बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के साथ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल ली है। एनडीए विधायक दल की बैठक में Nitish Kumar ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी। हालांकि सत्ता तक पहुंचने का यह सफर जितना ऐतिहासिक है, आगे का रास्ता उतना ही कठिन नजर आता है। सवाल यह है कि क्या सम्राट चौधरी इस “कांटों के ताज” को संभालकर इसे “सुनहरे मौके” में बदल पाएंगे? भ्रष्टाचार: सबसे बड़ी चुनौती बिहार में भ्रष्टाचार लंबे समय से एक जड़ जमाई समस्या रही है। सरकारें बदलीं, लेकिन सिस्टम में पारदर्शिता पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी। Samrat Choudhary के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे “जीरो टॉलरेंस” नीति को जमीन पर उतारें। सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी रोकना CSR फंड और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक सिस्टम तैयार करना अगर इसमें सफलता मिलती है, तो उनकी सरकार की साख मजबूत होगी, वरना यह मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बनेगा। कानून-व्यवस्था: ‘सुशासन’ की असली परीक्षा Nitish Kumar के शासन की सबसे बड़ी पहचान कानून-व्यवस्था में सुधार रही थी, लेकिन हाल के वर्षों में अपराध के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी। हत्या, लूट और महिला अपराध पुलिस व्यवस्था पर सवाल निवेश और विकास पर असर सम्राट चौधरी पहले गृह विभाग संभाल चुके हैं, ऐसे में अब उनसे ठोस सुधार की उम्मीद और भी बढ़ गई है। अगर कानून-व्यवस्था सुधरती है तो बिहार में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन विफलता NDA की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य: ढांचा बनाम गुणवत्ता बिहार में स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का ढांचा तो बढ़ा है, लेकिन गुणवत्ता अब भी बड़ी चुनौती है। शिक्षकों और डॉक्टरों की भारी कमी विश्वविद्यालयों की गिरती साख सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव Samrat Choudhary के सामने यह अवसर है कि वे सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें। अगर इसमें सुधार होता है, तो राज्य का “ह्यूमन कैपिटल” मजबूत होगा और पलायन कम हो सकता है। विवादों की छाया और विपक्ष का हमला मुख्यमंत्री बनते ही सम्राट चौधरी के पुराने विवाद भी सुर्खियों में आ गए हैं। कम उम्र में मंत्री बनने का मामला शैक्षणिक डिग्री पर सवाल विपक्ष, खासकर Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली आरजेडी, इन मुद्दों को लगातार उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। ऐसे में सम्राट के लिए सबसे बड़ा जवाब “काम” ही होगा, जिससे जनता का ध्यान विवादों से हट सके। नीतीश की विरासत: सबसे बड़ी कसौटी 20 साल तक बिहार की राजनीति में Nitish Kumar ने “सुशासन” की जो छवि बनाई, वह किसी भी नए मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है। भ्रष्टाचार पर व्यक्तिगत आरोपों का अभाव प्रशासनिक नियंत्रण विकास और कानून-व्यवस्था का संतुलन सम्राट चौधरी को न सिर्फ इस विरासत को बनाए रखना होगा, बल्कि उससे आगे भी बढ़ना होगा। मौका भी, जोखिम भी Samrat Choudhary के सामने यह एक “डबल एज्ड स्वॉर्ड” की तरह है– मौका: नई छवि गढ़ने का अवसर केंद्र और राज्य के तालमेल से विकास युवा नेतृत्व के रूप में पहचान जोखिम: अपेक्षाओं पर खरा न उतरना विपक्ष के हमलों में घिरना NDA की छवि पर असर बिहार की सत्ता संभालना जितना बड़ा अवसर है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। अगर Samrat Choudhary भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं में सुधार कर पाते हैं, तो वे राज्य के राजनीतिक इतिहास में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। लेकिन अगर वे इन चुनौतियों से पार नहीं पा सके, तो यह “सुनहरा मौका” राजनीतिक जोखिम में भी बदल सकता है।
महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए इसे “पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अधिकारों को खत्म करने की साजिश” करार दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर तेजी दिखाते हुए विशेष संसदीय सत्र बुलाए जाने के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X (पूर्व में ट्विटर)’ पर लंबी पोस्ट लिखकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। “जल्दबाजी में लाया जा रहा है बिल” Akhilesh Yadav ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरह जल्दबाजी में लाया जा रहा है, उससे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा कि भाजपा को अब “वोटरों का अकाल” पड़ गया है, इसलिए नए वर्गों को अपने पक्ष में लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। “जब पुराने समर्थक भाजपा से दूर हो रहे हैं, तब हर बार नए लोगों को लुभाने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं,” उन्होंने कहा। जनगणना और जातिगत आरक्षण का मुद्दा सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनगणना टाल रही है। उनके मुताबिक, “अगर जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की मांग भी उठेगी और उसके आधार पर आरक्षण की बात भी सामने आएगी, जिसे भाजपा कभी लागू नहीं करना चाहती।