बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया। शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया। हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं। भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बुधवार को अहम बैठक हुई। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन के पुनर्गठन, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। संगठन विस्तार पर हुआ मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसमें नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और विभिन्न राज्यों में संगठन को सशक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान बताया जा रहा है कि बैठक में हुई चर्चाओं के आधार पर भाजपा संगठन में जल्द ही नए पदाधिकारियों और जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है।
रांची। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के समापन सत्र में झारखंड को करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ औद्योगिक साझेदारी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के लिए ऐसा माहौल तैयार कर रही है, जिससे उद्योगों के साथ-साथ राज्य और स्थानीय युवाओं को भी स्थायी लाभ मिल सके। बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार नवाचार, तकनीक और शोध आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिजली आपूर्ति, परिवहन संपर्क, आधारभूत ढांचे और कुशल मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य ने देश को बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं और अब इसी प्रतिभा को झारखंड के विकास से जोड़ने का समय है। रोजगार सृजन और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा कार्यक्रम में उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड के पास अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है। उद्योगों और सरकार के सहयोग से समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दौरान जिंदल स्टील, रूंगटा ग्रुप, टाटा स्टील, वरुण बेवरेजेज समेत कई प्रमुख औद्योगिक समूहों ने निवेश में रुचि दिखाई। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव जिंदल स्टील की ओर से 40 हजार करोड़ रुपये और एंबिशियस सीमेंट की ओर से 30 हजार करोड़ रुपये का रहा। सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से झारखंड में औद्योगिक विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऐन वक्त पर उम्मीदवार बदलने से सियासी माहौल गर्म हो गया है। पहले भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और अन्य दलों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। प्रशांत किशोर ने भाजपा पर साधा निशाना जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा के फैसले को जनता के डर का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जो भाजपा पूरे देश में दूसरे दलों के उम्मीदवारों को अपनी ओर लाने का दावा करती है, उसे अब अपने ही गढ़ में उम्मीदवार बदलना पड़ रहा है। प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा जिस बांकीपुर को अपना मजबूत किला बताती थी, वहां अब उसे चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है। आरजेडी ने भी भाजपा को घेरा राष्ट्रीय जनता दल ने भी भाजपा के इस फैसले को उसकी कमजोरी करार दिया। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हार के डर से अपने ही पुराने कार्यकर्ता की "बलि" चढ़ा दी। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और यही वजह है कि भाजपा को उम्मीदवार बदलना पड़ा। 30 जुलाई को मतदान, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित है। इस बार भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता और जन सुराज के प्रशांत किशोर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ चुनावी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने नामांकन दाखिल किया। इसके बाद आयोजित एनडीए की सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय ऐसे लोग भी वोट मांगने आते हैं, जिनका बिहार और उसकी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की। एनडीए ने जताया जीत का भरोसा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर से एक समर्पित कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है और एनडीए पहले की तरह इस सीट पर भी बड़ी जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए पर भरोसा जताया था और इस बार भी बांकीपुर में जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा। राजद और जन सुराज भी मैदान में राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता ने भी गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है और इस बार राजद को समर्थन मिलेगा। कांग्रेस ने भी महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प नामांकन के दौरान एक रोचक घटना भी देखने को मिली, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मंच से उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम लेने के बजाय बार-बार दूसरे नेता आशीष सिन्हा का नाम लेते रहे। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। प्रशांत किशोर की एंट्री और प्रमुख दलों के आमने-सामने होने से यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है।
पटना, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अभिषेक कुमार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके नाम की घोषणा के साथ ही बांकीपुर का उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गया है। राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी कई वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत कई बड़े नेता चुनावी रणनीति पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रशांत किशोर से सीधी टक्कर इस उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का चुनाव केवल एक सीट का उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन सकता है। 30 जुलाई को मतदान निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। सभी प्रमुख दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं।
