धर्म

अक्षय तृतीया 2026 का शुभ संयोग

अक्षय तृतीया 2026: बिना मुहूर्त देखें करें हर शुभ काम, ‘स्वयंसिद्ध’ दिन देगा सफलता का आशीर्वाद

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Akshaya Tritiya gold buying and पूजा rituals
Akshaya Tritiya 2026 Auspicious Day

 

19 अप्रैल को बन रहा खास संयोग, ग्रहों की अनुकूल स्थिति से मिलेगा हर कार्य में लाभ

Akshaya Tritiya का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को ‘स्वयंसिद्ध’ या ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी ऐसा शुभ समय जिसमें किसी भी कार्य के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती।

मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल अक्षय यानी कभी खत्म न होने वाला होता है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

क्या है ‘अबूझ मुहूर्त’ का मतलब?

‘अबूझ मुहूर्त’ का अर्थ है ऐसा समय जिसे दोबारा सोचने या किसी ज्योतिषी से पूछने की आवश्यकता न हो।

अक्षय तृतीया पर पूरे दिन ग्रहों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे सभी मांगलिक कार्य बिना किसी हिचक के किए जा सकते हैं।

ग्रहों की स्थिति क्यों मानी जाती है खास?

ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च और शक्तिशाली अवस्था में होते हैं।

  • सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है
  • चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक होता है

जब ये दोनों ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति के निर्णय और प्रयास सकारात्मक परिणाम देते हैं। यही कारण है कि इस दिन ग्रह दोष भी प्रभावहीन माने जाते हैं।

पौराणिक मान्यता भी बनाती है इसे विशेष

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। यह तथ्य इस तिथि की पवित्रता और शक्ति को दर्शाता है।

इस दिन ब्रह्मांड से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है, जो हर कार्य को सफल बनाने में सहायक माना जाता है।

किन कार्यों के लिए सबसे शुभ है यह दिन?

अक्षय तृतीया को जीवन के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है:

  • विवाह और सगाई
  • गृह प्रवेश
  • नया व्यवसाय या निवेश
  • मुंडन और अन्य धार्मिक संस्कार
  • सोना-चांदी या संपत्ति की खरीद

सफलता के लिए अपनाएं ये सरल उपाय

  • सुबह की शुरुआत: स्नान कर अपने इष्ट देव का ध्यान करें और नए कार्य का संकल्प लें
  • शुभ खरीदारी: सोना या चांदी खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है
  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, जल या वस्त्र दान करें
  • सौम्य व्यवहार: वाणी और आचरण में मधुरता रखें
  • ईमानदारी से प्रयास: इस दिन शुरू किया गया काम लंबे समय तक फल देता है

आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों लाभ

अक्षय तृतीया सिर्फ भौतिक सफलता ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन का भी प्रतीक है।

यह दिन हमें यह सिखाता है कि सही समय पर सही निर्णय और सच्चे मन से किया गया कार्य जीवन में स्थायी सफलता दिला सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Palm with a triangle mark highlighted in palmistry symbolising prosperity and good fortune.
हथेली में इस स्थान पर बना त्रिभुज का निशान माना जाता है बेहद शुभ, मिलता है धन, भूमि और वाहन का सुख

नई दिल्ली: हस्तरेखा शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र में हथेली की रेखाओं, पर्वतों और विभिन्न चिह्नों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हथेली पर बने कुछ निशान व्यक्ति के स्वभाव, करियर, धन और भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। इनमें त्रिभुज का चिह्न विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अलग-अलग स्थानों पर बना यह निशान अलग-अलग प्रकार के फल प्रदान करता है। पर्वतों पर त्रिभुज के निशान का महत्व गुरु पर्वत पर त्रिभुज यदि गुरु पर्वत पर त्रिभुज का निशान बना हो तो ऐसे व्यक्ति समाजहित के कार्यों में रुचि रखते हैं। उन्हें करियर में उच्च पद और सम्मान मिलने की संभावना रहती है। शनि पर्वत पर त्रिभुज शनि पर्वत पर बना त्रिभुज व्यक्ति को ज्योतिष, रहस्य और गुप्त विद्याओं की ओर आकर्षित करता है। ऐसे लोग शोध और आध्यात्मिक विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। सूर्य पर्वत पर त्रिभुज सूर्य पर्वत पर यह निशान शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति कला, विज्ञान, चिकित्सा और शिल्प के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। बुध पर्वत पर त्रिभुज बुध पर्वत पर त्रिभुज का चिह्न व्यवसाय, राजनीति, विज्ञान और गहन अध्ययन में सफलता का संकेत माना जाता है। मंगल पर्वत पर त्रिभुज मंगल स्थान पर बना यह निशान व्यक्ति को आत्मविश्वासी और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने वाला बनाता है। ऐसे लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं। शुक्र पर्वत पर त्रिभुज शुक्र पर्वत पर त्रिभुज का निशान होने पर व्यक्ति गणित और तार्किक विषयों में अच्छा माना जाता है। इंद्र क्षेत्र में त्रिभुज ऐसे लोगों की रुचि गुप्त विद्याओं और रहस्यमयी विषयों में अधिक हो सकती है। रेखाओं पर त्रिभुज का क्या होता है अर्थ? पितृ रेखा पर त्रिभुज यह पैतृक संपत्ति या परिवार की ओर से मिलने वाले लाभ का संकेत माना जाता है। मातृ रेखा पर त्रिभुज ऐसे लोगों को ननिहाल पक्ष से सहयोग और लाभ मिलने की संभावना रहती है। आयु रेखा पर त्रिभुज सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह सबसे शुभ संकेतों में से एक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी मेहनत और प्रयास से धन, भूमि, वाहन और सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। मणिबंध रेखा पर त्रिभुज हथेली के निचले हिस्से में मणिबंध रेखा पर बना त्रिभुज वृद्धावस्था में धन और सम्मान मिलने का संकेत देता है। भाग्य रेखा पर त्रिभुज भाग्य रेखा पर बना त्रिभुज आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। त्रिभुज जितना बड़ा होगा, धन लाभ की संभावनाएं उतनी अधिक मानी जाती हैं। नोट: हस्तरेखा और सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इनके परिणाम व्यक्ति विशेष और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।  

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🌤️  दिनांक - 11 जून 2026 🌤️ दिन - गुरूवार 🌤️ विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - उत्तरायण  🌤️ ऋतु - ग्रीष्म ॠतु  🌤️ मास - अधिक ज्येष्ठ 🌤️ पक्ष - कृष्ण  🌤️ तिथि - एकादशी रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात द्वादशी 🌤️ नक्षत्र - रेवती सुबह 08:16 तक तत्पश्चात अश्विनी 🌤️ योग - शोभन 12 जून रात्रि 01:00 तक तत्पश्चात अतिगण्ड 🌤️*राहुकाल - दोपहर 02:19 से शाम 03:59 तक* 🌤️ सूर्योदय - 05:07 🌤️ सूर्यास्त -  06:19 👉 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे व्रत पर्व विवरण- परमा (कामदा)एकादशी,पंचक (समाप्त: सुबह 08:16 ) विशेष- *हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।। एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

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