चैत्र नवरात्रि

Ram Navami with Lord Ram idol and Pooja during auspicious muhurat timing
राम नवमी 2026: 26 या 27 मार्च? जानें सही तारीख, मुहूर्त और ज्योतिषीय गणना

चैत्र नवरात्रि के समापन के साथ मनाई जाने वाली राम नवमी को लेकर इस वर्ष श्रद्धालुओं के बीच तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रश्न यह है कि वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च को मनाई जाए या 27 मार्च को। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इसका स्पष्ट उत्तर समझना आवश्यक है। तिथि और समय का गणित हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर हो रहा है और इसका समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा। इस आधार पर: 27 मार्च को नवमी की उदयातिथि (सूर्योदय के समय नवमी) प्राप्त हो रही है जबकि 26 मार्च को दोपहर (मध्याह्न) में नवमी तिथि विद्यमान है, जिसे भगवान राम के जन्म का समय माना जाता है धार्मिक मान्यता क्या कहती है? धार्मिक ग्रंथों और व्रत परंपराओं के अनुसार, राम नवमी का पर्व “मध्याह्न व्यापिनी नवमी तिथि” में मनाना अधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी समय भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। ग्रह-नक्षत्र की स्थिति 26 मार्च (गुरुवार): दोपहर में नवमी तिथि, आर्द्रा नक्षत्र शाम 4:19 बजे तक, चंद्रमा मिथुन राशि में 27 मार्च (शुक्रवार): उदयातिथि के साथ नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र दोपहर 3:24 बजे तक, चंद्रमा कर्क राशि में कब मनाएं राम नवमी? जो श्रद्धालु उदयातिथि (सूर्योदय तिथि) के आधार पर व्रत रखते हैं, वे 27 मार्च को राम नवमी मनाएं जो लोग भगवान राम के जन्म मुहूर्त (मध्याह्न) को महत्व देते हैं, उनके लिए 26 मार्च अधिक उपयुक्त है शुभ मुहूर्त दोनों ही दिनों में राम नवमी पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक मध्याह्न क्षण: 12:27 बजे यह कुल 2 घंटे 28 मिनट का शुभ समय पूजा और राम जन्मोत्सव के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है। महत्वपूर्ण सलाह ध्यान दें कि ये समय दिल्ली के आधार पर हैं। अपने क्षेत्र के अनुसार सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Navratri 2026
Navratri 2026: 9 दिन, 9 स्वरूप और 9 भोग, नवरात्रि पूजा की लिस्ट पर डालें  एक नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि का शुभ पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है। यह नौ दिनों तक चलने वाला पावन उत्सव है, जिसमें मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि हर दिन देवी के प्रिय भोग अर्पित करने से भक्तों को विशेष फल, सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। नवरात्रि का हर दिन एक खास देवी को समर्पित होता है और उसी अनुसार भोग अर्पित किया जाता है।    पहला दिन और दूसरा  दिन   पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है, जिन्हें घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग चढ़ाया जाता है, जो लंबी आयु और सौभाग्य प्रदान करता है।   तीसरे दिन और चौथा दिन  तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जिन्हें दूध या दूध से बने मिष्ठान्न अर्पित किए जाते हैं। यह भोग जीवन में शांति और सुख लाने वाला माना जाता है। चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग अर्पित किया जाता है, जिससे बुद्धि और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।   पांचवें दिन और  छठे दिन पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में केले का भोग चढ़ाया जाता है, जो परिवार में सुख-शांति लाता है। छठे दिन मां कात्यायनी को शहद अर्पित किया जाता है, जिससे आकर्षण शक्ति और ऊर्जा बढ़ती है। सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग चढ़ाया जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।   आठवें दिन और नौवें दिन    आठवें दिन मां महागौरी की पूजा में नारियल का भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। वहीं नौवें दिन, यानी रामनवमी पर मां सिद्धिदात्री को खीर का भोग लगाया जाता है, जो सफलता और सिद्धियों की प्राप्ति का प्रतीक है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि नवरात्रि के दौरान भोग पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। लहसुन-प्याज का उपयोग वर्जित माना गया है। पहले माता को भोग अर्पित करें, उसके बाद ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इस प्रकार, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा और सही भोग अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का वास होता है।  

Anjali Kumari मार्च 23, 2026 0
Chaitra Navratri blessings
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए , क्या करें और क्या न करें?

