वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान नीति के मोर्चे पर बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की शक्तियों पर कांग्रेस का नियंत्रण बढ़ाना था। मतदान के दौरान दो रिपब्लिकन सीनेटरों के अंतिम समय में रुख बदलने से ट्रंप प्रशासन को राहत मिल गई। प्रस्ताव के रुकने के बाद ट्रंप ने इसे ईरान के लिए "कड़ा संदेश" बताया और अपने सहयोगी सांसदों का धन्यवाद किया। ट्रंप ने जताई खुशी, बोले- ईरान के लिए चेतावनी सीनेट में मतदान के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "वाह! सीनेट ने ईरान पर अपना वोट बदल दिया। रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने अपना रुख बदला। नेता जॉन थ्यून, लिंडसे ग्राहम, बर्नी मोरेनो और सभी का धन्यवाद। यह वोट ईरान के लिए एक चेतावनी है।" ट्रंप का कहना है कि राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव अमेरिका की कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता था। राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश नाकाम सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक हो। सीनेट ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इस तरह राष्ट्रपति की मौजूदा युद्ध शक्तियों को सीमित करने की कोशिश फिलहाल विफल हो गई। दो रिपब्लिकन सांसदों ने बदला फैसला इस मतदान का सबसे बड़ा मोड़ दो रिपब्लिकन सांसदों के रुख बदलने से आया। सीनेटर रैंड पॉल ने इस बार 'प्रेजेंट' वोट किया, यानी उन्होंने पक्ष या विपक्ष में मतदान नहीं किया। सीनेटर बिल कैसिडी ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के खिलाफ मतदान किया। अंतिम मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका और परिणाम 47-50-1 रहा। रैंड पॉल बोले- शांति वार्ता के लिए दिया राष्ट्रपति को मौका मतदान से पहले रैंड पॉल ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी युद्ध शक्तियों को लेकर राय नहीं बदली है। उन्होंने लिखा कि उनका 'प्रेजेंट' वोट राष्ट्रपति को स्थायी शांति के लिए बातचीत करने की अधिक गुंजाइश देने के उद्देश्य से है। बिल कैसिडी ने पहले उठाए सवाल, फिर बदला रुख सीनेटर बिल कैसिडी ने पहले ट्रंप प्रशासन से ईरान संघर्ष को लेकर कई सवाल पूछे थे। उनका कहना था कि सांसदों और जनता को युद्ध की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। बाद में उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी, जिससे उनकी कई चिंताएं दूर हो गईं। इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। कुछ रिपब्लिकन ने किया समर्थन, डेमोक्रेट में भी दिखी अलग राय रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स और लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव का विरोध किया। इससे साफ हुआ कि ईरान नीति को लेकर मतभेद केवल पार्टी लाइनों तक सीमित नहीं हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों पर बहस जारी अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों का तर्क है कि यदि कोई फैसला अमेरिका को बड़े सैन्य संघर्ष की ओर ले जा सकता है, तो उसमें कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए। वहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय राष्ट्रपति के पास त्वरित निर्णय लेने की पर्याप्त संवैधानिक शक्तियां बनी रहनी चाहिए। ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच सीनेट का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
दुनिया के सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली विमानों में शुमार अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रतिष्ठित विमान SAM 29000 (बोइंग VC-25A) अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। करीब 35 वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सेवा करने के बाद इस दिग्गज विमान को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया गया है। जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति इस विमान में सवार होते थे, तब इसका कॉल साइन ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) हो जाता था। तीन दशकों से अधिक समय तक यह विमान अमेरिकी शक्ति, कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपतियों के हवाई सफर में नए युग की शुरुआत SAM 29000 की विदाई के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई सफर में एक नए और अत्याधुनिक दौर की शुरुआत होने जा रही है। इस विमान की जगह अब विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया Boeing 747-8 लेने जा रहा है, जिसे सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं के लिहाज से कहीं अधिक आधुनिक माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नया विमान इसी वर्ष राष्ट्रपति के बेड़े में शामिल होकर अपनी सेवाएं शुरू कर सकता है। 