रांची: झारखंड में मौसम ने एक बार फिर तेज़ी से करवट ली है। शुक्रवार सुबह कई इलाकों में घनी धुंध देखने को मिली, जिससे दृश्यता प्रभावित रही, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही तापमान में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब India Meteorological Department ने राज्य के कई जिलों में 19 से 21 अप्रैल के बीच लू चलने की चेतावनी जारी की है। सुबह धुंध, दिन में तपिश मौसम विभाग के अनुसार, हवा की रफ्तार कम और नमी ज्यादा रहने के कारण सुबह के समय धुंध छाई रही। हालांकि जैसे ही धूप निकली, तापमान तेजी से बढ़ने लगा। अनुमान है कि 18 अप्रैल को तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है। बारिश और तेज हवाओं का भी अलर्ट Ranchi समेत कई जिलों में दोपहर बाद मौसम अचानक बदल सकता है। विभाग ने तेज हवा, मेघ गर्जन, हल्की बारिश और वज्रपात की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। 19–21 अप्रैल: कई जिलों में लू का खतरा राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जैसे जिलों में 19 से 21 अप्रैल के बीच लू चलने की संभावना है। इन इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ेगा। प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की अपील की है। कुहासे से हवाई सेवाएं प्रभावित धुंध का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा। IndiGo की रांची-बेंगलुरु फ्लाइट को कोलकाता डायवर्ट करना पड़ा। वहीं कई अन्य उड़ानों में देरी देखी गई, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
Bihar में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और राज्य इस समय दो अलग-अलग मौसमीय परिस्थितियों का सामना कर रहा है। अगले 48 घंटे लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आएंगे, जबकि 19 अप्रैल से भीषण गर्मी का दौर शुरू होने की चेतावनी दी गई है। सीमांचल में बारिश और आंधी से राहत मौसम विभाग के अनुसार सीमांचल क्षेत्र–अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया–में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में बादल और बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। दक्षिण बिहार में बढ़ता तापमान दूसरी ओर दक्षिणी जिलों–रोहतास, भभुआ (कैमूर) और औरंगाबाद–में पछुआ हवाओं के कारण तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। शुष्क हवाओं ने गर्मी को और तीखा बना दिया है, जिससे दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। 19 अप्रैल से लू का कहर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 18 अप्रैल से ही कई जिलों में लू की शुरुआत हो सकती है, जो 19 अप्रैल से और तेज हो जाएगी। रेड अलर्ट वाले प्रमुख जिले: बक्सर रोहतास कैमूर भोजपुर औरंगाबाद गया पटना इन क्षेत्रों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है। पूरवा बनाम पछुआ हवा का असर इस समय बिहार में पूरवा (पूर्वी) और पछुआ (पश्चिमी) हवाओं के बीच खींचतान जारी है। जहां पूरवा हवा चल रही है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम है, जबकि पछुआ हवा वाले इलाकों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मौसम देखने को मिल रहा है। क्या रखें सावधानियां आने वाले दिनों में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है– दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें धूप में निकलते समय सिर और शरीर को ढककर रखें
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही तीव्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कई क्षेत्रों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। महाराष्ट्र के कई जिलों में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने लू का अलर्ट जारी किया है। विदर्भ का अकोला लगभग 44 डिग्री तापमान के साथ दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल हो गया है। नागपुर, अमरावती और वर्धा में भी बढ़ी मुश्किलें महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती और वर्धा जैसे शहरों में भी भीषण गर्मी का असर देखा जा रहा है। ये शहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों की सूची में टॉप 10 में जगह बना चुके हैं। लगातार बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों को दिनचर्या में बदलाव करना पड़ रहा है। 2026 में सामान्य से अधिक गर्मी की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। मार्च से मई के बीच हीटवेव की तीव्रता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो कुछ इलाकों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। भारत के 20 शहर दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शामिल हाल के तापमान आंकड़ों में दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में भारत के लगभग 20 शहर शामिल हैं। चंद्रपुर, रायपुर, भिलाई, वाराणसी और सासाराम जैसे शहरों में भी 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान दर्ज किया गया है। यह स्थिति देश में बढ़ती गर्मी की गंभीरता को दर्शाती है। हीटवेव को लेकर सतर्क रहने की सलाह मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में हीटवेव के और तेज होने की चेतावनी दी है। उन्होंने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सावधानी नहीं बरती गई तो यह गर्मी का दौर और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