नई दिल्ली, एजेंसियां। 19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि का पर्व 27 मार्च  तक चलेगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में शुद्धता और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है, तभी व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।   क्या करें: पूजा और व्रत के जरूरी नियम नवरात्रि के दौरान रोज सुबह-शाम मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में दीपक जलाकर आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पहले दिन घट स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक जलाए रखना शुभ माना जाता है। भक्तों को इन दिनों ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और तन-मन के साथ घर की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। सात्विक भोजन ग्रहण करें और संभव हो तो पूरे नौ दिन व्रत रखें। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है।   क्या न करें: इन बातों से रखें परहेज नवरात्रि के दौरान कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है। इन दिनों लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें और केवल सात्विक आहार ही ग्रहण करें। शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके अलावा चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें और क्रोध, झूठ व नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखें। व्रत रखने वाले लोगों को त्याग और अनुशासन का पालन करते हुए साधारण जीवनशैली अपनानी चाहिए, जैसे जमीन पर सोना।   आस्था और अनुशासन का पर्व चैत्र नवरात्रि केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अनुशासन का भी पर्व है। सही नियमों का पालन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Navratri pilgrimage Jharkhand
Navratri 2026: झारखंड के प्रसिद्ध 9 देवी मंदिर में विराजती हैं साक्षात माता

