नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Suryavanshi ने अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण भी नहीं किया है, लेकिन उन्हें लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं। 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में जगह मिली है। इस बीच भारत के पूर्व कप्तान Sourav Ganguly ने वैभव को लेकर बड़ा बयान दिया है और क्रिकेट प्रशंसकों से धैर्य रखने की अपील की है। वैभव को समय देने की जरूरत: गांगुली सौरव गांगुली का मानना है कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले खिलाड़ी पर जरूरत से ज्यादा उम्मीदों का बोझ नहीं डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें अपने खेल को विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। गांगुली के मुताबिक, आईपीएल में वैभव ने जिस आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया, उससे उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियां अलग होती हैं और युवा खिलाड़ी को परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का अवसर मिलना चाहिए। इंग्लैंड की परिस्थितियां होंगी बड़ी परीक्षा पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि इंग्लैंड और आयरलैंड के विकेट भारतीय परिस्थितियों से काफी अलग होते हैं। वहां गेंद अधिक सीम और स्विंग करती है, जबकि उछाल भी ज्यादा रहता है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौरा सीखने और अनुभव हासिल करने का बड़ा अवसर होगा। गांगुली ने कहा कि युवा बल्लेबाज में अपार क्षमता है, लेकिन उनसे तुरंत असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। 'दुनिया जीत लेने की उम्मीद मत कीजिए' गांगुली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैभव को अपने खेल में जमने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है और वैभव भी उन्हीं में से एक हैं। लेकिन हर खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने के लिए समय चाहिए। उनका मानना है कि क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों को वैभव के विकास की प्रक्रिया को समझना चाहिए और उन्हें बिना अनावश्यक दबाव के आगे बढ़ने देना चाहिए। एबी डिविलियर्स ने भी किया समर्थन दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज AB de Villiers ने भी वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। डिविलियर्स का कहना है कि उम्र को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वैभव ने अपने प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि कई लोग यह कह सकते हैं कि वैभव अभी बहुत छोटे हैं या उन्हें और अनुभव की जरूरत है, लेकिन उनके प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि वह इस अवसर के हकदार हैं। भारतीय क्रिकेट की नई उम्मीद 15 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम में चयन हासिल कर वैभव सूर्यवंशी ने पहले ही इतिहास रच दिया है। अब सभी की निगाहें उनके संभावित डेब्यू पर टिकी हैं। हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस युवा खिलाड़ी को समय और समर्थन दोनों की जरूरत होगी ताकि वह अपनी प्रतिभा को लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट के लिए उपयोगी बना सके।
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच Gautam Gambhir और पूर्णिया से सांसद Rajesh Ranjan की हालिया मुलाकात चर्चा का विषय बन गई है। दोनों की तस्वीरें और मुलाकात की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट और राजनीति के गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे सांसद के बेटे और युवा क्रिकेटर सार्थक रंजन से जोड़कर देखा जा रहा है। बेटे सार्थक रंजन को लेकर हो सकती है चर्चा पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन घरेलू क्रिकेट में उभरते हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। आईपीएल 2026 की नीलामी में Kolkata Knight Riders ने उन्हें 30 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि पूरे सीजन में सार्थक को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। ऐसे में माना जा रहा है कि गौतम गंभीर और पप्पू यादव के बीच हुई बातचीत में सार्थक के क्रिकेट करियर, उनकी प्रगति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई हो सकती है। केकेआर से जुड़ा है गौतम गंभीर का खास रिश्ता गौतम गंभीर का कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ लंबा और सफल जुड़ाव रहा है। उनकी कप्तानी में टीम ने आईपीएल खिताब जीते और बाद में मेंटर के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि केकेआर से जुड़े किसी भी युवा खिलाड़ी के विकास को लेकर गंभीर की राय काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आईपीएल 2026 में नहीं मिला डेब्यू का मौका सार्थक रंजन को भले ही केकेआर ने अपनी टीम में शामिल किया, लेकिन उन्हें पूरे सीजन बेंच पर ही बैठना पड़ा। टीम का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और वह 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर रही। