हाजीपुर, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर शनिवार को हाजीपुर के अक्षयवट राय स्टेडियम से उड़ान भरने के बाद करीब सात मिनट तक एक ही क्षेत्र में हवा में मंडराता रहा। इस अप्रत्याशित स्थिति को देखकर स्टेडियम परिसर में मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह उड़ान संचालन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था और किसी तरह की तकनीकी खराबी या सुरक्षा संबंधी समस्या नहीं थी। उड़ान के बाद कुछ देर तक हवा में रुका हेलीकॉप्टर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सामान्य रूप से उड़ान भरी, लेकिन आगे बढ़ने के बजाय कुछ मिनट तक एक ही क्षेत्र में चक्कर लगाता रहा। एहतियात के तौर पर पुलिस और प्रशासन ने स्टेडियम में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर हटाना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी देखने को मिली। लोकेशन स्पष्ट होने के बाद पटना के लिए रवाना करीब सात मिनट बाद पायलट को आगे की उड़ान के लिए आवश्यक लोकेशन स्पष्ट होने पर हेलीकॉप्टर ने सामान्य रूप से उड़ान जारी रखी और पटना के लिए रवाना हो गया। अधिकारियों ने बताया कि पायलट को नेविगेशन संबंधी आवश्यक स्पष्टता मिलने तक हेलीकॉप्टर को हवा में होल्ड करना पड़ा। प्रशासन ने अफवाहों पर लगाया विराम घटना के बाद प्रशासन ने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया सुरक्षा मानकों के तहत अपनाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी नहीं आई थी और न ही सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या उत्पन्न हुई। उड़ान के दौरान सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया गया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव ने मौजूदा राज्य सरकार के जल्द गिरने की भविष्यवाणी कर दी। वृंदावन प्रवास के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि बिहार में बहुत जल्द सरकार बदलने वाली है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, "बिहार में बहुत जल्दी सरकार गिरने वाली है। यह मैंने पहले भी कहा था। मैं वृंदावन में हूं और भविष्यवाणी कर रहा हूं कि बहुत जल्द बिहार की सरकार बदल जाएगी।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और एनडीए नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हाल ही में संपन्न हुई है। एनडीए में मतभेद का किया दावा तेज प्रताप यादव ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि एनडीए के घटक दलों के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है और गठबंधन के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं। हालांकि, उनके इस दावे पर एनडीए के किसी भी प्रमुख नेता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर भी देखा जा रहा है। एनडीए ने विकास और समन्वय पर दिया जोर उधर, पटना में आयोजित एनडीए की बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियमित संवाद और बैठकों की परंपरा स्थापित कर गठबंधन को मजबूती दी है। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनडीए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। तेज प्रताप के बयान के बीच अब राज्य की राजनीति में सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत राज्य के 97.84 लाख लाभार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनके बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की पेंशन राशि हस्तांतरित कर दी है। इस योजना का लाभ वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को मिला है। सरकार का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी पेंशन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाएगी। अब हर महीने 10 तारीख तक मिलेगी पेंशन सरकार ने पेंशन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के खातों में हर महीने की 10 तारीख तक राशि भेजने की व्यवस्था की गई है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकेगी और उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 400 रुपये से बढ़कर हुई 1100 रुपये पेंशन राज्य सरकार ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में बड़ा इजाफा किया है। पहले लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 1100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई राशि महंगाई के दौर में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। छूटे हुए पात्र लोगों को भी मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पात्र लोग अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी जल्द शामिल किया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और सभी जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचे।
पटना, एजेंसियां। बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने खेती और सिंचाई को आसान बनाने के लिए कृषि फीडर से रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कहा है। किसानों को दिन में मिलेगी बिजली, सिंचाई में होगी आसानी अब किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए रात में बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से खासकर धान रोपाई और खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। कृषि फीडर के माध्यम से दिन के समय बिजली मिलने से खेती की लागत और परेशानियां कम होंगी। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दिए निर्देश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में किसानों को तय समय के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने को कहा है। सस्ती दर पर मिल रही है कृषि बिजली बिहार में कृषि कार्य के लिए किसानों को सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को कम लागत में पर्याप्त बिजली मिले, जिससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर हो और कृषि उत्पादन बढ़े। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी जोर बैठक में सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना को तेजी से लागू करने पर भी चर्चा की। सरकार का लक्ष्य किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधाओं से जोड़ना है, जिससे भविष्य में बिजली पर निर्भरता कम हो सके। किसानों को मिलेगी बड़ी सुविधा कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर बिजली उपलब्ध होने से किसान बेहतर तरीके से सिंचाई कर पाएंगे और फसलों की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। सरकार के इस फैसले को खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने नामांकन दाखिल किया। इसके बाद आयोजित एनडीए की सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय ऐसे लोग भी वोट मांगने आते हैं, जिनका बिहार और उसकी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की। एनडीए ने जताया जीत का भरोसा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर से एक समर्पित कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है और एनडीए पहले की तरह इस सीट पर भी बड़ी जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए पर भरोसा जताया था और इस बार भी बांकीपुर में जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा। राजद और जन सुराज भी मैदान में राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता ने भी गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है और इस बार राजद को समर्थन मिलेगा। कांग्रेस ने भी महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प नामांकन के दौरान एक रोचक घटना भी देखने को मिली, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मंच से उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम लेने के बजाय बार-बार दूसरे नेता आशीष सिन्हा का नाम लेते रहे। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। प्रशांत किशोर की एंट्री और प्रमुख दलों के आमने-सामने होने से यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार की कैबिनेट की अहम बैठक आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने की संभावना है। बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न विभागों ने अपने प्रस्ताव कैबिनेट सचिवालय को भेज दिए हैं और अंतिम मंजूरी के बाद इन पर निर्णय लिया जाएगा। इन प्रस्तावों पर रह सकती है नजर सूत्रों के मुताबिक बैठक में नई विकास योजनाओं, विभिन्न विभागों में पदों के सृजन, सड़क और पुल परियोजनाओं, शहरी विकास, शिक्षा संस्थानों के विस्तार तथा वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। सरकार कुछ प्रशासनिक नियुक्तियों और नई नीतियों पर भी फैसला ले सकती है। बैठक के बाद जारी होंगे आधिकारिक फैसले कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद सरकार आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से स्वीकृत प्रस्तावों की जानकारी देगी। फिलहाल एजेंडे की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए अंतिम निर्णय बैठक के बाद ही स्पष्ट होंगे।
पटना, एजेंसियां। आरा के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जाएगी, ताकि घटना के सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ सके। एनकाउंटर के बाद दर्ज हुई दो एफआईआर भरत तिवारी मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर फायरिंग करने और आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद किया गया है। दूसरी एफआईआर सीधे मुठभेड़ की घटना से जुड़ी है। परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल भरत तिवारी की मां आशा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। उन्होंने जगदीशपुर डीएसपी और शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। वहीं पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश कुमार ने भी इस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है और स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग की है। पुलिस का दावा- आत्मरक्षा में की गई फायरिंग पुलिस के अनुसार, 17 जून को अवैध हथियार बरामद करने के लिए भरत तिवारी के गांव में छापेमारी की गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई राउंड फायरिंग की और आत्मसमर्पण की चेतावनी के बावजूद गोली चलाता रहा। इसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे शाहपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद करने का दावा किया है। अब न्यायिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसकी क्या भूमिका रही।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं। महंगे तेल के कारण देश का आयात बिल बढ़ा, चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ा और रुपये की कमजोरी भी देखने को मिली। अब भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भारत चीन की तर्ज पर बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार घरेलू रिफाइनरियों को अधिक मात्रा में कच्चे तेल का भंडार तैयार करने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की नीति पर काम कर सकती है। चीन की रणनीति से मिला सबक ईरान संकट के दौरान चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदने के बजाय अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) का इस्तेमाल किया। इससे उसे कीमतों में उछाल का असर कम झेलना पड़ा। अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में सप्लाई बाधित होने या कीमतों में अचानक वृद्धि की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। फिलहाल सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखती हैं रिफाइनरियां वर्तमान में भारतीय रिफाइनरियां अपनी परिचालन जरूरतों के लिए लगभग 15 दिनों का कच्चा तेल स्टोर करती हैं। नई योजना के तहत इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग 30 दिनों की मांग के बराबर किया जा सकता है। इसके लिए करीब 150 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होगी, क्योंकि भारत की दैनिक खपत लगभग 5 मिलियन बैरल है। 60 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च यदि रिफाइनरियों को अपने भंडार को दोगुना करना पड़ता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा: नए स्टोरेज टैंक बनाने होंगे। हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इसी कारण कुछ रिफाइनरियां इस प्रस्ताव को लेकर चिंता भी जता सकती हैं। पोर्ट्स के पास बनाए जा सकते हैं स्टोरेज विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रिफाइनरियों को बंदरगाहों के पास स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का व्यापार आसान होगा। भारत भविष्य में क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। सिंगापुर का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल तेल भंडारण क्षमता ने उसे एशिया के प्रमुख तेल व्यापारिक केंद्रों में शामिल कर दिया है। रणनीतिक भंडार में भारत अभी काफी पीछे यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक विभिन्न देशों के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार इस प्रकार थे: चीन: 1,397 मिलियन बैरल अमेरिका: 413 मिलियन बैरल जापान: 263 मिलियन बैरल भारत: केवल 21 मिलियन बैरल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत अभी कई बड़े देशों से काफी पीछे है। क्या इससे पेट्रोल और LPG की कीमतों पर असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार होगा, तो अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान देश को तुरंत महंगा तेल खरीदने की मजबूरी कम होगी। इससे: पेट्रोल और डीजल की सप्लाई स्थिर रह सकती है। LPG की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। आयात बिल और रुपये पर दबाव कम किया जा सकेगा। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, यह एक दीर्घकालिक योजना है और इसके परिणाम आने में समय लग सकता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना का नाम अब पाटलीपुत्र होगा। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। हालांकि यह नया नाम नहीं है, बल्कि राजधानी पटना को पहले पाटलीपुत्र के नाम से ही जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान पाटलीपुत्र से बदलकर पटना किया गया। भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी मुख्यमंत्री ने फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखंड सहयोग सह जनकल्याण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बिहार के विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग, किसानों के हित और राजधानी पटना के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'बड़ा पटना' की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजधानी का विकास केवल वर्तमान शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके ऐतिहासिक गौरव को भी नई पहचान दी जाएगी। साथ ही नए और आधुनिक टाउनशिप विकसित कर आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों, उद्योग और कानून-व्यवस्था पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अधिक मुआवजा देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने बताया कि आपदा, संकट या शादी-विवाह जैसी परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। बिहार में अपराधियों के लिए जगह नही कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उद्योगों के विस्तार, नए टाउनशिप और बढ़ते बजट के कारण बिहार तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
कई गाड़ियों का दिखा काफिला पटना, एजेंसियां। बीजेपी नेता और भोजपुरी एक्टर पवन सिंह ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह से मुलाकात की है। पवन सिंह, अनंत सिंह के पटना वाले आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों के बीच काफी बातचीत हुई। इससे जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में देखा गया कि पवन सिंह कई गाड़ियों के काफिले के साथ अनंत सिंह के आवास पर पहुंचे थे, लेकिन दोनों के बीच क्या बात हुई, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। साथ-साथ दिखे अनंत सिंह और पवन सिंह वीडियो में यह भी देखा गया कि मुलाकात के बाद अनंत सिंह, पवन सिंह को घर से बाहर तक छोड़ने आए। इस दौरान उनके समर्थक भी काफी संख्या में मौजूद रहे। मुलाकात का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहा है। पवन सिंह को बीजेपी ने एमएलसी उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने सोमवार को नामांकन किया था। 10 सीटों के लिए 10 कैंडिडेट्स ने ही नॉमिनेशन किया था। इसके बाद उनकी निर्विरोध जीत तय मानी जा रही है। सीएम और प्रदेश अध्यक्ष से भी मिले थे बीजेपी ने चार उम्मीदवारों को कैंडिडेट बनाया था। इनमें पवन सिंह के अलावा डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित शामिल हैं। एमएलसी उम्मीदवार बनने के बाद पवन सिंह ने सीएम सम्राट चौधरी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की थी। साथ ही मीडिया से बात करते हुए एमएलसी कैंडिडेट पवन सिंह ने कहा था, संजय सरावगी जी को मेरा दिल से प्रणाम और दिल से धन्यवाद है। पार्टी मेरी मां है। बीजेपी परिवार का मैं सच्चा सेवक हूं और आजीवन रहूंगा। मेरा काम सच्चे दिल और मन से सिर्फ और सिर्फ सेवा करना है। आज है नामांकन वापस लेने की तारीख बिहार में विधान परिषद चुनाव की बात करें तो, पहली जून से आठ जून तक नामांकन की तारीख थी। नौ जून को नामांकन पत्रों की जांच की गई। 11 जून तक नाम वापसी का समय है। अब तक किसी भी उम्मीदवार ने अपने नाम वापस नहीं लिए हैं। इसके साथ ही 10 सीटों पर चुनाव के लिए 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन किया था। ऐसी स्थिति में बिना मतदान के ही निर्विरोध सभी 10 उम्मीदवारों का सदन जाना तया माना जा रहा है।
