धर्म

Devotee offering water and black sesame seeds during a Hindu ritual for ancestors to seek relief from Pitru Dosh.
पितृ दोष के संकेत क्या हैं? जानिए किन समस्याओं को माना जाता है इसका संकेत और क्या हैं धार्मिक उपाय

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को पूर्वजों की असंतुष्टि या उनसे जुड़े कर्मों के प्रभाव के रूप में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो या पूर्वजों का उचित सम्मान एवं श्राद्ध कर्म न किया जाए, तो परिवार को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है और इन्हें आस्था एवं धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। पितृ दोष के संभावित संकेत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी परिवार में लगातार कुछ विशेष समस्याएं बनी रहती हैं, तो उन्हें पितृ दोष के संकेत माना जाता है। 1. परिवार में लगातार कलह यदि घर में बिना किसी ठोस कारण के बार-बार विवाद, तनाव और मनमुटाव की स्थिति बनी रहती है, तो इसे पितृ दोष का एक संकेत माना जाता है। 2. आर्थिक परेशानियां और कर्ज मान्यता है कि कड़ी मेहनत के बावजूद आर्थिक स्थिति में सुधार न होना, लगातार कर्ज बढ़ना या धन संबंधी समस्याएं बने रहना भी पितृ दोष से जोड़ा जाता है। 3. विवाह में बाधाएं यदि विवाह में लगातार रुकावटें आ रही हों या वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कमी महसूस हो रही हो, तो ज्योतिष शास्त्र में इसे भी पितृ दोष का संभावित संकेत बताया गया है। 4. लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बार-बार बीमारी होना या लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बने रहना भी कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष से जुड़ा माना जाता है। 5. कार्यों में बार-बार असफलता यदि बनते हुए काम अचानक बिगड़ जाएं या लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता न मिले, तो इसे भी पितृ दोष का संकेत माना जाता है। 6. सपनों में पूर्वज दिखाई देना धार्मिक मान्यता है कि यदि सपनों में बार-बार पूर्वज दिखाई दें, वे भोजन मांगते नजर आएं या बार-बार सांप दिखाई दे, तो इसे भी पितृ दोष का संकेत माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए बताए गए धार्मिक उपाय ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष से राहत पाने के लिए कुछ पारंपरिक उपाय बताए गए हैं। प्रतिदिन स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करने की मान्यता है। भगवान शिव का जल और काले तिल से अभिषेक कर मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने की भी धार्मिक परंपरा है। जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र दान करने को भी पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं को विवेक के साथ अपनाएं पितृ दोष से जुड़ी मान्यताएं हिंदू धार्मिक परंपराओं और ज्योतिष शास्त्र पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि जीवन में आर्थिक, स्वास्थ्य या पारिवारिक समस्याएं हैं, तो उनके व्यावहारिक और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए समाधान भी अपनाना आवश्यक है।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Hindu Panchang for 10 July 2026 showing Ashadha Krishna Ekadashi, auspicious timings, Rahukaal, and planetary positions.
आज का पंचांग 10 जुलाई 2026: आषाढ़ कृष्ण एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति

Aaj Ka Panchang 10 July 2026: आज 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज भरणी और कृत्तिका नक्षत्र का संयोग बन रहा है। साथ ही चंद्रमा दिन में मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। यदि आप आज कोई शुभ कार्य, यात्रा या पूजा की योजना बना रहे हैं, तो पहले दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी जरूर जान लें। आज का पंचांग (10 जुलाई 2026) वार: शुक्रवार पक्ष: आषाढ़ कृष्ण पक्ष तिथि: एकादशी द्वादशी तिथि प्रारंभ: 11 जुलाई, रात 1:21 बजे नक्षत्र: भरणी (सुबह 9:48 बजे तक) इसके बाद: कृत्तिका नक्षत्र योग: शूल गंड योग प्रारंभ: 11 जुलाई, रात 1:43 बजे विक्रम संवत: 2083 ऋतु: ग्रीष्म सूर्योदय और चंद्रोदय का समय सूर्योदय: सुबह 5:14 बजे सूर्यास्त: शाम 6:45 बजे चंद्रोदय: 11 जुलाई, रात 1:32 बजे चंद्रास्त: दोपहर 2:45 बजे आज ग्रहों की स्थिति सूर्य: मिथुन राशि चंद्रमा: मेष राशि (दोपहर 3:25 बजे तक), इसके बाद वृषभ राशि मंगल: वृषभ राशि बुध: मिथुन राशि गुरु: कर्क राशि शुक्र: सिंह राशि शनि: मीन राशि राहु (वक्री): कुंभ राशि केतु (वक्री): सिंह राशि आज का राहुकाल आज सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में नए और शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। अभिजीत मुहूर्त यदि किसी शुभ कार्य की शुरुआत करनी हो, तो सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त शुभ माना गया है। दिन का चौघड़िया चर: सुबह 5:14 बजे से 6:57 बजे तक लाभ: सुबह 6:57 बजे से 8:37 बजे तक अमृत: सुबह 8:37 बजे से 10:21 बजे तक काल: सुबह 10:21 बजे से 11:38 बजे तक शुभ: सुबह 11:38 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक रोग: दोपहर 1:50 बजे से 3:25 बजे तक काल: शाम 3:25 बजे से 4:45 बजे तक शुभ: शाम 4:45 बजे से 6:50 बजे तक दिशाशूल और यात्रा का शुभ उपाय आज पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। यदि किसी आवश्यक कार्य से पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करनी पड़े, तो घर से निकलने से पहले दही का सेवन करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे यात्रा में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। आज का धार्मिक महत्व आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है। वहीं राहुकाल और काल चौघड़िया के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालु आज भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Devotee worshipping Lord Vishnu with a clean home altar before Yogini Ekadashi and performing traditional Vastu rituals.
योगिनी एकादशी 2026: व्रत से पहले करें ये 5 आसान वास्तु उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र में भी योगिनी एकादशी से पहले घर में कुछ विशेष बदलाव करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन उपायों से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। 1. मुख्य द्वार की अच्छी तरह करें सफाई वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। योगिनी एकादशी से पहले इसकी अच्छी तरह सफाई करें। व्रत वाले दिन सुबह मुख्य द्वार पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। 2. ईशान कोण को रखें साफ और व्यवस्थित घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण पूजा और देव स्थान के लिए शुभ माना जाता है। इस स्थान से कबाड़, टूटी-फूटी वस्तुएं और डस्टबिन हटा दें। यदि संभव हो तो यहां गंगाजल का छिड़काव करें और भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा करें। 3. सेंधा नमक वाले पानी से करें सफाई एकादशी से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले पानी से पोंछा लगाने की परंपरा कई लोग अपनाते हैं। इसके बाद भीमसेनी कपूर और लौंग का धुआं पूरे घर में करने की भी मान्यता है, जिसे नकारात्मकता दूर करने और वातावरण को शुद्ध रखने से जोड़ा जाता है। 4. तिजोरी या धन रखने का स्थान रखें व्यवस्थित एकादशी से पहले तिजोरी या जहां धन रखा जाता है, उस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। अनावश्यक कागजात हटा दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत वाले दिन लाल या पीले कपड़े में हल्दी की गांठ और गोमती चक्र रखकर तिजोरी में रखने से आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं। 5. पूजा स्थान को करें शुद्ध और सजाएं योगिनी एकादशी से पहले घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक, फूल और प्रसाद की उचित व्यवस्था करें। साफ और व्यवस्थित पूजा स्थल को शुभ माना जाता है और इससे पूजा का वातावरण भी सकारात्मक बनता है। धार्मिक मान्यता धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, वास्तु उपायों के प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इन्हें आस्था एवं परंपरा के आधार पर ही देखा जाता है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
NCERT Class 8 Textbook
NCERT ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी की