35 वर्षों तक अमेरिकी ताकत का प्रतीक रहा ‘एयर फोर्स वन’ SAM 29000 सिर्फ एक विमान नहीं था, बल्कि अमेरिकी शक्ति और वैश्विक प्रभाव का चलता-फिरता प्रतीक था। इस विमान ने दुनिया की कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों, अंतरराष्ट्रीय संकटों और ऐतिहासिक समझौतों का मूक गवाह बनकर अपनी भूमिका निभाई। यह विमान राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर बन जाता था, जिसमें अत्याधुनिक संचार प्रणाली, सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन संचालन की सुविधाएं मौजूद थीं। कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों का बना हमसफर इस प्रतिष्ठित विमान ने अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों को दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं पर सुरक्षित पहुंचाया। इनमें शामिल हैं: George H. W. Bush Bill Clinton George W. Bush Barack Obama Donald Trump Joe Biden इन राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में यह विमान कई वैश्विक संकटों, शांति वार्ताओं और ऐतिहासिक समझौतों का हिस्सा रहा। अब कौन संभालेगा कमान? SAM 29000 के रिटायर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया नया बोइंग 747-8 विमान उसकी जगह लेगा। अधिकारियों का दावा है कि नया विमान सुरक्षा, संचार, रक्षा प्रणाली और परिचालन क्षमताओं के मामले में अपने पूर्ववर्ती विमान से कई गुना अधिक उन्नत होगा। नए विमान में अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा, मिसाइल-रोधी तकनीक, सुरक्षित संचार नेटवर्क और लंबी दूरी की परिचालन क्षमता जैसी सुविधाएं होंगी। एक युग का अंत करीब साढ़े तीन दशक तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सुरक्षित आसमान की सैर कराने वाला SAM 29000 अब हमेशा के लिए सेवा से बाहर हो गया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया है और तकनीक तथा सुरक्षा के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। ‘एयर फोर्स वन’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह विमान आने वाले वर्षों में अमेरिकी इतिहास और राष्ट्रपतिीय कूटनीति के सबसे प्रतिष्ठित प्रतीकों में गिना जाएगा।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना जन्मदिन इस बार बेहद अनोखे अंदाज में मनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के साउथ लॉन को एक विशाल UFC फाइटिंग एरिना में तब्दील कर दिया गया, जहां अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) के कई मुकाबले आयोजित किए गए। इस दौरान ट्रंप फ्रंट रो में बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते नजर आए। बताया जा रहा है कि बारिश के कारण कार्यक्रम की शुरुआत में थोड़ी देरी हुई, लेकिन इसके बाद फाइटिंग केज के अंदर जोरदार मुकाबले देखने को मिले। 92 फीट ऊंचे ‘द क्लॉ’ नामक फाइटिंग केज में दुनिया के कई फाइटर्स ने हिस्सा लिया। एयर शो से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत अमेरिकी वायुसेना के विशेष फ्लाईपास्ट से हुई। इस दौरान छह एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट और छह एफ-16 फाइटिंग फाल्कन विमानों ने ‘सुपर डेल्टा फॉर्मेशन’ में उड़ान भरी। फ्लाईपास्ट के दौरान ट्रंप सैल्यूट करते नजर आए। इसके बाद संगीत की धुनों के बीच ट्रंप व्हाइट हाउस से निकलकर फाइटिंग एरिना तक पहुंचे और मुकाबलों का सिलसिला शुरू हुआ। ट्रंप परिवार और प्रशासन के वरिष्ठ सदस्य रहे मौजूद मुकाबलों के दौरान डोनाल्ड ट्रंप UFC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाना व्हाइट और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के साथ पहली पंक्ति में बैठे दिखाई दिए। उनके दोनों बेटे भी कार्यक्रम में मौजूद थे। इस आयोजन में ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए, जिनमें स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर, काश पटेल और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के नाम प्रमुख हैं। जन्मदिन समारोह या MAGA शक्ति प्रदर्शन? ट्रंप ने इस आयोजन को अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ समारोह का हिस्सा बताया, लेकिन कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों का उत्साह इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी पेश करता दिखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान समर्थक ‘यूएसए, यूएसए’ के नारे लगाते रहे। ब्रिटिश हेवीवेट मुक्केबाज टायसन फ्यूरी भी कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने ‘Donald Trump for Prime Minister’ लिखी टोपी पहन रखी थी, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। शुरुआती मुकाबलों में किसने जीता? शुरुआती मुकाबलों में ट्रंप के करीबी माने जाने वाले बो निकल (Bo Nickal) ने काइल डौकाउस (Kyle Daukaus) को हराया। वहीं डिएगो लोपेस (Diego Lopes) ने स्टीव गार्सिया (Steve Garcia) के खिलाफ जीत दर्ज की। रिपोर्ट लिखे जाने तक कई अन्य मुकाबले भी जारी थे और दुनिया भर के फाइटर्स इस आयोजन का हिस्सा बने हुए थे। UFC और ट्रंप की राजनीति का पुराना रिश्ता UFC लंबे समय से ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) समर्थक वर्ग के बीच लोकप्रिय रहा है। मशहूर पॉडकास्टर जो रोगन समेत UFC से जुड़े कई प्रभावशाली चेहरे ट्रंप के समर्थकों में गिने जाते हैं। यही वजह है कि इस आयोजन को खेल के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्या व्हाइट हाउस में स्थायी होगा UFC केज? