Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
Vat Savitri Vrat हिंदू धर्म का बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत वैवाहिक सुख और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। वट सावित्री व्रत 2026 कब है? पंचांग के अनुसार Vat Savitri Vrat ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष व्रत की तिथि: व्रत: 16 मई 2026, शनिवार अमावस्या तिथि प्रारंभ: सुबह 05:12 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: देर रात 01:31 बजे पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, वट वृक्ष की पूजा सुबह के समय करना विशेष फलदायी माना गया है। शुभ योग: सुबह 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा इस दौरान पूजा और व्रत संबंधी धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: वट वृक्ष में Brahma, Vishnu और Shiva का वास माना जाता है। इसे “अक्षय वट” भी कहा जाता है। वट वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं: व्रत रखती हैं वट वृक्ष की पूजा करती हैं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वट सावित्री व्रत पूजा विधि Vat Savitri Vrat के दिन: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटें सावित्री-सत्यवान कथा का पाठ करें पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें दान का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन: भोजन वस्त्र फल जरूरत की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 की पहली शनिश्चरी अमावस्या 16 मई, शनिवार को पड़ रही है। जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन आती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शनि देव की पूजा, तर्पण और दान-पुण्य से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि जीवन की बाधाएं भी कम होती हैं। शुभ योगों का विशेष संयोग ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 16 मई 2026 को कई शुभ योग बन रहे हैं: सुबह से 10:26 बजे तक सौभाग्य योग इसके बाद शोभन योग का प्रारंभ इन योगों को सुख, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में किए गए कार्य कई गुना अधिक फल देते हैं। पूजा और स्नान के शुभ मुहूर्त इस दिन कई महत्वपूर्ण मुहूर्त बताए गए हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:07 से 4:48 बजे तक शनि पूजा का शुभ समय: सुबह 7:19 से 8:59 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:45 बजे तक इस दौरान स्नान, ध्यान और मंत्र जाप को अत्यंत शुभ माना गया है। शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या पर किए गए उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना काले तिल और नीले फूल अर्पित करना जरूरतमंदों को काले वस्त्र, उड़द दाल और लोहे की वस्तुएं दान करना इन उपायों से शनि दोष में कमी आती है और आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। पितृ दोष निवारण के लिए तर्पण का महत्व इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन: चावल की खीर बनाकर पितरों के नाम से अग्नि में अर्पित करना तर्पण और श्राद्ध करना इन उपायों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक महत्व और मान्यता शनिश्चरी अमावस्या को शनि देव की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियों को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
Masik Shivratri हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि भगवान Shiva की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव का अभिषेक और रात्रि पूजा करते हैं। दूध और सफेद वस्तुओं का दान मासिक शिवरात्रि पर दूध, दही, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्रों का दान बेहद शुभ माना जाता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अन्न और भोजन का दान इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल और अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भूखे लोगों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ऐसे दान से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिल और घी का दान काले तिल और घी का दान भी मासिक शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। शिव मंदिर में घी का दीपक जलाना और तिल का दान करना जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे जीवन में शांति और स्थिरता आती है। वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को कपड़े, कंबल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और संतोष बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से दान को केवल पुण्य का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का भी प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ दान-पुण्य करने को विशेष फलदायी माना गया है।
सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।
आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।
