ऊर्जा सुरक्षा

Indian and UAE leaders signing major energy agreement for strategic crude oil storage partnership
भारत-UAE के बीच बड़ी ऊर्जा डील, भारत में 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करेगा अबूधाबी

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अबू धाबी यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक समझौता हुआ है। इस डील के तहत यूएई भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) स्टोर करेगा। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद हुआ। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और Abu Dhabi National Oil Company के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर समझौता किया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि इस समझौते के जरिए भारत के तेल भंडारण ढांचे में यूएई की हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक संकट के समय तेल आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। गैस भंडारण और LPG सप्लाई पर भी सहमति दोनों देशों ने रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने की दिशा में भी साथ काम करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ADNOC के बीच लंबी अवधि का LPG सप्लाई समझौता हुआ LNG, LPG और कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने पर सहमति बनी ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया विदेश मंत्रालय ने UAE को भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक अहम साझेदार बताया है। UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया ऊर्जा क्षेत्र के अलावा यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा भी की है। यह निवेश मुख्य रूप से: बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सेवाओं लॉजिस्टिक्स तकनीकी परियोजनाओं में किया जाएगा। इनमें: Emirates NBD बैंक का RBL बैंक में निवेश Abu Dhabi Investment Authority का National Infrastructure Investment Fund में निवेश International Holding Company का भारत की Saman Capital में निवेश जैसे समझौते शामिल हैं। रक्षा, शिपबिल्डिंग और AI में भी बढ़ा सहयोग भारत और यूएई ने रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी कई अहम समझौते किए हैं। Cochin Shipyard Limited और Dubai Drydocks World के बीच समझौता गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर बनाने पर सहमति समुद्री क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना इसके अलावा दोनों देशों ने भारत में 8-एक्साफ्लॉप सुपरकंप्यूटिंग सुविधा स्थापित करने के लिए टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत के AI मिशन और एडवांस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। METRI वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर लॉन्च भारत और यूएई ने सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार को मजबूत करने के लिए ‘METRI’ नामक वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर को लागू करने का फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय और यूएई बंदरगाहों के बीच व्यापार को अधिक तेज, सुरक्षित और कुशल बनाना है। होर्मुज स्ट्रेट पर साझा चिंता यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। दोनों देशों ने बातचीत के दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। भारत ने हालिया हमलों को लेकर यूएई के साथ एकजुटता भी जताई और संकट की स्थिति में सहयोग का भरोसा दिया।  

surbhi मई 16, 2026 0
ONGC platform in Arabian Sea producing natural gas to strengthen India’s energy security.
LPG संकट के बीच राहत की खबर: अरब सागर में ONGC ने शुरू किया गैस उत्पादन

वैश्विक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण एलपीजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित होने के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। सरकारी तेल कंपनी ONGC ने अरब सागर में अपने बड़े प्रोजेक्ट से गैस उत्पादन शुरू कर दिया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। क्या है पूरा मामला? ONGC ने दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DUDP) के तहत अरब सागर में गैस उत्पादन शुरू किया है। यह प्रोजेक्ट: मुंबई से लगभग 180 Km उत्तर-पश्चिम और गुजरात के पिपावाव से करीब 80 Km दक्षिण में स्थित है 29 मार्च 2026 को इस प्रोजेक्ट के पहले प्लेटफॉर्म B-12-24P से गैस उत्पादन सफलतापूर्वक शुरू किया गया। कितनी होगी गैस सप्लाई? कुल लक्ष्य: 21.5 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन पूरी क्षमता पर: 5 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन उत्पादित गैस को हजीरा प्लांट भेजा जा रहा है रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ प्रोजेक्ट ONGC ने इस प्रोजेक्ट को दो साल से भी कम समय में पूरा किया। कंपनी के अनुसार, इसमें: आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बेहतर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और टीम की दक्षता का बड़ा योगदान रहा। क्यों है यह प्रोजेक्ट अहम? वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच घरेलू उत्पादन बढ़ेगा एलपीजी और गैस की किल्लत कम हो सकती है आयात पर निर्भरता घटेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) मजबूत होगी क्या LPG संकट दूर होगा? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर तुरंत LPG संकट खत्म नहीं करेगा, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में सप्लाई को स्थिर करने में मदद करेगा। इससे गैस उपलब्धता बढ़ेगी और बाजार में दबाव कम होगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Indian Navy warships deployed in Gulf of Oman escorting oil tankers amid Hormuz Strait crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: ओमान की खाड़ी में बढ़ेगी नौसेना की ताकत, सुरक्षित निकाले जाएंगे भारतीय जहाज

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने ऊर्जा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने Indian Navy की तैनाती बढ़ाते हुए Gulf of Oman में अतिरिक्त युद्धपोत भेजने का फैसला किया है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। 6 से 7 युद्धपोतों की तैनाती, सुरक्षा पर फोकस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी को मजबूत करते हुए अब कुल युद्धपोतों की संख्या 6 से बढ़ाकर 7 की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चा तेल और LPG लेकर आने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यह वही मार्ग है, जहां से Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar जैसे देशों से भारत को ऊर्जा आपूर्ति होती है। 22 भारतीय जहाज फंसे, बढ़ी चिंता हालिया तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 भारतीय झंडाधारी जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20% आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। नेवी की एस्कॉर्ट रणनीति, जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा भारतीय नौसेना अब सक्रिय रूप से जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। हाल ही में एक भारतीय युद्धपोत ने यूएई के फुजैरा पोर्ट से निकले एक तेल टैंकर को सुरक्षित भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचाया। इसके अलावा, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे LPG कैरियर भी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं-जो मौजूदा संकट के बीच बड़ी राहत मानी जा रही है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई यह पूरी तैनाती Operation Sankalp के तहत की जा रही है, जिसकी शुरुआत 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर भरोसा बनाए रखना है। अदन की खाड़ी में भी लगातार मिशन भारतीय नौसेना सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। Gulf of Aden में भी 2008 से एंटी-पायरेसी मिशन चलाया जा रहा है, जहां हर समय एक युद्धपोत तैनात रहता है। यह मिशन समुद्री डकैती पर नजर रखने और भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाता है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भारत की यह रणनीतिक तैनाती बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

RIMS hostel death
झारखंड

रिम्स हॉस्टल में एमबीबीएस छात्र की मौत, फंदे से लटका शव बरामद

Anjali Kumari मई 16, 2026 0