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह शायद ‘द क्लॉ’ फाइटिंग केज को कभी हटाना नहीं चाहेंगे और इसे व्हाइट हाउस परिसर का स्थायी हिस्सा भी बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह व्हाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन के दौरान किए गए बड़े बदलावों की सूची में एक और अनोखा अध्याय जोड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने अभियान को नया रूप देते हुए एक अनोखी वेबसाइट लॉन्च की है। 'Aliens.gov' नाम की इस वेबसाइट को अंतरिक्ष और एलियन थीम पर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे प्रवासियों से जुड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना है। साइंस-फिक्शन जैसी थीम ने खींचा ध्यान गुरुवार को शुरू की गई इस वेबसाइट का डिज़ाइन किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा दिखाई देता है। वेबसाइट पर तारों और आकाशगंगाओं की पृष्ठभूमि के साथ नियॉन-हरे रंग के अक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। साइट खोलते ही एक संदेश दिखाई देता है— "They are among us" (वे हमारे बीच घूम रहे हैं)। यह संदेश उन अवैध प्रवासियों की ओर संकेत करता है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन लंबे समय से कानूनी शब्दावली में "एलियंस" कहकर संबोधित करता रहा है। गिरफ्तारियों को दिखाने के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म 'Aliens.gov' को अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) की कार्रवाई को प्रदर्शित करने के लिए विकसित किया गया है। वेबसाइट पर दावा किया गया है कि वर्षों से ऐसे लोग अमेरिका में रह रहे थे जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी और अब प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। साइट पर एक लाइव काउंटर भी लगाया गया है, जिसमें प्रवासियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई से जुड़े आंकड़े प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इंटरैक्टिव मैप से देखी जा सकती है गिरफ्तारी की जानकारी वेबसाइट की सबसे प्रमुख विशेषताओं में एक इंटरैक्टिव डिजिटल मैप शामिल है। इसके जरिए उपयोगकर्ता अमेरिका के किसी भी राज्य या शहर में हुई आव्रजन कार्रवाई की जानकारी देख सकते हैं। मैप पर उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार व्यक्ति का मूल देश, उस पर लगे आरोप और कथित आपराधिक रिकॉर्ड जैसी जानकारियां भी शामिल की गई हैं। इसके अलावा वेबसाइट पर एक रिपोर्टिंग फॉर्म भी दिया गया है, जहां नागरिक संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जानकारी साझा कर सकते हैं। पहले UFO से जुड़ी अटकलें लगी थीं इस वेबसाइट के लॉन्च से पहले व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टीजर वीडियो साझा किया था। वीडियो में खेतों में बने रहस्यमयी निशानों और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लोगों ने अनुमान लगाया कि सरकार UFO या दूसरे ग्रहों के जीवों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने वाली है। बाद में स्पष्ट हो गया कि यह अभियान अवैध प्रवासियों पर केंद्रित था और वेबसाइट का एलियंस से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। मानवाधिकार संगठनों ने जताई आपत्ति वेबसाइट लॉन्च होने के बाद कई मानवाधिकार और प्रवासी अधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि वेबसाइट पर इस्तेमाल की गई भाषा प्रवासियों को इंसानों की बजाय "एलियन" के रूप में पेश करती है, जिससे समाज में उनके प्रति नकारात्मक धारणा और भेदभाव बढ़ सकता है। आलोचकों का यह भी कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति प्रवासियों को अमानवीय रूप में दिखाती है और सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे सकती है। ट्रंप प्रशासन अपने फैसले पर कायम विवादों के बावजूद ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेबसाइट का उद्देश्य आव्रजन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराना है। प्रशासन का दावा है कि सीमाओं की सुरक्षा और अवैध प्रवास पर नियंत्रण उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इस बीच, अमेरिका के कई शहरों में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और निर्वासन अभियानों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं, लेकिन प्रशासन फिलहाल अपने सख्त आव्रजन रुख पर कायम नजर आ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ताजा मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और राष्ट्रपति के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने, नियमित