Bada Mangal के अवसर पर आज 12 मई को भक्त पूरे श्रद्धा भाव से Hanuman की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है और हिंदू धर्म में इनका विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवारों में हनुमान जी की पूजा करने से मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। भक्त इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरे बड़े मंगल का शुभ मुहूर्त आज दूसरे बड़े मंगल पर पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:08 बजे से 4:50 बजे तक विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 9:07 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक शाम पूजा मुहूर्त: शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक मान्यता है कि इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजा Hanuman की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और फूल, अक्षत, सिंदूर तथा नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके साथ तुलसी दल और पान का बीड़ा भी चढ़ाया जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाकर Hanuman Chalisa का पाठ करें और हनुमान मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व Bada Mangal को Hanuman की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। इस दिन कई भक्त मंदिरों में जाकर चोला चढ़ाते हैं, लाल ध्वजा अर्पित करते हैं और प्रसाद वितरण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से बजरंगबली भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अधिक मास के कारण इस बार खास है ज्येष्ठ महीना वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में अधिक मास पड़ने की वजह से दो ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग के चलते इस बार भक्तों को एक नहीं बल्कि चार प्रमुख एकादशी व्रत करने का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और इसी दौरान अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी के व्रत किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ माह में कब-कब पड़ेगी एकादशी? इस बार ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ मास के दौरान कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी शामिल हैं। अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026: दुर्लभ व्रत का महत्व पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। तिथि प्रारंभ: 26 मई सुबह 5:10 बजे तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 6:21 बजे पारण समय: सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। परमा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। तिथि प्रारंभ: 11 जून रात 12:57 बजे तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे पारण समय: सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक धर्म ग्रंथों में परमा एकादशी को मोक्षदायिनी और विशेष पुण्य देने वाली एकादशी बताया गया है। निर्जला एकादशी 2026: साल की सबसे कठिन एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को पड़ेगी। इसे सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है क्योंकि इस व्रत में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता। तिथि प्रारंभ: 24 जून शाम 6:12 बजे तिथि समाप्त: 25 जून रात 8:09 बजे पारण समय: 26 जून सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एकादशी व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला बड़ा मंगल भगवान Hanuman की विशेष आराधना का दिन माना जाता है। उत्तर भारत, खासकर Lucknow और अवध क्षेत्र में इस पर्व का बेहद खास महत्व है। इस साल 12 मई को ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन संकटमोचन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 19 साल बाद बना दुर्लभ संयोग साल 2026 का बड़ा मंगल इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण ज्येष्ठ माह लंबा हो गया है। आमतौर पर ज्येष्ठ महीने में 4 या 5 मंगलवार पड़ते हैं, लेकिन इस बार कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद बना है। धार्मिक मान्यता है कि इतने लंबे समय तक हनुमान जी की आराधना का अवसर मिलना बेहद शुभ माना जाता है। भक्त इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन कर बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। क्यों कहा जाता है ‘बुढ़वा मंगल’? बड़ा मंगल को कई जगह ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, Mahabharata काल में Hanuman ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर Bhima के अहंकार को समाप्त किया था। चूंकि उन्होंने वृद्ध रूप में मंगलवार को दर्शन दिए थे, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा। दूसरी मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान Rama और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसी कारण यह दिन हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 2026 के सभी बड़े मंगल की तिथियां पहला बड़ा मंगल – 5 मई दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई चौथा बड़ा मंगल – 26 मई पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून छठा बड़ा मंगल – 9 जून सातवां बड़ा मंगल – 16 जून आठवां बड़ा मंगल – 23 जून कैसे करें पूजा? बड़ा मंगल के दिन सुबह स्नान करके साफ या लाल वस्त्र पहनने की परंपरा है। भक्त हनुमान मंदिरों में जाकर चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाते हैं। इसके साथ ही बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और फलों का भोग लगाया जाता है। इस दिन Hanuman Chalisa, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शाम के समय हनुमान जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न की जाती है। लखनऊ और अवध में दिखती है खास रौनक Lucknow समेत अवध क्षेत्र में बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। भक्तों को शरबत, पूड़ी-सब्जी और प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 9 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान Krishna की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल मिलते हैं, जबकि छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करें? भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं भगवान Krishna को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और मुकुट में मोरपंख जरूर लगाएं। इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भोग में तुलसी दल जरूर रखें धार्मिक मान्यता के अनुसार बिना तुलसी के भगवान कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए माखन-मिश्री, फल या अन्य प्रसाद में तुलसी दल अवश्य रखें। मंत्र जाप और भजन करें इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन और Bhagavad Gita का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। दान-पुण्य करें जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गौ सेवा करें भगवान कृष्ण को गोपाल कहा जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इसे विशेष पुण्यदायी कार्य माना गया है। मध्यरात्रि में करें पूजा भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष आरती और पूजा का महत्व माना जाता है। इस समय घंटी, शंख और भजन के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या न करें? तामसिक भोजन से बचें इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर का वातावरण सात्विक और शांत रखना शुभ माना जाता है। अन्न और चावल का सेवन न करें यदि आप व्रत कर रहे हैं तो चावल और सामान्य अन्न से परहेज करें। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ग्रहण किए जा सकते हैं। तुलसी के पत्ते न तोड़ें जन्माष्टमी के दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। काले कपड़े पहनने से बचें पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। पीले, सफेद या लाल रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना गया है। क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलने, किसी की निंदा करने और क्रोध करने से बचना चाहिए। दिन में ज्यादा न सोएं धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन आलस्य नहीं करना चाहिए। समय को भजन, ध्यान और धार्मिक पाठ में लगाना अधिक शुभ माना जाता है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने से भगवान Krishna भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। दांपत्य जीवन में सुख, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
Shani Jayanti 2026: हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है. वर्ष 2026 में शनि जयंती 16 मई, शनिवार को मनायी जाएगी. यह दिन ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर पड़ता है और मान्यता है कि इसी दिन भगवान शनि देव का जन्म हुआ था. इस बार शनि जयंती शनिवार को पड़ रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा योग करीब 13 साल बाद बन रहा है, जिसका प्रभाव कई राशियों पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है. वृषभ राशि वालों को मिल सकती है बड़ी सफलता वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में शुभ माना जा रहा है. नौकरी में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं. जो लोग लंबे समय से नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छे अवसर मिल सकते हैं. कार्यक्षेत्र में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और कामकाज में स्थिरता आने की संभावना है. मिथुन राशि के लिए बन रहे लाभ के योग मिथुन राशि वालों के लिए शनि जयंती भाग्यशाली साबित हो सकती है. व्यापार में लाभ मिलने और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां और प्रमोशन मिल सकता है. आय में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं. तुला राशि पर रहेगी विशेष कृपा तुला राशि के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. करियर में नई उपलब्धियां हासिल होने की संभावना है. विदेश से नौकरी या व्यापार से जुड़े अवसर मिल सकते हैं. परिवार में सुख-शांति और खुशियों का माहौल बना रह सकता है. धनु राशि वालों को मिलेगा सहयोग धनु राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना है. लंबे समय से रुके कार्य पूरे हो सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार और स्वास्थ्य में राहत मिलने के संकेत हैं. मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है. कुंभ राशि के लिए रहेगा खास दिन कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव माने जाते हैं, इसलिए यह दिन इनके लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार साढ़ेसाती का प्रभाव इस दौरान कुछ हद तक कम हो सकता है. करियर, व्यापार और निजी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. शनि जयंती पर क्या करें? धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि जयंती के दिन शनि देव की पूजा, तेल अर्पित करना, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है. इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और शनि मंत्रों का जाप करने से शनि दोष कम होने की मान्यता है.
हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। तिथि और मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026, दोपहर 3:24 बजे दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 41 दिनों की दीक्षा परंपरा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस दीक्षा की शुरुआत: 2 अप्रैल 2026 समापन: 12 मई 2026 (हनुमान जयंती) भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं। दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है। दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: कर्नाटक: हनुमंथा, आंजनेय आंध्र-तेलंगाना: हनुमंतुडु, आंजनेयुडु तमिलनाडु: आंजनेयार पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं हनुमान जी को सिंदूर, चोला, फूल, फल, पान, गुड़-चना अर्पित करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद बांटें विशेष महत्व तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।
साल 2026 की शनि जयंती इस बार बेहद खास और दुर्लभ संयोगों से भरी हुई है। ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष शनि जयंती पर शनैश्चरी अमावस्या के साथ कई शक्तिशाली राजयोग बन रहे हैं, जो दशकों में एक बार देखने को मिलते हैं। यह महासंयोग करियर, धन, प्रतिष्ठा और जीवन में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। कब है शनि जयंती 2026? हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे से शुरू होकर 17 मई को रात 01:30 बजे तक रहेगी। चूंकि त्योहार उदयातिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, इसलिए शनि जयंती 16 मई, शनिवार को मनाई जाएगी। शनैश्चरी अमावस्या का विशेष महत्व जब अमावस्या शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाता है। यह संयोग शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान, पूजा और कर्म विशेष फलदायी होते हैं और शनि दोषों से राहत मिलती है। ग्रहों की खास स्थिति, बने कई राजयोग इस बार ग्रहों की स्थिति अत्यंत प्रभावशाली मानी जा रही है: सूर्य, शनि और चंद्रमा का संतुलन जीवन में कर्म और फल के बीच सामंजस्य स्थापित करेगा चंद्रमा का राशि परिवर्तन मानसिक स्पष्टता और निर्णय क्षमता बढ़ाएगा यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और आत्मविश्लेषण के लिए भी श्रेष्ठ माना जा रहा है शश, गजकेसरी और बुधादित्य योग का प्रभाव इस बार कई शक्तिशाली योग एक साथ बन रहे हैं: शश महापुरुष राजयोग: शनि अपनी स्वराशि कुंभ में रहकर यह योग बना रहे हैं, जिससे करियर में स्थिरता और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है गजकेसरी योग: गुरु और चंद्रमा की युति से बनने वाला यह योग धन, सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है बुधादित्य योग: सूर्य और बुध की युति से बुद्धि, व्यापार और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है अमला योग: यह योग व्यक्ति की छवि और सामाजिक प्रभाव को बेहतर बनाता है किन राशियों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ? वृषभ राशि: इस राशि के जातकों के लिए आर्थिक लाभ के प्रबल संकेत हैं। नए आय स्रोत बन सकते हैं और निवेश में फायदा मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि की संभावना है। मिथुन राशि: मिथुन राशि वालों के लिए यह समय भाग्य को मजबूत करने वाला रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। करियर और व्यापार दोनों में सकारात्मक बदलाव दिखेंगे। क्या करें शनि जयंती के दिन? शनि देव की पूजा करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें काले तिल, काली उड़द और लोहे का दान करना शुभ माना जाता है “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें
रांची। रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से “श्री शिवाला सेवा समिति” के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान धार्मिक और सामाजिक आयोजन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सुकुरहुटू गौशाला फुटबॉल मैदान, रांची में 5 से 11 मई 2026 तक आयोजित होने वाली “श्री शिव महापुराण कथा” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री को पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी मुलाकात के दौरान समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को कार्यक्रम की तैयारियों और रूपरेखा की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि कथा आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने की पूरी तैयारी की जा रही है। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में रमेश सिंह, रितेश कुमार, रवि राज, राहुल कुमार, सनद कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।
