ईरान

Iranian officials respond to reports of a possible US-Iran agreement amid ongoing diplomatic negotiations.
ट्रंप के समझौता दावे को ईरान ने नकारा, कहा- अभी किसी अंतिम डील पर फैसला नहीं

  अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान बोला- समझौते की खबरें अटकलों पर आधारित ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते को लेकर सामने आ रही खबरें केवल अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है और मसौदे का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बघाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी बघाई ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी निर्धारित "रेड लाइन्स" से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि वार्ता जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चिंता ईरानी प्रवक्ता ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने किया था समझौते का दावा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हस्ताक्षर समारोह यूरोप में आयोजित किया जा सकता है और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। भारतीय जहाज पर हमले को लेकर अमेरिका पर आरोप इस बीच ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले और उसमें भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे पर भी ईरान ने अमेरिका की आलोचना की है। इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में अमेरिकी कार्रवाई को "राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती" और "सशस्त्र लूट" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां वॉशिंगटन समझौते को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं तेहरान का कहना है कि बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि दोनों देश वास्तव में किसी व्यापक समझौते के करीब हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks and possible nuclear deal during a political event.
ट्रंप का बड़ा दावा: ‘दो हफ्तों में ईरान पर पूर्ण विजय’, परमाणु समझौते के भी दिए संकेत

  वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक और रणनीतिक टकराव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अगले दो सप्ताह अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे और इसी अवधि में ईरान के खिलाफ “पूर्ण विजय” हासिल होने की संभावना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच एक नए परमाणु समझौते की राह खुल सकती है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ा सैन्य तनाव फिलहाल कम होता दिखाई दे रहा है और क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। चुनावी कार्यक्रम में किया बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी एक वर्चुअल राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित किया। कार्यक्रम रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के समर्थन में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है और समझौते की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। ट्रंप ने कहा, “हम बातचीत कर रहे हैं और वे एक अच्छा समझौता करना चाहते हैं। वे हमें लगभग हर वह चीज देने को तैयार हैं जिसकी हमें जरूरत है। वे परमाणु हथियार नहीं रखने पर भी तैयार हैं।” ‘दो सप्ताह में दिखेगी असली जीत’ राष्ट्रपति ट्रंप ने अगले पखवाड़े को निर्णायक बताते हुए कहा कि अमेरिका जल्द ही अपनी रणनीतिक सफलता की घोषणा कर सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम यह संघर्ष जीत रहे हैं, लेकिन असली जीत अगले दो सप्ताह में दिखाई देगी। हम पूर्ण विजय की घोषणा करेंगे। यह पूरी जीत होगी और बहुत जल्द होगी।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि समझौता सफल रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ईरान-इजरायल तनाव के बीच आया बयान ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सप्ताहांत में ईरान और इजरायल के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। तनाव बढ़ने के बाद इजरायल ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने भी जवाबी हमले किए। बाद में दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिली। नेतन्याहू ने हमले रोकने की पुष्टि की इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि इजरायली सेना ने फिलहाल ईरानी ठिकानों पर अपने सैन्य अभियान रोक दिए हैं। उन्होंने किसी औपचारिक युद्धविराम की घोषणा नहीं की, लेकिन सैन्य कार्रवाई में आई नरमी को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह फिलहाल अपने सैन्य अभियान को आगे नहीं बढ़ाएगा।  तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई नई कार्रवाई होती है तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं। परमाणु समझौते पर फिर बढ़ीं उम्मीदें ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई दौर की वार्ताएं भी विफल रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष किसी नए समझौते पर सहमत होते हैं तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है। पहले भी दे चुके हैं ऐसी समयसीमा यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी कूटनीतिक सफलता के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की हो। इससे पहले भी उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों और युद्धविराम प्रयासों को लेकर इसी तरह की समय-सीमा का उल्लेख किया था। अब एक बार फिर ट्रंप ने अगले दो सप्ताह को निर्णायक बताते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इन दावों पर अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगी। पश्चिम एशिया पर टिकी दुनिया की नजर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते घटनाक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों और संभावित परमाणु समझौते की दिशा में होने वाली प्रगति आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaking about attack on Ayatollah Khamenei's office during conflict.
खामेनेई के दफ्तर पर हमले में बाल-बाल बचे थे अराघची, बोले- दो दिन तक नहीं पता था सुप्रीम लीडर जिंदा हैं या नहीं

  ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका-इजरायल संघर्ष के दौरान हुए एक बड़े हमले को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष के शुरुआती दिनों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले के समय वह उसी इमारत में मौजूद थे और मलबे के बीच से निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। अराघची के अनुसार, हमले के बाद दो दिनों तक उन्हें यह भी नहीं पता था कि खामेनेई किस स्थिति में हैं। हमले के वक्त खामेनेई के कार्यालय में मौजूद थे अराघची लेबनान के टीवी चैनल अल-मयादीन को दिए इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि संघर्ष के शुरुआती घंटों में खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया गया था। उस समय वे भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा, “विस्फोट के बाद मेरी पहली चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की स्थिति को लेकर थी। उस समय हालात बेहद अराजक थे और इमारत के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे।” दो दिन तक नहीं मिली खामेनेई की जानकारी अराघची ने बताया कि हमले के बाद लगातार दो दिनों तक उन्हें खामेनेई के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इस दौरान पूरा ध्यान राहत, बचाव और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहा। उनके मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार खामेनेई को सुरक्षित बंकर या विशेष स्थान पर जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। ‘जब तक जनता सुरक्षित नहीं, मैं भी नहीं’ विदेश मंत्री के अनुसार, खामेनेई का मानना था कि यदि आम ईरानी नागरिकों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध नहीं है, तो वे भी किसी विशेष सुरक्षा सुविधा का लाभ नहीं लेंगे। अराघची ने दावा किया कि खामेनेई ने कहा था कि देश की जनता जिस स्थिति का सामना करेगी, वही स्थिति वे भी स्वीकार करेंगे। उन्होंने युद्ध के दौरान खामेनेई के नेतृत्व और फैसलों की भी सराहना की। खाड़ी देशों को पहले ही दी गई थी चेतावनी इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले उन्होंने कई खाड़ी देशों का दौरा किया था और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में क्षेत्रीय सैन्य अड्डों का उपयोग किया गया, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ही तनाव बढ़ाने का एक प्रमुख कारण रही है। ईरान की प्रतिक्रिया ने विरोधियों को चौंकाया अराघची ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान की जवाबी क्षमता को कम आंका था। उनके अनुसार, बड़े पैमाने पर हमलों के बावजूद ईरान ने बहुत कम समय में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे विरोधी पक्ष की रणनीतिक गणनाएं प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया की तीव्रता ने कई देशों को आश्चर्य में डाल दिया। नेतृत्व परिवर्तन पर भी दिया बयान ईरानी विदेश मंत्री ने देश के नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई राष्ट्रीय मामलों और शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं तथा सरकारी संस्थानों के साथ उनका नियमित संवाद बना हुआ है। ईरान की आधिकारिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े किसी भी बदलाव पर अंतिम पुष्टि केवल संबंधित संवैधानिक संस्थाओं द्वारा ही की जा सकती है। कैसे शुरू हुआ था 2026 का संघर्ष? 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान में परमाणु ठिकानों, मिसाइल अड्डों, वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-IV’ के तहत मिसाइल और ड्रोन हमले किए। संघर्ष का प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया में देखा गया और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी इसका असर पड़ा। फिलहाल अप्रैल 2026 से संघर्षविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तनावपूर्ण बयानबाजी जारी है। ऐसे में क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Iranian President Masoud Pezeshkian amid reports of resignation denied by government officials
ईरान के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरों पर ईरान की सफाई, कहा- अफवाहों पर ध्यान न दें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के इस्तीफे की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि देश की निर्णय प्रक्रिया में बढ़ते सैन्य प्रभाव और सरकार की सीमित भूमिका से नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की है। ईरानी सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? ब्रिटिश-ईरानी मीडिया संस्थान 'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सर्वोच्च नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय फैसलों में सरकार की भूमिका कम होने से वह असंतुष्ट थे। राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया निराधार राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों ने इन खबरों को अफवाह करार देते हुए कहा कि पेजेशकियन सामान्य रूप से अपने सभी सरकारी दायित्व निभा रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग ने कहा कि विदेशी मीडिया द्वारा फैलाई जा रही खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। तस्नीम एजेंसी ने भी किया खंडन आईआरजीसी से संबद्ध तस्नीम न्यूज एजेंसी ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि राष्ट्रपति ने इस्तीफा नहीं दिया है और सरकार अपना कामकाज सामान्य रूप से चला रही है। सरकार और सुरक्षा संस्थाओं के रिश्तों पर चर्चा पिछले कुछ महीनों से ईरान की निर्वाचित सरकार और सैन्य-सुरक्षा संस्थाओं के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में इस्तीफे की अटकलों को बल मिला। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश की एकता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फैलाई जा रही ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है। सत्ता के केंद्र को लेकर बहस जारी विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में कई प्रभावशाली संस्थाओं और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका रहती है। लेकिन फिलहाल राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सरकार लगातार इन दावों को भ्रामक प्रचार बता रही है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu concerned over possible US-Iran agreement during ongoing diplomatic talks
अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच इजरायल की बढ़ी बेचैनी, नेतन्याहू को सता रहा ‘खराब समझौते’ का डर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति समझौते की बातचीत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। इस बीच इजरायल की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला संभावित समझौता इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना आगे बढ़ सकता है। वार्ता में इजरायल का प्रभाव घटने की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में इजरायल की भूमिका पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि मौजूदा वार्ता प्रक्रिया पर उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा और अंतिम निर्णय मुख्य रूप से वाशिंगटन और तेहरान के बीच ही तय हो रहे हैं। सार्वजनिक रूप से इजरायली नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की आलोचना करने से बच रहा है, लेकिन अंदरखाने बढ़ती चिंता की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान पर दबाव बनाए रखने की थी मांग सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में घोषित शुरुआती युद्धविराम के बाद नेतन्याहू लगातार इस बात की वकालत करते रहे कि ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए। उनका मानना था कि लगातार दबाव से तेहरान की रणनीतिक क्षमता कमजोर की जा सकती है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य दबाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक बातचीत और समझौते के रास्ते को प्राथमिकता दी। इससे दोनों सहयोगी देशों के दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट हो गया। किन मुद्दों को लेकर चिंतित है इजरायल? इजरायल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि संभावित समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी नेटवर्क) से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त प्रतिबंध या नियंत्रण शामिल न हो। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि यदि इन प्रमुख सुरक्षा मुद्दों का समाधान किए बिना ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो तेहरान को रणनीतिक लाभ मिल सकता है। 'खराब अंतरिम समझौते' का डर रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिका किसी ऐसे अंतरिम समझौते पर सहमत हो सकता है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केवल सीमित नियंत्रण स्थापित करे। इजरायल चाहता है कि किसी भी समझौते में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर स्पष्ट और सत्यापित प्रावधान हों। इजरायली पक्ष का तर्क है कि केवल आश्वासनों के आधार पर किया गया समझौता भविष्य में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। पश्चिम एशिया की राजनीति पर रहेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई व्यापक समझौता होता है, तो उसका असर पूरे पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में इजरायल, खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर लगातार अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि संभावित समझौते में इजरायल की मांगों को कितनी जगह मिलती है।  