रोहिणी का भावुक संदेश— हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आज 11 जून को 79वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर राबड़ी आवास में बुधवार देर रात पारिवार के बीच लालू यादव ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन सेलिब्रेट किया। इस दौरान राबड़ी देवी ने अपने हाथों से लालू यादव को केक खिलाकर जन्मदिन की बधाई दी। रोहिणी ने किया भावुक पोस्ट इधर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने पिता के जन्मदिन पर भावुक संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया। रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा- हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... रोहिणी ने लिखा कि उनकी जिंदगी में पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता। उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया, उन्हें संभलना और आगे बढ़ना सिखाया। हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़े रहे। अपने संदेश में रोहिणी ने पिता के प्रेम, त्याग और आशीर्वाद को अपनी सबसे बेशकीमती धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह और मार्गदर्शन ही उनकी ताकत है, जिसने जीवन के हर मोड़ पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद आगे रोहिणी ने ईश्वर से पिता के लिए लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उनके सिर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ हमेशा बना रहे, यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है। मुख्यमंत्री सम्राट ने लालू यादव के जन्मदिन पर दी बधाई बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूर्व सीएम लालू यादव के जन्मदिन पर ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए राजद सुप्रीमो को बर्थडे की बधाई दी। राजद कार्यकर्ता मना रहे जश्न इस मौके को लेकर राजद कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यालय को खूबसुरत और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पूरे बिहार में लालू के समर्थक अलग-अलग जगह केक काटकर, मिठाईय़ां बांटकर अपने नेता का जन्मदिन मना रहे हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचने के साथ ही राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए बिहार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। 94 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली पेंशन बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि समय पर पहुंचनी चाहिए। तेजस्वी ने पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है? कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट के समय किया जाता है। ऐसे में नियमित पेंशन भुगतान के लिए इस फंड का इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है। तेजस्वी ने दावा किया कि कई विकास योजनाओं का भुगतान लंबित है, ठेकेदारों के बिल अटके हुए हैं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। भाजपा ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आकस्मिकता निधि से राशि लेना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है। बाद में इस राशि का बजटीय समायोजन कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य लगातार जारी हैं। राजनीतिक बहस तेज पेंशन भुगतान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय नीति पर केंद्रित हो गई है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहा है, वहीं सरकार और भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।
पटना, एजेंसियां। भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह अब सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन्हें बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद शनिवार को पवन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद क्या बोले पवन सिंह? मुख्यमंत्री आवास में करीब 30 मिनट तक चली मुलाकात के बाद पवन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वह 8 जून को विधान परिषद चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। बीजेपी को बताया अपनी मां मुख्यमंत्री से मिलने से पहले पवन सिंह ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी को अपनी "मां" बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दोनों दी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य केवल जनसेवा करना है और वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। भोजपुरी स्टार से राजनीति तक का सफर भोजपुरी फिल्म उद्योग में "पावर स्टार" के नाम से मशहूर पवन सिंह का जन्म बिहार के आरा जिले में हुआ था। उनका लोकप्रिय गीत "लॉलीपॉप लागेलु" देश-विदेश में काफी चर्चित रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वे राजनीतिक सुर्खियों में रहे थे। पहले उन्हें बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इसके बाद उन्होंने काराकाट लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। एनडीए का मजबूत समीकरण विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने पवन सिंह समेत कई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। वहीं जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। विधानसभा में एनडीए के मजबूत संख्या बल को देखते हुए गठबंधन के अधिकांश उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव , पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजश्वी यादव द्वारा अपनी सुरक्षा लौटाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच सिंगापुर में मौजूद लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती का फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कम करने के बाद औपचारिक रूप से सुरक्षा बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी कारण राबड़ी देवी ने अपने आधिकारिक आवास से सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला किया। ‘करोड़ों लोग हैं लालू परिवार का सुरक्षा कवच’ रोहिणी ने अपने बयान में कहा कि बिहार की करोड़ों जनता ही लालू परिवार की असली सुरक्षा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि लालू प्रसाद, राबड़ी देवी या परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी सरकार पर होगी। उन्होंने राजद समर्थकों से भी अपील की कि वे बड़ी संख्या में राबड़ी देवी के आवास पहुंचकर अपना समर्थन दर्ज कराएं। जेडीयू का पलटवार, नीरज कुमार ने उठाए सवाल दूसरी ओर, नीरज कुमार ने रोहिणी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राबड़ी देवी को अभी भी जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षाकर्मियों को औपचारिक प्रक्रिया के बिना वापस भेजा गया। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि यदि परिवार सरकारी सुविधाएं छोड़ना चाहता है तो अन्य सुविधाओं पर भी पुनर्विचार कर सकता है। लालू परिवार की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