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्थक घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हैं तो अगले सीजन में उन्हें अवसर मिल सकता है। अफगानिस्तान टेस्ट से पहले चर्चा में आए गंभीर यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारतीय टीम 6 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच की तैयारियों में जुटी हुई है। हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर की रणनीतियों पर सभी की नजरें हैं और इसी बीच उनकी यह मुलाकात सुर्खियां बटोर रही है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों के बीच वास्तव में क्या बातचीत हुई, लेकिन क्रिकेट प्रेमियों के बीच इसे सार्थक रंजन के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वह 6 जून को भारत लौटेंगे और विभिन्न परीक्षा विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे। वर्तमान में अमेरिका में मौजूद दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों और छात्रों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि छात्र और नागरिक संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करें। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के एकजुट होने पर सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना पड़ेगा। दिल्ली एयरपोर्ट से जंतर-मंतर तक मार्च की तैयारी अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से 6 जून की सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वहां से सभी लोग संसद मार्ग थाने पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। दीपके के अनुसार, उनका प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। परीक्षा विवादों को लेकर सरकार पर सवाल दीपके ने दावा किया कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि नीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी-जीडी जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने छात्रों के बीच असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा किया है। उनका आरोप है कि इन घटनाओं का असर एक करोड़ से अधिक छात्रों पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जवाबदेही तय नहीं की गई। ऑनलाइन याचिका को मिले लाखों समर्थन अभिजीत दीपके ने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका पर अब तक करीब आठ लाख लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दीपके ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के प्रभावित होने के बावजूद यदि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो यह जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। गिरफ्तारी की आशंका पर भी दी प्रतिक्रिया अपने वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनके परिवार और मित्रों को आशंका है कि भारत लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उन्हें शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखते हैं तथा कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं। गांधी, आंबेडकर और भगत सिंह से प्रेरित होने का दावा दीपके ने कहा कि वह महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, भगत सिंह और जवाहरलाल नेहरू के विचारों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है और उनका आंदोलन इसी संवैधानिक अधिकार के तहत होगा। उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए सभी लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