बिहार में इन दिनों तेज गर्मी लोगों को परेशान कर रही है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग के अनुसार रविवार (5 अप्रैल) तक राज्य में तापमान में खास बदलाव नहीं होगा और दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि 6 अप्रैल से मौसम अचानक करवट ले सकता है। रविवार तक जारी रहेगी गर्मी बिहार के अधिकांश हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर रहने की संभावना है। दिन में तेज धूप और कुछ इलाकों में हल्की धूल भरी हवा चल सकती है, जिससे गर्मी का असर और बढ़ेगा। 6 अप्रैल को मौसम का यू-टर्न भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 6 अप्रैल से राज्य में मौसम अचानक बदल सकता है। इस दिन कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। ऑरेंज अलर्ट वाले जिले बक्सर, भोजपुर, अरवल, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां मौसम का असर अधिक गंभीर हो सकता है। येलो अलर्ट वाले जिले पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, पटना, बेगूसराय, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, गया और नवादा में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। मौसम का यह असर 6 अप्रैल के बाद भी 3–4 दिनों तक जारी रह सकता है। पिछले 24 घंटे का मौसम हाल राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान मौसम सामान्य रूप से शुष्क रहा, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 38.4°C डेहरी (रोहतास), शेखपुरा और कैमूर में दर्ज न्यूनतम तापमान 18.4°C सुखेत (मधुबनी) में रिकॉर्ड राज्य का तापमान 30.3°C से 38.4°C के बीच रहा अधिकांश जगहों पर अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री तक की बढ़ोतरी देखी गई। भूजल स्तर में गिरावट बढ़ी चिंता तेज गर्मी का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर जल स्तर पर भी दिखने लगा है। राज्य के करीब 21 जिलों में भूजल स्तर नीचे जाने लगा है। करीब 126 पंचायतों में 2 से 5 फीट तक गिरावट दर्ज की गई है। पटना, बिहारशरीफ, गया, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, भभुआ, जमुई, भागलपुर, बांका, सीतामढ़ी, दरभंगा, भोजपुर, गोपालगंज, मधुबनी, सहरसा, जहानाबाद, शेखपुरा, लखीसराय, खगड़िया और समस्तीपुर जैसे जिलों में स्थिति पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए 11 अप्रैल को पटना में भूजल संरक्षण को लेकर अहम बैठक बुलाई गई है।
झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार शाम को रांची और कोडरमा समेत कई इलाकों में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश हुई, जिससे गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत मिली। हालांकि, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए सतर्क रहने की चेतावनी दी है। 4 से 6 अप्रैल तक येलो अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक झारखंड में बारिश और खराब मौसम को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान राज्य के कई जिलों में तेज हवाएं, गरज के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है। इन 13 जिलों में विशेष चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को जिन जिलों में मौसम ज्यादा प्रभावित रह सकता है, उनमें शामिल हैं: पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद। इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। रविवार और सोमवार को और बढ़ेगा असर मौसम विभाग का अनुमान है कि रविवार और सोमवार को मौसम का असर और तेज हो सकता है। इस दौरान हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। अप्रैल में गर्मी का रिकॉर्ड टूटने के संकेत हालांकि अभी बारिश से थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अप्रैल के दूसरे और तीसरे सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ सकता है। वर्ष 2016 में 42 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बना था, जो इस बार टूटने की संभावना जताई जा रही है। महीने के अंत तक हीट वेव जैसी स्थिति भी बन सकती है। तापमान और बारिश का ताजा अपडेट पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई। रामगढ़ में सबसे ज्यादा 5 मिमी बारिश हुई सरायकेला में अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री दर्ज किया गया गुमला में न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया
देशभर में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील रह सकते हैं। दिल्ली, यूपी, बिहार समेत करीब 15 राज्यों में आंधी-तूफान, तेज बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। क्यों बदला मौसम? IMD के मुताबिक, लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और कई चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) इनकी वजह से पूरे देश में मौसम अस्थिर हो गया है, जिससे बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन राज्यों में ज्यादा खतरा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल (रेड अलर्ट), पूर्वोत्तर राज्य दक्षिण भारत के कई हिस्से (केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु) पश्चिम बंगाल के पश्चिम व पूर्व मिदनापुर में रेड अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-NCR का हाल दिन में हल्की बारिश या बूंदाबांदी शाम को गरज-चमक के साथ तेज हवाएं हवा की रफ्तार: 20–30 किमी/घंटा, झोंकों में 40 किमी/घंटा तापमान में 2–3°C तक गिरावट संभव यूपी-बिहार में उग्र मौसम UP: 30–50 किमी/घंटा की तेज हवाएं, बारिश और बिजली गिरने का खतरा बिहार: 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी (थंडरस्क्वॉल) झारखंड: तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना पहाड़ी इलाकों में असर उत्तराखंड: बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी कुछ जगहों पर ओलावृष्टि, फसलों को नुकसान की आशंका आगे कैसा रहेगा मौसम? 3–5 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है कई राज्यों में फिर से बारिश और तूफान की संभावना तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव रहेगा लोगों के लिए जरूरी सलाह आंधी-तूफान के दौरान खुले में न रहें बिजली गिरने से बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर जाएं अनावश्यक यात्रा से बचें किसान फसलों की सुरक्षा के इंतजाम करें