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है। नई पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय में व्यापक बदलाव किए गए हैं और पहले शामिल विवादास्पद संदर्भों को हटाकर पाठ को अधिक संतुलित और पारंपरिक नागरिक शास्त्र के स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।   न्यायपालिका अध्याय में किए गए बड़े बदलाव   संशोधित अध्याय में अब न्याय, संवैधानिक उपचार, अदालतों की संरचना, न्यायाधिकरण , जनहित याचिका और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया गया है। पहले शामिल न्यायपालिका पर आलोचनात्मक टिप्पणियों और भ्रष्टाचार संबंधी संदर्भों को हटा दिया गया है।   सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद हुआ संशोधन   इस वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कुछ अंशों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद NCERT ने पुस्तक का वितरण रोक दिया था और संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। संशोधित संस्करण अब औपचारिक रूप से छात्रों के लिए जारी कर दिया गया है।   नई किताबें स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी   NCERT ने राज्यों और संबद्ध विद्यालयों को संशोधित पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद का कहना है कि नए संस्करण का उद्देश्य छात्रों को न्यायपालिका की भूमिका और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहतर एवं संतुलित समझ प्रदान करना है।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Shiva during Pradosh Vrat with Shivling, lamps and Bel Patra.
जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

12 जुलाई को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत, प्रदोष काल में करें भगवान शिव की पूजा Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई, रविवार को पड़ रहा है। रविवार के दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत या भानु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जुलाई 2026, सुबह 02:04 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 जुलाई 2026, रात 10:29 बजे प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 07:22 बजे से रात 09:24 बजे तक प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें तथा भगवान शिव के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। दिनभर श्रद्धा के साथ व्रत रखें। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार रह सकते हैं। इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। शाम को प्रदोष काल से पहले स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा आरंभ करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर चंदन, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प तथा अक्षत अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें तथा कपूर या दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद वितरित करें और विधि अनुसार व्रत का पारण करें। रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति के जीवन से अनेक बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता यह भी है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है तथा यश, सम्मान, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। नोट: व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक विश्वासों और पंचांग पर आधारित हैं। श्रद्धालु स्थानीय परंपरा या अपने पुरोहित की सलाह के अनुसार भी पूजा कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Artistic depiction of Yamraj, Chitragupta and souls traveling through the mystical path of Yamlok after death.
Narad Puran: मृत्यु के बाद यमलोक में कैसे मिलता है पाप और पुण्य का फल? जानिए रहस्यमयी यात्रा का वर्णन