surbhi मई 30, 2026 0
UAE fighter jets and Gulf region map amid rising Iran-UAE tensions after ceasefire
सीजफायर के बाद भी UAE ने किया ईरान पर हमला, रिपोर्ट में बड़ा दावा, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सीजफायर के बाद ईरान के अंदर कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ दिनों बाद UAE ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर जवाबी हवाई कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन स्थानों को निशाना बनाया गया उनमें फारस की खाड़ी स्थित लावन द्वीप की रिफाइनरी, होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम और अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास बंदरगाह शहर और असलुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। ऊर्जा केंद्रों पर हमलों से बढ़ी चिंता रिपोर्ट के मुताबिक, असलुयेह ऊर्जा केंद्र पर हुए कथित हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। यह क्षेत्र ईरान के ऊर्जा उत्पादन और निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया गया है कि इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव डाला, ताकि ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को सीमित किया जा सके। अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय का दावा रिपोर्ट में मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि UAE ने ईरान के खिलाफ चलाए गए व्यापक सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय में काम किया। दावे के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद भी कुछ हफ्तों तक यह अभियान जारी रहा। हालांकि इन आरोपों पर UAE, अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खाड़ी देशों में बदली रणनीतिक स्थिति विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि UAE ने ईरान के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक आक्रामक रणनीति अपनाई है। जहां अधिकांश खाड़ी देश संघर्ष के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव से बचने की कोशिश करते रहे, वहीं UAE कथित तौर पर ईरान को सीधे जवाब देने वाले देशों में शामिल होता दिखाई देता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न तो UAE और न ही ईरान ने रिपोर्ट में बताए गए हमलों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में क्षेत्रीय घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी नए सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
British and French naval forces prepare mine-clearing operations near the Strait of Hormuz amid Iran deal talks.
होर्मुज से माइंस हटाने की तैयारी में ब्रिटेन-फ्रांस, ईरान डील पर टिकी नजर

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित और सामान्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वे होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने में सहयोग करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जिब्राल्टर में तैनात अपने युद्धपोत RFA Lyme Bay को इस मिशन के लिए तैयार रखा है। इस जहाज पर ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिक मौजूद हैं। साथ ही माइंस को निष्क्रिय करने वाले विशेष समुद्री ड्रोन और सैन्य उपकरण भी तैनात किए गए हैं। शांति समझौते के बाद शुरू हो सकता है ऑपरेशन ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह सीधे ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा। हालांकि, यदि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है और हालात सामान्य होते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से माइंस हटाने का अभियान शुरू किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ समझौते को लेकर “व्यापक सहमति” बन चुकी है, हालांकि अंतिम रूप अभी बाकी है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हालिया तनाव के दौरान यहां बड़ी संख्या में समुद्री माइंस बिछाई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जहाजों को केवल निर्धारित रूट से गुजरने के निर्देश भी दिए थे। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। ट्रंप ने NATO देशों की आलोचना की थी ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका चाहता था कि NATO सहयोगी देश होर्मुज को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। लेकिन कई यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया था कि वे सीधे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। ब्रिटेन और फ्रांस ने अब संकेत दिया है कि शांति बहाल होने के बाद वे माइंस हटाने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में मदद करेंगे। ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने किया युद्धपोत का दौरा ब्रिटेन के रक्षा मंत्री John Healey (कुछ रिपोर्टों में रक्षा अधिकारियों का हवाला) ने जिब्राल्टर में मौजूद RFA Lyme Bay का दौरा किया। यह एक amphibious warship है, जिसे समुद्री सुरक्षा और माइंस हटाने के विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईरान ने इजरायली ड्रोन गिराने का दावा किया इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुजगान प्रांत के ऊपर उड़ रहे एक इजरायली टोही ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, नौसेना ने ड्रोन का मलबा भी बरामद कर लिया है। इजरायल की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Reports claim Mojtaba Khamenei is living in a secret location under heightened security amid regional tensions.
गुप्त ठिकाने पर रह रहे हैं मोजतबा खामेनेई, अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा दावा