रांची। आज यानी गुरुवार 19 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो गया है। साल में दो नवरात्र होते है और दोनों संधिकाल में होते हैं। चैत्र से ही भारतीय नए साल की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की आराधना भक्त करते हैं। मां की आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। झारखंड में बड़े भक्ति भाव से होती है मां की पूजा झारखंड में भी दर्जनों देवी मंदिर हैं। गांव-गांव देवी मंडप भी होता है। यहां हम राज्य प्रमुख नौ देवी मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां साक्षात माता विराजती हैं।    1.हाराडीह मंदिरः यह मंदिर रांची जिले के तमाड़ ब्लाक में कांची नदी के तट पर स्थित है। रांची से लगभग 60 किमी दूर है। यहां 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा महिषासुरमर्दिनी की काले पत्थर की प्रतिमा है। मां यहां ध्यान मुद्रा में बैठी हैं और जिस सिंह पर विराजमान हैं, वह भी ध्यानमुद्रा में है। यह एक हजार साल से भी पुरानी प्रतिमा है। यहां मंदिर नया बना है, लेकिन प्राचीन मंदिरों के खंडहर यहां बिखरे पड़े हैं। देउड़ी मंदिर और हाराडीह मंदिर में काफी समानता हैं। 2. दिउड़ी मंदिर रांची-टाटा रोड पर तमाड़ से तीन किलोमीटर दूर स्थित है प्राचीन दिउड़ी मंदिर। मंदिर में सोलहभुजी मां दुर्गा विराजती हैं। नवरात्र के अवसर पर मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है। मंदिर में सोलहभुजी मां दुर्गा के अलावा भगवान शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इस मंदिर को आदिवासी और हिंदू संस्कृति का संगम कहा जाता है, क्योंकि इस मंदिर के पुजारी पाहन और ब्राह्मण दोनों हैं।   3. मां उग्रतारा मंदिर   लातेहार के चंदवा प्रखंड के नगर गांव स्थित मां उग्रतारा मंदिर में दुर्गा पूजा का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां सोलह दिनों की नवरात्र साधना होती है। कैथी भाषा में लिखे पांच सौ वर्ष पुराने ग्रंथ का अनुसरण करते हुए पूजा अनुष्ठान कराया जाता है। मंदिर के मुख्य प्रकोष्ठ में उग्रतारा की छोटी-छोटी मूर्तियां हैं, जो हमेशा वस्त्राच्छादित रहती हैं।   4. मां छिन्नमस्तिके मंदिर रजरप्पाः रांची से करीब 80 किमी दूर रामगढ़ के रजरप्पा में स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर सिद्धपीठ है। मां छिन्नमस्तिके के रूप में मां दुर्गा भक्तों की समस्त मनोकामना पूरा करती हैं। भैरवी, भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित यह शक्तिपीठ तंत्र साधना का भी बड़ा केंद्र है। दस महाविद्याओं की सिद्धि हासिल करने के लिए साधक यहां दूर-दूर से आते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए हमेशा भीड़ रहती है। 5. महामाया मंदिरः गुमला जिला मुख्यालय से से 30 किमी और घाघरा प्रखंड से आठ किमी दूर अवस्थित है हापामुनी गांव। यहां अति प्राचीन महामाया मंदिर है, जो हापामुनी गांव के बीच में है। मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 965 यानी 908 ई में हुई थी। मंदिर की स्थापना महाराजा मोहन राय के बेटे गजघंट द्वारा की गई थी। वे नागवंश के 22 वें राजा थे। उन्होंने मंदिर की देखभाल अपने गुरु हरिनाथ, एक मराठी ब्राह्मण को सौंप दी थी।   6. मौलिक्षा मंदिरः संताल परगना के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा के पास बसे एक छोटे से गांव मलूटी को गुप्त काशी कहा जाता है। यहां पर मौलिक्षा माता का मंदिर है, जिसकी मान्यता जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में है। मां मौलिक्षा के मंदिर में मां के मस्तक के ही दर्शन किये जा सकते हैं। मंदिर के भीतर गर्भगृह एवं ऊंचे चबूतरा पर मां की सौम्य भव्य प्रतिमा स्थापित है। मां मौलिक्षा, मां तारा की बड़ी बहन के रूप में जानी जाती हैं।   7. मां भद्रकाली मंदिरः चतरा के इटखोरी प्रखंड मुख्यालय से करीब डेढ़ किमी दूर स्थित भदुली गांव में मां भद्रकाली मंदिर स्थित है। मंदिर में कमल के आसन पर मां भद्रकाली की आदमकद प्रतिमा वरदायिनी मुद्रा में है। मां की चतुर्भुज प्रतिमा करीब साढ़े चार पीठ ऊंची और ढाई पीठ चौड़ी है और एक बेशकीमती काले पत्थर को तराश कर बनाई गई है। प्रतिमा के चरणों के नीचे ब्राह्मी लिपि में यह अंकित है कि प्रतिमा का निर्माण नौवीं शताब्दी में राजा महेंद्र पाल द्वितीय ने कराया था।   8. गढ़देवी का मंदिरः गढ़वा जिले में मां गढ़देवी का मंदिर है। मंदिर के कारण ही जिले का नाम गढ़वा पड़ा। गढ़वा ही नहीं आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र में भक्तों की काफी भीड़ होती है। मंदिर परिसर में गढ़ परिवार द्वारा सालों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष विधि विधान से पूजा किया जाता है, जिससे मंदिर पूरे नौ दिन असीम श्रद्धा का केंद्र बना रहता है।   9. मां कौलेश्वरी मंदिर चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड से छह किलोमीटर दूर स्थित मां कौलेश्वरी मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। कोल्हुआ पहाड़ की चोटी पर बने इस प्राचीन मंदिर में मां कौलेश्वरी की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर दसवीं सदी में बनाया गया था। धार्मिक कथाओं के अनुसार राजा विराट ने माता के प्रतिमा को यहां स्थापित किया था। दुर्गा सप्तशती में देवी भगवती को कौलेश्वरी कहा गया है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026: 600 मीटर ऊंचाई पर स्थित मैहर शारदा देवी मंदिर, रहस्यमयी मान्यताएं करती हैं हैरान