IPL 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद बढ़ी राष्ट्रीय टीम में चयन की उम्मीद भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Sooryavanshi को लेकर टीम इंडिया में चयन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आईपीएल 2026 में शानदार बल्लेबाजी करने वाले 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी के लिए अब राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खुलते नजर आ रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव Devajit Saikia ने संकेत दिया है कि वैभव जल्द ही भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बन सकते हैं। उनके बयान को युवा बल्लेबाज के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। IPL 2026 के सबसे बड़े सितारे बने वैभव Rajasthan Royals के लिए खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में 16 मैचों में 776 से अधिक रन बनाए और ऑरेंज कैप अपने नाम की। पूरे सीजन में उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज गेंदबाजों के खिलाफ निडर बल्लेबाजी की। उनकी तकनीक, आक्रामकता और दबाव में मैच संभालने की क्षमता ने क्रिकेट विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। BCCI सचिव ने दिए बड़े संकेत देवजीत सैकिया ने कहा कि चयन समिति युवा बल्लेबाज के प्रदर्शन पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनके भविष्य को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैभव भारतीय क्रिकेट के नए "वंडरकिड" हैं और आने वाले दिनों में दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ सकते हैं। सैकिया के अनुसार, चयन समिति के सभी सदस्य आईपीएल मैचों पर करीबी नजर रख रहे थे और वैभव का प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है। इंग्लैंड दौरे की टीम में मिल सकता है मौका रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के आगामी यूनाइटेड किंगडम दौरे के लिए होने वाली चयन बैठक में वैभव सूर्यवंशी का नाम चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि BCCI ने आधिकारिक तौर पर किसी चयन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों की टिप्पणियों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है। "असाधारण प्रतिभा" बताया देवजीत सैकिया ने कहा कि आईपीएल में कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन "असाधारण" रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट को इस समय एक नया प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिला है और वह जल्द ही नई ऊंचाइयों को छू सकता है। चयनकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती अब अंतिम फैसला मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar और उनकी टीम को लेना है। चयनकर्ताओं को यह तय करना होगा कि इतनी कम उम्र में वैभव को सीधे सीनियर टीम में मौका दिया जाए या पहले उन्हें भारत ए और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव दिलाए जाएं। खिलाड़ियों की फिटनेस पर भी BCCI की नजर आईपीएल के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भी BCCI सतर्क है। सैकिया ने बताया कि बोर्ड का तकनीकी और फिटनेस स्टाफ केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ियों की लगातार निगरानी करता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ी अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए बोर्ड हर गतिविधि में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता। भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार? वैभव सूर्यवंशी की उम्र अभी सिर्फ 15 साल है, लेकिन उन्होंने जिस तरह बड़े मंच पर खुद को साबित किया है, उससे क्रिकेट जगत में उनकी तुलना भविष्य के बड़े सितारों से की जाने लगी है। अगर उन्हें जल्द ही टीम इंडिया में मौका मिलता है, तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।
आईपीएल 2026 के फाइनल में शानदार प्रदर्शन के बाद युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी बल्लेबाजी नहीं, बल्कि पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के दौरान दिया गया उनका मजेदार जवाब है, जिसने स्टेडियम से लेकर सोशल मीडिया तक सभी को हंसने पर मजबूर कर दिया। Ravi Shastri और वैभव के बीच हुई यह दिलचस्प बातचीत अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। प्रेजेंटेशन में छाया मजेदार पल Indian Premier League 2026 Final के बाद अवॉर्ड सेरेमनी में वैभव सूर्यवंशी सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे। इसी दौरान प्रस्तोता रवि शास्त्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में उनसे उनकी डाइट के