व्यायाम करने और खान-पान में सुधार करने की सलाह भी दी है। व्हाइट हाउस ने जारी की मेडिकल रिपोर्ट व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (29 मई) को राष्ट्रपति की वार्षिक स्वास्थ्य जांच से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट जारी की। राष्ट्रपति के चिकित्सक Sean Barbabella ने एक आधिकारिक मेमो में ट्रंप की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सामान्य पाई गई है। डॉक्टरों ने उनकी मानसिक क्षमता और संज्ञानात्मक स्थिति को भी संतोषजनक बताया है। राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह फिट मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ट्रंप राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी उम्र को देखते हुए स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है और किसी गंभीर बीमारी या ऐसी समस्या के संकेत नहीं मिले हैं जो उनके सार्वजनिक दायित्वों को प्रभावित कर सके। वजन घटाने की सलाह रिपोर्ट में उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को सकारात्मक बताया गया है, लेकिन डॉक्टरों ने ट्रंप को वजन नियंत्रित करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र में वजन कम करने से हृदय संबंधी जोखिम घट सकते हैं और शारीरिक क्षमता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसी वजह से उन्हें नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने की सिफारिश की गई है। खान-पान और जीवनशैली में सुधार की जरूरत मेडिकल टीम ने ट्रंप को अपनी डाइट में सुधार करने और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से उनकी फिटनेस और बेहतर हो सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और सक्रिय दिनचर्या उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगी। 14 जून को 80 वर्ष के होंगे ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप 14 जून को 80 वर्ष के हो जाएंगे। उनकी उम्र को लेकर अक्सर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस होती रही है, खासकर तब जब वे अमेरिका के सबसे वरिष्ठ उम्र वाले नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस की ओर से जारी यह मेडिकल रिपोर्ट उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मानी जा रही है। उम्र को लेकर चर्चा के बीच आई रिपोर्ट अमेरिका में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की उम्र और स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बने हुए हैं। इसी संदर्भ में ट्रंप की स्वास्थ्य रिपोर्ट पर भी व्यापक नजर रखी जा रही थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि मेडिकल जांच के निष्कर्ष बताते हैं कि राष्ट्रपति की शारीरिक और मानसिक स्थिति स्थिर है तथा वे अपने कार्यकाल की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में बड़ा UFC फाइट इवेंट आयोजित किया जाएगा। इसके लिए व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में विशाल फाइटिंग एरीना तैयार किया जा रहा है। मंगलवार को वहां बड़े क्रेन और लोहे के ढांचे लगाते हुए देखा गया। यह मुकाबला 14 जून को होगा, जो ट्रंप का 80वां जन्मदिन भी है। हजारों लोग लाइव देखेंगे मुकाबला ट्रंप ने बताया कि इस इवेंट में करीब 4,500 लोग सीधे व्हाइट हाउस लॉन में बैठकर मुकाबला देख सकेंगे। इसके अलावा व्हाइट हाउस के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी, जहां करीब 1 लाख लोग मुफ्त में मैच देख पाएंगे। ट्रंप बोले- ऐसा इवेंट पहले कभी नहीं हुआ इस महीने ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा था कि यह बेहद बड़ा फाइट इवेंट होगा और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने UFC के मशहूर ऑक्टागन रिंग की तस्वीर भी दिखाई थी, जिसके पीछे व्हाइट हाउस नजर आ रहा था। UFC फाइटिंग के बड़े फैन हैं ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से UFC मुकाबलों के समर्थक रहे हैं। वह कई बड़े फाइट इवेंट्स में हिस्सा लेते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि UFC जैसे खेलों के जरिए ट्रंप युवा पुरुष वोटर्स के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘UFC Freedom 250’ रखा गया इवेंट का नाम इस खास मुकाबले का नाम “UFC Freedom 250” रखा गया है। ट्रंप ने इसे अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ से जुड़ा कार्यक्रम बताया है। UFC की ओर से पहले ही घोषणा की जा चुकी है कि मुख्य मुकाबले में Ilia Topuria और Justin Gaethje आमने-सामने होंगे। इस इवेंट पर खर्च होंगे करोड़ों डॉलर रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर खर्च हो सकते हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस कार्यक्रम का पूरा खर्च UFC कंपनी उठाएगी और अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। व्हाइट हाउस में पहले भी कर चुके हैं बड़े बदलाव यह आयोजन ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में किए जा रहे बड़े बदलावों का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले रोज गार्डन की घास हटाई जा चुकी है और ईस्ट विंग में बड़ा बॉलरूम बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। युद्ध और महंगाई के बीच हो रहा बड़ा आयोजन यह इवेंट ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ईरान के साथ बढ़ते तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी वजह से विपक्षी दल और कई विश्लेषक इस आयोजन को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
