्तों का ही उपयोग करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें, व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें। इस दिन रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को मोह-माया के बंधनों से मुक्त करता है और जीवन के पापों का नाश करता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करने वाले भक्त को मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायक और श्रेष्ठ माना गया है। 3 अप्रैल 2026 से वैशाख मास की शुरुआत हो रही है, जिसे धार्मिक ग्रंथों में मोक्ष प्रदान करने वाला और पापों का नाश करने वाला महीना बताया गया है। शास्त्रों, विशेषकर नारद पुराण और स्कंद पुराण में वैशाख मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार, जिस प्रकार वेदों का स्थान सर्वोच्च है, उसी तरह सभी महीनों में वैशाख का स्थान श्रेष्ठ माना गया है। माधव मास: नाम में ही छिपी है महिमा वैशाख मास को ‘माधव मास’ भी कहा जाता है। ‘माधव’ भगवान विष्णु का एक प्रमुख नाम है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस महीने में नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। वैशाख में हुए भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार इस पावन महीने में भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतार प्रकट हुए, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है- परशुराम अवतार: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को भगवान परशुराम का जन्म हुआ। नृसिंह अवतार: वैशाख चतुर्दशी को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान ने नृसिंह रूप धारण किया। कूर्म अवतार: समुद्र मंथन के दौरान भगवान ने कछुए का रूप लेकर मंदराचल पर्वत को सहारा दिया। इन दिव्य घटनाओं के कारण वैशाख मास को विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत पावन और उत्सवमय माना जाता है। दान-पुण्य और सेवा का विशेष महत्व वैशाख मास केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक कल्याण और सेवा का भी महीना है। गर्मी के इस समय में प्यासे लोगों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना, पेड़ लगाना, सत्तू और पंखे का दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में किया गया दान सीधे भगवान विष्णु की सेवा के समान फल देता है। शास्त्रों का संदेश नारद पुराण में कहा गया है- “न वैशाख समो मासो, न सत्येन समं तपः” अर्थात् वैशाख के समान कोई महीना नहीं है और सत्य के समान कोई तप नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।