धर्म

Offer Water in Jyeshtha for Great Merit

Jyeshtha Month 2026: शुरू हुआ ज्येष्ठ माह, इस महीने करें ये एक काम–मिलेगा अक्षय पुण्य

surbhi मई 2, 2026 0
Earthen pot filled with water kept for public service during the holy Jyeshtha month
Jyeshtha Month 2026 Jal Daan Significance

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, त्याग और सेवा का महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में इस पवित्र माह की शुरुआत 2 मई से हो चुकी है और इसका समापन 29 जून को होगा। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से आरंभ हुई, लेकिन उदयातिथि के आधार पर 2 मई से ज्येष्ठ मास की गणना की जाती है। यह हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है और इस दौरान सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है।

अधिक मास का विशेष संयोग, बढ़ेगा पुण्य का प्रभाव

इस बार ज्येष्ठ माह में Adhik Maas का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे Purushottam Maas भी कहा जाता है। यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम काल माना जाता है।

नौतपा: तप और सेवा की असली परीक्षा

ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला Nautapa वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रचंड होती हैं और तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है।

  • इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी पानी के लिए तरसते हैं
  • पेड़-पौधों और प्रकृति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है

ऐसे समय में दया और सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में इस माह को “सेवा का महीना” भी कहा गया है।

पूजा-पाठ और धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह का आरंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होता है। पूरे महीने में स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है।

इस दौरान विशेष रूप से भगवान Vishnu के Vamana Avatar (त्रिविक्रम रूप) की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि:

  • भगवान विष्णु की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं
  • पापों का नाश होता है
  • व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है

सिर्फ एक काम–जल दान, मिलेगा महान फल

अगर कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो भी इस माह में एक बेहद सरल उपाय करके वह महान पुण्य कमा सकता है–जल दान

जल दान को ज्येष्ठ माह का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ दान माना गया है।
आप इन आसान तरीकों से इसे कर सकते हैं:

  • प्यासे लोगों को ठंडा पानी पिलाएं
  • घर या दुकान के बाहर मिट्टी का घड़ा (मटका) रखकर उसमें पानी भरें
  • राहगीरों के लिए छांव और पानी की व्यवस्था करें
  • पक्षियों के लिए छत या आंगन में पानी रखें
  • पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करें

धार्मिक मान्यता है कि इस छोटे से कार्य से भी व्यक्ति को अपार पुण्य प्राप्त होता है और भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है।

सेवा, दया और प्रकृति से जुड़ने का संदेश

ज्येष्ठ माह केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का भी समय है।

  • यह हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना ही सच्ची भक्ति है
  • सेवा और दया के जरिए ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

धर्म

View more
Maa Rudra Kali idol at Ranchi’s Bhairav Baba Temple, revered for spiritual and tantric significance
रांची के भैरव बाबा मंदिर में विराजमान मां रुद्र काली: रहस्यमयी शक्ति, तांत्रिक महत्व और अटूट आस्था का केंद्र