Iran ने संभावित अमेरिकी सैन्य हमलों की आशंका के बीच अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और रुकती कूटनीतिक बातचीत के बीच यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, United States ईरान के खिलाफ नए सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहा है। अमेरिकी हमले की तैयारी की रिपोर्ट अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस और रक्षा विभाग के भीतर ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों का दावा है कि यदि अगले 24 घंटों में कोई बड़ी कूटनीतिक सफलता नहीं मिलती, तो राष्ट्रपति Donald Trump बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दे सकते हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक किसी अंतिम फैसले की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के कई अधिकारियों ने अपनी मेमोरियल डे वीकेंड छुट्टियां रद्द कर दी हैं। ट्रंप ने रद्द किया वीकेंड कार्यक्रम तनावपूर्ण हालात के बीच राष्ट्रपति ट्रंप को न्यू जर्सी में अपना वीकेंड कार्यक्रम छोड़कर वॉशिंगटन लौटना पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मौजूदा सरकारी परिस्थितियों के कारण उनका व्हाइट हाउस में रहना ज्यादा जरूरी है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय जिम्मेदारियां प्राथमिकता हैं। ईरान-अमेरिका बातचीत फिर अटकी दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने के बावजूद शांति वार्ता फिलहाल ठप मानी जा रही है। विवाद की सबसे बड़ी वजह ईरान का संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका का कहना है कि ईरान को न केवल परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना होगा, बल्कि उसके पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम भी हटाना होगा। दूसरी ओर ईरान इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है और अपने परमाणु कार्यक्रम को राष्ट्रीय अधिकार बता रहा है। सीजफायर के बावजूद कायम है तनाव अप्रैल में घोषित अस्थायी सीजफायर अब भी तकनीकी रूप से लागू है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में छिटपुट हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी वजह से मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक बातचीत विफल रहती है, तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है।
Donald Trump ने ईरान संकट और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए शादी में जाना आसान नहीं है और चाहे वह जाएं या नहीं, दोनों ही हालात में मीडिया उन्हें निशाना बनाएगा। पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी में शामिल होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल समय सही नहीं लग रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर मैं शादी में जाता हूं, तो मुझे मारा जाएगा। अगर नहीं जाता हूं, तो फेक न्यूज मुझे छोड़ने वाली नहीं है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि Iran से जुड़े मौजूदा तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात उनकी प्राथमिकता बने हुए हैं। बहामास में होगी निजी शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनल्ड ट्रंप जूनियर इस सप्ताहांत Bahamas में एक निजी समारोह में मॉडल और सोशलाइट Bettina Anderson के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं। बताया जा रहा है कि समारोह को बेहद निजी रखा गया है और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा और राजनीति बनी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक चर्चाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शादी में शामिल होने या न होने, दोनों स्थितियों में मीडिया आलोचना करेगा। ट्रंप ने इसे “ऐसी स्थिति जिसमें मैं जीत नहीं सकता” बताया। कैंप डेविड में हुई थी सगाई डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने दिसंबर में अपनी सगाई का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की सगाई Camp David में हुई थी। बाद में बेटिना एंडरसन ने Mar-a-Lago में एक ब्राइडल शावर कार्यक्रम भी आयोजित किया था। ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी यह डोनल्ड ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी होगी। इससे पहले उनकी शादी Vanessa Trump से हुई थी, जिनसे उनके पांच बच्चे हैं। दोनों का 2018 में तलाक हो गया था। हाल ही में वैनेसा ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। इसके अलावा ट्रंप जूनियर की सगाई पहले Kimberly Guilfoyle से भी हुई थी, लेकिन 2024 में दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। ईरान संकट पर टिकी दुनिया की नजर ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति और सुरक्षा प्राथमिकताएं निजी कार्यक्रमों पर भारी पड़ सकती हैं।
Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
बंद कमरे की बैठकों में उठाए गंभीर सवाल अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को आशंका है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध की वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि निजी बैठकों में वेंस ने सवाल उठाया कि क्या पेंटागन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की वास्तविक स्थिति बता रहा है या केवल सकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही है। मिसाइल भंडार को लेकर बढ़ी चिंता वेंस की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर है। उनका मानना है कि ईरान युद्ध में बड़ी मात्रा में हथियार खर्च हो रहे हैं, जिससे भविष्य में चीन, रूस या उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिका कमजोर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने यह चिंता सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने भी रखी है। हेगसेथ पर सीधे आरोप से बच रहे वेंस हालांकि, जेडी वेंस ने अब तक सार्वजनिक रूप से पीट हेगसेथ की आलोचना नहीं की है। उन्होंने कई मौकों पर रक्षा मंत्री की तारीफ भी की है। सूत्रों का कहना है कि वेंस इस मुद्दे को व्यक्तिगत टकराव में बदलने से बचना चाहते हैं। लेकिन उनके करीबी मानते हैं कि पेंटागन की तरफ से पेश की जा रही तस्वीर जरूरत से ज्यादा आशावादी है। खुफिया रिपोर्ट और दावों में अंतर पीट हेगसेथ लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और रक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन आंतरिक खुफिया आकलनों में तस्वीर कुछ अलग बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब भी अपनी वायुसेना और मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाने में सफल रहा है। 2028 की राजनीति पर भी असर विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का राजनीतिक भविष्य भी इस युद्ध के नतीजों से जुड़ा हुआ है। यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है या अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो इसका असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वेंस की संभावनाओं पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन में बढ़ सकती है खींचतान ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद सामने आने से साफ है कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष स्तर पर रणनीति को लेकर एकराय नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति की चिंताओं को कितना महत्व देते हैं और पेंटागन की रणनीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।
सीमित संस्करण में मिलेगा नया अमेरिकी पासपोर्ट अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने की तैयारी में जुटा है। इसी कड़ी में अमेरिकी सरकार एक विशेष लिमिटेड-एडिशन पासपोर्ट जारी करने जा रही है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर और हस्ताक्षर शामिल होंगे। यह खास पासपोर्ट जुलाई 2026 से अमेरिकी नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी संख्या सीमित होगी और यह "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर जारी किया जाएगा। डिजाइन में दिखेगी ट्रंप की खास छाप व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी तस्वीरों में नए पासपोर्ट का डिजाइन सामने आया है। इसमें ट्रंप का चित्र, सुनहरे रंग में उनके हस्ताक्षर, अमेरिकी ध्वज और स्वतंत्रता घोषणा पत्र की झलक दिखाई दे रही है। पासपोर्ट के एक अन्य पृष्ठ पर अमेरिका के संस्थापक नेताओं को स्वतंत्रता घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए दर्शाया गया है। 250वीं वर्षगांठ के जश्न का हिस्सा अमेरिका जुलाई 2026 में स्वतंत्रता घोषणा की 250वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस अवसर पर देशभर में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि यह पासपोर्ट इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करने के लिए तैयार किया गया है। वॉशिंगटन से होगी शुरुआत यह विशेष पासपोर्ट सबसे पहले वॉशिंगटन पासपोर्ट एजेंसी के जरिए जारी किया जाएगा। वितरण इस गर्मी से शुरू होगा और स्टॉक खत्म होने तक जारी रहेगा। पहले भी दिखी है ट्रंप ब्रांडिंग यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप का नाम या छवि सरकारी योजनाओं में शामिल की गई हो। 2026 के नेशनल पार्क पास पर ट्रंप की तस्वीर दिखाई गई। अमेरिकी टकसाल ने ट्रंप की प्रोफाइल वाला 1 डॉलर का स्मारक सिक्का भी प्रस्तावित किया है। वॉशिंगटन के कई सरकारी भवनों पर ट्रंप की तस्वीर वाले बैनर लगाए गए हैं। राजनीतिक बहस तेज होने के आसार ट्रंप की इस नई पहल को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस छिड़ सकती है। समर्थक इसे ऐतिहासिक सम्मान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे सरकारी संस्थानों के निजी ब्रांडिंग के रूप में देख रहे हैं। इतिहास और राजनीति का अनोखा संगम अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर जारी होने वाला यह पासपोर्ट न केवल एक यात्रा दस्तावेज होगा, बल्कि अमेरिकी राजनीति और इतिहास के मौजूदा दौर का प्रतीक भी बनेगा।