रांची। जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक शिष्टमंडल प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में राजभवन पहुंचा और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है। पुलिस की कार्यशैली पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल भाजपा ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि 27 जून 2026 को जमशेदपुर के आदित्यपुर क्षेत्र में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने पुलिस वैन से हिमांशु को बाहर खींचकर धारदार हथियार से हमला किया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। इस घटना में घायल प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता में चल रहा है। भाजपा का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की वारदात राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है और कई मामलों में पुलिस जांच की दिशा बदलने का प्रयास करती रही है। निष्पक्ष जांच की उठाई मांग ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि पुलिस द्वारा जिन तथ्यों को सामने लाया जा रहा है, उनकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि जिस कारोबारी का नाम इस मामले में जोड़ा जा रहा है, उसके संबंध में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भाजपा का दावा है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और दोषियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र हस्तक्षेप किया जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून-व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहे। अब इस मामले में राज्यपाल के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में चल रहे बदलावों के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद केंद्र सरकार में भी बदलाव की संभावना पर मंथन चल रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी भी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर रहेगा जोर सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ राज्यों से नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है। पहले भाजपा संगठन, फिर कैबिनेट विस्तार की संभावना पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, भाजपा पहले अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर सकती है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार का रास्ता साफ हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल यह चर्चा राजनीतिक और मीडिया सूत्रों पर आधारित है और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही लिया जाएगा।
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव परिणामों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हार का उतना दुख नहीं है, जितना “अपनों द्वारा भरोसा तोड़े जाने” का दर्द है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा पर धनबल और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस चुनाव में धनबल, छल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यदि सभी सहयोगी दल एकजुट रहते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की जीत जनभावनाओं की नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत और संसाधनों के इस्तेमाल की जीत है। “दिल आहत है, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी” मंत्री ने कहा कि उनका मन आहत जरूर है, लेकिन वह निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया है और यह स्थायी नहीं होती। अंसारी ने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां भले ही आज उनके पक्ष में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में बदलाव संभव है। “आज उनका दिन है, कल हमारा भी आएगा” अपने संदेश में इरफान अंसारी ने कहा कि राजनीति में किसी की जीत स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भाजपा का समय है, लेकिन आने वाले समय में हालात बदलेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया को महागठबंधन के भीतर बढ़ती असहमति और राजनीतिक असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
रांची। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत सभी प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी कार्यक्रमों और पार्टी की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशानुसार अब प्रत्येक माह की 15 तारीख को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में पूर्व में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर रूपरेखा तय की गई। एसआईआर को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर एसआईआर पर अमर बाउरी ने कहा कि भाजपा ने अपने सभी जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कर लिया है, जबकि सरकार की ओर से अभी प्रशिक्षण का कार्य पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर तक एसआईआर को प्रभावी ढंग से लागू करवाना भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए संगठन स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत का दावा राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा प्रदेश महामंत्री ने दावा किया कि पार्टी का उम्मीदवार पूर्ण बहुमत के साथ जीत हासिल करेगा। उन्होंने कांग्रेस के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल है, तो उसे किसी प्रकार की चिंता नहीं होनी चाहिए। बाउरी ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और पार्टी का प्रत्याशी विजयी होगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान में सीटों के बराबर उम्मीदवार बचे, जिसके चलते मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। निर्वाचन आयोग ने सभी प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया। इस चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा रहे निशांत कुमार जिन्होंने पहली बार किसी सदन की सदस्यता हासिल की है। मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद पहुंचे हैं। उनके अलावा जदयू से भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद भी निर्विरोध निर्वाचित हुए। भोजपुरी स्टार पवन सिंह भी बने MLC भारतीय जनता पार्टी की ओर से भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह ने भी पहली बार विधान परिषद का चुनाव जीता है। उनके साथ भाजपा के संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित भी निर्वाचित हुए हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से सुनील सिंह ने भी जीत दर्ज की है। NDA का दबदबा कायम चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दबदबा साफ दिखाई दिया। भाजपा और जदयू को चार-चार सीटें मिलीं, जबकि लोजपा (रामविलास) के खाते में एक सीट गई। इस तरह NDA ने कुल 10 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं राजद को एक सीट मिली। दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर उठे सवाल इन परिणामों के बीच बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्हें इस बार विधान परिषद का उम्मीदवार नहीं बनाया गया, जबकि वे मंत्री पद पर बने हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा में किसी सदन की सदस्यता नहीं मिलने पर उनके मंत्री पद पर संकट खड़ा हो सकता है। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने एक ओर नए चेहरों को सदन तक पहुंचाया है, वहीं राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और चर्चाओं को भी जन्म दिया है।