नई दिल्ली, एजेंसियां। मैहर शारदा देवी मंदिर चैत्र नवरात्रि 2026 के मौके पर मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। त्रिकूट पर्वत पर करीब 600 मीटर की ऊंचाई पर बने इस प्राचीन मंदिर का इतिहास 6वीं शताब्दी से जुड़ा बताया जाता है।   1080 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं दर्शन इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1080 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि अब रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे भक्त आसानी से माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं। हर साल नवरात्र के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।   शक्तिपीठ के रूप में मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘मैहर’ पड़ा, जिसका अर्थ है “मां का हार”।   आल्हा-ऊदल से जुड़ी मान्यताएं मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी मान्यता यह भी है कि वीर योद्धा आल्हा-ऊदल यहां माता के परम भक्त थे। कहा जाता है कि आज भी सबसे पहले मां के दर्शन वही करते हैं और उनके द्वारा चढ़ाए गए ताजे फूल मंदिर में पाए जाते हैं।   इतिहास और आस्था का संगम मान्यता है कि Adi Shankaracharya ने भी यहां पूजा-अर्चना की थी। मंदिर में मां शारदा की प्रतिमा की स्थापना विक्रम संवत 559 में की गई थी। इस स्थान पर अन्य देवी-देवताओं जैसे काल भैरवी, हनुमान, काली, दुर्गा और शेषनाग की भी पूजा की जाती है।   नवरात्र में विशेष आयोजन चैत्र नवरात्र के दौरान यहां भव्य मेला लगता है। सुबह 4 बजे से आरती शुरू होती है और दिनभर श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर माता के दर्शन करते हैं। शाम को भी भजन-कीर्तन और आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक आस्था, इतिहास और रहस्यमयी मान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Hindu New Year and Chaitra Navratri
हिंदू नववर्ष 2083 और चैत्र नवरात्र का शुभारंभ: 19 मार्च से शुरू पावन पर्व, विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग

आज 19 मार्च 2026 से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व Chaitra Navratri शुरू हो गया है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष यानी नवसंवत्सर 2083 और शक संवत 1947 का भी शुभारंभ हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन नए आरंभ, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के साथ नए वर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का आरंभ होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की गणना भी शुरू होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। 19 मार्च को कलश स्थापना का महत्व नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा स्थल तैयार कर कलश स्थापित करते हैं और मां दुर्गा की आराधना का संकल्प लेते हैं। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान से होती है और इसके बाद नौ दिनों तक नियमित रूप से देवी पूजा, व्रत, जप और तप किया जाता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा की जाती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इन नौ दिनों की साधना के बाद दसवें दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाता है। 22 मार्च को विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग इस बार नवरात्र के बीच 22 मार्च को Vinayaka Chaturthi का व्रत भी रखा जाएगा। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है और मध्याह्न काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों का समय चैत्र नवरात्र को आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इन दिनों में: व्रत, जप और ध्यान का विशेष महत्व   दान-पुण्य और सेवा कार्य शुभ   नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम समय   भक्त मां दुर्गा की आराधना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

surbhi मार्च 19, 2026 0
Durga Puja rituals during Chaitra Navratri festival
चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना से रामनवमी तक पूरा कैलेंडर, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

आस्था और श्रद्धा का प्रतीक Chaitra Navratri इस वर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। इस बार तिथियों, मुहूर्तों और विशेष संयोगों को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। कलश स्थापना का शुभ समय 19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहने के बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हुई। प्रतिपदा के क्षय होने के कारण इसी दिन कलश स्थापना की गई। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:32 बजे से 12:21 बजे तक   हालांकि पूरे दिन स्थापना संभव है, लेकिन सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है।   मंगलवारी जुलूसों का धार्मिक उत्साह रामनवमी से पहले इस बार तीन मंगलवारी जुलूसों का आयोजन हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं: पहला: 10 मार्च   दूसरा: 17 मार्च   तीसरा: 24 मार्च   इन जुलूसों में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और भक्ति का माहौल चरम पर होता है। षष्ठी और महासप्तमी (24–25 मार्च) 24 मार्च (षष्ठी): बेलवरण का आयोजन, शाम 6:54 बजे तक तिथि मान्य   25 मार्च (महासप्तमी): मां दुर्गा के सातवें स्वरूप की पूजा, शाम 4:30 बजे तक सप्तमी   इस दिन से पंडालों में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। महाअष्टमी और महानवमी (26–27 मार्च) 26 मार्च (महाअष्टमी):   अष्टमी तिथि दोपहर 2:15 बजे तक   संधि पूजा और विशेष अनुष्ठानों का महत्व   27 मार्च (महानवमी + रामनवमी): नवमी तिथि दोपहर 12:02 बजे तक   पुनर्वसु नक्षत्र का शुभ संयोग   रामनवमी का विशेष योग इस वर्ष Ram Navami 27 मार्च को मनाई जाएगी। वाराणसी पंचांग के अनुसार नवमी तिथि सुबह 5:56 बजे से शाम 5:12 बजे तक रहेगी, जिससे पूजा के लिए पर्याप्त शुभ समय उपलब्ध रहेगा। दशमी और देवी आगमन-गमन 28 मार्च (दशमी): सुबह 10:06 बजे तक तिथि मान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार: मां दुर्गा का आगमन डोली पर   गमन मुर्गा पर   इसे वर्ष भर के शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Maa Durga palanquin arrival Navratri
चैत्र नवरात्रि 2026: पालकी पर आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगी विदाई; जानिए इसके धार्मिक संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व आस्था, शक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों में देवी शक्ति पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि को श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को राम नवमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक Durga के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे और व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।   घटस्थापना से होगी पूजा की शुरुआत नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ पूजा की शुरुआत होती है। ज्योतिष गणना के अनुसार 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक घटस्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।   पालकी पर होगा मां दुर्गा का आगमन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस दिन से शुरू होती है, उसी के आधार पर देवी के आगमन की सवारी तय मानी जाती है। इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए माता का आगमन पालकी (डोली) पर माना जा रहा है। मान्यता है कि पालकी पर देवी का आगमन समाज और प्रकृति में उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। इसे आर्थिक चुनौतियों, प्राकृतिक आपदाओं या महामारी जैसी स्थितियों के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।   हाथी पर होगी माता की विदाई नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा और उस दिन शुक्रवार है। परंपराओं के अनुसार शुक्रवार को देवी का प्रस्थान हाथी पर माना जाता है। हाथी को धार्मिक मान्यता में समृद्धि, स्थिरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इससे अच्छी वर्षा, कृषि में लाभ और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं।   कैसे तय होती है माता की सवारी मान्यता के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसी के आधार पर देवी के पृथ्वी पर आने और वापस जाने की सवारी तय मानी जाती है। हालांकि देवी का मुख्य वाहन सिंह माना जाता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान उनकी सवारी बदल जाती है और इसे भविष्य के संकेतों से जोड़ा जाता है।

