1774 – भारत में डाक सेवा शुरू हुई, पहला डाकघर खुला। 1867 – मुंबई में प्रार्थना समाज की स्थापना हुई। 1870 – अमेरिका में पहली बार किसी अश्वेत नागरिक ने वोट दिया। 1889 – पेरिस का मशहूर एफिल टावर को आधिकारिक रुप से खोला गया। 1917 – अमेरिका ने 25 मिलियन डॉलर में डेनिश वेस्ट इंडीज खरीदा और उसका नाम वर्जिन आइलैंड रखा। 1921 – रॉयल ऑस्ट्रेलिया एयरफोर्स की स्थापना हुई। 1946 – द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूनान में पहली बार मतदान हुआ। 1959 – तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 15 दिन की पदयात्रा कर भारत की सीमा में पहुंचे। भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दी। 1964 – मुंबई में अंतिम बार इलेक्ट्रिक ट्राम चली। 1966 – सोवियत रूस ने पहला चंद्रयान लूना10 लांच किया। 1979 – माल्टा ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता की घोषणा की। 1983 – कोलंबिया के शहर पोपायन में आए विनाशकारी भूंकप में 5000 लोगों की मौत हुई। 1986 – मेक्सिको विमान 940 के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से सवार सभी 167 यात्रियों की मौत हो गई। 1990 – पोल टैक्स यानी प्रति व्यक्ति कर के ख़िलाफ़ लंदन में क़रीब 70 हज़ार लोग सड़कों पर उतर आए थे। 1990 – डॉ भीमराव अंबेडकर को मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया। 1997 - वासलेव क्लार्क को नया नाटो सैनिक कमांडर नियुक्त किया गया। 1998 - भारत और चीन इंटर गवर्नमेंटल कांफ़्रेस आन कल्चरल पॉलिसीज के लिए गठित यूनेस्को की मसौदा समिति के सदस्य निर्वाचित। 2000 - 22 वर्ष बाद जापान के उत्तरी धोकाइडु द्वीप में दाते के निकट उसू ज्वालामुखी फिर सक्रिय। 2001 - यूगोस्लाविया के पूर्व राष्ट्रपति मिलोसेविच की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस का धावा। 2001 - अपने ही घर में नजरबंद, यूरोपीय मंत्रियों ने क्योटो संधि को जीवित घोषित किया। 2005 - संयुक्त राष्ट्र संघ ने उत्तर कोरिया को अनाज की आपूर्ति रोकी। 2007 - विश्व तैराकी चैम्पियनशिप में माइकल फ़ेल्प्स ने छह स्वर्ण हासिल किये। 2008 - कृष्णा सोबती को के.के.बिड़ला फाउण्डेशन का वर्ष 2007 का 'व्यास सम्मान' देने की घोषणा की गई। 2008 - रेवती मेनन को 'दयावती मोदी स्त्री शक्ति सम्मान, 2007' प्रदान किया गया। 2008 - पाक वायुसेना की बस के पास बम विस्फोट में 12 लोग मारे गए। 2011- जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी बढ़ कर 121 करोड़ (1 अरब 21 करोड़) हो गई जो दस साल पहले हुई गणना के मुकाबले यह 17.64 फ़ीसदी ज़्यादा है। 2019 - अरब लीग ने सर्वसम्मति से गोलन पहाडि़यों पर ट्रंप का फैसला खारिज किया। 2019 - कश्मीर घाटी में आने-जाने वाला सीआरपीएफ का हर काफिला अब 40 वाहनों से अधिक का नहीं होगा। साथ ही इस अर्धसैनिक बल के काफिले की अगुआई अब एसपी रैंक का अधिकारी ही करेगा। 2020 - कोविड-19 महामारी के मद्देनजर नेपाल में पूर्ण लॉकडाउन के एक दिन बाद हजारों अमरीकियों ने आज देश छोड़ दिया। 2020 - असाधारण जी 20 व्यापार व निवेश मंत्रिस्तरीय वर्चुअल मीट का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने किया। 2021 - भारत और ताजिकिस्तान आर्थिक साझेदारी को और बढाने पर सहमत हुए। 2021 - विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर बढ़ाकर 10.1 प्रतिशत किया तथा विश्व बैंक ने बांग्लादेश की अनुमानित विकास दर में संशोधन किया। 