Mojtaba Khamenei को लेकर अमेरिकी मीडिया में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के शीर्ष नेता इस समय बेहद गोपनीय तरीके से एक अज्ञात स्थान पर रह रहे हैं और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क लगभग सीमित कर दिया गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई तक सीधे पहुंचना लगभग असंभव हो गया है। उनसे संपर्क केवल विशेष दूतों और गुप्त कुरियर नेटवर्क के जरिए किया जा रहा है। यही वजह है कि Iran और United States के बीच चल रही शांति वार्ता और संभावित पीस डील की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत में देरी रिपोर्ट के अनुसार, Donald Trump प्रशासन के साथ बातचीत कर रहे ईरानी अधिकारियों को भी अपने ही सिस्टम के भीतर संवाद स्थापित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया कि अमेरिका की ओर से भेजे गए किसी भी प्रस्ताव या समझौते के मसौदे को मोजतबा खामेनेई तक पहुंचाने और वहां से जवाब वापस आने में काफी समय लग रहा है। इसका कारण यह है कि उनके पास सीधे संपर्क का सामान्य माध्यम अब मौजूद नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई ने अपने करीबी अधिकारियों को पहले से निर्देश दे रखे हैं कि किन मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है और किन विषयों से बचना है। शीर्ष अधिकारियों को भी नहीं पता लोकेशन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुरक्षा कारणों से ईरानी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी मोजतबा खामेनेई की वास्तविक लोकेशन की जानकारी नहीं है। संदेशों के आदान-प्रदान के लिए विशेष कुरियर नेटवर्क बनाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उनकी लोकेशन को पूरी तरह गुप्त रखना है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि जवाब आने में काफी देर हो रही है और इससे वार्ता प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन के बाद बढ़ी सुरक्षा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियानों के दौरान ईरानी सरकारी तंत्र से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर कई वरिष्ठ नेताओं की पहचान की गई थी। इसी क्रम में “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान हुए हमलों में मोजतबा खामेनेई के घायल होने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है और उनकी सार्वजनिक मौजूदगी लगभग समाप्त हो गई है। पिता अली खामेनेई के बाद और बढ़ी सतर्कता रिपोर्ट के मुताबिक, Ali Khamenei की मौत के बाद सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इसी कारण मोजतबा खामेनेई अब सार्वजनिक कार्यक्रमों से लगभग दूर हैं। ईरानी मीडिया में समय-समय पर उनके नाम से जारी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के कई अधिकारी फिलहाल भूमिगत बंकरों से काम कर रहे हैं और सीधे संवाद से बच रहे हैं, जिससे अमेरिका के साथ बातचीत की गति और धीमी हो गई है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Map showing submarine internet cables near Strait of Hormuz amid rising Iran digital control concerns.
ईरान का नया ‘डिजिटल हथियार’  होर्मुज की इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण की कोशिश से दुनिया में बढ़ी चिंता

Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump issues strong warning to Iran amid rising Middle East tensions and nuclear dispute.
‘घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी’, ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना   ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump and Iranian leaders exchange sharp warnings amid rising US-Iran tensions over peace proposal talks.
ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को बताया ‘कचरा’, तेहरान बोला- हमला हुआ तो करारा जवाब मिलेगा