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल इसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। PDA के अधिकारों पर चोट का आरोप अखिलेश यादव ने अपने “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” फार्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “A” यानी आधी आबादी (महिलाएं) भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में PDA वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है, जिससे सामाजिक न्याय का संतुलन बिगड़ सकता है। महिलाओं की स्थिति पर भी उठाए सवाल सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार में महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई, बढ़ती गैस सिलेंडर कीमतें और रोजमर्रा के खर्चों ने महिलाओं की रसोई पर सीधा असर डाला है। “भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा परेशान अगर कोई है, तो वो महिलाएं ही हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है, जिससे महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जमीनी उदाहरण देकर घेरा Akhilesh Yadav ने मेरठ और नोएडा की महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दर्द को समझना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार इस बिल को लेकर गंभीर है, तो इसे आम महिलाओं के बीच जाकर घोषित करना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके। “चुनावी चाल है महिला आरक्षण” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर चुनाव से पहले इस तरह के बड़े मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि इस बार भी महिलाओं को केंद्र में रखकर वही “पुरानी राजनीतिक चाल” चली जा रही है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। महिला आरक्षण को लेकर Akhilesh Yadav का यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चुनावी विमर्श बनने वाला है। सपा इसे सामाजिक न्याय और PDA के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि केंद्र सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में सामने रख रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद Abhishek Banerjee ने मंगलवार को कूचबिहार में एक विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को “बांग्लादेशी” कहकर उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ राजनीतिक हमला बल्कि “बंगाली अस्मिता और सम्मान पर चोट” बताया। “हमारी भाषा और पहचान को निशाना बनाया जा रहा” अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और वह भाषा तथा संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बांग्ला बोलने वालों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उन्हें घुसपैठिया तक कहा जा रहा है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की पहचान और सम्मान की रक्षा करना टीएमसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है और पार्टी इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। खान-पान पर ‘पहरा’ का आरोप सभा को संबोधित करते हुए Abhishek Banerjee ने भाजपा पर लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कई भाजपा शासित राज्यों में मछली और मांस की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है, जो सीधे तौर पर बंगाली संस्कृति पर हमला है। “हमारे यहां मछली-भात सिर्फ खाना नहीं, हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है। अगर कोई हमारी थाली तक में दखल देगा, तो बंगाल की जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने कहा। मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासकर राजबंशी और मतुआ समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का “समर्थन” इन समुदायों के लिए सिर्फ दिखावा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे। लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है,” उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप केंद्र की Government of India पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को उसका उचित अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि राज्य की जनता बार-बार तृणमूल कांग्रेस को चुनती है, इसलिए केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। “दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं,” उन्होंने कहा। “4 मई को जनता देगी जवाब” अपने भाषण के अंत में अभिषेक बनर्जी ने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा, “4 मई को नतीजे आएंगे और उस दिन बंगाल की जनता अहंकारी और बंगाल विरोधी ताकतों को सबक सिखाएगी।” कूचबिहार की इस रैली में Abhishek Banerjee ने बंगाली पहचान, संस्कृति, खान-पान और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उनके इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी चुनाव में टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है।