व्हाइट हाउस डिनर में गूंजा शाही हास्य ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी ली। उनके इस मजाक ने पूरे हॉल में ठहाके गूंजा दिए। चार्ल्स ने कहा, "मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका नहीं होता, तो यूरोप जर्मन बोल रहा होता। मैं कहूं कि अगर हम नहीं होते, तो आप आज फ्रेंच बोल रहे होते।" इतिहास के जरिए दिया करारा जवाब राजा चार्ल्स का यह बयान उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच हुई ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा था। अमेरिकी स्वतंत्रता से पहले दोनों यूरोपीय शक्तियां इस क्षेत्र पर कब्जे के लिए संघर्ष कर रही थीं। उनका यह तंज ट्रंप की उस टिप्पणी का जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका के बिना यूरोप आज जर्मन बोल रहा होता। व्हाइट हाउस जलाने का भी किया जिक्र चार्ल्स ने अपने भाषण में 1814 के 'बर्निंग ऑफ वॉशिंगटन' का भी जिक्र किया, जब ब्रिटिश सेना ने व्हाइट हाउस के कुछ हिस्सों को आग के हवाले कर दिया था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "ब्रिटिशों ने भी व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट री-डेवलपमेंट की कोशिश की थी।" बोस्टन टी पार्टी पर भी चुटकी राजा ने बोस्टन टी पार्टी का जिक्र करते हुए कहा कि यह शाम उस ऐतिहासिक घटना से कहीं बेहतर साबित हुई है। उनके इस बयान पर मेहमानों ने जोरदार तालियां बजाईं। ट्रंप ने भी दिया मजेदार जवाब ट्रंप ने भी पीछे नहीं हटते हुए चार्ल्स की कांग्रेस में दिए गए भाषण का जिक्र किया। उन्होंने हंसते हुए कहा, "उन्होंने डेमोक्रेट्स को खड़ा कर दिया, जो मैं कभी नहीं कर पाया।" खास रिश्तों पर दिया जोर चार्ल्स ने अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण गठबंधनों में से एक बताया। उन्होंने दोनों देशों से वैश्विक चुनौतियों के बीच एकजुट रहने का आह्वान किया। व्हाइट हाउस की यह शाम कूटनीति, इतिहास और हास्य का शानदार संगम बन गई।
ब्रिटेन के सम्राट Charles III और महारानी Camilla चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हाल ही में व्हाइट हाउस संवाददाता डिनर में गोलीबारी हुई और ईरान को लेकर अमेरिका-ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। ऐतिहासिक दौरा यह किंग चार्ल्स के शासनकाल का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण विदेशी दौरा माना जा रहा है। यह यात्रा अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। ब्रिटिश सम्राट की यह अमेरिका यात्रा पिछले दो दशकों में पहली है। ट्रंप से निजी मुलाकात वॉशिंगटन पहुंचने के बाद किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने राष्ट्रपति Donald Trump और प्रथम महिला Melania Trump से निजी मुलाकात की। ट्रंप लंबे समय से ब्रिटिश शाही परिवार के प्रशंसक रहे हैं। कार्यक्रम में क्या खास? अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे व्हाइट हाउस में भव्य राजकीय भोज न्यूयॉर्क में 9/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि वर्जीनिया में पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं का दौरा किंग चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले इतिहास के केवल दूसरे ब्रिटिश सम्राट बनेंगे। सुरक्षा के बीच जारी दौरा हाल ही में White House Correspondents' Association Dinner में हुई गोलीबारी के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Buckingham Palace ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ समीक्षा के बाद यात्रा को तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने का फैसला किया। ईरान मुद्दे पर तनाव ईरान को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हालिया मतभेदों ने इस यात्रा को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर सार्वजनिक नाराजगी जताई थी, हालांकि हाल के दिनों में उनके बयान कुछ नरम पड़े हैं। कैंसर उपचार के बीच सक्रियता 77 वर्षीय किंग चार्ल्स कैंसर का इलाज करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने सार्वजनिक दायित्वों को निभा रहे हैं। "स्पेशल रिलेशनशिप" की परीक्षा ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार इस दौरे को अमेरिका और ब्रिटेन के बीच "स्पेशल रिलेशनशिप" को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब उनके कार्यकाल को लेकर लगातार विवाद और असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। करीब 14 महीने पहले नियुक्त की गई बॉन्डी को ट्रंप की करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था, लेकिन हालात इस कदर बिगड़े कि उन्हें अचानक पद छोड़ना पड़ा। व्हाइट हाउस में टकराव बना टर्निंग पॉइंट रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस में एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप और बॉन्डी के बीच तीखा टकराव हुआ। