भाजपा

Tejashwi Yadav Samrat Chaudhary
पेंशन भुगतान पर छिड़ी सियासी जंग, तेजस्वी ने सरकार से पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है?

पटना, एजेंसियां।  बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचने के साथ ही राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए बिहार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।   94 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली पेंशन बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि समय पर पहुंचनी चाहिए।   तेजस्वी ने पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है? कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट के समय किया जाता है। ऐसे में नियमित पेंशन भुगतान के लिए इस फंड का इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है।   तेजस्वी ने दावा किया कि कई विकास योजनाओं का भुगतान लंबित है, ठेकेदारों के बिल अटके हुए हैं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।   भाजपा ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आकस्मिकता निधि से राशि लेना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है। बाद में इस राशि का बजटीय समायोजन कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य लगातार जारी हैं।   राजनीतिक बहस तेज पेंशन भुगतान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय नीति पर केंद्रित हो गई है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहा है, वहीं सरकार और भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
INDIA alliance leaders discuss opposition unity and strategy during a high-level meeting in New Delhi.
INDIA गठबंधन बैठक में दिखी एकजुटता, लेकिन उभरे पुराने मतभेद; 2029 की तैयारी पर भी हुआ मंथन

  नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की महत्वपूर्ण बैठक में एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर मौजूद कुछ पुराने मतभेद भी सामने आए। बैठक में शामिल नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही भविष्य की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी चर्चा की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रभावी मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट रहना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक समाज के आंदोलनों से जुड़ाव बढ़ाने और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कांग्रेस से ‘बड़ा दिल’ दिखाने की अपील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी दल को समर्थन देने के लिए कांग्रेस को उदार रवैया अपनाना चाहिए। अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी चुनावी हार या जीत के आधार पर जल्दबाजी में राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए। 2029 के लिए अभी से तैयारी का सुझाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बैठक में कहा कि विपक्ष को केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक रणनीति बनाने और लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। नियमित समन्वय बैठकों की मांग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर समन्वय विपक्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। CJP अभियान पर भी हुई चर्चा बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभियान का भी उल्लेख हुआ। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अभियान के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि यदि कोई जन-अभियान लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है तो उससे संवाद किया जाना चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस अभियान के अचानक उभार और इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई। DMK ने गठबंधन से दूरी बनाई बैठक से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने स्पष्ट कर दिया कि वह अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सहयोगी दल अब अलग राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, ऐसे में DMK स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगी। उन्होंने भविष्य में किसी व्यापक धर्मनिरपेक्ष और भाजपा-विरोधी मंच की संभावना से इनकार नहीं किया। आम आदमी पार्टी ने भी दोहराई दूरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी पहले ही गठबंधन से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर चुकी है। AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की बजाय अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाना रहा है। उन्होंने कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी संभावित गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया। केरल को लेकर कांग्रेस-वाम दलों में तकरार बैठक में वाम दलों ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद वाम दलों पर सार्वजनिक हमले उचित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि केरल में उठाए गए विषय राज्य कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पुराने विवादों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर जोर बैठक का समापन विपक्षी एकता और समन्वय को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ। नेताओं ने माना कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के बीच विश्वास, संवाद और साझा रणनीति पहले से कहीं अधिक जरूरी है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

  चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं। प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे। नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया। किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
TMC Former MLA
बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे TMC के पूर्व विधायक को NIA ने किया गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां।  एनआईए की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे टीएमसी के पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल के चर्चित भांगड़ बम विस्फोट मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य संदिग्ध और फरार चल रहे पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को दक्षिण 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। चुनाव से पहले बम बनाते समय हुआ था धमाका एनआईए की जांच के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। जब अवैध रूप से क्रूड बम (कच्चा बम) बनाने के दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में बम बनाने वाले एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साजिश रचने और सबूत मिटाने का आरोप शौकत मोल्ला इस पूरे मामले में चौथे आरोपी हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि पूर्व विधायक ही इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने ही अन्य आरोपियों को बम बनाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, विस्फोट होने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए मोल्ला ने आरोपियों को घटनास्थल से सबूत मिटाने और दृश्य के साथ छेड़छाड़ करने का भी आदेश दिया था।

Unknown जून 6, 2026 0
K Annamalai New Party
भाजपा से अलग हुए के. अन्नामलाई ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का किया ऐलान