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। इसके साथ ही वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। समारोह में Nitish Kumar, J. P. Nadda, Chirag Paswan समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिसने इस बदलाव के राजनीतिक महत्व को और भी बढ़ा दिया। शपथ से पहले आस्था, फिर सत्ता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले Samrat Choudhary पटना के राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दो डिप्टी CM के साथ बना संतुलन नई सरकार में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है– Bijendra Prasad Yadav Vijay Kumar Chaudhary दोनों नेताओं ने राज्यपाल के समक्ष शपथ लेकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। यह फैसला एनडीए के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। “नीतीश से सीखा, अब आगे बढ़ाएंगे बिहार” शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Samrat Choudhary ने कहा कि: उन्हें पार्टी ने राज्य की सेवा का अवसर दिया है वे लगभग 30 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं उन्होंने Nitish Kumar के साथ काम करते हुए प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया उन्होंने यह भी कहा कि “समृद्ध बिहार” का जो सपना देखा गया है, उसे नई सरकार और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। बीजेंद्र यादव: अनुभव और निरंतरता का चेहरा डिप्टी सीएम बने Bijendra Prasad Yadav बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। सुपौल से लगातार नौवीं बार विधायक 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचे जेपी आंदोलन से जुड़ाव संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ उनकी नियुक्ति से सरकार को स्थिरता और अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। विजय चौधरी: ‘संकटमोचक’ की नई जिम्मेदारी दूसरे डिप्टी सीएम Vijay Kumar Chaudhary को Nitish Kumar का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कई अहम विभागों का अनुभव प्रशासनिक मामलों में दक्ष राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे सरकार के भीतर तालमेल और संकट प्रबंधन की अहम कड़ी साबित होंगे। नई सरकार के सामने चुनौतियां और उम्मीदें नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देना शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार बुनियादी ढांचे का विस्तार कानून-व्यवस्था को मजबूत रखना वहीं, जनता को उम्मीद है कि नई टीम “डबल इंजन” सरकार के जरिए विकास की रफ्तार तेज करेगी। एनडीए का नया राजनीतिक संदेश इस शपथ ग्रहण के साथ यह साफ संदेश गया है कि: भाजपा अब बिहार में नेतृत्व की भूमिका में है जेडीयू के अनुभवी नेताओं को सरकार में मजबूत स्थान दिया गया है गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान दिया गया है बिहार में सत्ता का यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, अनुभव और संतुलन का नया अध्याय है। Samrat Choudhary के नेतृत्व में और Bijendra Prasad Yadav व Vijay Kumar Chaudhary के अनुभव के साथ अब नजर इस बात पर होगी कि यह नई सरकार राज्य को विकास और स्थिरता के नए रास्ते पर कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।
नोएडा: Noida में वेतन वृद्धि को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का आंदोलन अब सियासी मुद्दा बन गया है। प्रदर्शन के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मजदूरों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। अखिलेश यादव का सरकार पर हमला Akhilesh Yadav ने कहा कि फैक्ट्री श्रमिकों के बाद अब घरेलू कामगार भी सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई और गलत नीतियों के कारण मजदूर और मध्यम वर्ग दोनों परेशान हैं। राहुल गांधी का समर्थन वहीं Rahul Gandhi ने कहा कि नोएडा की घटना मजदूरों की मजबूरी की आवाज है। उन्होंने कहा कि ₹12,000 की सैलरी में गुजारा मुश्किल है और ₹20,000 वेतन की मांग जायज है। प्रशासन का बड़ा फैसला गौतमबुद्ध नगर की डीएम Medha Roopam ने बताया कि: श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांग मान ली गई है 10 तारीख से पहले वेतन देने के निर्देश समय पर बोनस देने का भी फैसला सरकार ने हाल ही में मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान भी किया है। पुलिस का दावा – हालात काबू में पुलिस अधिकारियों के मुताबिक: छिटपुट घटनाओं को छोड़कर स्थिति नियंत्रण में है कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है हिंसा के मामलों में 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है क्यों भड़का प्रदर्शन? कम वेतन और लंबे काम के घंटे बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन का खर्च बेहतर वेतन (₹18-20 हजार) की मांग हाल के दिनों में हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरे और कुछ जगहों पर हिंसा भी देखने को मिली। नोएडा में श्रमिकों का यह आंदोलन अब सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार ने वेतन बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं, वहीं विपक्ष इसे मजदूरों की नाराजगी बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।
पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब वरिष्ठ जेडीयू नेता Vijay Kumar Chaudhary ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहीं। इस नई सियासी तस्वीर में एक तरफ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर Nitish Kumar के करीबी और भरोसेमंद सहयोगी विजय चौधरी को डिप्टी सीएम की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश के भरोसेमंद को मिली कमान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि Nitish Kumar ने सरकार के संतुलन और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अपने सबसे अनुभवी नेता को आगे किया है। शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Vijay Kumar Chaudhary भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी राजनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व में रही है और यह जिम्मेदारी उनके विश्वास का परिणाम है। अनुभव और प्रशासनिक पकड़ विजय चौधरी: बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं जटिल प्रशासनिक मामलों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं इसी कारण उन्हें सरकार का “क्राइसिस मैनेजर” भी कहा जाता है। नई सरकार में क्या होगी भूमिका? नई सरकार में Vijay Kumar Chaudhary की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बीजेपी नेतृत्व और जेडीयू के बीच तालमेल बैठाना प्रशासनिक फैसलों में स्थिरता बनाए रखना विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करना विश्लेषकों का मानना है कि जहां Samrat Choudhary के पास ऊर्जा है, वहीं विजय चौधरी के पास अनुभव का मजबूत आधार है। विकास पर रहेगा फोकस डिप्टी सीएम बनने के बाद विजय चौधरी ने संकेत दिए कि सरकार: शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान देगी “न्याय के साथ विकास” की नीति को आगे बढ़ाएगी एनडीए सरकार का नया संतुलन इस शपथ के साथ बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। Vijay Kumar Chaudhary की नियुक्ति से यह संदेश गया है कि जेडीयू अब भी सरकार में मजबूत भूमिका निभा रही है। बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि रणनीति और संतुलन का नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय चौधरी अपने अनुभव के दम पर सरकार को कितनी मजबूती देते हैं और राज्य के विकास को नई दिशा कैसे देते हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव Abhishek Banerjee ने वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में वही लोग वोट देंगे जो पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में दिल्ली या Bihar में वोट डाल चुका है और फिर बंगाल में वोट देने आता है, तो TMC कार्यकर्ता उसे ऐसा करने से रोकेंगे। “बाहरी वोटरों से जीतना चाहती है भाजपा” Abhishek Banerjee ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party (भाजपा) बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में रहने वाले गैर-बंगाली लोगों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहर से आकर वोट डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वोटर लिस्ट पर विवाद गहराया राज्य में नई वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। करीब 1 करोड़ पुराने नाम हटाए जाने का दावा 27 लाख लोग SIR ट्रिब्यूनल में विचाराधीन, जिन्हें इस बार वोट का अधिकार नहीं मिलेगा Abhishek Banerjee ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि: सभी मतभेद भुलाकर चुनाव पर ध्यान दें गुटबाजी से दूर रहें पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ें उन्होंने इसे Mamata Banerjee के नेतृत्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि पार्टी को जीत दिलाए। “आत्मसंतुष्टि से बचें” Abhishek Banerjee ने कहा कि भले ही सर्वे में पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही हो, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाकर काम करने पर भी जोर दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद को दिशा दे सकता है।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
