देशभर में आज चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर हनुमान जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। पवनपुत्र, रामभक्त और चिरंजीवी हनुमान जी को ‘अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता’ कहा जाता है, जिसका उल्लेख हनुमान चालीसा में भी मिलता है। भक्ति साहित्य के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा- “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता” मान्यता है कि माता सीता ने हनुमान जी को इन दिव्य शक्तियों और संपत्तियों का वरदान दिया था। क्या हैं हनुमान जी की 8 सिद्धियां? हनुमान जी के पास आठ अद्भुत दिव्य शक्तियां मानी जाती हैं, जिन्हें अष्ट सिद्धि कहा जाता है- अणिमा – स्वयं को अत्यंत सूक्ष्म बनाने की शक्ति महिमा – इच्छानुसार विशाल रूप धारण करने की शक्ति गरिमा – शरीर को अत्यधिक भारी बनाने की क्षमता लघिमा – शरीर को अत्यंत हल्का कर लेने की शक्ति प्राप्ति – किसी भी वस्तु को तुरंत प्राप्त कर लेने की शक्ति प्राकाम्य – कहीं भी जाने, आकाश में उड़ने या जल में रहने की क्षमता ईशित्व – दैवीय शक्तियों पर नियंत्रण रखने की क्षमता वशित्व – इंद्रियों और मन को वश में करने की शक्ति इन सिद्धियों के कारण हनुमान जी किसी भी रूप में प्रकट होकर असंभव कार्यों को संभव बना सकते हैं। क्या हैं 9 निधियां? नव निधियां दिव्य संपत्तियों का प्रतीक मानी जाती हैं, जो जीवन में समृद्धि और संतुलन का संकेत देती हैं- पद्म निधि – स्वर्ण-चांदी संग्रह और दान की प्रवृत्ति महापद्म निधि – धर्म कार्यों में धन का उपयोग नील निधि – कई पीढ़ियों तक चलने वाली संपत्ति मुकुंद निधि – राज्य और सत्ता से जुड़ी संपत्ति नंद निधि – परिवार और वंश को संभालने वाली संपत्ति मकर निधि – अस्त्र-शस्त्रों का संग्रह कच्छप निधि – स्वयं के उपयोग की संपत्ति शंख निधि – सीमित अवधि तक रहने वाली संपत्ति खर्व निधि – मिश्रित और विविध फल देने वाली संपत्ति भक्तों को क्या मिलता है हनुमान जी की कृपा से? धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को साहस, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। हनुमान जी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है, क्योंकि उनकी कृपा से जीवन के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।
हिंदू धर्म में हर महीने का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायक और श्रेष्ठ माना गया है। 3 अप्रैल 2026 से वैशाख मास की शुरुआत हो रही है, जिसे धार्मिक ग्रंथों में मोक्ष प्रदान करने वाला और पापों का नाश करने वाला महीना बताया गया है। शास्त्रों, विशेषकर नारद पुराण और स्कंद पुराण में वैशाख मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार, जिस प्रकार वेदों का स्थान सर्वोच्च है, उसी तरह सभी महीनों में वैशाख का स्थान श्रेष्ठ माना गया है। माधव मास: नाम में ही छिपी है महिमा वैशाख मास को ‘माधव मास’ भी कहा जाता है। ‘माधव’ भगवान विष्णु का एक प्रमुख नाम है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु जल में निवास करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता यह भी है कि जो व्यक्ति इस महीने में नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। वैशाख में हुए भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार इस पावन महीने में भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतार प्रकट हुए, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है- परशुराम अवतार: वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को भगवान परशुराम का जन्म हुआ। नृसिंह अवतार: वैशाख चतुर्दशी को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान ने नृसिंह रूप धारण किया। कूर्म अवतार: समुद्र मंथन के दौरान भगवान ने कछुए का रूप लेकर मंदराचल पर्वत को सहारा दिया। इन दिव्य घटनाओं के कारण वैशाख मास को विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत पावन और उत्सवमय माना जाता है। दान-पुण्य और सेवा का विशेष महत्व वैशाख मास केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक कल्याण और सेवा का भी महीना है। गर्मी के इस समय में प्यासे लोगों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना, पेड़ लगाना, सत्तू और पंखे का दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में किया गया दान सीधे भगवान विष्णु की सेवा के समान फल देता है। शास्त्रों का संदेश नारद पुराण में कहा गया है- “न वैशाख समो मासो, न सत्येन समं तपः” अर्थात् वैशाख के समान कोई महीना नहीं है और सत्य के समान कोई तप नहीं है।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसमें पूजा, व्रत, दान और स्नान का अत्यंत पुण्य फल बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की उपासना की जाती है। इस वर्ष 1 अप्रैल 2026 को व्रत और चंद्र पूजन किया जाएगा, जबकि 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती मनाई जाएगी। तिथि और शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे व्रत और चंद्र अर्घ्य: 1 अप्रैल (संध्या समय) स्नान-दान और हनुमान जयंती: 2 अप्रैल (उदयातिथि के अनुसार) शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन पूर्णिमा की तिथि शाम और रात में रहती है, उसी दिन व्रत और चंद्रमा की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि चैत्र पूर्णिमा की शाम चंद्रोदय के समय अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना जाता है। चांदी या तांबे के पात्र में जल लें उसमें कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाएं चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करें प्रमुख मंत्र ॐ सोमाय नमः ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ॐ क्लीं सोम मंत्राय नमः ॐ नमः शशांकशेखराय नियम और सावधानियां तामसिक भोजन से बचें (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) क्रोध और विवाद से दूर रहें अर्घ्य के बाद सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध, वस्त्र) का दान करें सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करें धार्मिक महत्व मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं। इस दिन अर्घ्य देने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही, यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाला माना जाता है।
हिंदू धर्म में Hanuman Jayanti का विशेष महत्व है। इस वर्ष यह पावन पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन Hanuman का जन्म हुआ था, इसलिए इसे चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और कुंडली का मंगल दोष भी शांत होता है। हनुमान जयंती पर करें ये 5 प्रभावी उपाय 1. व्रत और राम नाम का जप इस दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करें और Ram का नाम जपें। रामचरितमानस, राम स्तुति या राम चालीसा का पाठ करने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 2. सिंदूर अर्पित करें हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं, भय दूर होता है और शत्रुओं पर विजय मिलती है। 3. हनुमान बाहुक और अष्टक का पाठ रोग, भय या संकट से मुक्ति के लिए हनुमान बाहुक और संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करें। यह उपाय मानसिक और शारीरिक कष्टों को दूर करने में सहायक माना जाता है। 4. बजरंग बाण का पाठ (विशेष परिस्थिति में) यदि जीवन में गंभीर संकट हो, तो बजरंग बाण का पाठ किया जा सकता है। हालांकि इसे सामान्य परिस्थितियों में पढ़ने की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन कठिन समय में यह अत्यंत प्रभावी माना गया है। 5. दान और भोग का महत्व हनुमान जयंती पर मसूर की दाल, गुड़, चना दाल और लाल वस्त्र का दान करें। साथ ही हनुमान जी को लड्डू और बूंदी का भोग लगाएं। इससे मंगल और शनि दोष शांत होते हैं। आस्था और विश्वास का पर्व हनुमान जयंती केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हनुमान जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त साल 2026 में हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि आरंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे उदया तिथि के अनुसार पर्व: 2 अप्रैल 2026 शुभ मुहूर्त: 2 अप्रैल को सूर्योदय से लेकर सुबह 07:41 बजे तक पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा सामग्री हनुमान जी की कृपा पाने के लिए पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व है: लाल कपड़ा और चौकी चमेली का तेल, सिंदूर, जनेऊ लाल फूल, चंदन, अक्षत बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना, केला घी का दीपक, धूप, कपूर, गंगाजल तुलसी दल (भोग में अनिवार्य) पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ या लाल वस्त्र पहनें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराकर चमेली तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर फूल, फल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं, साथ में तुलसी दल जरूर रखें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती कर सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें। प्रमुख मंत्र ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय रामदूताय स्वाहा ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय रामदूताय स्वाहा इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। क्या है मान्यता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और भक्ति भाव से पूजा कर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
भारत में आस्था और श्रद्धा के प्रमुख पर्वों में से एक राम नवमी इस वर्ष 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम का जन्म हुआ था, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं को घर लाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन वस्तुओं से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, सुख-समृद्धि आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। 1. शंख राम नवमी के दिन शंख को घर लाना बेहद शुभ माना जाता है। इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का वास होता है। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। 2. श्रीराम यंत्र इस पावन अवसर पर श्रीराम यंत्र की स्थापना घर में सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह परिवार में प्रेम, एकता और सम्मान को बढ़ाता है और बुरी नजर से भी रक्षा करता है। 3. राम दरबार राम नवमी के दिन राम दरबार (राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा) घर लाना अत्यंत शुभ होता है। नियमित पूजा करने से घर में शांति, सौहार्द और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 4. चांदी की वस्तुएं इस दिन चांदी की वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में मान-सम्मान और समृद्धि बढ़ती है और भगवान राम की कृपा बनी रहती है। 5. तुलसी का पौधा यदि घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो राम नवमी के दिन इसे अवश्य लगाएं। तुलसी को पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो वास्तु दोष दूर करने और आर्थिक समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है।
