Lord Vishnu

Sacred banyan leaves placed near a Hindu temple during traditional religious rituals and worship
बरगद का पत्ता किन देवी-देवताओं को नहीं चढ़ाना चाहिए? जानिए धार्मिक मान्यताएं और पूजा के नियम

पूजा में हर वस्तु का होता है विशेष महत्व सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक वस्तु का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रिय सामग्री भी अलग होती है। इसी कारण कुछ वस्तुएं कुछ देवताओं को अर्पित की जाती हैं, जबकि कुछ वस्तुओं का उपयोग वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद (वट वृक्ष) का पत्ता कुछ देवी-देवताओं की पूजा में अर्पित नहीं किया जाता। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताएं। भगवान विष्णु को क्यों नहीं चढ़ाया जाता बरगद का पत्ता? Lord Vishnu की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना गया है। तुलसी को भक्ति, पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद का वृक्ष तप, वैराग्य और स्थिरता का प्रतीक है, जबकि भगवान विष्णु को कोमल और सात्विक अर्पण अधिक प्रिय माने जाते हैं। इसी कारण उनकी पूजा में बरगद के पत्ते चढ़ाने की परंपरा नहीं है। मां लक्ष्मी की पूजा में क्यों माना जाता है वर्जित? Goddess Lakshmi धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद का वृक्ष स्थायित्व, तपस्या और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। गृहस्थ जीवन में लक्ष्मी पूजा के दौरान कमल, गुलाब और अन्य शुभ पुष्पों का प्रयोग अधिक शुभ माना जाता है। इसलिए मां लक्ष्मी को बरगद का पत्ता अर्पित करने की परंपरा नहीं है। गणेश जी की पूजा में भी नहीं होता उपयोग Lord Ganesha की पूजा में दूर्वा, मोदक और लाल पुष्पों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को ऐसी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं जो मंगल, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक हों। बरगद का पत्ता वैराग्य और कठोर तपस्या से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इसे गणेश पूजा में उपयोग नहीं किया जाता। बरगद के वृक्ष का धार्मिक महत्व हालांकि कुछ देवताओं की पूजा में बरगद का पत्ता अर्पित नहीं किया जाता, लेकिन वट वृक्ष स्वयं हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। Vat Savitri Vrat और वट पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में बरगद के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है। इसे दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान देवी-देवताओं की प्रिय और वर्जित वस्तुओं की जानकारी रखें। ताजे और स्वच्छ फूल-पत्तियों का ही उपयोग करें। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा करें। पूजा सामग्री का चयन धार्मिक परंपराओं के अनुसार करें। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में बरगद का पत्ता अर्पित नहीं किया जाता। माना जाता है कि प्रत्येक देवता की प्रिय सामग्री अलग होती है और उसी के अनुरूप पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। नोट: यह जानकारी प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं।  

surbhi जून 2, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi on Padmini Ekadashi during Adhik Maas fasting rituals
पद्मिनी एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Dark chocolate pieces kept beside a bedside lamp symbolizing better sleep and stress relief at night
रात में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद? बेहतर नींद और तनाव कम करने में मिल सकती है मदद

सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu with yellow flowers and lamps on Apara Ekadashi 2026
अपरा एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा अपार पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और जरूरी नियम

आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Earthen pot filled with water kept for public service during the holy Jyeshtha month
Jyeshtha Month 2026: शुरू हुआ ज्येष्ठ माह, इस महीने करें ये एक काम–मिलेगा अक्षय पुण्य