Iran और United States के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो उसके सशस्त्र बल “हमलावर को सबक सिखाने” के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप ने क्या कहा? वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को “अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा: “यह युद्धविराम गंभीर लाइफ सपोर्ट पर है।” ट्रंप ने हालात की तुलना ऐसे मरीज से की जिसकी “जीवित रहने की संभावना सिर्फ एक प्रतिशत” बची हो। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने दी जवाबी चेतावनी ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि ईरान किसी भी संघर्ष के लिए तैयार है। उन्होंने X पर लिखा: “हमारे सशस्त्र बल किसी भी हमले का जवाब देने और हमलावर को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि “खराब रणनीति और गलत फैसलों का परिणाम हमेशा बुरा ही होता है।” ईरान के प्रस्ताव में क्या था? ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, तेहरान ने जो प्रस्ताव दिया था उसमें: ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने पूरे क्षेत्र में सैन्य अभियान रोकने लेबनान में Hezbollah को निशाना बनाने वाले हमलों पर रोक विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें शामिल थीं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा: “हमने किसी तरह की रियायत नहीं मांगी, सिर्फ ईरान के वैध अधिकारों की मांग की है।” होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा दबाव तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। Strait of Hormuz में पहले से चल रही रुकावटों के कारण तेल बाजार दबाव में हैं। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पेट्रोल-डीजल महंगा होना खाद्य और परिवहन लागत बढ़ना जैसे असर देखने को मिल सकते हैं। क्यों बढ़ रहा है तनाव? विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद: ईरान के परमाणु कार्यक्रम अमेरिकी प्रतिबंध मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी इजरायल और हिजबुल्ला को लेकर टकराव को लेकर है। हालिया बयानबाजी से साफ है कि फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Donald Trump faces Iran tensions ahead of a crucial diplomatic visit to China
चीन दौरे से पहले मुश्किल में ट्रंप: ईरान से टकराव या कूटनीतिक समझौता? क्या है पूरा प्लान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक जटिल वैश्विक समीकरण के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। एक ओर ईरान के साथ बढ़ता सैन्य और आर्थिक तनाव है, तो दूसरी ओर 14-15 मई को प्रस्तावित चीन का बेहद अहम दौरा। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या पहले ईरान के साथ टकराव सुलझाया जाए या चीन के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दी जाए? क्यों इतना अहम है चीन दौरा? व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा कई वजहों से बेहद महत्वपूर्ण है: अमेरिका-चीन के बीच व्यापार और प्रतिबंधों को लेकर तनाव वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति का मुद्दा दरअसल, अमेरिका यह समझता है कि चीन के साथ सीधी बातचीत के बिना मौजूदा संकटों का समाधान मुश्किल होगा। यही वजह है कि पहले टाले जा चुके इस दौरे को अब हर हाल में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। ईरान संकट ने बढ़ाई कूटनीतिक चुनौती ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान से जुड़ी स्थिति है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, वहां बढ़ते तनाव ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई होता है मार्च की शुरुआत से ही यहां व्यवधान की स्थिति बनी हुई है कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है इसका सीधा असर वैश्विक बाजार, खासकर तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ा है। ऊर्जा संकट और वैश्विक असर चीन समेत एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। रास्ता बाधित होने के कारण: तेल की सप्लाई कम हुई कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ी यही वजह है कि अब यह मुद्दा अमेरिका-चीन वार्ता का केंद्र बन चुका है। चीन की भूमिका–मध्यस्थ या रणनीतिक खिलाड़ी? चीन इस पूरे विवाद में खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन स्थिति इतनी सरल नहीं है: अमेरिका ने चीन की कई शिपिंग कंपनियों और तेल रिफाइनरियों पर प्रतिबंध लगाए हैं आरोप है कि ये कंपनियां ईरान से तेल खरीदकर अमेरिकी नियमों का उल्लंघन कर रही हैं ऐसे में चीन एक तरफ समाधान चाहता है, तो दूसरी तरफ अपने आर्थिक हितों की भी रक्षा कर रहा है। ट्रंप के सामने दो रास्ते इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप प्रशासन के सामने दो बड़े विकल्प हैं: 1. सैन्य दबाव बढ़ाना ईरान पर और कड़े प्रतिबंध सैन्य कार्रवाई की संभावना क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी बढ़ाना 2. कूटनीतिक समाधान चीन की मध्यस्थता का इस्तेमाल ईरान के साथ बातचीत ऊर्जा और व्यापार को स्थिर करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप फिलहाल दोनों रणनीतियों को साथ लेकर चल रहे हैं–एक तरफ दबाव, दूसरी तरफ बातचीत। दौरे पर पड़ सकता है असर? अगर ईरान के साथ तनाव और बढ़ता है, तो: ट्रंप का चीन दौरा फिर टल सकता है या फिर दौरे का एजेंडा पूरी तरह ईरान संकट पर केंद्रित हो सकता है लेकिन अगर कोई आंशिक समाधान निकलता है, तो यह दौरा वैश्विक राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Donald Trump speaking about Iran during an Oval Office address
मेरी एक कॉल से रुकी 8 महिलाओं की फांसी”–ट्रंप का दावा, ईरान की ताकत पर भी बड़ा बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। ओवल ऑफिस में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी एक कॉल के बाद ईरान में 8 महिलाओं को दी जाने वाली फांसी रोक दी गई। “एक फोन कॉल से टली फांसी” ट्रंप ने कहा कि ईरान 8 महिलाओं को फांसी देने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए कहा–“ऐसा मत करो, पूरी दुनिया देख रही है।” उन्होंने दावा किया कि उनकी इस अपील के बाद फांसी रोक दी गई। विरोध प्रदर्शनों पर गंभीर आरोप ट्रंप के अनुसार, पिछले दो महीनों में ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 42,000 लोगों की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग निहत्थे थे और सिर्फ विरोध करने के कारण मारे गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ईरान की सैन्य ताकत पर दावा ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। उनके मुताबिक: नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है वायुसेना भी काफी हद तक निष्क्रिय हो गई है ड्रोन फैक्ट्रियां 82% तक नष्ट मिसाइल फैक्ट्रियां करीब 90% तक तबाह उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौता करने को “बेताब” है। अर्थव्यवस्था पर भी असर ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की नाकेबंदी (ब्लॉकेड) के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान को तेल से लगभग कोई आय नहीं हो रही और आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। अन्य मुद्दों का भी जिक्र ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में एक पहलवान समेत कई लोगों को राजनीतिक बयानों के कारण फांसी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां विरोध करने वालों पर सख्ती की जा रही है और मौत के वास्तविक आंकड़े आधिकारिक आंकड़ों से ज्यादा हो सकते हैं। बाजार और रणनीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि डॉव जोन्स इंडेक्स और एसएंडपी 500 नई ऊंचाइयों पर पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने ईरान पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ईरान का जवाब वहीं, ईरान की ओर से जवाब देते हुए संसद अध्यक्ष ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मजबूत किया जाएगा और फारस की खाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अमेरिका के किसी भी हस्तक्षेप का मुकाबला करने की बात कही।