कोलकोता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वह इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाली दूसरी राज्यसभा सांसद बन गई हैं। उनके इस्तीफे से पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम में भी टीएमसी के संगठन को बड़ा नुकसान माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सुष्मिता देव ने बुधवार सुबह राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने असम टीएमसी अध्यक्ष पद समेत संगठन में अपनी सभी जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग कर लिया। हिमंता सरमा से मुलाकात के बाद बढ़ीं अटकलें इस्तीफे के तुरंत बाद सुष्मिता देव की मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वास शर्मा से हुई। इस मुलाकात के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी यह मुलाकात असम की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है। कांग्रेस से टीएमसी में आई थीं सुष्मिता देव 53 वर्षीय सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। वह असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री Santosh Mohan Dev की बेटी हैं। वह कांग्रेस की महिला इकाई 'ऑल इंडिया महिला कांग्रेस' की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और असम के सिलचर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। लगातार बढ़ रही हैं टीएमसी की मुश्किलें सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक असंतोष और बगावत की खबरों से जूझ रही है। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शिखर रॉय भी पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर चुके हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में पार्टी विधायकों के एक वर्ग द्वारा नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताने और कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे टीएमसी के लिए संगठनात्मक चुनौती बन सकते हैं और आने वाले दिनों में पार्टी को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
पटना, एजेंसियां। भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन्हें बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद शनिवार को पवन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद क्या बोले पवन सिंह? मुख्यमंत्री आवास में करीब 30 मिनट तक चली मुलाकात के बाद पवन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वह 8 जून को विधान परिषद चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। बीजेपी को बताया अपनी मां मुख्यमंत्री से मिलने से पहले पवन सिंह ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी को अपनी "मां" बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दोनों दी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य केवल जनसेवा करना है और वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। भोजपुरी स्टार से राजनीति तक का सफर भोजपुरी फिल्म उद्योग में "पावर स्टार" के नाम से मशहूर पवन सिंह का जन्म बिहार के आरा जिले में हुआ था। उनका लोकप्रिय गीत "लॉलीपॉप लागेलु" देश-विदेश में काफी चर्चित रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वे राजनीतिक सुर्खियों में रहे थे। पहले उन्हें बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद उन्होंने काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। एनडीए का मजबूत समीकरण विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने पवन सिंह समेत कई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। वहीं जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। विधानसभा में एनडीए के मजबूत संख्या बल को देखते हुए गठबंधन के अधिकांश उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार ऐतिहासिक नतीजे सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाने की ओर निर्णायक बढ़त बना ली है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 148 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए भाजपा 190 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। करीब 15 साल से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ी गई इस लड़ाई में कई दिग्गज नेता अपने-अपने क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी के जनाधार में गिरावट साफ नजर आई। कैसे बदला बंगाल का राजनीतिक समीकरण 2011 में जहां भाजपा का खाता तक नहीं खुला था, वहीं 2016 में उसने 3 सीटें जीतीं और 2021 में 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनकर उभरी। इस बार पार्टी ने 40% से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर ग्रामीण, आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली। इन इलाकों में भाजपा की बड़ी बढ़त चुनाव नतीजों से साफ है कि भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में पार्टी को भारी जनसमर्थन मिला, जबकि टीएमसी शहरी इलाकों और कुछ पारंपरिक सीटों तक सिमटती नजर आई। भाजपा की जीत के बड़े कारण भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई अहम वजहें रहीं। पार्टी का मजबूत संगठन, आक्रामक चुनाव प्रचार और बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत इसके प्रमुख कारण बने। इसके अलावा सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों में गहरी पैठ बनाना भी भाजपा के लिए निर्णायक साबित हुआ। सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कमजोर रणनीति ने भी भाजपा को फायदा पहुंचाया। टीएमसी की हार के कारण तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे सत्ता विरोधी माहौल, संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के खिलाफ बढ़ता असंतोष प्रमुख कारण रहे। कई मंत्री अपने ही क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर साबित हुई। कल्याणकारी योजनाएं भी इस बार मतदाताओं को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर सकीं। नया राजनीतिक अध्याय शुरू इस चुनाव परिणाम के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। वामपंथ और कांग्रेस के बाद टीएमसी का दौर खत्म होता दिख रहा है और अब भाजपा के नेतृत्व में राज्य में नई राजनीतिक दिशा तय होती नजर आ रही है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