भैरव बाबा मंदिर में मां रुद्र काली का अद्भुत स्वरूप आकर्षण का केंद्र झारखंड की राजधानी रांची में स्थित भैरव बाबा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में विराजमान मां रुद्र काली का स्वरूप भक्तों और साधकों के बीच विशेष श्रद्धा और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। मान्यता है कि मां रुद्र काली देवी शक्ति के उस उग्र रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भक्तों की रक्षा करने के साथ-साथ नकारात्मक शक्तियों का विनाश भी करती हैं। मां रुद्र काली को महाकाली और भैरवी के संयुक्त रौद्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। तंत्र शास्त्रों में उन्हें शीघ्र फल प्रदान करने वाली और साधकों की रक्षा करने वाली देवी माना गया है। कहां स्थित है भैरव बाबा मंदिर? रांची शहर में ‘रांची वाले भैरव बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर रशियन हॉस्टल कॉलोनी के समीप स्थित है। यह स्थान वर्षों से श्रद्धालुओं और तांत्रिक साधकों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर दूर-दराज से भी श्रद्धालु मंदिर आते हैं। मां रुद्र काली का स्वरूप क्यों माना जाता है रहस्यमयी? मंदिर में स्थापित मां रुद्र काली की प्रतिमा को रक्तवर्णा, त्रिनेत्री और नरमुंडों की माला धारण किए हुए स्वरूप में दर्शाया गया है। उनका रूप पहली नजर में उग्र और भयावह प्रतीत होता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी और रक्षक स्वरूप हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है यह मंदिर स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार, भैरव बाबा मंदिर तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भैरव साधना, काली साधना और रुद्र तंत्र साधना से जुड़े विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। मान्यता है कि मां रुद्र काली की स्थापना ऐसे सिद्ध साधकों द्वारा की गई थी जिन्होंने अघोर और कौल परंपरा की कठिन साधनाओं में सिद्धि प्राप्त की थी। इसी कारण यह स्थान तांत्रिक परंपराओं से जुड़े लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। अमावस्या की रात को होते हैं विशेष अनुष्ठान मंदिर में अमावस्या के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान रुद्र काली पूजन, हवन और तांत्रिक विधियों से जुड़े अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। श्रद्धालु इस दिन मां के दर्शन और पूजा को विशेष फलदायी मानते हैं। मां रुद्र काली की उपासना से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां रुद्र काली की आराधना करने से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति से मुक्ति मिल सकती है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना मां तक अवश्य पहुंचती है और वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। हालांकि तंत्र शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि किसी भी तांत्रिक साधना को योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं करना चाहिए। स्थानीय लोगों की अटूट आस्था रांची और आसपास के क्षेत्रों में मां रुद्र काली को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। कई लोग उन्हें भैरव बाबा की दक्षिण दिशा की रक्षक देवी मानते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां का आशीर्वाद जीवन में आने वाली कठिनाइयों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है। मंदिर में की जाने वाली प्रमुख साधनाएं रुद्र काली तंत्र हवन गुप्त रात्रि जप भैरव-काली समाहित साधना तंत्र रक्षा कवच निर्माण कर्म बाधा निवारण अनुष्ठान रांची का भैरव बाबा मंदिर और यहां विराजमान मां रुद्र काली का स्वरूप आज भी रहस्य, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम माना जाता है। यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ तांत्रिक परंपराओं के अध्ययन और साधना के लिए भी विशेष महत्व रखता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Tulsi leaves and Gangajal offered during Hindu last rites as described in Garuda Purana

गरुड़ पुराण: मृत्यु के समय मुंह में तुलसी और गंगाजल क्यों डाला जाता है? जानिए इसका आध्यात्मिक रहस्य

Zodiac symbols representing weekly career and financial horoscope predictions for June 15-21, 2026.

साप्ताहिक आर्थिक राशिफल, 15 से 21 जून 2026: मेष, मिथुन और मकर राशि वालों के लिए खास रहेगा यह सप्ताह

Devotees worshipping Peepal tree and offering prayers on Somvati Amavasya during Adhik Maas.

Somvati Amavasya 2026: आज सोमवती अमावस्या और अधिक मास का दुर्लभ संयोग, इन उपायों से दूर हो सकती हैं जीवन की बाधाएं

Rohini Vrat worship dedicated to Lord Vasupujya Swami on June 14, 2026
रोहिणी व्रत 2026: 14 जून को रखा जाएगा पवित्र व्रत, जानें महत्व और पूजा विधि

Rohini Vrat 2026: जैन धर्म में रोहिणी व्रत को अत्यंत शुभ और पुण्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है और श्रद्धालु इसे पूरे नियम, संयम और भक्ति भाव से करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। जून 2026 में कब है रोहिणी व्रत? ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, 14 जून 2026, रविवार को रोहिणी व्रत रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके कारण यह तिथि व्रत, ध्यान और पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है। जैन धर्म में रोहिणी व्रत का महत्व रोहिणी व्रत जैन समाज के प्रमुख धार्मिक व्रतों में शामिल है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करने से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है। वैवाहिक सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है व्रत कई महिलाएं अपने पति के उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से भी रोहिणी व्रत करती हैं। माना जाता है कि यह व्रत परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली लाने में सहायक होता है। कितने वर्षों तक किया जाता है रोहिणी व्रत? परंपरा के अनुसार, रोहिणी व्रत का संकल्प सामान्यतः 3 वर्ष, 5 वर्ष या 7 वर्ष के लिए लिया जाता है। इनमें 5 वर्ष 5 माह की अवधि को विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है। संकल्प की अवधि पूरी होने के बाद व्रत का विधिवत उद्यापन किया जाता है, जिससे व्रत पूर्ण माना जाता है। आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग जैन धर्म में रोहिणी व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, तप और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन की गई पूजा और आराधना से आत्मिक शुद्धि तथा मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Aaj Ka Rashiphal

आज का राशिफल

Aaj Ka Itihas

12 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

Aaj Ka Panchang

ll~ वैदिक पंचांग ~ll

Palm with a triangle mark highlighted in palmistry symbolising prosperity and good fortune.
हथेली में इस स्थान पर बना त्रिभुज का निशान माना जाता है बेहद शुभ, मिलता है धन, भूमि और वाहन का सुख

नई दिल्ली: हस्तरेखा शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र में हथेली की रेखाओं, पर्वतों और विभिन्न चिह्नों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हथेली पर बने कुछ निशान व्यक्ति के स्वभाव, करियर, धन और भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। इनमें त्रिभुज का चिह्न विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अलग-अलग स्थानों पर बना यह निशान अलग-अलग प्रकार के फल प्रदान करता है। पर्वतों पर त्रिभुज के निशान का महत्व गुरु पर्वत पर त्रिभुज यदि गुरु पर्वत पर त्रिभुज का निशान बना हो तो ऐसे व्यक्ति समाजहित के कार्यों में रुचि रखते हैं। उन्हें करियर में उच्च पद और सम्मान मिलने की संभावना रहती है। शनि पर्वत पर त्रिभुज शनि पर्वत पर बना त्रिभुज व्यक्ति को ज्योतिष, रहस्य और गुप्त विद्याओं की ओर आकर्षित करता है। ऐसे लोग शोध और आध्यात्मिक विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। सूर्य पर्वत पर त्रिभुज सूर्य पर्वत पर यह निशान शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति कला, विज्ञान, चिकित्सा और शिल्प के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। बुध पर्वत पर त्रिभुज बुध पर्वत पर त्रिभुज का चिह्न व्यवसाय, राजनीति, विज्ञान और गहन अध्ययन में सफलता का संकेत माना जाता है। मंगल पर्वत पर त्रिभुज मंगल स्थान पर बना यह निशान व्यक्ति को आत्मविश्वासी और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने वाला बनाता है। ऐसे लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं। शुक्र पर्वत पर त्रिभुज शुक्र पर्वत पर त्रिभुज का निशान होने पर व्यक्ति गणित और तार्किक विषयों में अच्छा माना जाता है। इंद्र क्षेत्र में त्रिभुज ऐसे लोगों की रुचि गुप्त विद्याओं और रहस्यमयी विषयों में अधिक हो सकती है। रेखाओं पर त्रिभुज का क्या होता है अर्थ? पितृ रेखा पर त्रिभुज यह पैतृक संपत्ति या परिवार की ओर से मिलने वाले लाभ का संकेत माना जाता है। मातृ रेखा पर त्रिभुज ऐसे लोगों को ननिहाल पक्ष से सहयोग और लाभ मिलने की संभावना रहती है। आयु रेखा पर त्रिभुज सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह सबसे शुभ संकेतों में से एक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी मेहनत और प्रयास से धन, भूमि, वाहन और सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। मणिबंध रेखा पर त्रिभुज हथेली के निचले हिस्से में मणिबंध रेखा पर बना त्रिभुज वृद्धावस्था में धन और सम्मान मिलने का संकेत देता है। भाग्य रेखा पर त्रिभुज भाग्य रेखा पर बना त्रिभुज आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। त्रिभुज जितना बड़ा होगा, धन लाभ की संभावनाएं उतनी अधिक मानी जाती हैं। नोट: हस्तरेखा और सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इनके परिणाम व्यक्ति विशेष और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।  

surbhi जून 11, 2026 0
Numerology symbols and lucky numbers representing daily predictions for June 11, 2026.

आज का अंक ज्योतिष 11 जून 2026: मूलांक 2 के लिए लाभ का दिन, मूलांक 3 को सामाजिक मेलजोल से मिलेगी खुशी

Aaj Ka Rashiphal

आज का राशिफल

Aaj Ka Itihas

11 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

0 Comments

Top week

Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
दुनिया

अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?