surbhi मई 1, 2026 0
Donald Trump and Iranian leader amid rising tensions over nuclear talks and Strait of Hormuz
युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

Iran ने अमेरिका के साथ जारी तनाव खत्म करने के लिए एक नया चरणबद्ध प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump इससे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। इससे युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया? ईरान की तीन-स्तरीय योजना में शामिल हैं: पहले अमेरिका-इज़राइल के साथ युद्धविराम फिर Strait of Hormuz में नौवहन बहाल करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना उसके बाद परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत तेहरान चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा युद्ध खत्म होने और समुद्री विवाद सुलझने के बाद हो। अमेरिका क्यों नाराज? वॉशिंगटन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अलग नहीं किया जा सकता। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि किसी भी समझौते की शुरुआत ही परमाणु हथियारों के मुद्दे से हो। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता दे। होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। यहां जारी तनाव से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। कूटनीति की राह कठिन प्रस्ताव पर गतिरोध के कारण इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता भी टल गई। इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, जिससे निकट भविष्य में समझौते की संभावना कमजोर दिख रही है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Russia defends Iran at UN Security Council amid rising tensions over Strait of Hormuz
UN में रूस ने ईरान का किया बचाव, होर्मुज पर अमेरिका-पश्चिम को घेरा

Russia ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर Iran का खुलकर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, पर तीखा हमला बोला और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कदमों को जायज़ ठहराया। रूस ने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि Vasily Nebenzya ने कहा कि युद्ध की स्थिति में किसी भी तटीय देश को अपनी सुरक्षा के लिए समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सीमित करने का अधिकार है। उनका कहना था कि ईरान पर पूरा दोष मढ़ना गलत है, जबकि वह खुद बाहरी दबाव और हमलों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों पर 'समुद्री डाकू' वाला हमला नेबेंज्या ने पश्चिमी देशों की तुलना समुद्री डाकुओं से करते हुए कहा कि वे अपने "गैरकानूनी" कदमों को एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की आड़ में छिपाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश खुलेआम समुद्र में लूटपाट जैसी कार्रवाइयों का समर्थन कर रहे हैं। पहले भी रूस-चीन ने किया था वीटो इस महीने की शुरुआत में China और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना था। पुतिन ने भी जताया समर्थन इसी दिन रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और ईरान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। क्यों अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
US and Iran delegates clash at UN Nuclear Non-Proliferation Treaty review conference in New York
UN परमाणु संधि सम्मेलन में अमेरिका-ईरान आमने-सामने, उपाध्यक्ष पद को लेकर तीखी बहस