हिंदू धर्म में Shiva की आराधना के लिए प्रदोष व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं। मई 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए खास है, क्योंकि इस बार दोनों प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहे हैं, जिससे Guru Pradosh Vrat का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग विशेष रूप से ज्ञान, सौभाग्य और सफलता देने वाला माना जाता है। मई 2026 प्रदोष व्रत की तिथियां पहला प्रदोष व्रत – 14 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:20 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08:31 बजे इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना सबसे फलदायी रहेगा। दूसरा प्रदोष व्रत – 28 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 मई, सुबह 07:56 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई, सुबह 09:50 बजे इस दिन भी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन Shiva कैलाश पर्वत पर आनंदित होकर नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा और उपासना कई गुना अधिक फल देती है। गुरु प्रदोष व्रत के लाभ: शत्रुओं पर विजय जीवन में सुख-शांति ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करियर और कार्यों में सफलता पूजा विधि (सरल तरीके से) अगर आप प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो इस विधि से पूजा कर सकते हैं: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें दिनभर फलाहार या व्रत रखें शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें अंत में आरती करें
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, त्याग और सेवा का महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में इस पवित्र माह की शुरुआत 2 मई से हो चुकी है और इसका समापन 29 जून को होगा। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से आरंभ हुई, लेकिन उदयातिथि के आधार पर 2 मई से ज्येष्ठ मास की गणना की जाती है। यह हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है और इस दौरान सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। अधिक मास का विशेष संयोग, बढ़ेगा पुण्य का प्रभाव इस बार ज्येष्ठ माह में Adhik Maas का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे Purushottam Maas भी कहा जाता है। यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम काल माना जाता है। नौतपा: तप और सेवा की असली परीक्षा ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला Nautapa वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रचंड होती हैं और तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी पानी के लिए तरसते हैं पेड़-पौधों और प्रकृति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है ऐसे समय में दया और सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में इस माह को “सेवा का महीना” भी कहा गया है। पूजा-पाठ और धार्मिक महत्व ज्येष्ठ माह का आरंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होता है। पूरे महीने में स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान विशेष रूप से भगवान Vishnu के Vamana Avatar (त्रिविक्रम रूप) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि: भगवान विष्णु की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं पापों का नाश होता है व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है सिर्फ एक काम–जल दान, मिलेगा महान फल अगर कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो भी इस माह में एक बेहद सरल उपाय करके वह महान पुण्य कमा सकता है–जल दान। जल दान को ज्येष्ठ माह का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ दान माना गया है। आप इन आसान तरीकों से इसे कर सकते हैं: प्यासे लोगों को ठंडा पानी पिलाएं घर या दुकान के बाहर मिट्टी का घड़ा (मटका) रखकर उसमें पानी भरें राहगीरों के लिए छांव और पानी की व्यवस्था करें पक्षियों के लिए छत या आंगन में पानी रखें पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करें धार्मिक मान्यता है कि इस छोटे से कार्य से भी व्यक्ति को अपार पुण्य प्राप्त होता है और भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। सेवा, दया और प्रकृति से जुड़ने का संदेश ज्येष्ठ माह केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का भी समय है। यह हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना ही सच्ची भक्ति है सेवा और दया के जरिए ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और हर महीने दो बार–कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष–में आता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। मई 2026 में दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ रहे हैं–अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी। आइए जानते हैं इनकी सही तिथि, शुभ समय और महत्व। मई 2026 की एकादशी तिथियां अपरा एकादशी (अचला एकादशी) तिथि: 13 मई 2026, बुधवार एकादशी प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 02:52 बजे एकादशी समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 01:30 बजे पारण (व्रत खोलने का समय): 14 मई, सूर्योदय के बाद अपरा एकादशी को “अचला एकादशी” भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। पद्मिनी एकादशी (कमला एकादशी) तिथि: 27 मई 2026, बुधवार एकादशी प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे पारण: 28 मई को शुभ मुहूर्त में पद्मिनी एकादशी को “कमला एकादशी” भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत का महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार: एकादशी का व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है पापों का नाश और पुण्य की वृद्धि होती है जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और कथा सुनना विशेष फलदायी माना जाता है। एकादशी व्रत के नियम व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से ही मानी जाती है सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित करें चावल का सेवन वर्जित होता है क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें द्वादशी तिथि में शुभ समय पर पारण करना जरूरी होता है ध्यान रखें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, लेकिन पूजा में पहले से रखे तुलसी दल का उपयोग किया जा सकता है। महत्वपूर्ण जानकारी पंचांग के अनुसार तिथियों में स्थान के हिसाब से थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या मंदिर के पुजारी से समय की पुष्टि कर लेना बेहतर होता है।
