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Delegates gather in Washington for Lebanon-Israel ceasefire and peace negotiations amid rising tensions
अमेरिका में फिर होगी लेबनान-इजरायल शांति वार्ता, सीजफायर खत्म होने से पहले बढ़ी उम्मीदें

वॉशिंगटन में दो दिन तक चलेगी अहम बैठक Lebanon और Israel के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए गुरुवार से अमेरिका में नई शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। वॉशिंगटन में होने वाली इस बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम (Ceasefire) अब समाप्ति के करीब पहुंच चुका है। हालांकि सीजफायर औपचारिक रूप से अभी लागू माना जा रहा है, लेकिन इस दौरान भी इजरायली हवाई हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायली हमलों में 22 लोगों की मौत लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार को इजरायल ने दक्षिण और पूर्वी लेबनान में करीब 40 स्थानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 22 लोगों की जान गई, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। राजधानी Beirut सहित कई शिया बहुल इलाकों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। लगातार हो रहे हमलों से आम नागरिकों में भय और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने जताई थी ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद पिछले महीने 23 अप्रैल को दोनों देशों के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस में मिले थे। उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी और उम्मीद जताई थी कि जल्द ही इजरायल और लेबनान के नेताओं के बीच ऐतिहासिक शिखर बैठक होगी। हालांकि लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने साफ कहा था कि जब तक इजरायली हमले बंद नहीं होते और सुरक्षा समझौता नहीं बनता, तब तक ऐसी बैठक संभव नहीं है। हिज्बुल्लाह पर कार्रवाई को लेकर दबाव इजरायल लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में कहा था कि “जो भी इजरायल को धमकी देगा, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च से अब तक लेबनान में इजरायली हमलों में 2800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। अमेरिका की मध्यस्थता में होगी बातचीत इस बार होने वाली वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio शामिल नहीं होंगे, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप चीन दौरे पर हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यस्थों की टीम दोनों देशों के प्रतिनिधियों के साथ दो दिनों तक बातचीत करेगी। लेबनान की ओर से विशेष दूत Simon Karam हिस्सा लेंगे, जबकि इजरायल का प्रतिनिधित्व उसके अमेरिका स्थित राजदूत Yechiel Leiter करेंगे। क्षेत्रीय तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित ईरान-इजरायल संघर्ष और लेबनान में जारी हिंसा का असर अब पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक बाजारों पर भी इसका दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में संघर्ष और गंभीर रूप ले सकता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Iranian delegation meets Pakistani leaders in Islamabad amid US-Iran tensions and mediation efforts
ईरान-अमेरिका के बीच फिलहाल सीधी बातचीत नहीं, पाकिस्तान निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका

इस्लामाबाद पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शुक्रवार को एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी। अराघची अपने दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif, सेना प्रमुख Asim Munir और विदेश मंत्री Ishaq Dar से मुलाकात करेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि पाकिस्तान ही तेहरान की चिंताओं और प्रस्तावों को वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा। हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर टिकी निगाहें दूसरी ओर, अमेरिका भी वार्ता को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner के जल्द इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान अमेरिकी मांगों को ध्यान में रखते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है। अमेरिका की प्रमुख शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और Strait of Hormuz में जहाजों की निर्बाध आवाजाही शामिल है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजारों और समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद बढ़ गई है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Donald Trump angrily reacting during press briefing over question on Indian ships attack
Iran-US War: भारतीय जहाजों पर हमले के सवाल पर ट्रंप भड़के, पत्रकार को कहा–“Out”

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का गुस्सा कैमरे पर देखने को मिला। Strait of Hormuz में भारतीय टैंकरों पर हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सख्त प्रतिक्रिया दी और पत्रकार को बाहर जाने के लिए कह दिया। क्या हुआ था? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाया। इस घटना पर India ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे बेहद गंभीर बताया। सवाल पर क्यों भड़के ट्रंप? 18 अप्रैल को व्हाइट हाउस में प्रेस इंटरैक्शन के दौरान: CBS News की रिपोर्टर Olivia Rinaldi ने ट्रंप से सवाल पूछा सवाल था: भारतीय जहाजों पर हुए हमले पर अमेरिका का क्या रुख है? जैसे ही सवाल पूछा गया, ट्रंप नाराज हो गए और उन्होंने रिपोर्टर को “Out” कहकर बाहर जाने को कहा। यह पूरा वाकया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर विवाद इस घटना के बाद: कई लोगों ने ट्रंप के व्यवहार की आलोचना की पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे खुद ओलिविया रिनाल्डी ने भी वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल पूछा था। कौन हैं ओलिविया रिनाल्डी? Olivia Rinaldi: CBS News में व्हाइट हाउस रिपोर्टर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान को कवर कर चुकी हैं “CBS Evening News” और “60 Minutes” जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं क्यों बढ़ा तनाव? United States और ईरान के बीच तनाव चरम पर है होर्मुज में जहाजों पर हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है कूटनीतिक बातचीत में फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं दिख रही