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने उन पर “अक्षम्य गलती” करने का आरोप लगाया। बॉन्डी ने पद पर बने रहने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रपति अपने फैसले पर अडिग रहे और तत्काल प्रभाव से उन्हें हटा दिया गया। एपस्टीन फाइल्स विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें बॉन्डी की बर्खास्तगी के पीछे सबसे बड़ी वजह चर्चित Jeffrey Epstein से जुड़ा विवाद माना जा रहा है। आरोप है कि इस मामले से संबंधित दस्तावेजों को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया और कुछ अहम नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे ट्रंप प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए और बॉन्डी की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे। लीक विवाद ने भी बढ़ाया दबाव एक अन्य विवाद में बॉन्डी पर अमेरिकी सांसद Eric Swalwell से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगा। यह मामला कथित चीनी जासूस क्रिस्टीन फैंग से जुड़े जांच से संबंधित था। इस घटनाक्रम ने व्हाइट हाउस की नाराजगी को और बढ़ा दिया। ट्रंप की नाराजगी: विरोधियों पर कार्रवाई नहीं सूत्रों के अनुसार, ट्रंप इस बात से भी नाराज थे कि बॉन्डी ने उनके राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई कमजोर रही, जिसके चलते कोर्ट में केस टिक नहीं पाए। इससे राष्ट्रपति का भरोसा और कमजोर हुआ। विवादों से घिरा रहा कार्यकाल पाम बॉन्डी का पूरा कार्यकाल विवादों में रहा। न्याय विभाग में बड़े पैमाने पर बदलाव, अधिकारियों की छुट्टी, और राजनीतिक एजेंडे को प्राथमिकता देने के आरोप लगातार लगते रहे। इसके अलावा संसदीय सुनवाई के दौरान उनका आक्रामक रवैया भी आलोचना का कारण बना। अब आगे क्या? फिलहाल डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल बनाया गया है। स्थायी नियुक्ति के लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें Lee Zeldin और Ron DeSantis प्रमुख माने जा रहे हैं। इस बर्खास्तगी के साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन में आगे और बड़े फेरबदल हो सकते हैं, जिससे अमेरिकी राजनीति में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है।
वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 34वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम लगभग 20 मिनट का संबोधन दिया। इस भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका युद्ध में बढ़त बना चुका है और ईरान की सैन्य, राजनीतिक और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, कई विश्लेषकों और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर ट्रंप के इन दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ईरानी सेना और युद्ध क्षमता पर दावे ट्रंप ने कहा कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि हकीकत यह है कि ईरान अब भी सक्रिय सैन्य जवाब दे रहा है। इजरायल पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमले इस बात का संकेत हैं कि उसकी हमला करने की क्षमता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव भी बरकरार बताया जा रहा है। सत्ता परिवर्तन और कट्टर नेतृत्व का मुद्दा ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व कम कट्टर है। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा नेतृत्व पहले से अधिक आक्रामक माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की अपेक्षाओं के उलट, ईरान की रणनीति और कठोर हो सकती है। परमाणु क्षमता खत्म होने का दावा संदिग्ध ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल हवाई हमलों से किसी देश के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना बेहद कठिन है, खासकर तब जब संवर्धित यूरेनियम और गुप्त सुविधाओं का सवाल हो। इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। तेल, होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता ईरान के तेल ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमले की चेतावनी ने वैश्विक बाज़ारों को चिंतित कर दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और युद्ध की समयसीमा पर सवाल ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत और महंगाई को नियंत्रित बताया, लेकिन युद्ध के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, “दो से तीन हफ्तों में युद्ध खत्म” करने का ट्रंप का दावा भी संदेह के घेरे में है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।