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, त्याग और सेवा का महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में इस पवित्र माह की शुरुआत 2 मई से हो चुकी है और इसका समापन 29 जून को होगा। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से आरंभ हुई, लेकिन उदयातिथि के आधार पर 2 मई से ज्येष्ठ मास की गणना की जाती है। यह हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है और इस दौरान सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। अधिक मास का विशेष संयोग, बढ़ेगा पुण्य का प्रभाव इस बार ज्येष्ठ माह में Adhik Maas का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे Purushottam Maas भी कहा जाता है। यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम काल माना जाता है। नौतपा: तप और सेवा की असली परीक्षा ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला Nautapa वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रचंड होती हैं और तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी पानी के लिए तरसते हैं पेड़-पौधों और प्रकृति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है ऐसे समय में दया और सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में इस माह को “सेवा का महीना” भी कहा गया है। पूजा-पाठ और धार्मिक महत्व ज्येष्ठ माह का आरंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होता है। पूरे महीने में स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान विशेष रूप से भगवान Vishnu के Vamana Avatar (त्रिविक्रम रूप) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि: भगवान विष्णु की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं पापों का नाश होता है व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है सिर्फ एक काम–जल दान, मिलेगा महान फल अगर कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो भी इस माह में एक बेहद सरल उपाय करके वह महान पुण्य कमा सकता है–जल दान। जल दान को ज्येष्ठ माह का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ दान माना गया है। आप इन आसान तरीकों से इसे कर सकते हैं: प्यासे लोगों को ठंडा पानी पिलाएं घर या दुकान के बाहर मिट्टी का घड़ा (मटका) रखकर उसमें पानी भरें राहगीरों के लिए छांव और पानी की व्यवस्था करें पक्षियों के लिए छत या आंगन में पानी रखें पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करें धार्मिक मान्यता है कि इस छोटे से कार्य से भी व्यक्ति को अपार पुण्य प्राप्त होता है और भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। सेवा, दया और प्रकृति से जुड़ने का संदेश ज्येष्ठ माह केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का भी समय है। यह हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना ही सच्ची भक्ति है सेवा और दया के जरिए ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है

surbhi मई 2, 2026 0
Devotee worship Lord Vishnu on Vaishakh Purnima with lamps, flowers and sacred chants
वैशाख पूर्णिमा 2026: भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करें, मिलेगा पुण्य और मानसिक शांति

आज 1 मई, शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है, इसलिए इसे “माधव मास” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, दान और भगवान विष्णु के नामों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष फल मिलता है भगवान विष्णु की उपासना से सुख-समृद्धि बढ़ती है पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है कहा जाता है कि इस दिन किया गया जप और पुण्य कई गुना फल देता है। 108 नामों के जाप का महत्व भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मन को शांति मिलती है नकारात्मक विचार दूर होते हैं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि नाम-जप से भगवान नारायण शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान विष्णु के 108 पवित्र नाम नीचे भगवान विष्णु के 108 नाम दिए जा रहे हैं, जिनका जाप आज के दिन विशेष फलदायी माना गया है: ऊँ श्री विष्णवे नमः ऊँ श्री परमात्मने नमः ऊँ श्री विराट पुरुषाय नमः ऊँ श्री क्षेत्र-क्षेत्रज्ञाय नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नमः ऊँ श्री ईश्वराय नमः ऊँ श्री हृषीकेशाय नमः ऊँ श्री पद्मनाभाय नमः ऊँ श्री विश्वकर्मणे नमः ऊँ श्री कृष्णाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नमः ऊँ श्री सर्वेश्वराय नमः ऊँ श्री अच्युताय नमः ऊँ श्री वासुदेवाय नमः ऊँ श्री पुण्डरीकाक्षाय नमः ऊँ श्री नर-नारायणाय नमः ऊँ श्री जनार्दनाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री चतुर्भुजाय नमः ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री माधवाय नमः ऊँ श्री महाबलाय नमः ऊँ श्री गोविन्दाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री विश्वात्मने नमः ऊँ श्री सहस्राक्षाय नमः ऊँ श्री नारायणाय नमः ऊँ श्री सिद्धसंकल्पाय नमः ऊँ श्री महेन्द्राय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री अनन्तजिते नमः ऊँ श्री महीधराय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नमः ऊँ श्री दामोदराय नमः ऊँ श्री कमलापतये नमः ऊँ श्री परमेश्वराय नमः ऊँ श्री धनेश्वराय नमः ऊँ श्री मुकुन्दाय नमः ऊँ श्री आनन्दाय नमः ऊँ श्री सत्यधर्माय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री चक्रगदाधराय नमः ऊँ श्री भगवते नमः ऊँ श्री शान्तिदाय नमः ऊँ श्री गोपतये नमः ऊँ श्री श्रीपतये नमः ऊँ श्री श्रीहरये नमः ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नमः ऊँ श्री कपिलेश्वराय नमः ऊँ श्री वाराहाय नमः ऊँ श्री नरसिंहाय नमः ऊँ श्री रामाय नमः ऊँ श्री हयग्रीवाय नमः ऊँ श्री शोकनाशनाय नमः ऊँ श्री विशुद्धात्मने नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री धनंजयाय नमः ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः ऊँ श्री यदुश्रेष्ठाय नमः ऊँ श्री लोकनाथाय नमः ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नमः ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नमः ऊँ श्री एकपदे नमः ऊँ श्री सुलोचनाय नमः ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नमः ऊँ श्री सप्तवाहनाय नमः ऊँ श्री वंशवर्धनाय नमः ऊँ श्री योगिने नमः ऊँ श्री धनुर्धराय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री अक्रूराय नमः ऊँ श्री दुःस्वप्ननाशनाय नमः ऊँ श्री भूभवे नमः ऊँ श्री प्राणदाय नमः ऊँ श्री देवकीनन्दनाय नमः ऊँ श्री शंखभृते नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री कमलनयनाय नमः ऊँ श्री जगतगुरवे नमः ऊँ श्री सनातनाय नमः ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नमः ऊँ श्री द्वारकानाथाय नमः ऊँ श्री दानवेन्द्रविनाशकाय नमः ऊँ श्री दयानिधये नमः ऊँ श्री एकात्मने नमः ऊँ श्री शत्रुजिते नमः ऊँ श्री घनश्यामाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री जरामरणवर्जिताय नमः ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः ऊँ श्री विराटपुरुषाय नमः ऊँ श्री यशोदानन्दनाय नमः ऊँ श्री परमधार्मिकाय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री प्रभवे नमः ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताय नमः ऊँ श्री गगनसदृशाय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री हंसाय नमः ऊँ श्री व्यासाय नमः ऊँ श्री प्रकटाय नमः