बिहार विधानसभा में आज होने वाला फ्लोर टेस्ट मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के लिए औपचारिकता हो सकता है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के लिए यह किसी बड़ी राजनीतिक परीक्षा से कम नहीं है। असली सवाल सरकार के बहुमत का नहीं, बल्कि RJD और महागठबंधन की एकजुटता का है। पिछले झटकों ने बढ़ाई चिंता तेजस्वी यादव के लिए चिंता की वजह भी साफ है। पिछले फ्लोर टेस्ट और राज्यसभा चुनाव में RJD के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग या पाला बदलकर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया था। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठे थे। 35 विधायकों को साथ रखना चुनौती इस समय महागठबंधन के पास सिर्फ 35 विधायक हैं। ऐसे में एक भी विधायक का टूटना विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है। तेजस्वी के सामने सरकार गिराने से ज्यादा अपनी टीम को एकजुट रखने की चुनौती है। सम्राट की जीत तय, तेजस्वी की साख दांव पर Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली NDA सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट का नतीजा लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन अगर महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं, तो यह तेजस्वी के लिए बड़ी राजनीतिक जीत होगी। बिहार की राजनीति को मिलेगा बड़ा संदेश अगर इस बार भी कोई विधायक पाला बदलता है, तो इसका असर सिर्फ आज के फ्लोर टेस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। यह 2026 और आगे की बिहार राजनीति में तेजस्वी की रणनीति और पकड़ पर भी सवाल खड़े करेगा। इसलिए कहा जा रहा है कि यह सरकार का नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की साख का फ्लोर टेस्ट है।
पटना: Bihar की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar आज अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद एनडीए गठबंधन नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला करेगा। सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। Sanjay Jha, Lalan Singh और Vijay Kumar Chaudhary मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। वहीं उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary भी सीएम हाउस पहुंचे। इसके बाद नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी एक ही गाड़ी से बाहर निकलते देखे गए, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। दिनभर का पूरा कार्यक्रम: सुबह 11 बजे: नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की अंतिम बैठक दोपहर 2 बजे: एक अणे मार्ग स्थित आवास पर JDU विधायक दल की बैठक दोपहर 3 बजे: राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे शाम 4 बजे: एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला बुधवार सुबह 11 बजे: नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण कैबिनेट की आखिरी बैठक सुबह 11 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक मौजूदा सरकार के कार्यकाल की अंतिम औपचारिक बैठक रही। इसके बाद एनडीए के सभी घटक दल–JDU, BJP, HAM, RLJP और RLM–अपने-अपने विधायकों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे। 145 दिन का कार्यकाल Nitish Kumar ने 20 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी 14 अप्रैल 2026 को इस्तीफा देने पर कार्यकाल 145 दिन का रहेगा यह उनका दूसरा सबसे छोटा कार्यकाल होगा इससे पहले 2000 में मात्र 7 दिन में इस्तीफा देना पड़ा था NDA बैठक में तय होगा नया चेहरा शाम 4 बजे होने वाली एनडीए की संयुक्त बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इस बैठक में भाजपा की ओर से Shivraj Singh Chouhan पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे और उनकी निगरानी में फैसला लिया जाएगा। आगे क्या नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण बुधवार सुबह 11 बजे राजभवन में होगा। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार का औपचारिक गठन पूरा हो जाएगा। राजनीतिक मायने मुख्यमंत्री आवास पर लगातार बैठकों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है नीतीश और सम्राट का एक साथ दिखना कई संकेत दे रहा है अब सबकी नजरें एनडीए बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के अगले मुख्यमंत्री का नाम तय होगा बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की कमान अगले दौर में किसके हाथ में होगी।
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार सम्राट चौधरी को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज राजनीतिक संदेश है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? क्या बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के बयान बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं। अगर बीजेपी सम्राट चौधरी को आगे नहीं बढ़ाती है, तो इससे कुशवाहा वोट बैंक में नाराजगी की आशंका बन सकती है। वहीं अगर उन्हें आगे किया जाता है, तो इसका श्रेय भी नीतीश कुमार ले सकते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में जदयू को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति यह मामला बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी खुलकर यह भी नहीं कह पा रही कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और सही समय का इंतजार कर रही है, ताकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार फैसला लिया जा सके। ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश? राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का संदेश देना चाहते हैं। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर वे यह दिखाना चाहते हैं कि इस सामाजिक एकता में उनकी अहम भूमिका है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है। क्या दोहराई जाएगी सुशील कुमार मोदी जैसी कहानी? राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं सम्राट चौधरी की स्थिति भी दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी न हो जाए। 