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।   2031 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी   एक वीडियो संदेश के माध्यम से अन्नामलाई ने कहा कि उनकी नई राजनीतिक पार्टी वर्ष 2031 में होने वाले Tamil Nadu Legislative Assembly Election 2031 में भाग लेगी। उन्होंने संकेत दिया कि नई पार्टी तमिलनाडु की राजनीति में एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में उभरेगी और राज्य के विकास तथा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देगी।   वैचारिक मतभेद बने अलगाव की वजह   अन्नामलाई ने अपने बयान में कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद चल रहे थे। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी सोच और पार्टी नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था। इसी कारण उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया और स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया।   आईपीएस अधिकारी से राजनीतिक नेता तक का सफर   पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में Bharatiya Janata Party का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें 2021 में तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 2025 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास किया, हालांकि चुनावी स्तर पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।   नई पारी पर टिकी राजनीतिक नजरें   अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका पार्टी से अलग होना और नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी नई पार्टी भविष्य में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बना सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अन्नामलाई अपनी नई पार्टी की आधिकारिक घोषणा कब करते हैं और वह राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Yogi Adityanath with newly sworn-in ministers during Uttar Pradesh cabinet expansion ceremony in Lucknow
योगी मंत्रिमंडल का विस्तार: 6 नए मंत्रियों ने ली शपथ, दो मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का मंत्रिमंडल विस्तार किया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। किन नेताओं को मिली जगह? मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 6 नए नेताओं को शामिल किया गया। इनमें: Manoj Pandey – कैबिनेट मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary – कैबिनेट मंत्री Hansraj Vishwakarma – राज्य मंत्री Kailash Rajput – राज्य मंत्री Krishna Paswan – राज्य मंत्री Surendra Diler – राज्य मंत्री को शपथ दिलाई गई। दो राज्य मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार इसके अलावा: Ajit Singh Pal Somendra Tomar को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश 2027 विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सरकार में पहले 54 मंत्री थे, जो अब बढ़कर 60 हो गए हैं। कौन हैं भूपेंद्र चौधरी? पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिने जाते हैं। वे पहले भी पंचायती राज मंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh तथा भाजपा से जुड़े रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर नेताओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मंत्री Daya Shankar Singh ने कहा कि मंत्रिपरिषद में खाली पदों को भरते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary ने इसे खुशी की बात बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित फैसलों पर अब अमल हो रहा है। वहीं मंत्री Suresh Kumar Khanna ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और डबल इंजन सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। मंत्री Sanjay Nishad ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a massive rally in Cooch Behar ahead of West Bengal elections.
कूचबिहार में गरजे अभिषेक बनर्जी, बोले– भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ बताया जा रहा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद Abhishek Banerjee ने मंगलवार को कूचबिहार में एक विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को “बांग्लादेशी” कहकर उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ राजनीतिक हमला बल्कि “बंगाली अस्मिता और सम्मान पर चोट” बताया। “हमारी भाषा और पहचान को निशाना बनाया जा रहा” अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और वह भाषा तथा संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बांग्ला बोलने वालों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उन्हें घुसपैठिया तक कहा जा रहा है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की पहचान और सम्मान की रक्षा करना टीएमसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है और पार्टी इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। खान-पान पर ‘पहरा’ का आरोप सभा को संबोधित करते हुए Abhishek Banerjee ने भाजपा पर लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कई भाजपा शासित राज्यों में मछली और मांस की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है, जो सीधे तौर पर बंगाली संस्कृति पर हमला है। “हमारे यहां मछली-भात सिर्फ खाना नहीं, हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है। अगर कोई हमारी थाली तक में दखल देगा, तो बंगाल की जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने कहा। मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासकर राजबंशी और मतुआ समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का “समर्थन” इन समुदायों के लिए सिर्फ दिखावा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे। लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है,” उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप केंद्र की Government of India पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को उसका उचित अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि राज्य की जनता बार-बार तृणमूल कांग्रेस को चुनती है, इसलिए केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। “दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं,” उन्होंने कहा। “4 मई को जनता देगी जवाब” अपने भाषण के अंत में अभिषेक बनर्जी ने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा, “4 मई को नतीजे आएंगे और उस दिन बंगाल की जनता अहंकारी और बंगाल विरोधी ताकतों को सबक सिखाएगी।” कूचबिहार की इस रैली में Abhishek Banerjee ने बंगाली पहचान, संस्कृति, खान-पान और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उनके इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी चुनाव में टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Mamata Banerjee addressing supporters in Bhabanipur amid voter list controversy before Bengal Elections 2026.
बंगाल चुनाव 2026: क्या भवानीपुर में फंस गई ममता बनर्जी की सीट? SIR पर सियासी घमासान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटरों की संख्या में भारी कमी ने टीएमसी की चिंता बढ़ा दी है, जबकि भाजपा इस स्थिति को अपने पक्ष में मान रही है। भवानीपुर में घटे हजारों वोटर रिपोर्ट्स के मुताबिक, भवानीपुर सीट पर करीब 51,000 वोटर कम हुए यह कुल मतदाताओं का लगभग 25% हिस्सा है SIR से पहले यहां करीब 2.06 लाख वोटर थे कैसे घटे वोट? पहला चरण: मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट आदि आधार पर 44,000+ नाम हटाए गए दूसरा चरण: 2,300 से ज्यादा नाम और हटाए गए सिर्फ 18 नए वोटर जोड़े गए जांच प्रक्रिया: 14,000+ नाम जांच में गए 10,000+ बहाल, लेकिन 3,875 नाम स्थायी रूप से हटे वोटबैंक पर असर का डर हटाए गए वोटरों में: 23% मुस्लिम 77% गैर-मुस्लिम भवानीपुर में मुस्लिम वोटर TMC का पारंपरिक आधार रहे हैं ऐसे में वोट कटने से ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है भाजपा vs टीएमसी: बढ़ी सियासी टक्कर भाजपा ने भवानीपुर को “गेम चेंजर सीट” बताया गृह मंत्री अमित शाह ने यहां रोड शो कर माहौल बनाया BJP का दावा: भवानीपुर जीतते ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन संभव TMC का गुस्सा और एक्शन TMC ने चुनाव आयोग से शिकायत की ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए पार्टी का आरोप-SIR के जरिए वोटबैंक को टारगेट किया गया मुस्लिम वोट पर सियासी नजर बंगाल में करीब 30% मुस्लिम आबादी मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में असर AIMIM जैसे दलों की एंट्री से वोट बंटने की आशंका क्यों अहम है भवानीपुर सीट? 2021 उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यहां से 85,000 वोटों से जीत दर्ज की थी भाजपा को मिले थे 26,000 वोट इस बार वोटरों की संख्या घटने से चुनाव का समीकरण बदल सकता है

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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