surbhi मई 1, 2026 0
Mohini Ekadashi worship and donation rituals in Hindu tradition
एकादशी पर इन चीजों का दान देता है अक्षय पुण्य: जानिए सही नियम और महत्व

  मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल को हिंदू धर्म में Ekadashi का विशेष महत्व माना गया है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है, इस साल 27 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। इस दिन व्रत, पूजा और दान-पुण्य करने से भगवान Vishnu की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक को अक्षय पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर किया गया दान तभी फलदायी होता है जब उसे सही नियमों और सच्ची श्रद्धा के साथ किया जाए। एकादशी पर दान करने के क्या हैं लाभ? एकादशी के दिन दान-पुण्य करने से व्यक्ति को कई आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। पापों से मुक्ति का मार्ग खुलता है जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। किन चीजों का दान माना गया है सबसे शुभ? एकादशी पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है: अन्न दान: गेहूं, दाल और अन्य अनाज का दान सर्वोत्तम माना जाता है चावल का दान: हालांकि इस दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता, लेकिन दान करना शुभ होता है फल और जल: फल, जल से भरा कलश और धार्मिक पुस्तकों का दान भी पुण्यदायी है पीली वस्तुएं: पीले कपड़े, चने की दाल और गुड़ का दान विशेष फल देता है धन और भोजन: जरूरतमंदों को भोजन कराना या आर्थिक मदद करना श्रेष्ठ माना गया है गौ सेवा: गायों को चारा खिलाना या उनकी सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी है दान-पुण्य के जरूरी नियम स्नान और पूजा के बाद ही दान करें दान हमेशा सात्विक और शुद्ध होना चाहिए तामसिक वस्तुओं का दान न करें दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा से दान करें निस्वार्थ भाव से बिना किसी अपेक्षा के दान करें द्वादशी पर करें व्रत का पारण एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। इससे व्रत पूर्ण और सफल माना जाता है। एकादशी केवल व्रत या परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। इस दिन किए गए दान और अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और उसे धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu during Mohini Ekadashi with tulsi leaves, lamps, and traditional offerings.
Mohini Ekadashi 2026: 26 या 27 अप्रैल कब है? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

  हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी 2026 सही तारीख साल 2026 में मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल (सोमवार) को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि शुरू: 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे उदया तिथि (सूर्योदय के अनुसार) के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा मुहूर्त: सुबह 9:02 बजे से 10:40 बजे तक व्रत पारण (व्रत खोलने का समय) पारण तिथि: 28 अप्रैल 2026 समय: सुबह 5:43 बजे से 8:21 बजे तक पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप) सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा/तस्वीर स्थापित करें भगवान को स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं चंदन तिलक लगाएं, धूप-दीप जलाएं तुलसी दल, फल, नारियल, मिठाई अर्पित करें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें अंत में आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें क्या है धार्मिक मान्यता? मोहिनी एकादशी का संबंध उस कथा से है जब भगवान विष्णु ने “मोहिनी” रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों को भ्रमित किया। यह दिन बुराइयों, मोह और गलत संगति से मुक्ति पाने का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा का संदेश एक कथा के अनुसार, एक पापी युवक ने ऋषि के कहने पर यह व्रत किया और उसका जीवन पूरी तरह बदल गया। इससे यह सीख मिलती है कि सही समय पर किया गया एक अच्छा कर्म इंसान की दिशा बदल सकता है। क्यों खास है यह व्रत? सहस्र गौदान के बराबर पुण्य पापों से मुक्ति बुद्धि और विवेक में वृद्धि जीवन की समस्याओं से छुटकारा जीवन के लिए सीख मोहिनी अवतार हमें सिखाता है कि केवल ताकत ही नहीं, बल्कि सही समय पर लिया गया समझदारी भरा निर्णय ही असली जीत दिलाता है। मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सही निर्णय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पर्व है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Lord Vishnu during Varuthini Ekadashi
Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी व्रत के 11 नियम, जिनका पालन किए बिना अधूरा रह जाता है पुण्यफल

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पवित्र Varuthini Ekadashi का सनातन परंपरा में विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान Vishnu को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे विधि-विधान से करने पर साधक के जीवन के दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत फलदायी व्रत बताया गया है, जो बड़े-बड़े यज्ञों से भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इस व्रत का पूर्ण पुण्यफल तभी प्राप्त होता है, जब इसके नियमों का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी से जुड़े 11 प्रमुख नियम: वरुथिनी एकादशी व्रत के 11 जरूरी नियम व्रत के नियमों का पालन एक दिन पहले संध्याकाल से ही शुरू कर देना चाहिए और पारण तक जारी रखना चाहिए। एकादशी व्रत में अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार करें और व्रत से एक दिन पहले ही चावल खाना बंद कर दें। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। केवल शरीर ही नहीं, मन को भी पवित्र रखें। किसी के प्रति गलत विचार न लाएं। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है। चावल और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें तथा जमीन पर शयन करें। अगले दिन शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक पारण करना अनिवार्य है, तभी व्रत पूर्ण माना जाता है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए उन्हें पहले ही तोड़कर रख लें। भगवान विष्णु के साथ माता Lakshmi की पूजा भी करें। अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें। दिनभर वाद-विवाद से बचें और मन में श्रीहरि के मंत्रों का जप करते रहें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का पालन करने से साधक को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। हालांकि, यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu during Varuthini Ekadashi with lamps and offerings.
Varuthni Ekadashi 2026: सही तिथि, महत्व और राशि अनुसार दान-पुण्य के विशेष उपाय

वैशाख मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इसी माह में आने वाली वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, यदि इस दिन राशि अनुसार दान-पुण्य और उपाय किए जाएं तो पूरे वर्ष लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहती है। कब है वरुथिनी एकादशी 2026? वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026 को रात 1:17 बजे से प्रारंभ होकर 14 अप्रैल 2026 को रात 1:08 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को व्रत रखा जाएगा और पारण 14 अप्रैल को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। क्या है इस एकादशी का महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। राशि अनुसार करें ये खास उपाय मेष: भगवान विष्णु को लाल फूल अर्पित करें, जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। वृषभ: सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं, भगवान शीघ्र प्रसन्न होंगे। मिथुन: हरे वस्त्र अर्पित करें, हर कार्य में सफलता मिलेगी। कर्क: खीर का भोग लगाएं, रुके हुए कार्य पूरे होंगे। सिंह: पीले वस्त्र अर्पित करें और स्वयं भी धारण करें, विशेष फल मिलेगा। कन्या: सफेद मिठाई और केसर चढ़ाएं, आर्थिक समस्याएं दूर होंगी। तुला: सफेद वस्तुओं का दान करें, वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी। वृश्चिक: गुड़ का दान करें, नौकरी और व्यापार में तरक्की होगी। धनु: पीले वस्त्र, चंदन और फल अर्पित करें, शुभ परिणाम मिलेंगे। मकर: दही और इलायची का भोग लगाएं, मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। कुंभ: पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं, लक्ष्मी-नारायण की कृपा बनी रहेगी। मीन: गरीबों की सेवा करें और मिश्री का भोग लगाएं, पारिवारिक कलह दूर होगी। वरुथिनी एकादशी केवल व्रत रखने का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। यदि इस दिन श्रद्धा और राशि अनुसार उपाय किए जाएं, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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