Narendra Modi ने Vigyan Bhavan में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की नारी शक्ति को समर्पित है और लोकतंत्र को नई मजबूती देगा। संसद रचने जा रही नया इतिहास प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। यह फैसला सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र और सशक्त होगा “समतामूलक भारत” के सपने को आगे बढ़ाएगा विशेष सत्र और बड़ा फैसला सरकार ने Parliament of India का विशेष सत्र 16–18 अप्रैल के बीच बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े अहम कदम उठाए जाएंगे। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को 2023 में सर्वसम्मति से पास किया गया था। “मैं उपदेश देने नहीं, आशीर्वाद लेने आया हूं” अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा: “मैं यहां किसी को उपदेश देने नहीं आया हूं” “मैं देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूं” उन्होंने देशभर से आई महिलाओं का आभार जताया और इसे “नए युग की शुरुआत” बताया। दशकों का इंतजार खत्म होने की बात पीएम मोदी ने कहा कि: महिला आरक्षण पर करीब 4 दशक से चर्चा चल रही थी अब इसे लागू करने का समय आ गया है लक्ष्य है कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाए सहयोग से आगे बढ़ने की अपील प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर: संवाद, सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ें संसद की गरिमा को नई ऊंचाई दें पीएम मोदी के बयान से साफ है कि सरकार महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मील का पत्थर बनाना चाहती है। अब नजर संसद के विशेष सत्र और विपक्ष के रुख पर रहेगी।
Sonia Gandhi ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली मुद्दा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) है। उन्होंने Narendra Modi पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया। परिसीमन को बताया “खतरनाक” सोनिया गांधी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन: सिर्फ गणितीय नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होना चाहिए गलत तरीके से लागू हुआ तो यह संविधान पर असर डाल सकता है इसे जल्दबाजी में लाना “खतरनाक” हो सकता है PM मोदी की मंशा पर सवाल अपने लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि: सरकार जाति आधारित जनगणना को टालना चाहती है संसद के विशेष सत्र में बिल लाकर विपक्ष को दबाव में डालने की कोशिश की जा रही है चुनावी माहौल (Tamil Nadu और West Bengal) के बीच यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया महिला आरक्षण कानून पर क्या कहा? सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि: Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 पहले ही 2023 में पास हो चुका है इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था “30 महीने बाद फैसला क्यों बदला?” उन्होंने सवाल उठाया: सरकार को अपना रुख बदलने में 30 महीने क्यों लगे? अगर संशोधन जरूरी था, तो कुछ हफ्ते और इंतजार क्यों नहीं किया गया? सोनिया गांधी का साफ कहना है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन और राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ा रही है। इस मुद्दे पर अब सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV के ईरान युद्ध पर दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें “ऐसा पोप पसंद नहीं है जो यह मानता हो कि परमाणु हथियार रखना ठीक है।” उन्होंने पोप के रुख को अमेरिकी विदेश नीति के लिए “बेहद खराब” करार दिया। ट्रंप का तीखा हमला मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि वे पोप लियो के प्रशंसक नहीं हैं। उनका आरोप है कि पोप ऐसे देशों के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं, जो परमाणु हथियार हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप के मुताबिक, यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे विचारों का समर्थन नहीं किया जा सकता। ईरान युद्ध पर आमने-सामने पोप लियो XIV हाल के दिनों में अमेरिका और इज़रायल की ईरान के खिलाफ नीतियों की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी को “अस्वीकार्य” बताया था। खासतौर पर ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि संघर्ष विराम से पहले “एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” धर्म और राजनीति का टकराव इस विवाद में धर्म और राजनीति का मेल भी देखने को मिला। ट्रंप और उनके रक्षा सचिव ने युद्ध के दौरान अपने बयानों में ईश्वर का उल्लेख किया, वहीं पोप ने शांति और संयम की अपील की। इस कारण दोनों पक्षों के बीच वैचारिक टकराव और गहरा गया है। अन्य मुद्दों पर भी मतभेद पोप लियो XIV ने वेनेज़ुएला के मुद्दे पर भी अमेरिका की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और वहां की जनता की इच्छा का सम्मान करने की बात कही थी।