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
World map highlighting United States and China with leaders Trump and Xi Jinping representing global power shift.
ग्लोबल पावर शिफ्ट? सर्वे में अमेरिका पिछड़ा, चीन आगे-ट्रंप की लीडरशिप पर उठे सवाल

वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दे रहा है कि शक्ति संतुलन अब बदल रहा है। ताजा सर्वे के मुताबिक, United States की वैश्विक साख में गिरावट आई है, जबकि China ने पहली बार उसे पीछे छोड़ दिया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध जैसे हालात दुनिया की राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। Gallup सर्वे में बड़ा उलटफेर Gallup के ताजा ग्लोबल अप्रूवल सर्वे के अनुसार, चीन को 36% और अमेरिका को 31% अप्रूवल रेटिंग मिली है। यह पिछले दो दशकों में चीन की सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के नेतृत्व में यह सुधार देखा गया है, जबकि Donald Trump की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ा है। अमेरिका की छवि क्यों कमजोर हुई? विश्लेषकों के मुताबिक, इसके पीछे कई बड़े कारण हैं- ट्रेड वॉर और रेसिप्रोकल टैरिफ सहयोगी देशों पर भी सख्त आर्थिक नीतियां ईरान के साथ बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक स्तर पर आक्रामक विदेश नीति इन वजहों से अमेरिका की अस्वीकृति दर 48% तक पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। चीन की स्थिति क्यों मजबूत हुई? दूसरी ओर, चीन की छवि में सुधार दर्ज किया गया है। वैश्विक स्तर पर उसकी अप्रूवल रेटिंग 32% से बढ़कर 36% हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर आर्थिक नीतियां और रणनीतिक कूटनीति ने चीन को फायदा पहुंचाया है। अन्य देशों की स्थिति सर्वे के अनुसार: Germany लगातार नौवें साल सबसे ज्यादा सकारात्मक रेटिंग (48%) के साथ शीर्ष पर बना हुआ है Russia की अप्रूवल रेटिंग 26% रही क्या बदल रही है दुनिया की ताकत? यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि वैश्विक नेतृत्व को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। अमेरिका की पारंपरिक ‘सुपरपावर’ छवि को चुनौती मिल रही है, जबकि चीन अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। हालांकि यह सर्वे कुछ बड़े हालिया घटनाक्रमों से पहले किया गया था, लेकिन इसके संकेत गंभीर हैं। आने वाले समय में अमेरिका-चीन के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, जो वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगी।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran policy with oil fields and Strait of Hormuz shipping route in background.
‘मैं पहले एक बिजनेसमैन हूं’-ईरान को लेकर ट्रंप के बयान से मचा बवाल, तेल और टोल पर फोकस

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। ट्रंप ने साफ कहा है कि वह “सबसे पहले एक बिजनेसमैन हैं”, और इसी नजरिए से ईरान के साथ चल रहे टकराव को देख रहे हैं। तेल पर नजर या रणनीति? ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका युद्ध में जीत हासिल करता है, तो उसे ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया- “युद्ध में जीतने वाले का ही संसाधनों पर अधिकार होता है।” ट्रंप के अनुसार, यह कदम अमेरिका के सैन्य खर्च की भरपाई करने का एक तरीका हो सकता है। ‘जंग की लागत तेल से वसूलेंगे’ ट्रंप ने खुलकर कहा कि- अमेरिका ने युद्धों पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं अब समय आ गया है कि इन खर्चों की भरपाई की जाए ईरान के तेल कुओं से होने वाली कमाई इसका जरिया बन सकती है उनका यह बयान उनकी ट्रांजेक्शनल (लेन-देन आधारित) विदेश नीति को दर्शाता है। वेनेजुएला मॉडल का दिया उदाहरण ट्रंप ने अपनी बात को सही ठहराने के लिए वेनेजुएला का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि- वहां अमेरिका की भागीदारी से भारी मात्रा में तेल निकाला गया इससे युद्ध की लागत की भरपाई संभव हुई ट्रंप अब इसी मॉडल को ईरान पर लागू करना चाहते हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट पर ‘अमेरिकी टोल’ का प्रस्ताव ट्रंप की योजना सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। उन्होंने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी बयान दिया। ट्रंप ने सुझाव दिया कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से अमेरिका टोल वसूले उनका कहना था- “हम विजेता हैं, तो टोल हम क्यों न लें?” गौरतलब है कि वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर उठे सवाल ट्रंप के इन बयानों के बाद कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है- किसी देश के संसाधनों पर कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है इससे वैश्विक तनाव और बढ़ सकता है यह संप्रभुता (sovereignty) के सिद्धांत को चुनौती देता है क्या कहता है यह बयान? विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि- वह विदेश नीति को भी बिजनेस डील की तरह देखते हैं सैन्य कार्रवाई के पीछे आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हैं

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Donald Trump warning Iran amid rising tensions as Iran issues strong retaliation threat over possible attack
ट्रंप की 48 घंटे की डेडलाइन पर ईरान का कड़ा जवाब, बोला- “हमला हुआ तो विनाशकारी जवाब देंगे”