उत्तर भारत में मार्च के आखिर में अचानक बदले मौसम ने सभी को हैरान कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में लगातार बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि ने भीषण गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन इसके पीछे का कारण असामान्य और दुर्लभ माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार एक बेहद खास और लंबा सिस्टम सक्रिय हुआ है, जिसने अफगानिस्तान से लेकर भारत तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी बादलों की सीधी पट्टी बना दी है। क्या है इस अचानक बदलाव की वजह? इस मौसम परिवर्तन की मुख्य वजह एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है, जो इस समय उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है। यह ऊपरी हवा में बनने वाला चक्रवाती सिस्टम है, जो बारिश, तेज हवाएं और ठंडक लेकर आता है। इसकी वजह से 40 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, कई जगहों पर ओले गिरे हैं और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी भी हुई है। क्यों खास है इस बार का सिस्टम? आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों (दिसंबर से फरवरी) तक सीमित रहते हैं। लेकिन इस बार का सिस्टम कई मायनों में अलग है- यह एक सीधी ट्रफ (रेखा) के रूप में फैला है करीब 1000 किमी लंबा है मार्च के अंत में भी बेहद सक्रिय है सामान्यतः इस समय तक जेट स्ट्रीम कमजोर होकर उत्तर की ओर खिसक जाती है, जिससे ऐसे सिस्टम दुर्लभ हो जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कहां से मिल रही है इतनी नमी? इस शक्तिशाली सिस्टम को नमी कई समुद्री स्रोतों से मिल रही है- भूमध्य सागर कैस्पियन सागर काला सागर फारस की खाड़ी और अरब सागर इन सभी स्रोतों से आई नमी ने इस सिस्टम को और मजबूत बना दिया है, जिससे व्यापक बारिश हो रही है। दिल्ली में टूटा 3 साल का रिकॉर्ड दिल्ली में मार्च महीने में हुई इस बारिश ने पिछले तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। तापमान में करीब 7 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मौसम ठंडा हो गया है। क्या यह ‘न्यू नॉर्मल’ बन रहा है? मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग और जेट स्ट्रीम के व्यवहार में बदलाव के कारण अब पश्चिमी विक्षोभ का असर पहले से ज्यादा लंबे समय तक देखने को मिल रहा है। जो सिस्टम पहले फरवरी तक खत्म हो जाते थे, वे अब मार्च और अप्रैल तक सक्रिय रह रहे हैं। आगे क्या रहेगा मौसम का हाल मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद एक और हल्का पश्चिमी विक्षोभ 22 मार्च के आसपास दस्तक दे सकता है।
झारखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में शनिवार से मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी झारखंड के इलाकों में मेघ गर्जन के साथ हल्की बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई गई है। स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने 9 और 10 मार्च के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर झारखंड के मौसम पर पड़ रहा है। इसके प्रभाव से कई जिलों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शनिवार को Ranchi सहित पूर्वी जिलों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 9 मार्च को उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड के कई इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिलेगा। 10 मार्च को भी कई स्थानों पर इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना है। तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार 9 और 10 मार्च को राज्य के कई हिस्सों में तेज हवा चल सकती है और कुछ जगहों पर वज्रपात भी हो सकता है। इसे देखते हुए लोगों को खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। खासकर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। रांची में भी बारिश की संभावना राजधानी Ranchi में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। शनिवार को दिनभर आसमान में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश का एक दौर देखने को मिल सकता है। रविवार को भी ऐसे ही हालात बने रहने की संभावना है। हालांकि इस बारिश से तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं होगी। तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद अगले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य के कई जिलों में तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। Deoghar, Dhanbad, Dumka और Jamtara में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं Godda और Pakur में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिमी झारखंड के Chatra, Garhwa और Palamu में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं दक्षिणी झारखंड के East Singhbhum और Seraikela-Kharsawan में भी तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।