बारे में सवाल पूछा। शास्त्री ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वह रोज कितना दूध पीते हैं। इस सवाल को सुनकर वैभव खुद अपनी हंसी नहीं रोक पाए और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैं अब दूध नहीं पीता." उनका यह जवाब सुनते ही मंच पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। इसके बाद रवि शास्त्री ने भी मजाक में कहा कि अब उन्हें अपने घर में इतने अवॉर्ड्स रखने के लिए एक बड़ी अलमारी की जरूरत पड़ने वाली है। अवॉर्ड्स की झड़ी लगाने वाले खिलाड़ी बने वैभव सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। उन्होंने इस सीजन में कई बड़े पुरस्कार अपने नाम किए, जिनमें शामिल हैं: ऑरेंज कैप मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन बताया अपना सफलता का मंत्र अवॉर्ड समारोह के दौरान वैभव ने अपने खेल को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि इस सीजन ने उन्हें सिखाया कि हर मैच और हर परिस्थिति में एक जैसी बल्लेबाजी नहीं की जा सकती। मैच की स्थिति के अनुसार खुद को ढालना जरूरी होता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि आक्रामक बल्लेबाजी उनकी पहचान है। उनके अनुसार, अगर पहली गेंद उनकी रेंज में होती है और उन्हें शॉट खेलने का भरोसा होता है, तो वह उसे मारने की पूरी कोशिश करते हैं। यही उनका स्वाभाविक खेल है और अब तक यह रणनीति उनके लिए सफल रही है। 15 साल की उम्र में रचा इतिहास वैभव सूर्यवंशी का आईपीएल 2026 सीजन रिकॉर्डतोड़ रहा। उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए और पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी गेंदबाजों पर दबदबा बनाए रखा। उनके नाम दर्ज उपलब्धियां: 776 रन 1 शतक दो बार 90 के पार आउट एलिमिनेटर में 97 रन क्वालीफायर-2 में 96 रन पूरे सीजन में 72 छक्के 72 छक्कों के साथ वैभव सूर्यवंशी आईपीएल इतिहास के एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल करती है। आईपीएल 2026 में उनकी बल्लेबाजी, आत्मविश्वास और मैच्योर सोच ने साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सुपरस्टार मिल चुका है।
आईपीएल 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोर रहे युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को लेकर भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज Dinesh Karthik ने बड़ा बयान दिया है। कार्तिक ने कहा कि इतनी कम उम्र में शानदार प्रदर्शन कर रहे वैभव की तुलना महान बल्लेबाज Sachin Tendulkar से करना सही नहीं होगा। ‘अगला सचिन’ कहना ठीक नहीं एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान Dinesh Karthik ने कहा कि वैभव जो कर रहे हैं वह बेहद खास है, लेकिन लोगों को उन्हें “अगला सचिन” कहना शुरू नहीं करना चाहिए। कार्तिक ने कहा कि: “वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं और इस उम्र में उनका प्रदर्शन शानदार है। लेकिन सचिन ने जो हासिल किया था, वह असाधारण था। वैभव के सामने आने वाली चुनौतियां अलग होंगी।” उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा उम्मीदों का दबाव डालना सही नहीं है। मैदान से ज्यादा बाहर की चुनौतियां Dinesh Karthik का मानना है कि आज के दौर में युवा खिलाड़ियों के सामने सोशल मीडिया, लोकप्रियता और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियां ज्यादा हैं। उन्होंने कहा: “सचिन के सामने मैदान के अंदर और बाहर दोनों तरह की चुनौतियां थीं। लेकिन वैभव को खेल के बाहर की चीजों को संभालना सीखना होगा।” कार्तिक ने साफ कहा कि वैभव के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन करियर को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए मानसिक मजबूती भी बेहद जरूरी होगी। आईपीएल ने बदल दी क्रिकेट की तस्वीर Indian Premier League को लेकर भी कार्तिक ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 2008 से लेकर अब तक आईपीएल पूरी तरह बदल चुका है और यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले खेल टूर्नामेंट्स में शामिल हो गया है। उनके मुताबिक: आईपीएल ने युवा खिलाड़ियों को बड़ा मंच दिया है क्रिकेट अब एक मजबूत करियर विकल्प बन चुका है इस लीग ने कई खिलाड़ियों की जिंदगी बदल दी है शानदार फॉर्म में चल रहे हैं वैभव Vaibhav Suryavanshi इस सीजन में शानदार फॉर्म में हैं। Rajasthan Royals की ओर से खेलते हुए उन्होंने 13 मैचों में 579 रन बनाए हैं। इस दौरान: 1 शतक 3 अर्धशतक भी उनके बल्ले से निकले हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स दोनों को प्रभावित किया है। क्या सचिन जैसी उम्मीदें बनेंगी दबाव? क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी युवा खिलाड़ी की तुलना जल्दी किसी दिग्गज से करना उसके करियर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए वैभव को अपनी अलग पहचान बनाने का समय देना जरूरी है।