2005 के बाद जदयू-भाजपा गठबंधन में सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी काफी मजबूत मानी जाती थी। लेकिन बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण बदलने पर सुशील मोदी को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था। गृह मंत्री के तौर पर प्रदर्शन पर भी सवाल सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार को घेरा है। हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें फिलहाल खुला समर्थन दिया जा रहा है। आगे क्या? बिहार की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है। क्या यह रणनीति बीजेपी को दबाव में लाने के लिए है, या फिर गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास-इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और सभी की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं।
‘समृद्धि यात्रा’ के बयान से गर्म हुई सियासत बिहार की राजनीति में इन दिनों उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान दिए गए एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। मंच से उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि “आगे ये ही सब काम संभालेंगे”, जिसके बाद उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गईं। जेडीयू ने दी सफाई, ‘अभी ऐसा कोई फैसला नहीं’ हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए जनता दल यूनाइटेड ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। विजय चौधरी ने ‘संकेत’ को किया डिकोड बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की यह पुरानी कार्यशैली रही है कि वे अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आगे जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने साफ कहा, “मैं उस कार्यक्रम में मौजूद था, इसे उत्तराधिकारी का संकेत मानना सही नहीं है। मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा कहते रहते हैं।” सम्राट चौधरी की भूमिका पर क्या बोले नेता? विजय चौधरी ने यह जरूर माना कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अगला मुख्यमंत्री घोषित करने जैसी कोई बात फिलहाल नहीं है। जमुई में बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा? दरअसल, जमुई में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश कुमार लगातार दो-तीन दिनों से इसी तरह के बयान दे रहे थे। जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी के लिए लोगों से समर्थन भी मांगा, तब यह चर्चा और तेज हो गई कि वह अपने उत्तराधिकारी का संकेत दे रहे हैं। आगे क्या? नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों के बीच यह मुद्दा और अहम हो गया है। हालांकि जेडीयू की सफाई के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में उत्तराधिकारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। नीतीश कुमार के संकेतों और जेडीयू की सफाई के बीच आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है। पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी। हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके। मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया। सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।
जेडीयू सूत्रों का दावा – आज भरेंगे नामांकन, अमित शाह रहेंगे मौजूद; बीजेपी के हाथ में आ सकती है कमान बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री Nitish Kumar जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राज्य की राजनीति में एक युग के अंत जैसा होगा। बताया जा रहा है कि वे आने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर सकते हैं। जेडीयू के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी मौजूद रह सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगले सप्ताह तक नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस पर उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के हाथ में जा सकती है कमान अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी के हाथ में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, नया मुख्यमंत्री बीजेपी का ही कोई वरिष्ठ नेता होगा। फिलहाल डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है। पटना दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नया मुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से हो सकता है, ताकि सामाजिक संतुलन साधा जा सके। बेटे निशांत कुमार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर यह फैसला होता है तो जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह बड़ा कदम माना जाएगा। 10 बार शपथ, सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड 75 वर्षीय नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। 2015 से वे लगातार सत्ता में हैं, बीच में कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे। चाहे NDA हो या महागठबंधन, नीतीश कुमार हर चुनाव में प्रमुख चेहरा रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में जब राजनीतिक विश्लेषक उन्हें लगभग खारिज कर चुके थे, तब उन्होंने जबरदस्त वापसी की। महिलाओं के लिए साइकिल योजना और शराबबंदी जैसे फैसलों ने उन्हें मजबूत समर्थन दिलाया। विपक्ष के हमले और उम्र को लेकर सवाल विपक्षी दल Rashtriya Janata Dal (RJD) ने हाल के दिनों में नीतीश कुमार की उम्र और सक्रियता को लेकर सवाल उठाए थे। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि बीजेपी लंबे समय से बिहार में खुद नेतृत्व संभालना चाहती थी। अब अगर यह बदलाव होता है तो बिहार की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। क्या खत्म होगा एक दौर? नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कई बार राजनीतिक पाला बदला, लेकिन अपनी पकड़ बनाए रखी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वे वाकई राज्यसभा जाएंगे और बिहार में नया नेतृत्व सामने आएगा या फिर सियासी समीकरण आखिरी समय में बदल जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।