देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले ‘छोटू’ (FTL) सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। कमर्शियल सिलिंडर में भारी उछाल नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर अब 3,071.50 रुपये हो गई है। 5 किलो वाला ‘छोटू’ भी महंगा सिर्फ बड़े सिलिंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह सिलिंडर छोटे दुकानदारों, ढाबों और सीमित व्यावसायिक उपयोग के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही सिलिंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा: रेस्टोरेंट और होटल बेकरी और फूड आउटलेट कैटरिंग सर्विस छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता आमतौर पर ऐसे व्यवसाय बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। क्यों बढ़ती हैं कीमतें? 5 किलो वाला FTL सिलिंडर सब्सिडी फ्री होता है और इसकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है। इसलिए इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर जल्दी देखने को मिलता है। क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल LPG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर खाने-पीने की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।
देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका सामने आया है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। राजधानी दिल्ली में अब इस सिलेंडर की नई कीमत ₹3,071.50 हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, जहां LPG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। तेल कंपनियों द्वारा लिया गया यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कारोबारी लागत बढ़ी हुई है। लगातार दूसरे महीने कीमतों में इजाफा होने से छोटे व्यापारियों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है। पिछले महीने भी 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹195 से ₹218 तक बढ़ाए गए थे, वहीं 5 किलो वाले मिनी सिलेंडर की कीमत में करीब ₹51 का इजाफा हुआ था। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, कीमत में कोई बदलाव नहीं जहां कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है, वहीं आम जनता के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी ₹913 पर ही बनी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को इसमें ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। हर महीने की पहली तारीख को तय होते हैं दाम देश की प्रमुख तेल कंपनियां–इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम–हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर के उतार-चढ़ाव के आधार पर तय होती हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर मिल रहा है। पिछले साल मार्च में ₹2 प्रति लीटर की कटौती के बाद से इनके दाम स्थिर बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बनी वजह कमर्शियल LPG की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक की वृद्धि हो चुकी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।
LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर अगर आप घर में एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 मई 2026 से LPG से जुड़े कई नियम बदलने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब और सुविधा पर पड़ेगा। इन बदलावों में बुकिंग सिस्टम, डिलीवरी प्रक्रिया, eKYC और कीमतों तक कई अहम अपडेट शामिल हैं। गैस बुकिंग के नियम होंगे सख्त नए नियमों के तहत अब गैस सिलेंडर बुक करने के बीच का समय बढ़ा दिया गया है। पहले शहरी क्षेत्रों में 21 दिन बाद रीफिल बुक किया जा सकता था अब यह समय बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ग्रामीण इलाकों में यह अंतराल 45 दिन तक हो सकता है इसका मतलब है कि अब उपभोक्ताओं को गैस का इस्तेमाल ज्यादा योजना बनाकर करना होगा। डिलीवरी में OTP सिस्टम लागू गैस सिलेंडर डिलीवरी को सुरक्षित बनाने के लिए अब OTP आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है। डिलीवरी के समय मोबाइल पर OTP आएगा OTP बताने के बाद ही सिलेंडर मिलेगा इससे गलत डिलीवरी और गड़बड़ी पर रोक लगेगी eKYC अनिवार्य, सब्सिडी पर असर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए आधार eKYC अब जरूरी कर दिया गया है। हर वित्त वर्ष में एक बार eKYC करना अनिवार्य सब्सिडी पाने के लिए यह जरूरी प्रक्रिया होगी जिनका eKYC पहले से पूरा है, उन्हें दोबारा करने की जरूरत नहीं LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव हाल के दिनों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में लगभग 60 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें भी लगातार बदल रही हैं 1 मई के बाद कीमतों में और बदलाव की संभावना जताई जा रही है PNG गैस की ओर बढ़ रहा जोर सरकार अब धीरे-धीरे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दे रही है। जिन इलाकों में PNG उपलब्ध है, वहां इसे अपनाने पर जोर भविष्य में LPG सप्लाई पर असर पड़ सकता है तय समय में PNG कनेक्शन न लेने पर LPG सुविधा प्रभावित हो सकती है LPG सिलेंडर बुकिंग के नए आसान तरीके उपभोक्ता अब कई तरीकों से गैस बुक कर सकते हैं: व्हाट्सऐप के जरिए मिस्ड कॉल या IVRS कॉल से SMS के माध्यम से मोबाइल ऐप और वेबसाइट से हमेशा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही बुकिंग करने की सलाह दी गई है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां केवल आधिकारिक नंबर और ऐप का ही इस्तेमाल करें किसी अनजान लिंक या कॉल से बचें पेमेंट से पहले पूरी जानकारी जरूर जांचें 1 मई से लागू होने वाले ये नए नियम LPG उपभोक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ रहे हैं। जहां एक ओर सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर लोगों को बुकिंग और उपयोग में ज्यादा सतर्क रहना होगा।