आज 1 मई, शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है, इसलिए इसे “माधव मास” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, दान और भगवान विष्णु के नामों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष फल मिलता है भगवान विष्णु की उपासना से सुख-समृद्धि बढ़ती है पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है कहा जाता है कि इस दिन किया गया जप और पुण्य कई गुना फल देता है। 108 नामों के जाप का महत्व भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मन को शांति मिलती है नकारात्मक विचार दूर होते हैं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि नाम-जप से भगवान नारायण शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान विष्णु के 108 पवित्र नाम नीचे भगवान विष्णु के 108 नाम दिए जा रहे हैं, जिनका जाप आज के दिन विशेष फलदायी माना गया है: ऊँ श्री विष्णवे नमः ऊँ श्री परमात्मने नमः ऊँ श्री विराट पुरुषाय नमः ऊँ श्री क्षेत्र-क्षेत्रज्ञाय नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नमः ऊँ श्री ईश्वराय नमः ऊँ श्री हृषीकेशाय नमः ऊँ श्री पद्मनाभाय नमः ऊँ श्री विश्वकर्मणे नमः ऊँ श्री कृष्णाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नमः ऊँ श्री सर्वेश्वराय नमः ऊँ श्री अच्युताय नमः ऊँ श्री वासुदेवाय नमः ऊँ श्री पुण्डरीकाक्षाय नमः ऊँ श्री नर-नारायणाय नमः ऊँ श्री जनार्दनाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री चतुर्भुजाय नमः ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री माधवाय नमः ऊँ श्री महाबलाय नमः ऊँ श्री गोविन्दाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री विश्वात्मने नमः ऊँ श्री सहस्राक्षाय नमः ऊँ श्री नारायणाय नमः ऊँ श्री सिद्धसंकल्पाय नमः ऊँ श्री महेन्द्राय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री अनन्तजिते नमः ऊँ श्री महीधराय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नमः ऊँ श्री दामोदराय नमः ऊँ श्री कमलापतये नमः ऊँ श्री परमेश्वराय नमः ऊँ श्री धनेश्वराय नमः ऊँ श्री मुकुन्दाय नमः ऊँ श्री आनन्दाय नमः ऊँ श्री सत्यधर्माय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री चक्रगदाधराय नमः ऊँ श्री भगवते नमः ऊँ श्री शान्तिदाय नमः ऊँ श्री गोपतये नमः ऊँ श्री श्रीपतये नमः ऊँ श्री श्रीहरये नमः ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नमः ऊँ श्री कपिलेश्वराय नमः ऊँ श्री वाराहाय नमः ऊँ श्री नरसिंहाय नमः ऊँ श्री रामाय नमः ऊँ श्री हयग्रीवाय नमः ऊँ श्री शोकनाशनाय नमः ऊँ श्री विशुद्धात्मने नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री धनंजयाय नमः ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः ऊँ श्री यदुश्रेष्ठाय नमः ऊँ श्री लोकनाथाय नमः ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नमः ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नमः ऊँ श्री एकपदे नमः ऊँ श्री सुलोचनाय नमः ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नमः ऊँ श्री सप्तवाहनाय नमः ऊँ श्री वंशवर्धनाय नमः ऊँ श्री योगिने नमः ऊँ श्री धनुर्धराय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री अक्रूराय नमः ऊँ श्री दुःस्वप्ननाशनाय नमः ऊँ श्री भूभवे नमः ऊँ श्री प्राणदाय नमः ऊँ श्री देवकीनन्दनाय नमः ऊँ श्री शंखभृते नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री कमलनयनाय नमः ऊँ श्री जगतगुरवे नमः ऊँ श्री सनातनाय नमः ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नमः ऊँ श्री द्वारकानाथाय नमः ऊँ श्री दानवेन्द्रविनाशकाय नमः ऊँ श्री दयानिधये नमः ऊँ श्री एकात्मने नमः ऊँ श्री शत्रुजिते नमः ऊँ श्री घनश्यामाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री जरामरणवर्जिताय नमः ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः ऊँ श्री विराटपुरुषाय नमः ऊँ श्री यशोदानन्दनाय नमः ऊँ श्री परमधार्मिकाय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री प्रभवे नमः ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताय नमः ऊँ श्री गगनसदृशाय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री हंसाय नमः ऊँ श्री व्यासाय नमः ऊँ श्री प्रकटाय नमः