2021 - भारतीय सेना ने औपचारिक रूप से सैन्य फार्म को बंद कर दिया। 2021 - रफाल लड़ाकू विमानों की चौथी खेप में तीन विमान फ्रांस से भारत पहुंचे। 2022 - जम्मू के पुंछ जिले के सड़क हादसे में वाहन फिसलने से 9 लोगों की मौत व 4 घायल हुए। 2022 - भारत- सेशेल्स संयुक्त सैन्य दस दिवसीय अभ्यास लैमिटीये सेशेल्स में संपन्न हुआ। 2023 - पाकिस्तान के कराची में मुफ्त राशन वितरण में मची भगदड़ से 8 महिलाओं सहित 3 बच्चों की दर्दनाक मौत हुई। 2023 - राजस्थान के जोधपुर सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत व दो घायल हुए। 2023 - भारत और फिलीपींस के बीच चौथी संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। 2023 - नौसेना वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे सेवानिवृत्त हुए। 31 मार्च को जन्मे व्यक्ति 1504 - गुरु अंगद देव, सिक्खों के दूसरे गुरु। 1860 - रमा शंकर व्यास - हिन्दी के उत्कृष्ट लेखकों में से एक। 1865 - आनंदी गोपाल जोशी - भारत की प्रथम महिला डॉक्टर। 1912 - राजेंद्र नारायण सिंह देव - उड़ीसा राज्य के 6वें मुख्यमंत्री रहे थे। 1934 - कमला दास - अंग्रेज़ी और मलयालम की प्रसिद्ध लेखिका। 1938 - शीला दीक्षित - भारत की प्रसिद्ध महिला राजनीतिज्ञ तथा दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री। 1941 - पी. जे. कुरियन - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ। 1945 - मीरा कुमार, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञा , पहली महिला लोकसभा अध्यक्षा। 1987 - कोनेरू हंपी, भारतीय ग्रैंडमास्टर शतरंज। 31 मार्च को हुए निधन 1727 – महान भौतिकशास्त्री आइजैक न्यूटन का 84 वर्ष की आयु में लंदन में निधन हुआ। 1930 - श्यामजी कृष्ण वर्मा, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं लेखक। 1931 - पूर्णसिंह - भारत के विशिष्ठ निबंधकारों में से एक। 1972 – भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी का निधन। 2002 - मोतुरु उदयन, भारतीय महिला कार्यकर्ता। 2009 - रॉल अलफोन्सिन - अर्जेंटीना के राष्ट्रपति थे। 2020 - गीता रामजी युगांडाई-दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिक और एचआईवी की रोकथाम में शोधकर्ता थीं। 2021 - अमेरिकी बेसबॉल के तीसरे बेसमैन केन रिट्ज (69) का निधन हुआ। 2021 - अमेरिकी कॉलेज बास्केटबॉल कोच रॉन ग्रीन (82) का निधन हुआ। 2022 - अमेरिकी डू-वॉप बास गायक फ्रेड जॉनसन (80) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी फ़ुटबॉल रनिंग बैक जॉन ब्रॉकिंगटन (74) का निधन हुआ। 31 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव पैठण यात्रा। बगाजी महाराज यात्रा - वरुड़ बगाजी (अमरावती)। विजय गोविन्द हलंकर दिवस (मणिपुर)। माधवनाथ महाराज पुण्य तिथि (चित्रकूट , इंदौर )। गुरु श्रीअंगद देव जयन्ती (तारीखानुसार)। भारत की पहली महिला डॉक्टर श्रीमती आनंदी गोपाल जोशी जयन्ती (159वीं )। श्री राजेंद्र नारायण जयन्ती। श्रीमती शीला दीक्षित जयन्ती। वित्तीय लेखा वर्ष पूर्ण। अंतर्राष्ट्रीय ड्रग जाँच दिवस (2024)। विश्व बैकअप दिवस (2024)। ईस्टर रविवार ( Easter Sunday , क्रिश्चियन )। इंटरनेशनल ट्रांसजेंडर डे ऑफ़ विजिबिलिटी (International Transgender Day of Visibility)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।