रसोई गैस सिलिंडर बुक कराने का झंझट अब काफी हद तक खत्म हो गया है। अब Indane Gas, Bharat Gas और HP Gas के ग्राहक WhatsApp, SMS, कॉल और ऐप जैसे कई आसान विकल्पों के जरिए घर बैठे LPG रिफिल बुक कर सकते हैं। पहले जहां डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करना मुश्किल होता था, वहीं अब यह प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक हो गई है। खास बात यह है कि बुकिंग के तुरंत बाद कन्फर्मेशन भी मिल जाता है। LPG सिलिंडर बुक करने के आसान तरीके Indane Gas कॉल/SMS: 7718955555 WhatsApp: 7588888824 (REFILL भेजें) मिस्ड कॉल: 8454955555 Bharat Gas IVRS: 7715012345 / 7718012345 WhatsApp: 1800224344 HP Gas कॉल: 7718955555 WhatsApp: 9222201122 मिस्ड कॉल: 9493602222 WhatsApp से LPG बुकिंग कैसे करें? अपने LPG प्रोवाइडर का WhatsApp नंबर सेव करें WhatsApp खोलकर उस नंबर पर चैट शुरू करें ‘REFILL’ लिखकर मैसेज भेजें दिए गए निर्देशों का पालन करें (कस्टमर नंबर/मोबाइल वेरिफिकेशन) बुकिंग कन्फर्म करें – आपको तुरंत कन्फर्मेशन मिल जाएगा सुरक्षा के लिए नया सिस्टम अब LPG डिलीवरी को सुरक्षित बनाने के लिए Delivery Authentication Code (DAC) लागू किया गया है। सिलिंडर आने पर आपके मोबाइल पर एक कोड भेजा जाएगा यह कोड डिलीवरी एजेंट को देना जरूरी होगा बिना कोड के डिलीवरी पूरी नहीं होगी साथ ही, eKYC अपडेट रखना भी जरूरी है, वरना सब्सिडी और बुकिंग में परेशानी हो सकती है। नया नियम जरूर जान लें अब LPG सिलिंडर की दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर जरूरी है। पहले यह सीमा 21 दिन थी। अगर आप इससे पहले बुकिंग करेंगे, तो सिस्टम आपकी रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करेगा। WhatsApp और अन्य डिजिटल विकल्पों के आने से LPG सिलिंडर बुक करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गया है। सही जानकारी और नए नियमों का पालन करके आप बिना किसी परेशानी के समय पर गैस रिफिल पा सकते हैं।
देश में रसोई गैस यानी LPG की किल्लत ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर Strait of Hormuz में भारतीय तेल और गैस टैंकरों के फंसे होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। Iran और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। आपूर्ति संकट, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं केंद्र सरकार ने साफ किया है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचें। साथ ही, सरकार पाइपलाइन के जरिए गैस (PNG) के उपयोग को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है ताकि LPG पर निर्भरता कम हो सके। जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई LPG की किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। देशभर में 12,000 से ज्यादा छापे 15,000 से अधिक सिलेंडर जब्त आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई इसके बावजूद कई जगहों पर लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में नजर आ रहे हैं और कुछ मामलों में ब्लैक में 3000 रुपये तक में सिलेंडर बिकने की खबरें हैं। सरकार का बैकअप प्लान स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं: घरेलू LPG उत्पादन में 40% तक बढ़ोतरी राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त मिट्टी का तेल 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नए वितरण दिशा-निर्देश लागू किए PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के निर्देश जिनके पास PNG कनेक्शन है, उन्हें LPG सरेंडर करने की सलाह कमर्शियल यूजर्स के लिए नई नीति सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जो राज्य PNG नेटवर्क को तेजी से बढ़ाएंगे, उन्हें कमर्शियल LPG सप्लाई में 30% तक बढ़ोतरी दी जाएगी। होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या घरों तक गैस मिलती रहेगी? सरकार ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और घरों तक गैस सप्लाई जारी रहेगी। ऑनलाइन बुकिंग 90% से ज्यादा हो चुकी है, और लोगों से अपील की गई है कि वे एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं-सिलेंडर घर तक पहुंचाए जाएंगे। कब खत्म होगी किल्लत? हालांकि कुछ टैंकर भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन पहले की बाधाओं का असर अभी भी दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।