Juli Gupta मार्च 14, 2026 0
Goddess Durga idol decorated during Chaitra Navratri festival with devotees offering prayers
Chaitra Navratri 2026: इन राशियों पर बरसेगी मां दुर्गा की विशेष कृपा, करियर और धन में मिल सकते हैं बड़े अवसर

  19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में Chaitra Navratri को अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भक्त Durga के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार की नवरात्रि को खास माना जा रहा है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की, धन लाभ और नए अवसरों का संकेत दे रहा है।   नवरात्रि में बनेंगे दो खास शुभ योग ज्योतिष के अनुसार इस साल की चैत्र नवरात्रि में दो महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं: Shash Mahapurush Yoga Gajakesari Yoga इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इनके प्रभाव से कई लोगों के जीवन में सफलता, प्रतिष्ठा और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं।   मेष राशि: बढ़ेगा आत्मविश्वास और मिल सकते हैं नए अवसर मेष राशि के जातकों के लिए यह नवरात्रि काफी सकारात्मक साबित हो सकती है। इस राशि के स्वामी Mars को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। माता दुर्गा की कृपा से इस दौरान आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप अपने फैसले अधिक मजबूती से ले पाएंगे। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को अच्छा अवसर मिल सकता है व्यापारियों के लिए नए संपर्क और नए बाजार खुल सकते हैं रुका हुआ धन मिलने की संभावना है पारिवारिक विवाद भी सुलझ सकते हैं   सिंह राशि: सम्मान और पदोन्नति के बन सकते हैं योग सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस राशि पर Sun का प्रभाव माना जाता है, जो नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान: कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है वरिष्ठ अधिकारी आप पर भरोसा जता सकते हैं पदोन्नति या नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है परिवार में चल रहे मतभेद धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं   वृश्चिक राशि: दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगी ऊर्जा वृश्चिक राशि के जातकों के लिए भी यह नवरात्रि राहत भरा समय ला सकती है। पिछले कुछ समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। माता दुर्गा की कृपा से: काम में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना है मानसिक और शारीरिक ऊर्जा बढ़ेगी   आस्था और सकारात्मकता का पर्व चैत्र नवरात्रि को नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इस दौरान पूजा, व्रत और साधना के साथ-साथ लोग अपने जीवन में नए संकल्प भी लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार यदि श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ प्रयास किया जाए, तो यह समय कई लोगों के लिए तरक्की और सफलता के नए रास्ते खोल सकता है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0