United Nations में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विवाद ईरान को सम्मेलन का उपाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर हुआ। क्या है पूरा मामला? न्यूयॉर्क में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन में ईरान को 34 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया। यह नियुक्ति गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की ओर से की गई थी। अमेरिका ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अमेरिका ने क्यों जताया विरोध? अमेरिकी अधिकारी क्रिस्टोफर यीव ने कहा कि ईरान का इस पद पर होना NPT की भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है और International Atomic Energy Agency के साथ भी पूरा सहयोग नहीं कर रहा। उन्होंने इसे सम्मेलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया। ईरान का पलटवार ईरान के प्रतिनिधि रज़ा नजाफी ने अमेरिकी आरोपों को "बेबुनियाद और राजनीतिक" करार दिया। उन्होंने अमेरिका पर ही परमाणु हथियारों के विस्तार और दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। ईरान का रुख ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। हालांकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। फिलहाल, यह टकराव वैश्विक परमाणु सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Reza Pahlavi targeted with tomato sauce after press conference in Berlin
बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर फेंका गया टमाटर सॉस, VIDEO वायरल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर एक व्यक्ति ने लाल रंग का तरल पदार्थ फेंक दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टमाटर केचप था। घटना उस समय हुई जब पहलवी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अपने समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैसे हुआ हमला? वीडियो में देखा जा सकता है कि रेजा पहलवी समर्थकों की ओर हाथ हिला रहे थे। तभी पीछे से एक व्यक्ति अचानक आया और उन पर लाल तरल फेंक दिया। लाल पदार्थ उनके कोट और गर्दन पर गिरा सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया पुलिस ने मौके पर ही उसे हिरासत में ले लिया हालांकि, पहलवी इस घटना में पूरी तरह सुरक्षित रहे। हमले के बाद भी नहीं रुके पहलवी हमले के बावजूद रेजा पहलवी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने समर्थकों का अभिवादन जारी रखा और बाद में अपनी कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। यह घटना उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच मौजूद गहरे राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाती है। सीजफायर पर की थी तीखी आलोचना घटना से कुछ देर पहले पहलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि तेहरान के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा करना एक बड़ी भूल होगी और पश्चिमी देशों को ईरान के साथ केवल "यथास्थिति" बनाए रखने की नीति छोड़नी चाहिए। कौन हैं रेजा पहलवी? रेजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1967 में उन्हें क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उनका परिवार निर्वासन में चला गया। वे लंबे समय से ईरान की मौजूदा इस्लामिक सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। हाल के महीनों में वे ईरान में राजनीतिक बदलाव की मांग को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Donald Trump orders US Navy to destroy Iranian boats laying mines in Strait of Hormuz
ट्रंप का बड़ा आदेश: हॉरमुज में बारूदी सुरंग बिछाने वाली ईरानी नौकाओं को देखते ही मार गिराओ

ईरान को सीधी सैन्य चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि अगर ईरान की छोटी नौकाएं हॉरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने की कोशिश करें, तो उन्हें तुरंत "shoot and kill" किया जाए। यह आदेश ऐसे समय आया है जब ईरान ने एक बार फिर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। क्यों अहम है हॉरमुज जलडमरूमध्य? हॉरमुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। यहां किसी भी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ता है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा: "मैंने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि हॉरमुज में बारूदी सुरंग बिछाने वाली किसी भी छोटी नौका को तुरंत मार गिराया जाए।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी माइंस्वीपर्स फिलहाल जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाने में जुटे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल टैंकर भी पकड़ा तनाव को और बढ़ाते हुए अमेरिकी सेना ने भारतीय महासागर में ईरानी तेल तस्करी से जुड़े एक और टैंकर को जब्त कर लिया। बताया जा रहा है कि यह जहाज चीन की ओर जा रहा था और पहले भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ चुका था। ईरान ने भी दिखाई ताकत एक दिन पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हॉरमुज में तीन मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया था, जिनमें से दो को कब्जे में ले लिया गया। ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख ने इसे "इस्लामी ईरान की ताकत का प्रदर्शन" बताया। बातचीत पर अभी भी संशय हालांकि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कराने की कोशिश जारी है, लेकिन फिलहाल कोई बैठक तय नहीं हो सकी है। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नाकेबंदी हटाए। अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले समुद्री मार्ग पूरी तरह खोले। लेबनान में सीजफायर बढ़ाया गया ट्रंप ने साथ ही घोषणा की कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लागू युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। वैश्विक बाजारों पर असर संभव हॉरमुज में बढ़ते तनाव से: तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है शिपिंग बीमा महंगा हो सकता है वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Donald Trump warns Iran over nuclear tensions as US boosts military presence in Middle East
ट्रंप का ईरान को कड़ा संदेश: “परमाणु हथियार नहीं, लेकिन समय खत्म हो रहा है” – मिडल ईस्ट में बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बयानबाजी तेज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि ईरान के पास शांति समझौते के लिए “बहुत कम समय बचा है”। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। ट्रंप का दावा: “पारंपरिक तरीके से ईरान को भारी नुकसान” व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने बिना परमाणु हथियारों के ही ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही “काफी हद तक कमजोर” हो चुकी है और अब स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी देश के लिए पूरी तरह गलत है और इसे कभी भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। “टिक-टॉक का समय शुरू हो चुका है”: ट्रंप की चेतावनी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के लिए “समय तेजी से खत्म हो रहा है”। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की स्थिति मजबूत है और ईरान की सैन्य और नेतृत्व संरचना पहले से कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान के पास समझौता करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं। मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक ताकत में इजाफा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए तीसरा विमानवाहक पोत (aircraft carrier) भी तैनात कर दिया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत और बढ़ गई है। पहले से ही दो बड़े विमानवाहक पोत मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिससे तनावपूर्ण स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान-हॉर्मुज स्ट्रेट विवाद से बढ़ी चिंता मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग है। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई है कि इस समुद्री मार्ग से होने वाली व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं। सैन्य टकराव की आशंका, लेकिन कूटनीति अभी भी अधर में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति वार्ता की कोशिशें फिलहाल अनिश्चित हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद कमजोर स्थिति में बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत दोबारा शुरू नहीं होती, तो यह तनाव आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है। युद्ध की नहीं, लेकिन दबाव की राजनीति तेज ट्रंप के बयान और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व की स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है, लेकिन उनके बयानों से साफ है कि दबाव की रणनीति तेज हो चुकी है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव कूटनीति की ओर बढ़ेगा या फिर टकराव और गहरा होगा।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Injured Mojtaba Khamenei amid Iran power shift as IRGC generals take control
ईरान में सत्ता का नया समीकरण: गंभीर रूप से घायल मोजतबा खामेनेई, सैन्य जनरलों के हाथ में फैसले