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई 48 घंटे की डेडलाइन पर अब ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और अगर उसके नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ तो इसका “बहुत अधिक विनाशकारी” जवाब दिया जाएगा। ईरान की सीधी चेतावनी ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया’ के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया, तो ईरान की अगली जवाबी कार्रवाई और भी व्यापक और खतरनाक होगी। सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के मुताबिक, प्रवक्ता ने टेलीग्राम पर कहा, “अगर नागरिक ठिकानों पर हमले दोहराए जाते हैं, तो हमारे आक्रामक और जवाबी कदम पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होंगे।” ट्रंप की कड़ी चेतावनी दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर मंगलवार तक उनकी शर्तों पर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका “पूरे ईरान को उड़ा देगा”। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग के लिए खोलना होगा, वरना उसे भारी परिणाम भुगतने होंगे। Axios और Fox News को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “अगर वे कोई डील नहीं करते हैं, तो मैं वहां सब कुछ उड़ा दूंगा।” “ईरान पहले ही तबाह हो चुका है” – ट्रंप ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि ईरान पहले ही काफी नुकसान झेल चुका है और हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को हर दिन अपने पुल, पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना पड़ रहा है। ABC News से बातचीत में उन्होंने कहा, “ऐसा कोई देश नहीं है जिसने कभी इस तरह की मार झेली हो।” नागरिक नुकसान पर भी सख्त रुख ट्रंप ने संभावित हमलों में नागरिकों के नुकसान को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग खुद अपनी सरकार से परेशान हैं और ऐसे हालात में वे बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा, “वे (ईरानी लोग) डर में जी रहे हैं… लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।” बढ़ता तनाव, दुनिया की नजरें टिकीं अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे विश्व की चिंता बढ़ा दी है। यदि हालात काबू में नहीं आए, तो यह संघर्ष बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें मंगलवार की डेडलाइन पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि हालात बातचीत से सुलझेंगे या टकराव और बढ़ेगा।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Strait of Hormuz oil tankers amid tension, UN Security Council debate on global crisis
होर्मुज संकट: UN में रूस-चीन का वीटो, फ्रांस ने भी रोका प्रस्ताव-क्या ट्रंप की रणनीति को झटका?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक राजनीति और कूटनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र में इस अहम समुद्री मार्ग को खोलने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया, जबकि हैरानी की बात यह रही कि नाटो सदस्य फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। क्या था UN में प्रस्ताव? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस प्रस्ताव में जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने का भी प्रावधान शामिल था, ताकि तेल सप्लाई बहाल की जा सके। रूस-चीन ने क्यों लगाया वीटो? रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। चीन का कहना है कि सैन्य हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ सकते हैं रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया दोनों देशों का मानना है कि यह प्रस्ताव अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की सैन्य रणनीति को समर्थन देता है। फ्रांस का विरोध क्यों चौंकाने वाला? सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। फ्रांस, नाटो का सदस्य होने के बावजूद अमेरिका के रुख से अलग नजर आया। इससे यह संकेत मिला कि पश्चिमी देशों के बीच भी इस मुद्दे पर एकजुटता नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं ट्रंप की रणनीति पर असर? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित करना चाहता है। लेकिन UN में वीटो और सहयोगी देशों के मतभेद से: अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है वैश्विक समर्थन कमजोर होता दिख रहा है कूटनीतिक समाधान और मुश्किल हो सकता है आगे क्या? प्रस्ताव के पास होने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है तेल बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है बड़े देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
US and Israeli military officials in strategic meeting discussing Iran amid rising Middle East tensions
ईरान पर हमले की तैयारी? अमेरिका-इजरायल की सीक्रेट बैठक से बढ़ी वैश्विक चिंता

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच हुई एक कथित ‘सीक्रेट मीटिंग’ ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने इजरायल में इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में ईरान की सैन्य क्षमताओं, खासकर उसके हथियार निर्माण ढांचे को कमजोर करने की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी दौरान, इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में ईरान के सैन्य उत्पादन के “महत्वपूर्ण हिस्सों” को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे उसकी रक्षा क्षमता को बड़ा झटका लगेगा। अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और संभावित कार्रवाई रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 3,500 अमेरिकी सैनिक पहले ही मध्य पूर्व में तैनात किए जा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पास किसी भी वक्त सैन्य कार्रवाई का आदेश देने का विकल्प मौजूद है। इसके साथ ही, अमेरिका का उभयचर हमला जहाज USS Tripoli (LHA-7) भी क्षेत्र में पहुंच चुका है, जो आधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस है और इसमें फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर और बड़ी संख्या में मरीन तैनात हैं। क्या होगा ग्राउंड ऑपरेशन? रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि संभावित सैन्य अभियान पारंपरिक बड़े पैमाने के युद्ध जैसा नहीं होगा। इसके बजाय, इसमें स्पेशल फोर्सेज और पैदल सेना की संयुक्त टीमों द्वारा सीमित और टारगेटेड ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना हो सकता है, बिना पूर्ण युद्ध में उतरे। वैश्विक असर की आशंका अगर यह सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिका या इजरायल की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में इन रिपोर्ट्स को संभावित रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, न कि अंतिम निर्णय के रूप में।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0