कर्नाटक की कांग्रेस राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। करीब 30 विधायक New Delhi पहुंचकर पार्टी नेतृत्व से कैबिनेट में जगह की मांग करने वाले हैं। पहली बार चुने गए विधायकों की मांग पहली बार जीतकर आए विधायकों ने खुलकर अपनी दावेदारी पेश की है। उनका कहना है कि: कैबिनेट फेरबदल में कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाया जाए नए चेहरों को भी सरकार में मौका मिलना चाहिए सीनियर विधायकों का दबाव वहीं 3 से ज्यादा बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ विधायक भी पीछे नहीं हैं। करीब 40 सीनियर विधायकों में से 20 को मंत्री बनाने की मांग उनका तर्क है कि सरकार में अनुभव का उपयोग जरूरी है दिल्ली में बड़े नेताओं से मुलाकात 30 विधायक Delhi पहुंचकर वरिष्ठ विधायक Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, K C Venugopal और Randeep Singh Surjewala से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। “हर किसी की इच्छा मंत्री बनने की” मांड्या से विधायक Ravikumar Gowda ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर किसी की होती है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री पर निर्भर करेगा। अंदरूनी खींचतान बढ़ी 38 विधायकों ने पहले ही नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग रखी विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी अब जल्द ही फिर बैठक कर आगे की रणनीति तय होगी क्यों अहम है यह मुद्दा? यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार को लेकर अंदरूनी दबाव बढ़ता जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री इस संतुलन को कैसे साधते हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। Narendra Modi, Mallikarjun Kharge और Kiren Rijiju के बीच चिट्ठियों का दौर इस बहस को और गर्म कर रहा है। आखिर खरगे ने PM मोदी को क्यों लिखा पत्र? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सरकार पर कई आरोप लगाए: सरकार जल्दबाजी में संशोधन लागू करना चाहती है चुनाव से पहले इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया खरगे का कहना है कि इतने अहम कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है, न कि जल्दबाजी में फैसला। रिजिजू का जवाब–“अभी सही समय है” इन आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: 16 मार्च 2026 से ही सभी दलों से बातचीत शुरू हो चुकी थी कई पार्टियों–जैसे Samajwadi Party, DMK, Trinamool Congress–से चर्चा की गई कई दलों ने समर्थन भी जताया रिजिजू ने जोर देकर कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है। संसद सत्र क्यों बुलाया गया? सरकार ने 16–18 अप्रैल 2026 तक संसद सत्र बुलाया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे लागू किया जा सके। सरकार इसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। मुद्दा क्या है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है। अब सरकार चाहती है कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाए, जबकि विपक्ष टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
Supreme Court of India आज West Bengal में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेहद अहम माना जा रहा है। किस पीठ के सामने होगी सुनवाई? सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ के सामने होगी। 13 अप्रैल की कार्यसूची में इस मामले को सूचीबद्ध किया गया है। चुनाव आयोग पहले ही दे चुका है अंतिम सूची Election Commission of India ने 9 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है। बंगाल में चुनाव: 23 और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई SIR और ‘स्थगन’ का मतलब क्या? मतदाता सूची के “स्थगन” का मतलब है कि अब इस चुनाव के लिए नई एंट्री नहीं की जा सकती। यानी जो नाम सूची में नहीं है, वह इस बार वोट नहीं डाल सकेगा। मालदा केस पर भी सुनवाई कोर्ट Malda में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले पर भी सुनवाई करेगा। इस मामले में पहले ही National Investigation Agency (NIA) को जांच सौंपने का आदेश दिया जा चुका है।
नई दिल्ली: पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में बड़ा दांव खेलते हुए सभी 294 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि पार्टी के प्रमुख चेहरे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं की भागीदारी बेहद सीमित रह सकती है। रणनीति: संसाधनों का सीमित और लक्षित इस्तेमाल कांग्रेस इस बार पूरे राज्य में चुनाव लड़ रही है, लेकिन पार्टी की रणनीति “हर सीट पर पूरा जोर” देने की नहीं, बल्कि चुनिंदा मजबूत सीटों पर फोकस करने की बताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि जिन क्षेत्रों में उसकी पकड़ अपेक्षाकृत मजबूत है, वहीं संसाधनों और प्रचार का अधिक उपयोग किया जाए। यही वजह है कि बड़े नेताओं के प्रचार कार्यक्रम भी सीमित रखे जा सकते हैं। TMC के साथ ‘अघोषित समझ’ की चर्चा राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच एक अघोषित समझ हो सकती है। माना जा रहा है कि अगर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बड़े स्तर पर प्रचार करते हैं, तो बीजेपी विरोधी वोट - खासकर अल्पसंख्यक वोट - बंट सकते हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा मिल सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नेतृत्व भी संयमित प्रचार रणनीति अपना रहा है। मुस्लिम बहुल इलाकों पर खास नजर मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अधिक है, और यहीं कांग्रेस के कुछ मजबूत उम्मीदवार मैदान में हैं। पार्टी चाहती है कि इन क्षेत्रों में वोटों का विभाजन न हो, इसलिए बड़े नेताओं की एंट्री को सीमित रखा जा सकता है, ताकि स्थानीय समीकरण प्रभावित न हों। पिछले चुनावों का अनुभव भी बना आधार अगर पिछले चुनावों पर नजर डालें, तो राहुल गांधी ने 2021 विधानसभा चुनाव में केवल एक दिन और दो सीटों पर ही प्रचार किया था। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बंगाल में सीमित रैलियां की थीं, जबकि देशभर में उन्होंने 100 से ज्यादा सभाएं की थीं। इससे साफ संकेत मिलता है कि बंगाल में कांग्रेस की रणनीति हमेशा से सीमित लेकिन केंद्रित प्रचार की रही है। क्या होगा आगे? फिलहाल यह तय नहीं है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पूरी तरह प्रचार से दूर रहेंगे या कुछ सीटों पर औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराएंगे। लेकिन इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस इस बार संतुलित और रणनीतिक खेल खेल रही है, जिसमें हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
Harivansh Nomination: राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को एक बार फिर उच्च सदन का सदस्य बनाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मनोनीत किया है। क्यों हुआ मनोनयन? हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था उन्हें उस सीट पर नामित किया गया है, जो पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद खाली हुई थी संवैधानिक प्रावधान यह मनोनयन संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत किया गया राष्ट्रपति को राज्यसभा में नॉमिनेटेड सदस्य नियुक्त करने का अधिकार होता है हरिवंश का प्रोफाइल बिहार से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके राज्यसभा के उपसभापति के रूप में भी कार्य कर चुके संसदीय कार्यों में लंबा अनुभव
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक खुला लेख लिखते हुए इसकी अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा हुआ है। साथ ही, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की है। क्यों जरूरी है महिला आरक्षण बिल? प्रधानमंत्री ने अपने लेख में लिखा कि: भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है इसके बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व कम है उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो: शासन की गुणवत्ता बेहतर होती है नई सोच और अनुभव से नीतियां मजबूत बनती हैं सभी दलों से समर्थन की अपील PM मोदी ने कहा: यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, पूरे देश का है महिला सशक्तिकरण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करें। 16 अप्रैल को संसद में चर्चा प्रधानमंत्री ने बताया कि: 16 अप्रैल को संसद सत्र बुलाया जाएगा इस दौरान महिला आरक्षण बिल पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया होगी क्या है इसका महत्व? PM मोदी के अनुसार: यह बिल लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएगा महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का बड़ा अवसर मिलेगा समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं
असम में चुनावी माहौल के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और यूडीएफ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने घुसपैठ, विकास और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को उठाते हुए एनडीए के पक्ष में मतदान की अपील की। घुसपैठ पर सख्त संदेश योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “अब समय आ गया है कि घुसपैठियों को बोरिया-बिस्तर समेटकर बाहर जाना होगा” आरोप लगाया कि कांग्रेस और यूडीएफ ने घुसपैठ को बढ़ावा दिया कहा कि सरकार एक-एक घुसपैठिए की पहचान कर कार्रवाई कर रही है डेमोग्राफी बदलने का आरोप योगी ने दावा किया कि विपक्षी दलों ने असम की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफी) बदलने की कोशिश की एनडीए सरकार राज्य की पहचान और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है कानून-व्यवस्था पर जोर “असम को घुसपैठ का अड्डा नहीं बनने देंगे” दंगा फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी यूपी का उदाहरण देते हुए कहा कि “वहां अब दंगे और कर्फ्यू खत्म हो चुके हैं” असम की संस्कृति की सराहना कामाख्या मंदिर को आस्था का प्रमुख केंद्र बताया काजीरंगा नेशनल पार्क को जैव विविधता का अनमोल उदाहरण कहा संत श्रीमंत शंकरदेव और माधवदेव के योगदान को याद किया लचित बोरफुकन को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया विकास पर क्या बोले? पूर्वोत्तर में तेजी से बढ़ रही कनेक्टिविटी (सड़क, रेल, हवाई, जलमार्ग) का जिक्र नए AIIMS, IIT, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज बनने की बात “डबल इंजन सरकार” को विकास का आधार बताया