देश की कमान अब जनरलों के नेटवर्क के इर्द-गिर्द ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े मोजतबा खामेनेई की गंभीर चोटों के बाद देश की निर्णय प्रक्रिया पर सेना का प्रभाव तेजी से बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब महत्वपूर्ण फैसले सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शीर्ष जनरलों की सलाह और सहमति से लिए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा हालात में सरकार का मुख्य काम केवल आंतरिक स्थिरता बनाए रखना, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना और रोजमर्रा के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाना रह गया है। गंभीर चोटों के बाद इलाज जारी, कई सर्जरी हो चुकी हैं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई को पहले हुए हमलों में गंभीर चोटें आई हैं। उनकी एक टांग पर अब तक तीन बार सर्जरी हो चुकी है और आगे चलकर उन्हें कृत्रिम पैर (prosthetic leg) की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, उनके हाथ की भी सर्जरी की गई है और उसमें धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। चेहरे और होंठों पर गंभीर जलन के निशान बताए गए हैं, जिससे बोलने में कठिनाई हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भविष्य में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। देश से अलग-थलग, सिर्फ मेडिकल टीम से संपर्क जानकारी के अनुसार, सुरक्षा कारणों से वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेता अब सीधे मोजतबा से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। उनका इलाज स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। ईरान के राष्ट्रपति, जो स्वयं एक डॉक्टर हैं, भी उनकी देखभाल प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वे सार्वजनिक रूप से बोलने से बच रहे हैं और केवल लिखित संदेशों के जरिए ही संवाद कर रहे हैं। सैन्य नेतृत्व के हाथ में सत्ता का संतुलन ईरान की सत्ता संरचना में इस समय बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स देश की सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार पहले के मुकाबले अब अलग नेताओं के पास स्थानांतरित हो गए हैं। संसद प्रमुख और कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय रणनीति में ज्यादा प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। सरकार सीमित भूमिका में, जनरल्स का बढ़ता प्रभाव ईरान की निर्वाचित सरकार फिलहाल केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नजर आ रही है। खाद्य आपूर्ति, ईंधन व्यवस्था और घरेलू स्थिरता जैसे कार्य सरकार के मुख्य दायित्व बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में देश के भीतर शक्ति का संतुलन स्पष्ट रूप से सैन्य नेतृत्व की ओर झुका हुआ है। हालांकि, ईरानी व्यवस्था में अलग-अलग शक्ति केंद्रों का अस्तित्व पहले से ही रहा है। अस्थिर समय में सत्ता का बदलता ढांचा ईरान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति एक असाधारण मोड़ पर दिखाई दे रही है, जहां घायल नेतृत्व, सीमित प्रशासनिक भूमिका और मजबूत सैन्य प्रभाव मिलकर एक नया शक्ति समीकरण बना रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश का राजनीतिक ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Strait of Hormuz with commercial ships navigating amid geopolitical tension and Iranian naval monitoring
हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन ईरानी गार्ड ने लगाए नए नियम – अमेरिका और तेल बाजार पर असर

  ईरान के बयान से बढ़ी उलझन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्धविराम अवधि के दौरान यह समुद्री रास्ता सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” रहेगा। लेकिन इसी घोषणा के बाद स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सख्त शर्तें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को पहले उनकी अनुमति लेनी होगी। साथ ही तय मार्ग का ही उपयोग करना होगा। सैन्य जहाजों के प्रवेश पर अब भी रोक जारी है। इसे गार्ड ने “नई व्यवस्था” बताया है। ईरान के अंदर ही बयान पर असहमति ईरान के ही कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों ने विदेश मंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। तस्नीम न्यूज ने इसे “अधूरा और भ्रम पैदा करने वाला” बताया, जबकि मेहर न्यूज ने कहा कि रणनीतिक हालात को देखते हुए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहना चाहिए। अमेरिका और ट्रंप का दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल चुका है और उन्होंने ईरान को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समझौता पूरा नहीं हो जाता। तेल बाजार पर असर इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कीमतें करीब 10 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों और सैन्य शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर आने वाले दिनों में भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 8, 2026 0