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन देवी शक्ति के उग्र और प्रभावशाली स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक सच्चे मन से मां कालरात्रि की आराधना करता है, उसके जीवन से भय और बाधाएं दूर होती हैं और साहस, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कालरात्रि का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व मां कालरात्रि का रूप अत्यंत तेजस्वी और अद्भुत माना जाता है। उनका वर्ण श्याम, केश खुले, गले में विद्युत समान चमकती माला और तीन नेत्र-यह स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वह सुरक्षा और कल्याण का प्रतीक हैं। इसी कारण उन्हें “शुभंकारी” भी कहा जाता है, जो अपने भक्तों को हर संकट से उबारती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं। पूजा विधि: सरलता और श्रद्धा का विशेष महत्व नवरात्रि के सातवें दिन पूजा विधि को अत्यंत पवित्र और अनुशासित माना गया है: प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें श्रद्धा और सादगी के साथ पूजा करें, दिखावे से बचें भोग और आरती का महत्व मां कालरात्रि को गुड़ और चना का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटा जाता है। अंत में मां की आरती करना अनिवार्य माना गया है, जो पूजा को पूर्णता प्रदान करती है। मंत्र और शुभ रंग इस दिन मां कालरात्रि के बीज मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः” नियमित मंत्र जाप से मन शांत होता है और नकारात्मक विचारों का नाश होता है। शुभ रंग के रूप में नीला रंग धारण करना उत्तम माना गया है, जो आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। पौराणिक कथा: बुराई पर अच्छाई की जीत पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में आतंक फैलाया, तब देवी दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण किया। रक्तबीज को यह वरदान था कि उसके रक्त की हर बूंद से नया राक्षस उत्पन्न होता था। मां कालरात्रि ने अद्भुत रणनीति से उसका वध किया और उसके रक्त को भूमि पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समाहित कर लिया। इस प्रकार बुराई का अंत हुआ और देवताओं को मुक्ति मिली। यह कथा जीवन में साहस, धैर्य और बुद्धिमत्ता की शक्ति को दर्शाती है।
चैत्र नवरात्रि सनातन धर्म में शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की साधना के बाद अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कब करें कन्या पूजन? पंचांग के अनुसार, दुर्गाष्टमी (26 मार्च 2026): प्रातः 11:48 बजे तक कन्या पूजन करना शुभ रहेगा। महानवमी (26 मार्च 11:48 बजे से शुरू): यह तिथि 27 मार्च सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार 26 या 27 मार्च को उदया तिथि के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं। किस उम्र की कन्या का क्या महत्व? नवरात्रि में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूप माना जाता है। प्रत्येक उम्र की कन्या की पूजा अलग-अलग फल प्रदान करती है: 2 वर्ष (कुमारी): दुख-दरिद्रता दूर, सुख-समृद्धि की प्राप्ति 3 वर्ष (त्रिमूर्ति): धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद 4 वर्ष (कल्याणी): परिवार और कुल का कल्याण 5 वर्ष (रोहिणी): स्वास्थ्य और सौभाग्य 6 वर्ष (कालिका): बुद्धि, विद्या और विवेक 7 वर्ष (शाम्भवी): ऐश्वर्य और शक्ति 8 वर्ष (दुर्गा/शांभवी): विवाद और मुकदमों में सफलता 9 वर्ष (चंडिका/दुर्गा): शत्रुओं पर विजय और कार्य सिद्धि 10 वर्ष (सुभद्रा): सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कैसे करें कन्या पूजन? कन्या पूजन की विधि सरल लेकिन अत्यंत श्रद्धापूर्ण होती है: अष्टमी या नवमी के दिन स्नान कर मां दुर्गा की पूजा करें। 9 कन्याओं और एक बालक (भैरव स्वरूप) को आमंत्रित करें। कन्याओं के चरण धोकर उनका तिलक करें और मौली बांधें। लाल चुनरी अर्पित करें और आसन पर बैठाएं। उन्हें पूरी, हलवा, चना, खीर आदि भोजन कराएं। अंत में उपहार, वस्त्र या दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक किया गया कन्या पूजन जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व में पांचवां दिन माता दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह शुभ अवसर 23 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान के साथ मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख, पारिवारिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप मां स्कंदमाता को ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति माना जाता है। वे चार भुजाओं वाली हैं और अपनी गोद में भगवान कार्तिकेय को धारण किए रहती हैं, जिन्हें ‘स्कंद’ भी कहा जाता है। माता की दो भुजाओं में कमल पुष्प होते हैं, जबकि एक हाथ वरमुद्रा में होता है। इनका वाहन सिंह है, लेकिन कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें ‘पद्मासना’ भी कहा जाता है। उनका शांत और तेजस्वी स्वरूप भक्तों को आस्था और विश्वास से भर देता है। पूजा विधि: कैसे करें आराधना नवरात्रि के पांचवें दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद माता का ध्यान कर कलश स्थापना की जाती है। पूजा के दौरान चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। मां