हिंदू धर्म में नरसिंह जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान भगवान नृसिंह की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, आरती और मंत्रों का जाप करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट होकर अधर्म का नाश किया था। इसलिए इस दिन की गई सच्चे मन से उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान नरसिंह की आरती ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी। अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी। दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे। शिवजी जय-जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ श्रद्धापूर्वक करें इन मंत्रों का जाप आपत्ति निवारक नरसिंह मंत्र ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥ नरसिंह गायत्री मंत्र ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नरसिंह प्रचोदयात्॥ संपत्ति बाधा नाशक मंत्र ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूऱय॥ ऋण मोचक नरसिंह मंत्र ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नमः॥ क्या है इस दिन का महत्व? नरसिंह जयंती पर व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भय समाप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान नृसिंह अपने भक्तों की हर बाधा को दूर कर उन्हें साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
30 अप्रैल को मनाई जाएगी छिन्नमस्ता जयंती सनातन धर्म में मां शक्ति के अनेक स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें मां छिन्नमस्ता का स्वरूप सबसे रहस्यमयी, उग्र और अद्वितीय माना जाता है। दस महाविद्याओं में शामिल मां छिन्नमस्ता त्याग, आत्मबल और दिव्य शक्ति की प्रतीक हैं। उनकी साधना विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 2026 में छिन्नमस्ता जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। छिन्नमस्ता जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 को शाम 7:51 बजे प्रारंभ होगी और 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर छिन्नमस्ता जयंती 30 अप्रैल को मनाना शुभ रहेगा। मां छिन्नमस्ता का अनोखा और रहस्यमयी स्वरूप मां छिन्नमस्ता का स्वरूप अत्यंत विलक्षण है। वे अपने ही कटे हुए सिर को एक हाथ में धारण करती हैं, जबकि दूसरे हाथ में तलवार रहती है। उनकी गर्दन से बहने वाली रक्त की तीन धाराएं जीवन ऊर्जा, त्याग और ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। इनमें से एक धारा स्वयं देवी ग्रहण करती हैं, जबकि शेष दो उनकी सहचरियां पीती हैं। यह स्वरूप आत्मसंयम, बलिदान और शक्ति के अनंत प्रवाह का संदेश देता है। क्यों खास है मां छिन्नमस्ता की साधना? दस महाविद्याओं में मां छिन्नमस्ता को छठा स्थान प्राप्त है। उनका उग्र रूप साधकों को भय, मोह और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। यही कारण है कि तांत्रिक, योगी, अघोरी और नाथ संप्रदाय के साधक उनकी विशेष उपासना करते हैं। यह साधना सामान्य पूजा से अलग होती है और इसमें विशेष नियमों एवं विधियों का पालन किया जाता है। मां छिन्नमस्ता की पूजा से मिलते हैं ये लाभ मन से भय और असुरक्षा की भावना दूर होती है। आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है। जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। शारीरिक कष्टों और रोगों से राहत प्राप्त होती है। साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। रजरप्पा मंदिर: मां छिन्नमस्ता का प्रमुख धाम झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित रजरप्पा मंदिर मां छिन्नमस्ता का सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह पवित्र मंदिर रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर दामोदर और भैरवी नदियों के संगम पर स्थित है। तांत्रिक साधना के लिए यह स्थल विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि और छिन्नमस्ता जयंती के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धा और शक्ति का अद्भुत संगम मां छिन्नमस्ता केवल उग्रता की प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे आत्मबल, त्याग और जीवन ऊर्जा का साक्षात स्वरूप हैं। उनकी उपासना साधक को भयमुक्त बनाकर जीवन में सफलता और साहस प्रदान करती है। छिन्नमस्ता जयंती का पर्व शक्ति साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
भगवान Shiva को समर्पित भौम प्रदोष व्रत आज, 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से मंगल दोष शांति, बाधाओं की समाप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त काशी पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल शाम 6:54 बजे से रात 9:04 बजे तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। भौम प्रदोष क्यों है खास? जब प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो उसे भौम प्रदोष कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से: मंगल दोष शांति कर्ज मुक्ति विवादों से राहत आत्मविश्वास में वृद्धि नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए शुभ माना जाता है। पूजा विधि प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर शिवलिंग स्थापित करें। जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन, बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें। घी-शक्कर या मिठाई का भोग लगाएं। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। Shiv Chalisa का पाठ करें। प्रदोष व्रत कथा सुनें। घी का दीपक जलाकर आरती करें। शाम को प्रदोष काल में पुनः विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत के लाभ मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि, मानसिक शांति तथा जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति प्रदान करते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।