Narada Purana में जीवन, मृत्यु, कर्म और परलोक से जुड़े कई गूढ़ रहस्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है। पुराणों के अनुसार मनुष्य को मृत्यु के बाद अपने कर्मों के आधार पर फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्म करने वाले जीव जहां सुखपूर्वक धर्मलोक की यात्रा करते हैं, वहीं पाप कर्म करने वालों को कठोर यातनाएं सहनी पड़ती हैं। नारद पुराण में यमलोक के मार्ग और वहां मिलने वाले दंड एवं सुखों का अत्यंत विस्तृत और रहस्यमयी वर्णन किया गया है। छियासी हजार योजन लंबा बताया गया है यमलोक का मार्ग नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग लगभग 86,000 योजन तक फैला हुआ है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर माना जाता है। इस हिसाब से यह दूरी करीब 11 लाख किलोमीटर से भी अधिक बताई गई है। कहा गया है कि: धर्म और दान-पुण्य करने वाले लोग इस मार्ग को सुखपूर्वक पार कर लेते हैं पाप कर्म करने वाले जीव अत्यंत कष्ट झेलते हुए यात्रा करते हैं पापी जीवों के बारे में वर्णन मिलता है कि उनके कंठ सूख जाते हैं, वे भय और पीड़ा से रोते-चिल्लाते हैं और Yamdoot उन्हें चाबुक और अस्त्रों से दंडित करते हुए आगे ले जाते हैं। यमलोक के मार्ग में मिलती हैं भयानक यातनाएं पुराण में यमलोक के रास्ते को बेहद कठिन और भयावह बताया गया है। मार्ग में: जलती हुई अग्नि तपती रेत कांटेदार वृक्ष तीखी धार वाली चट्टानें अंधेरी गुफाएं सुई जैसे कांटे मौजूद रहते हैं। कहीं बाघों की डरावनी गर्जना सुनाई देती है तो कहीं जीवों को रस्सियों और अंकुशों से खींचा जाता है। पाप कर्म करने वाले जीव इन यातनाओं को सहते हुए अपने कर्मों पर पछतावा करते हैं। पुराणों के अनुसार इस यात्रा में न छाया मिलती है और न पानी। पुण्यात्माओं को मिलते हैं दिव्य सुख नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जिन्होंने जीवन में धर्म, दया और दान किया हो, उन्हें यमलोक की यात्रा में विशेष सुख प्राप्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर: अन्न दान करने वालों को स्वादिष्ट भोजन मिलता है जल दान करने वालों को उत्तम पेय प्राप्त होते हैं वस्त्र दान करने वालों को दिव्य वस्त्र मिलते हैं दीपदान करने वालों के मार्ग प्रकाशित रहते हैं गोदान करने वालों को विशेष सुख प्राप्त होते हैं जो व्यक्ति माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों की सहायता करता है तथा सभी जीवों के प्रति दया भाव रखता है, उसे धर्मराज के लोक में सम्मान प्राप्त होता है। धर्मराज पुण्यात्माओं का करते हैं सम्मान Yama पुण्यात्माओं का स्वागत मित्र की तरह करते हैं। पुराण के अनुसार धर्मराज कहते हैं कि मानव जीवन पाकर भी जो व्यक्ति धर्म और पुण्य नहीं करता, उससे बड़ा पापी कोई नहीं। नारद पुराण में धर्म, दान और भगवान के स्मरण को जीवन का सबसे बड़ा साधन बताया गया है। चित्रगुप्त याद दिलाते हैं कर्मों का हिसाब वहीं पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत भयावह रूप में दिखाई देते हैं। पुराण में वर्णन है कि उनकी आंखें लाल होती हैं और वे प्रलयकाल के बादलों जैसी गर्जना करते हैं। इसके बाद Chitragupta जीवों को उनके कर्मों का पूरा हिसाब याद दिलाते हैं और उसी अनुसार उन्हें नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। पुराणों के अनुसार पापों का फल भोगने के बाद जीव फिर पृथ्वी पर विभिन्न योनियों में जन्म लेते हैं। क्या संदेश देता है नारद पुराण? नारद पुराण का मुख्य संदेश यह है कि: मनुष्य को हमेशा धर्म और सद्कर्म करने चाहिए दया, सेवा और दान जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं हर कर्म का फल अवश्य मिलता है मानव जीवन को केवल भौतिक सुखों में नहीं गंवाना चाहिए पुराणों के अनुसार धर्म का मार्ग ही अंततः जीव को सुख, सम्मान और मोक्ष की ओर ले जाता है।  

surbhi मई 19, 2026 0
वैदिक पंचांग 18 अप्रैल 2026
Vedic Almanac: l वैदिक पंचांग l 18 अप्रैल 2026, शनिवार l

ll~ वैदिक पंचांग ~ll 🌞  🌤️  *दिनांक - 18 अप्रैल 2026* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत 2083* 🌤️ *शक संवत -1948* 🌤️ *अयन - उत्तरायण*  🌤️ *ऋतु - वसंत ॠतु*  🌤️ *मास - वैशाख* 🌤️ *पक्ष - शुक्ल*  🌤️ *तिथि - प्रतिपदा दोपहर 02:10 तक तत्पश्चात द्वितीया* 🌤️ *नक्षत्र - अश्विनी सुबह 09:42 तक तत्पश्चात भरणी* 🌤️ *योग - प्रीति रात्रि 11:56 तक तत्पश्चात आयुष्मान* 🌤️*राहुकाल - सुबह 09:28 से सुबह 11:03 तक* 🌤️ *सूर्योदय - 05:38* 🌤️ *सूर्यास्त -  06:17* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (शाम 06:49 से रात्रि 07:52 तक)*  💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

Unknown अप्रैल 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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