को पीले फूल और फल चढ़ाकर मंत्रों का जाप, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। अंत में कपूर से आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। प्रिय रंग और पुष्प मान्यता के अनुसार मां स्कंदमाता को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। वहीं, पूजा में पीले रंग के फूल जैसे गेंदा और पीला गुलाब अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। भोग: क्या लगाएं प्रसाद मां स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि केले का प्रसाद चढ़ाने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और बुद्धि का विकास होता है। इसके अलावा केले से बनी खीर या मिठाई का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। स्कंदमाता के प्रमुख मंत्र सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ धार्मिक महत्व माना जाता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से संतान सुख, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। उनकी कृपा से भक्तों को आरोग्य, ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, यह भी मान्यता है कि उनकी भक्ति से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
आस्था और श्रद्धा का प्रतीक Chaitra Navratri इस वर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। इस बार तिथियों, मुहूर्तों और विशेष संयोगों को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। कलश स्थापना का शुभ समय 19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहने के बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हुई। प्रतिपदा के क्षय होने के कारण इसी दिन कलश स्थापना की गई। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:32 बजे से 12:21 बजे तक हालांकि पूरे दिन स्थापना संभव है, लेकिन सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है। मंगलवारी जुलूसों का धार्मिक उत्साह रामनवमी से पहले इस बार तीन मंगलवारी जुलूसों का आयोजन हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं: पहला: 10 मार्च दूसरा: 17 मार्च तीसरा: 24 मार्च इन जुलूसों में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और भक्ति का माहौल चरम पर होता है। षष्ठी और महासप्तमी (24–25 मार्च) 24 मार्च (षष्ठी): बेलवरण का आयोजन, शाम 6:54 बजे तक तिथि मान्य 25 मार्च (महासप्तमी): मां दुर्गा के सातवें स्वरूप की पूजा, शाम 4:30 बजे तक सप्तमी इस दिन से पंडालों में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। महाअष्टमी और महानवमी (26–27 मार्च) 26 मार्च (महाअष्टमी): अष्टमी तिथि दोपहर 2:15 बजे तक संधि पूजा और विशेष अनुष्ठानों का महत्व 27 मार्च (महानवमी + रामनवमी): नवमी तिथि दोपहर 12:02 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र का शुभ संयोग रामनवमी का विशेष योग इस वर्ष Ram Navami 27 मार्च को मनाई जाएगी। वाराणसी पंचांग के अनुसार नवमी तिथि सुबह 5:56 बजे से शाम 5:12 बजे तक रहेगी, जिससे पूजा के लिए पर्याप्त शुभ समय उपलब्ध रहेगा। दशमी और देवी आगमन-गमन 28 मार्च (दशमी): सुबह 10:06 बजे तक तिथि मान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार: मां दुर्गा का आगमन डोली पर गमन मुर्गा पर इसे वर्ष भर के शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है।
चैत्र अमावस्या 2026 को लेकर लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह अगले ही दिन से शुरू हो रही Chaitra Navratri है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और स्नान-दान कब किया जाए- 18 मार्च या 19 मार्च? पंचांग गणना और उदयातिथि के आधार पर अब इस भ्रम को स्पष्ट कर दिया गया है। चैत्र अमावस्या की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026 को सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या होती है, वही दिन अमावस्या माना जाता है। इस आधार पर: चैत्र अमावस्या की मान्य तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार) दर्श अमावस्या (तिथि प्रारंभ): 18 मार्च 2026 (बुधवार) तर्पण-श्राद्ध और पिंडदान कब करें? धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान अमावस्या तिथि में दिन के समय किया जाता है। 18 मार्च को अमावस्या तिथि दिनभर मौजूद रहेगी जबकि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी इसलिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान 18 मार्च 2026 को करना श्रेष्ठ रहेगा शुभ समय: दोपहर 11:30 बजे से 2:30 बजे के बीच इस दौरान पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज और पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व है। साथ ही, 18 मार्च की शाम को सूर्यास्त के बाद पितरों के लिए दीपदान करना भी शुभ माना गया है। स्नान-दान कब करें? उदयातिथि के आधार पर स्नान और दान 19 मार्च 2026 को किया जाएगा शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक सूर्योदय के बाद भी स्नान-दान किया जा सकता है इस दिन स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, फल और धन का दान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक महत्व चैत्र अमावस्या को पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है। इसे कई स्थानों पर भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान से पितृ दोष दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अगले दिन से Chaitra Navratri का शुभारंभ होता है, इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आरोग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा की कामना के साथ माता शीतला की पूजा और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं और परिवार को स्वास्थ्य एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता को देवी दुर्गा का ही एक पावन रूप माना जाता है। वे रोगों से रक्षा करने वाली और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए प्राचीन समय से ही शीतला माता की पूजा की जाती रही है। शीतला अष्टमी व्रत और पूजा विधि शीतला अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातःकाल जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी स्थापित कर उस पर माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान माता को पुष्प, नीम की पत्तियां, हल्दी, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही गंगाजल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। शीतला माता को ठंडा और एक दिन पूर्व बनाया गया भोजन विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में मालपुआ, मिठाई, दही, और बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद भक्तों को शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही देवी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। पूजा के समापन पर एक लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर घर के सभी कमरों और परिवार के सदस्यों पर छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है। शीतला माता के प्रमुख मंत्र पूजा के दौरान माता शीतला के इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है- ॐ शीतलायै नमः। ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः। शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥ वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी-कलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥ इन मंत्रों के जप से देवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को रोगों से मुक्ति तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। शीतला अष्टमी पर करें ये विशेष उपाय शास्त्रों के अनुसार शीतला माता को शीतल वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए इस दिन ठंडे जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मौसम के बदलाव के दौरान शरीर के तापमान को संतुलित रखने में यह सहायक होती है। इसके अलावा शीतला अष्टमी की पूजा में हल्दी अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के बाद हल्दी का तिलक स्वयं लगाकर परिवार के अन्य सदस्यों को भी लगाना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हल्दी शुद्धता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु शीतला अष्टमी के दिन सच्चे मन से माता शीतला की पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है, लेकिन Chaitra Amavasya को वर्ष की प्रमुख अमावस्याओं में गिना जाता है। यह दिन खास तौर पर पितरों की शांति, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, तर्पण और दान से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं या घर पर ही विधि-विधान से पूजा कर अपने पितरों का स्मरण करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना जाता है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार Chaitra Amavasya की तिथि 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार स्नान, दान और पितरों का तर्पण जैसे शुभ कार्य 19 मार्च को करना अधिक फलदायी माना गया है। तामसिक भोजन से रखें दूरी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अमावस्या के दिन मांस, मछली, शराब और अन्य तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मन शांत रहता है और व्यक्ति पूजा-पाठ में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हो पाता है। घर में शांति बनाए रखना जरूरी अमावस्या के दिन घर में झगड़ा या विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो सकता है, इसलिए सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी होता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बनाए रखने से आध्यात्मिक वातावरण भी मजबूत होता है। पितरों का तर्पण और सम्मान चैत्र अमावस्या को पितरों को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन पूर्वजों के नाम से तर्पण करना, उनका स्मरण करना और जरूरतमंदों को दान देना विशेष पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। सुबह जल्दी उठकर करें पूजा अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और भगवान का ध्यान करना शुभ माना जाता है। देर तक सोने के बजाय सुबह ध्यान, जप और पूजा-पाठ करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और मन में सकारात्मकता बनी रहती है। दान-पुण्य का विशेष महत्व इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। कहा जाता है कि अमावस्या के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा-पाठ, तर्पण और दान किया जाए, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक संतोष के साथ-साथ पारिवारिक सुख-शांति भी प्राप्त होती है।