आईपीएल 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियों में छाए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए सोमवार की शाम बेहद निराशाजनक रही। 300 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से गेंदबाजों पर कहर बरपाने वाले इस उभरते सितारे को सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज प्रफुल हिंगे ने ‘गोल्डन डक’ पर आउट कर सबको चौंका दिया। यह सिर्फ एक विकेट नहीं था, बल्कि उस आक्रामक अंदाज पर सवाल भी था जिसने वैभव को टूर्नामेंट की सबसे बड़ी सनसनी बना दिया है। आंकड़े बताते हैं–कमजोरी नहीं, ताकत है पुल शॉट वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि पुल और हुक शॉट उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत हैं। कुल रन: 67 शॉट्स: 22 आउट: 2 स्ट्राइक रेट: 304.54 चौके/छक्के: 5/7 इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तेज गेंदबाजों के खिलाफ पुल शॉट खेलते हुए उनका प्रदर्शन बेहद आक्रामक और प्रभावी रहा है। ऐसे में इस विकेट को तकनीकी खामी कहना जल्दबाजी होगी। कैसे प्रफुल हिंगे ने रचा ‘जाल’? प्रफुल हिंगे ने किसी असाधारण गेंद का सहारा नहीं लिया, बल्कि वैभव की आक्रामक मानसिकता को ही उनके खिलाफ इस्तेमाल किया। उन्होंने ‘हार्ड लेंथ’ पर गेंद डालते हुए ऐसी गति और उछाल पैदा की, जिससे बल्लेबाज को प्रतिक्रिया का समय कम मिला। वैभव ने अपने पसंदीदा पुल शॉट का प्रयास किया, लेकिन गेंद अपेक्षा से ज्यादा उछली और बल्ले के ऊपरी हिस्से से लगकर हवा में चली गई। विकेटकीपर ने आसान कैच लेकर पारी का अंत कर दिया। यह एक योजनाबद्ध रणनीति थी–जहां गेंदबाज ने बल्लेबाज की ताकत को ही कमजोरी में बदल दिया। ‘हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड’ का खेल वैभव सूर्यवंशी का खेल पूरी तरह ‘हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड’ पर आधारित है। यही आक्रामकता उन्हें तेजी से रन दिलाती है, लेकिन कभी-कभी यही शैली जोखिम भी बन जाती है। इस मैच में भी वही हुआ–जिस पुल शॉट ने उन्हें पहचान दिलाई, उसी शॉट ने उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। तकनीक नहीं, टाइमिंग और परिस्थिति का खेल इस घटना को तकनीकी कमजोरी से जोड़ना सही नहीं होगा। यह एक खराब टाइमिंग, जल्दबाजी में लिया गया फैसला और गेंदबाज की सटीक रणनीति का मिश्रण था। युवा खिलाड़ी के तौर पर वैभव के लिए यह सीखने का मौका जरूर है, लेकिन उनके आंकड़े यह साबित करते हैं कि उनका आक्रामक खेल आगे भी गेंदबाजों के लिए चुनौती बना रहेगा।
मुंबई, एजेंसियां। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के 15 साल के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ अपनी आतिशी बल्लेबाजी से सुर्खियां तो बटोरीं, लेकिन उनके आउट होने के तरीके ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 गेंदों पर 78 रन बनाने वाले वैभव एक बेहद साधारण शॉट खेलकर उस समय आउट हो गए जब उनकी टीम एक ऐतिहासिक स्कोर की ओर बढ़ रही थी। मैच के बाद खुद खिलाड़ी ने भी स्वीकार किया कि उनकी इस लापरवाही की वजह से टीम के खाते में 10 से 20 रन कम जुड़े, जो अंत में टीम के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते थे। विराट के हाथों में थमाया कैच और थमी रनों की रफ्तार राजस्थान की पारी के 9वें ओवर में जब वैभव पूरी तरह सेट हो चुके थे और मैच का रुख तय कर चुके थे, तब उन्होंने क्रुणाल पांड्या की गेंद पर एक अनावश्यक और खराब शॉट खेला। गेंद सीधे विराट कोहली के हाथों में गई और वैभव की आक्रामक पारी का असमय अंत हो गया। उन्होंने अपनी इस पारी में 8 चौके और 7 छक्के जरूर लगाए, लेकिन उनके इस गैर-जिम्मेदाराना विकेट ने मिडिल ऑर्डर पर अचानक दबाव बढ़ा दिया। विशेषज्ञों और कमेंटेटर्स का मानना है कि यदि वे क्रीज पर थोड़ा और संयम दिखाते, तो राजस्थान की जीत और भी बड़ी हो सकती थी। मोहम्मद कैफ और सबा करीम जैसे दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि वैभव से इस मैच में शतक की उम्मीद थी, लेकिन एक 'लूज शॉट' ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। वैभव ने खुद स्वीकार किया कि जब वह गलत शॉट खेलकर आउट होते हैं, तो उन्हें गहरा अफ़सोस होता है क्योंकि इससे टीम को नुकसान पहुंचता है। दिग्गजों को निशाना बनाने की जिद पड़ सकती है भारी वैभव की बल्लेबाजी शैली को लेकर पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान और हरभजन सिंह ने एक अलग थ्योरी पेश की है। उनका दावा है कि वैभव जानबूझकर जसप्रीत बुमराह, जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार जैसे बड़े कद वाले गेंदबाजों को टारगेट करते हैं। यह 'अति-आक्रामकता' किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए भविष्य में जोखिम भरी साबित हो सकती है। इरफान पठान ने कहा कि गेंदबाज अब उनसे डरने लगे हैं, लेकिन यह रणनीति हमेशा सफल नहीं होती। जसप्रीत बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ना या हेजलवुड के एक ओवर में लगातार प्रहार करना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन अनुभवी गेंदबाजों के सामने ऐसी 'बिंदास' शैली अक्सर जल्दी विकेट गंवाने का कारण बनती है। दिग्गजों का मानना है कि बड़े गेंदबाजों के खिलाफ ऐसी आक्रामकता दिखाने के चक्कर में वे अक्सर अपनी पारी को लंबा नहीं खींच पाते। आंकड़ों का मायाजाल और परिपक्वता का अभाव आंकड़े बताते हैं कि वैभव ने आईपीएल के 11 मैचों में 230 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से 452 रन बनाए हैं। इस सीजन के केवल 4 मैचों में ही वे 18 छक्के जड़ चुके हैं, जो उन्हें लीग की छक्का सूची में शीर्ष पर रखता है। हालांकि, इन बड़े नंबरों के पीछे वह परिपक्वता अभी भी नजर नहीं आ रही है जिसकी उम्मीद एक सलामी बल्लेबाज से की जाती है। उनके नाम अब तक कुल 36 चौके और 42 छक्के दर्ज हैं, लेकिन जब तक वे अपनी पारी को बड़े शतकीय स्कोर में तब्दील करने की क्षमता विकसित नहीं करते, तब तक ये छोटी-बड़ी आक्रामक पारियां टीम के लिए पूर्ण रूप से संतोषजनक नहीं होंगी। उनकी प्रैक्टिस और मैच की परिस्थितियों के बीच तालमेल की कमी उनके 'डिसमिसल' में साफ झलकती है। शोहरत के बीच एकाग्रता की चुनौती वैभव सूर्यवंशी का यह सार्वजनिक अफ़सोस उनकी टीम के लिए एक चिंता का विषय है। 15 साल की कच्ची उम्र में मिली यह अत्यधिक शोहरत कहीं उनकी एकाग्रता को भंग न कर दे, इसे लेकर उनके कोच और टीम मैनेजर रोमी भिंडर लगातार उन्हें सतर्क कर रहे हैं। उनके पिता ने भी उन्हें गेम पर फोकस करने की सलाह दी है। मैदान पर उनकी शैली कभी-कभी आत्मविश्वास के बजाय गैर-जिम्मेदारी की ओर झुकती दिखाई देती है। आगामी मुकाबलों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वैभव अपनी इन गलतियों से सीख लेकर लंबी पारियां खेल पाते हैं, या फिर 'लूज शॉट' खेलकर आउट होने का यह सिलसिला उनके करियर के लिए एक बड़ा रोड़ा साबित होगा।
इंडियन प्रीमियर लीग के एक रोमांचक मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी तूफानी बल्लेबाज़ी से क्रिकेट जगत को चौंका दिया। राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेले गए मैच में महज़ 15 साल के इस बल्लेबाज़ ने 26 गेंदों पर 78 रन ठोककर इतिहास रच दिया। 300 के स्ट्राइक रेट से मचाया तहलका वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक पारी में 8 चौके और 7 छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 300 से अधिक रहा, जिसने RCB के गेंदबाज़ों को पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया। उनकी बल्लेबाज़ी में आत्मविश्वास और आक्रामकता साफ झलक रही थी। IPL में बनाया अनोखा महारिकॉर्ड वैभव सूर्यवंशी ने इस पारी के साथ एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जो अब तक कोई बल्लेबाज़ नहीं बना पाया था। IPL की पहली 11 पारियों के बाद सबसे ज्यादा छक्के: 42 – वैभव सूर्यवंशी 30 – जेक फ्रेज़र-मैकगर्क 26 – शॉन मार्श 24 – नीतीश राणा 23 – क्रिस लिन / ग्लेन मैक्सवेल यह आंकड़े दिखाते हैं कि वैभव किस स्तर की आक्रामक बल्लेबाज़ी कर रहे हैं। एक और ऐतिहासिक उपलब्धि वैभव सूर्यवंशी IPL इतिहास के पहले भारतीय बल्लेबाज़ बन गए हैं, जिन्होंने 300+ स्ट्राइक रेट के साथ एक से अधिक 50+ स्कोर बनाए हैं। गेंदबाज़ों पर भारी पड़े वैभव अपने छोटे से IPL करियर में वैभव ने बड़े-बड़े गेंदबाज़ों के खिलाफ भी बेखौफ खेल दिखाया है: IPL की पहली गेंद – छक्का जसप्रीत बुमराह की पहली गेंद – छक्का भुवनेश्वर कुमार की पहली गेंद – चौका जोश हेज़लवुड की पहली 4 गेंदें – 3 चौके, 1 छक्का शार्दुल ठाकुर की पहली गेंद – छक्का राजस्थान रॉयल्स की शानदार जीत इस मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 6 विकेट से हराया। वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल की शानदार पारियों ने टीम को जीत दिलाई। वैभव को उनकी शानदार बल्लेबाज़ी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
