पवन सिंह

Bihar MLC Election
बिहार MLC चुनाव में सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

पटना, एजेंसियां। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान में सीटों के बराबर उम्मीदवार बचे, जिसके चलते मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। निर्वाचन आयोग ने सभी प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया।   इस चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा रहे निशांत कुमार जिन्होंने पहली बार किसी सदन की सदस्यता हासिल की है। मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद पहुंचे हैं। उनके अलावा जदयू से भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद भी निर्विरोध निर्वाचित हुए।   भोजपुरी स्टार पवन सिंह भी बने MLC भारतीय जनता पार्टी की ओर से भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह  ने भी पहली बार विधान परिषद का चुनाव जीता है। उनके साथ भाजपा के संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित भी निर्वाचित हुए हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से सुनील सिंह ने भी जीत दर्ज की है।   NDA का दबदबा कायम चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दबदबा साफ दिखाई दिया। भाजपा और जदयू को चार-चार सीटें मिलीं, जबकि लोजपा (रामविलास) के खाते में एक सीट गई। इस तरह NDA ने कुल 10 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं राजद को एक सीट मिली।   दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर उठे सवाल इन परिणामों के बीच बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्हें इस बार विधान परिषद का उम्मीदवार नहीं बनाया गया, जबकि वे मंत्री पद पर बने हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा में किसी सदन की सदस्यता नहीं मिलने पर उनके मंत्री पद पर संकट खड़ा हो सकता है।   बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने एक ओर नए चेहरों को सदन तक पहुंचाया है, वहीं राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और चर्चाओं को भी जन्म दिया है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Powerstar Pawan Singh Anant Singh
बाहुबली अनंत सिंह से मिले पावर स्टार पवन सिंह, BJP से बनेंगे MLC

कई गाड़ियों का दिखा काफिला पटना, एजेंसियां। बीजेपी नेता और भोजपुरी एक्टर पवन सिंह ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह से मुलाकात की है। पवन सिंह, अनंत सिंह के पटना वाले आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों के बीच काफी बातचीत हुई। इससे जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में देखा गया कि पवन सिंह कई गाड़ियों के काफिले के साथ अनंत सिंह के आवास पर पहुंचे थे, लेकिन दोनों के बीच क्या बात हुई, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। साथ-साथ दिखे अनंत सिंह और पवन सिंह वीडियो में यह भी देखा गया कि मुलाकात के बाद अनंत सिंह, पवन सिंह को घर से बाहर तक छोड़ने आए। इस दौरान उनके समर्थक भी काफी संख्या में मौजूद रहे। मुलाकात का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहा है। पवन सिंह को बीजेपी ने एमएलसी उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने सोमवार को नामांकन किया था। 10 सीटों के लिए 10 कैंडिडेट्स ने ही नॉमिनेशन किया था। इसके बाद उनकी निर्विरोध जीत तय मानी जा रही है। सीएम और प्रदेश अध्यक्ष से भी मिले थे बीजेपी ने चार उम्मीदवारों को कैंडिडेट बनाया था। इनमें पवन सिंह के अलावा डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित शामिल हैं। एमएलसी उम्मीदवार बनने के बाद पवन सिंह ने सीएम सम्राट चौधरी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की थी। साथ ही मीडिया से बात करते हुए एमएलसी कैंडिडेट पवन सिंह ने कहा था, संजय सरावगी जी को मेरा दिल से प्रणाम और दिल से धन्यवाद है। पार्टी मेरी मां है। बीजेपी परिवार का मैं सच्चा सेवक हूं और आजीवन रहूंगा। मेरा काम सच्चे दिल और मन से सिर्फ और सिर्फ सेवा करना है। आज है नामांकन वापस लेने की तारीख बिहार में विधान परिषद चुनाव की बात करें तो, पहली जून से आठ जून तक नामांकन की तारीख थी। नौ जून को नामांकन पत्रों की जांच की गई। 11 जून तक नाम वापसी का समय है। अब तक किसी भी उम्मीदवार ने अपने नाम वापस नहीं लिए हैं। इसके साथ ही 10 सीटों पर चुनाव के लिए 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन किया था। ऐसी स्थिति में बिना मतदान के ही निर्विरोध सभी 10 उम्मीदवारों का सदन जाना तया माना जा रहा है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Pawan Singh
CM सम्राट से मिले पवन सिंह, BJP कोटे से MLC के लिए इस दिन करेंगे नामांकन

पटना, एजेंसियां। भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन्हें बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद शनिवार को पवन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद क्या बोले पवन सिंह? मुख्यमंत्री आवास में करीब 30 मिनट तक चली मुलाकात के बाद पवन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वह 8 जून को विधान परिषद चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। बीजेपी को बताया अपनी मां मुख्यमंत्री से मिलने से पहले पवन सिंह ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी को अपनी "मां" बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दोनों दी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य केवल जनसेवा करना है और वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। भोजपुरी स्टार से राजनीति तक का सफर भोजपुरी फिल्म उद्योग में "पावर स्टार" के नाम से मशहूर पवन सिंह का जन्म बिहार के आरा जिले में हुआ था। उनका लोकप्रिय गीत "लॉलीपॉप लागेलु" देश-विदेश में काफी चर्चित रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वे राजनीतिक सुर्खियों में रहे थे। पहले उन्हें बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद उन्होंने काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। एनडीए का मजबूत समीकरण विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने पवन सिंह समेत कई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। वहीं जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। विधानसभा में एनडीए के मजबूत संख्या बल को देखते हुए गठबंधन के अधिकांश उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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US President Donald Trump speaks about Iran talks, nuclear concerns, and a possible diplomatic agreement.
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ट्रंप बोले- समझौते से हो या सैन्य कार्रवाई से, अंत में अमेरिका ही जीतेगा

Deepshikha जून 5, 2026 0