कोलकाता, एजेंसियां। नरेंद्र मोदी ने बैरकपुर में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत का भरोसा जताया। दूसरे चरण के मतदान से पहले हुई इस रैली में उन्होंने कहा कि यह उनका अंतिम चुनावी दौरा है और जनता का रुझान स्पष्ट रूप से बदलाव की ओर है। “शपथ ग्रहण में शामिल होने फिर लौटूंगा” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे पूरे विश्वास के साथ लौट रहे हैं कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद उन्हें BJP के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फिर से बंगाल आना पड़ेगा। उन्होंने इसे राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बताया। बैरकपुर के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र पीएम ने बैरकपुर के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जिसने Indian Rebellion of 1857 को शक्ति दी थी। उन्होंने कहा कि अब यही क्षेत्र बंगाल में बदलाव का नेतृत्व करेगा। TMC सरकार पर तीखा हमला प्रधानमंत्री ने All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में उद्योग बंद हो रहे हैं, जबकि अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि TMC के पास विकास के लिए कोई स्पष्ट दृष्टि नहीं है और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। रोजगार और विकास का वादा मोदी ने कहा कि पूर्वी भारत का विकास देश की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने और राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का वादा किया। साथ ही Syama Prasad Mukherjee के सपनों को पूरा करने की बात कही।
Narendra Modi 14 अप्रैल को West Bengal के भाजपा कार्यकर्ताओं से ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान के तहत सीधा संवाद करेंगे। यह वर्चुअल कार्यक्रम दोपहर 4:30 बजे आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत करना है। नमो ऐप से जुड़ने का मौका इस कार्यक्रम में जुड़ने के लिए NaMo App को मुख्य प्लेटफॉर्म बनाया गया है। कार्यकर्ता इस ऐप के जरिए: अपने सुझाव और विचार साझा कर सकते हैं भविष्य की रणनीति पर फीडबैक दे सकते हैं चुने गए प्रतिभागियों को PM से सीधे बात करने का मौका मिलेगा क्या है अभियान का मकसद? Bharatiya Janata Party (BJP) का मानना है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता ही चुनाव जीत का सबसे अहम कड़ी होता है। इस कार्यक्रम के जरिए: कार्यकर्ताओं में जोश भरना घर-घर जनसंपर्क की रणनीति समझाना केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना TMC के खिलाफ रणनीति बंगाल में Trinamool Congress (TMC) के खिलाफ बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। पीएम मोदी कार्यकर्ताओं को बताएंगे: कैसे हर बूथ को मजबूत बनाया जाए चुनावी चुनौतियों और हिंसा के आरोपों के बीच संगठन को कैसे सक्रिय रखा जाए क्यों अहम है यह कार्यक्रम? पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच यह कार्यक्रम बीजेपी के लिए ग्राउंड लेवल स्ट्रेटजी को मजबूत करने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में इस डिजिटल संवाद से जुड़ने की अपील की है।
रांची। रामनवमी के दौरान मुरहू, खूंटी में हुई अप्रिय घटना को भारतीय जनता पार्टी ने बेहद गंभीरता से लिया है। अब इस मामले की जांच बीजेपी की एक कमेटी करेगी। इसके लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू ने एक उच्च स्तरीय 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। खूंटी पहुंची टीम पार्टी द्वारा गठित यह विशेष समिति 31 मार्च को मुरहू (खूंटी) पहुंच गई है। समिति के सदस्य घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। स्थानीय लोगों से बातचीत कर पूरी घटना की विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य घटना के पीछे के कारणों और परिस्थितियों को स्पष्ट करना है। जांच समिति में ये हैं शामिल राकेश प्रसाद (प्रदेश उपाध्यक्ष), नीलकंठ सिंह मुंडा (पूर्व मंत्री), नवीन जायसवाल (मुख्य सचेतक), सीपी सिंह (विधायक एवं पूर्व मंत्री), बालमुकुंद सहाय औक सीमा शर्मा।
पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पूरी तरह से बदल दी है। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी अब “अपनों” पर भरोसा जताने की नीति पर आगे बढ़ रही है। ‘बाहरी चेहरों’ से दूरी, पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता पिछले चुनाव में पार्टी ने बड़ी संख्या में अन्य दलों से आए नेताओं को टिकट दिया था, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हुआ था। इस बार भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह “किराए के नेताओं” पर निर्भर नहीं रहेगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के अनुसार, पार्टी इस बार केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ा रही है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। गुटबाजी खत्म कर एकजुटता पर जोर भाजपा नेतृत्व ने इस बार आंतरिक गुटबाजी को खत्म करने पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछली बार अलग-अलग नेताओं के अलग सुर पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुए थे। अब पार्टी का दावा है कि सभी गुट एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें अमित शाह और राज्य के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी शामिल हैं, संगठन को एक दिशा में ले जाने पर फोकस कर रहे हैं। एंटी-इनकंबेंसी पर भाजपा का दांव भाजपा इस बार तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी स्थानीय स्तर पर मुद्दों को उठाने और हर विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी नेताओं के खिलाफ “चार्जशीट” पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि जनता के बीच स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सकता है। ‘लोकल मुद्दे, लोकल चेहरे’ पर फोकस भाजपा इस बार “लोकल मुद्दे और लोकल चेहरे” की रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। संगठन का मानना है कि इससे जमीनी कनेक्ट मजबूत होगा और पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।