आईपीएल 2026 में एक ऐसा मुकाबला देखने को मिला जिसने क्रिकेट फैंस को हैरान कर दिया। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया के दिग्गज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी चौंका दिया। महज 15 साल के इस युवा खिलाड़ी ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने मैच का रुख ही बदल दिया। गुवाहाटी में दिखा तूफानी खेल राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए इस मुकाबले में शुरुआत से ही राजस्थान का दबदबा रहा। बारिश के कारण मैच 11 ओवर का कर दिया गया, लेकिन इस छोटे मुकाबले में भी बड़े रिकॉर्ड बन गए। वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 14 गेंदों में 39 रन ठोक दिए, जिसमें 5 शानदार छक्के शामिल थे। खास बात यह रही कि उन्होंने बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए। जायसवाल के साथ मिलकर मचाया कहर यशस्वी जायसवाल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 32 गेंदों में नाबाद 77 रन बनाए। दोनों की जोड़ी ने मिलकर सिर्फ 5 ओवर में 80 रन जोड़ दिए और टीम को 11 ओवर में 150 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। मुंबई की टीम रही बेबस 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की टीम कभी मैच में वापसी नहीं कर पाई और 9 विकेट खोकर सिर्फ 123 रन ही बना सकी। तीन मैच में वैभव का प्रदर्शन CSK के खिलाफ: 17 गेंद में 52 रन GT के खिलाफ: 18 गेंद में 31 रन MI के खिलाफ: 14 गेंद में 39 रन क्यों खास है ये पारी? इतनी कम उम्र में दुनिया के टॉप गेंदबाज के खिलाफ इस तरह की बल्लेबाजी ने वैभव सूर्यवंशी को रातों-रात स्टार बना दिया है। उनकी निडर बल्लेबाजी ने यह दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद मजबूत है।
भारतीय क्रिकेट में एक नया सितारा तेजी से उभर रहा है। महज 15 साल की उम्र में Vaibhav Suryavanshi ने T-20 क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। Rajasthan Royals की ओर से खेलते हुए चेन्नई के खिलाफ मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 17 गेंदों में 52 रन की विस्फोटक पारी खेली और अपनी टीम को 8 विकेट से शानदार जीत दिलाई। इस दौरान उन्होंने 4 चौके और 5 छक्के लगाए, यानी अपनी पारी के 52 में से 46 रन केवल बाउंड्री से आए। शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज वैभव ने अपनी पारी की दूसरी ही गेंद पर छक्का जड़कर इरादे साफ कर दिए। उन्होंने Matt Henry की गेंद पर छक्का लगाकर शुरुआत की और फिर लगातार आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 15 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। T-20 में बनाया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड इस पारी के साथ वैभव सूर्यवंशी T-20 इतिहास में 15 साल की उम्र में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। अब तक वह इस उम्र में कुल 67 छक्के जड़ चुके हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। दिलचस्प बात यह है कि इस उम्र में बाकी खिलाड़ियों के कुल छक्के मिलाकर भी इस आंकड़े के करीब नहीं पहुंचते। IPL में भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड वैभव ने IPL में भी एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपनी पहली 8 पारियों में 29 छक्के लगाकर सबसे ज्यादा सिक्स मारने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इस मामले में उन्होंने Jake Fraser-McGurk को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 28 छक्के थे। इसके अलावा, वैभव IPL इतिहास में ऐसे पहले खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने एक ही फ्रेंचाइजी के लिए 18 गेंदों से कम में एक से ज्यादा बार अर्धशतक जड़ा है। भविष्य का सुपरस्टार? वैभव की इस धमाकेदार पारी ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा मैच विनर मिल सकता है। इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास, शॉट चयन और आक्रामकता उन्हें खास बनाती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।