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार पांच राज्यों-पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी-में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान देश के इन पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार चुनावी मैदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। ‘गठबंधन धर्म’ का हवाला पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि यह फैसला गठबंधन की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन होने के कारण जेडीयू ने इन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है। तैयारी की कमी भी बनी वजह राजीव रंजन ने यह भी स्वीकार किया कि इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक तैयारी उतनी मजबूत नहीं है। इसी कारण वर्तमान हालात का आकलन करते हुए चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया गया। भविष्य के लिए दरवाजे खुले हालांकि पार्टी ने भविष्य के लिए संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि जब संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा, तब सीट बंटवारे और चुनाव लड़ने को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत की जा सकती है। कब होंगे चुनाव? इन पांचों राज्यों में चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी हैं: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे बदलती रणनीति के संकेत गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड पहले बिहार के बाहर भी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है।
केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आई एक रिपोर्ट ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। Association for Democratic Reforms (ADR) और केरल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिनसे राज्य की राजनीति और जनप्रतिनिधियों की प्रोफाइल पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। 70% विधायकों पर आपराधिक मामले रिपोर्ट के मुताबिक, Kerala के कुल 132 विधायकों में से 92 (लगभग 70%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी हलफनामे में दी है। इनमें से 33 विधायक (करीब 25%) ऐसे हैं, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे आरोप शामिल हैं। 2 विधायकों पर हत्या (IPC 302) के मामले 3 विधायकों पर हत्या के प्रयास (IPC 307) 3 विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध, जिनमें एक मामला रेप से जुड़ा ये आंकड़े लोकतांत्रिक व्यवस्था में उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि पर गंभीर बहस को जन्म देते हैं। किस पार्टी के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले? पार्टीवार आंकड़ों में भी स्थिति चिंताजनक है: Communist Party of India (Marxist): 74% विधायक Indian National Congress: 90% विधायक Communist Party of India: 44% विधायक Indian Union Muslim League: 86% विधायक यह आंकड़े बताते हैं कि लगभग सभी प्रमुख दलों में आपराधिक मामलों वाले नेताओं की मौजूदगी है। आधे से ज्यादा विधायक करोड़पति रिपोर्ट में विधायकों की संपत्ति को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। कुल संपत्ति: ₹363.78 करोड़ औसत संपत्ति: ₹2.75 करोड़ प्रति विधायक 72 विधायक (55%) करोड़पति कुछ दलों में तो सभी विधायक करोड़पति हैं, जैसे केरल कांग्रेस (M), JD(S), NCP और केरल कांग्रेस। सबसे अमीर और सबसे कम संपत्ति वाले विधायक सबसे अमीर: Mathew Kuzhalnadan (कांग्रेस) – ₹34 करोड़+ दूसरे: Mani C Kappan – ₹27 करोड़+ तीसरे: KB Ganesh Kumar – ₹19 करोड़+ वहीं, PP Sumod (CPI-M) ने सबसे कम संपत्ति, करीब ₹9.9 लाख घोषित की है। शिक्षा, महिला प्रतिनिधित्व और उम्र का आंकड़ा 61% विधायक ग्रेजुएट या उससे अधिक शिक्षित 36% ने 5वीं से 12वीं तक पढ़ाई की केवल 11 महिला विधायक (8%) 70% विधायक 51–80 वर्ष आयु वर्ग में ये आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा के स्तर में सुधार के बावजूद महिला प्रतिनिधित्व अभी भी बेहद कम है। क्या कहती है यह रिपोर्ट? Association for Democratic Reforms की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि राजनीति में आपराधिक छवि और धनबल का प्रभाव अभी भी मजबूत है। चुनाव से पहले यह रिपोर्ट मतदाताओं के लिए एक अहम संकेत है कि वे उम्मीदवारों के चयन में अधिक जागरूक रहें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।