19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में Chaitra Navratri को अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भक्त Durga के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार की नवरात्रि को खास माना जा रहा है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की, धन लाभ और नए अवसरों का संकेत दे रहा है। नवरात्रि में बनेंगे दो खास शुभ योग ज्योतिष के अनुसार इस साल की चैत्र नवरात्रि में दो महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं: Shash Mahapurush Yoga Gajakesari Yoga इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इनके प्रभाव से कई लोगों के जीवन में सफलता, प्रतिष्ठा और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। मेष राशि: बढ़ेगा आत्मविश्वास और मिल सकते हैं नए अवसर मेष राशि के जातकों के लिए यह नवरात्रि काफी सकारात्मक साबित हो सकती है। इस राशि के स्वामी Mars को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। माता दुर्गा की कृपा से इस दौरान आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप अपने फैसले अधिक मजबूती से ले पाएंगे। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को अच्छा अवसर मिल सकता है व्यापारियों के लिए नए संपर्क और नए बाजार खुल सकते हैं रुका हुआ धन मिलने की संभावना है पारिवारिक विवाद भी सुलझ सकते हैं सिंह राशि: सम्मान और पदोन्नति के बन सकते हैं योग सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस राशि पर Sun का प्रभाव माना जाता है, जो नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान: कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है वरिष्ठ अधिकारी आप पर भरोसा जता सकते हैं पदोन्नति या नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है परिवार में चल रहे मतभेद धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं वृश्चिक राशि: दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगी ऊर्जा वृश्चिक राशि के जातकों के लिए भी यह नवरात्रि राहत भरा समय ला सकती है। पिछले कुछ समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। माता दुर्गा की कृपा से: काम में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना है मानसिक और शारीरिक ऊर्जा बढ़ेगी आस्था और सकारात्मकता का पर्व चैत्र नवरात्रि को नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इस दौरान पूजा, व्रत और साधना के साथ-साथ लोग अपने जीवन में नए संकल्प भी लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार यदि श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ प्रयास किया जाए, तो यह समय कई लोगों के लिए तरक्की और सफलता के नए रास्ते खोल सकता है।
27 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी इस वर्ष रामनवमी का पावन पर्व 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राम भक्तों के लिए इस बार खास बात यह है कि रामनवमी से पहले लगातार तीन मंगलवारी जुलूस निकाले जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर भगवान राम के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना देंगे। इन जुलूसों के दौरान ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और झांकियों के साथ पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। 10, 17 और 24 मार्च को निकलेंगे मंगलवारी जुलूस रामनवमी से पहले हर साल परंपरागत रूप से मंगलवार को मंगलवारी जुलूस निकाले जाते हैं। इस बार भी तीन अलग-अलग मंगलवार को यह जुलूस आयोजित होंगे। पहला मंगलवारी जुलूस – 10 मार्च दूसरा मंगलवारी जुलूस – 17 मार्च तीसरा मंगलवारी जुलूस – 24 मार्च इन जुलूसों में राम भक्त बड़ी संख्या में शामिल होकर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियों के साथ शहर में शोभायात्रा निकालते हैं। भक्त हाथों में भगवा झंडे लेकर भक्ति गीतों और जयकारों के साथ आगे बढ़ते हैं। जुलूस के रास्ते में कई जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, शरबत और जलपान की व्यवस्था भी की जाती है, जिससे पूरे शहर में धार्मिक और उत्सवी माहौल बन जाता है। 26 मार्च को महाअष्टमी पर निकलेगी भव्य झांकी रामनवमी से एक दिन पहले 26 मार्च को महाअष्टमी के अवसर पर भव्य झांकी निकाली जाएगी। इस दिन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और आकर्षक सजावट से मंदिरों की सुंदरता देखते ही बनेगी। झांकी के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। महाअष्टमी की झांकी देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों से निकलकर इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं। 27 मार्च को दोपहर तक रहेगी नवमी तिथि पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, वाराणसी पंचांग के मुताबिक इस बार नवमी तिथि 27 मार्च को सुबह 5:56 बजे से शुरू होकर शाम 5:12 बजे तक रहेगी। हालांकि भगवान राम के जन्म का मध्याह्न काल दोपहर 12:02 बजे तक माना जाता है। इसी समय को सबसे शुभ माना जाता है और इसी दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाएंगे। पुनर्वसु नक्षत्र से बढ़ेगा पर्व का महत्व इस वर्ष रामनवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र का भी विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम का जन्म भी पुनर्वसु नक्षत्र में ही हुआ था। जब नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का ऐसा संयोग बनता है, तो रामनवमी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इसी वजह से मंदिरों में हवन, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भगवान राम का आशीर्वाद लेंगे और पूरे उत्साह तथा श्रद्धा के साथ रामनवमी का पर्व मनाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज