Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
जैन धर्म में रोहिणी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना को समर्पित होता है और मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में रोहिणी व्रत 18 मई, सोमवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है। रोहिणी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त रोहिणी व्रत किसी निश्चित तिथि पर नहीं बल्कि रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव के अनुसार रखा जाता है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र विद्यमान रहता है, तब यह व्रत किया जाता है। मुख्य व्रत तिथि: 18 मई 2026, सोमवार रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 मई 2026, रात 9:43 बजे रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 मई 2026, शाम 5:55 बजे विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक व्रत पारण का समय: 18 मई को सुबह 11:32 बजे के बाद क्या है रोहिणी व्रत का महत्व? रोहिणी व्रत मुख्य रूप से जैन समुदाय द्वारा रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत आत्मिक शुद्धि, संयम और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। रोहिणी व्रत के प्रमुख नियम यह व्रत लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक किया जाता है। हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन उपवास रखा जाता है। व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली और धार्मिक नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद विधि-विधान से ‘उद्यापन’ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बिना उद्यापन के लंबे समय तक किए गए व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु, धाम में दिख रहा आस्था का सैलाब Kedarnath Temple की यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा शुरू होने के महज 22 दिनों के भीतर 5 लाख 23 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। लगातार बढ़ रही भक्तों की संख्या से पूरे केदारघाटी क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ केदारनाथ धाम पहुंच रही है। बुधवार को अकेले 32,427 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। अब तक कुल 5,23,582 भक्त पवित्र धाम में माथा टेक चुके हैं। यात्रा मार्ग पर बेहतर सुविधाएं प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पैदल मार्ग पर जगह-जगह विश्राम स्थल, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। धाम क्षेत्र में स्वच्छता, आवास और आपातकालीन सेवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। श्रद्धालुओं ने की व्यवस्थाओं की सराहना देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु प्रशासनिक व्यवस्थाओं की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। पंजाब के रोपड़ से आए दिवाकर ने बताया कि दर्शन व्यवस्था बेहद सरल और सुगम रही। वहीं अहमदाबाद से आई श्रद्धालु माही ने कहा कि उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर सुविधाएं मिलीं। पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा लाभ केदारनाथ यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय और पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। यात्रा सीजन के शुरुआती दौर में ही इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना उत्तराखंड पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
Masik Shivratri हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि भगवान Shiva की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव का अभिषेक और रात्रि पूजा करते हैं। दूध और सफेद वस्तुओं का दान मासिक शिवरात्रि पर दूध, दही, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्रों का दान बेहद शुभ माना जाता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अन्न और भोजन का दान इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल और अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भूखे लोगों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ऐसे दान से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिल और घी का दान काले तिल और घी का दान भी मासिक शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। शिव मंदिर में घी का दीपक जलाना और तिल का दान करना जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे जीवन में शांति और स्थिरता आती है। वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को कपड़े, कंबल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और संतोष बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से दान को केवल पुण्य का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का भी प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ दान-पुण्य करने को विशेष फलदायी माना गया है।
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला बड़ा मंगल भगवान Hanuman की विशेष आराधना का दिन माना जाता है। उत्तर भारत, खासकर Lucknow और अवध क्षेत्र में इस पर्व का बेहद खास महत्व है। इस साल 12 मई को ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन संकटमोचन हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 19 साल बाद बना दुर्लभ संयोग साल 2026 का बड़ा मंगल इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण ज्येष्ठ माह लंबा हो गया है। आमतौर पर ज्येष्ठ महीने में 4 या 5 मंगलवार पड़ते हैं, लेकिन इस बार कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा दुर्लभ संयोग करीब 19 साल बाद बना है। धार्मिक मान्यता है कि इतने लंबे समय तक हनुमान जी की आराधना का अवसर मिलना बेहद शुभ माना जाता है। भक्त इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन कर बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। क्यों कहा जाता है ‘बुढ़वा मंगल’? बड़ा मंगल को कई जगह ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, Mahabharata काल में Hanuman ने वृद्ध वानर का रूप धारण कर Bhima के अहंकार को समाप्त किया था। चूंकि उन्होंने वृद्ध रूप में मंगलवार को दर्शन दिए थे, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा। दूसरी मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान Rama और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इसी कारण यह दिन हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। 2026 के सभी बड़े मंगल की तिथियां पहला बड़ा मंगल – 5 मई दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई चौथा बड़ा मंगल – 26 मई पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून छठा बड़ा मंगल – 9 जून सातवां बड़ा मंगल – 16 जून आठवां बड़ा मंगल – 23 जून कैसे करें पूजा? बड़ा मंगल के दिन सुबह स्नान करके साफ या लाल वस्त्र पहनने की परंपरा है। भक्त हनुमान मंदिरों में जाकर चमेली के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाते हैं। इसके साथ ही बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और फलों का भोग लगाया जाता है। इस दिन Hanuman Chalisa, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शाम के समय हनुमान जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न की जाती है। लखनऊ और अवध में दिखती है खास रौनक Lucknow समेत अवध क्षेत्र में बड़ा मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। भक्तों को शरबत, पूड़ी-सब्जी और प्रसाद वितरित किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 9 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान Krishna की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल मिलते हैं, जबकि छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करें? भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं भगवान Krishna को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और मुकुट में मोरपंख जरूर लगाएं। इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भोग में तुलसी दल जरूर रखें धार्मिक मान्यता के अनुसार बिना तुलसी के भगवान कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए माखन-मिश्री, फल या अन्य प्रसाद में तुलसी दल अवश्य रखें। मंत्र जाप और भजन करें इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन और Bhagavad Gita का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। दान-पुण्य करें जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गौ सेवा करें भगवान कृष्ण को गोपाल कहा जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इसे विशेष पुण्यदायी कार्य माना गया है। मध्यरात्रि में करें पूजा भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष आरती और पूजा का महत्व माना जाता है। इस समय घंटी, शंख और भजन के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या न करें? तामसिक भोजन से बचें इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर का वातावरण सात्विक और शांत रखना शुभ माना जाता है। अन्न और चावल का सेवन न करें यदि आप व्रत कर रहे हैं तो चावल और सामान्य अन्न से परहेज करें। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ग्रहण किए जा सकते हैं। तुलसी के पत्ते न तोड़ें जन्माष्टमी के दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। काले कपड़े पहनने से बचें पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। पीले, सफेद या लाल रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना गया है। क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलने, किसी की निंदा करने और क्रोध करने से बचना चाहिए। दिन में ज्यादा न सोएं धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन आलस्य नहीं करना चाहिए। समय को भजन, ध्यान और धार्मिक पाठ में लगाना अधिक शुभ माना जाता है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने से भगवान Krishna भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। दांपत्य जीवन में सुख, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
Shani Jayanti 2026: हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है. वर्ष 2026 में शनि जयंती 16 मई, शनिवार को मनायी जाएगी. यह दिन ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर पड़ता है और मान्यता है कि इसी दिन भगवान शनि देव का जन्म हुआ था. इस बार शनि जयंती शनिवार को पड़ रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा योग करीब 13 साल बाद बन रहा है, जिसका प्रभाव कई राशियों पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है. वृषभ राशि वालों को मिल सकती है बड़ी सफलता वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में शुभ माना जा रहा है. नौकरी में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं. जो लोग लंबे समय से नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छे अवसर मिल सकते हैं. कार्यक्षेत्र में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और कामकाज में स्थिरता आने की संभावना है. मिथुन राशि के लिए बन रहे लाभ के योग मिथुन राशि वालों के लिए शनि जयंती भाग्यशाली साबित हो सकती है. व्यापार में लाभ मिलने और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां और प्रमोशन मिल सकता है. आय में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं. तुला राशि पर रहेगी विशेष कृपा तुला राशि के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. करियर में नई उपलब्धियां हासिल होने की संभावना है. विदेश से नौकरी या व्यापार से जुड़े अवसर मिल सकते हैं. परिवार में सुख-शांति और खुशियों का माहौल बना रह सकता है. धनु राशि वालों को मिलेगा सहयोग धनु राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना है. लंबे समय से रुके कार्य पूरे हो सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार और स्वास्थ्य में राहत मिलने के संकेत हैं. मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है. कुंभ राशि के लिए रहेगा खास दिन कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव माने जाते हैं, इसलिए यह दिन इनके लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार साढ़ेसाती का प्रभाव इस दौरान कुछ हद तक कम हो सकता है. करियर, व्यापार और निजी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. शनि जयंती पर क्या करें? धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि जयंती के दिन शनि देव की पूजा, तेल अर्पित करना, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है. इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और शनि मंत्रों का जाप करने से शनि दोष कम होने की मान्यता है.
Bakrid 2026 Date: रमजान और ईद-उल-फितर के बाद मुस्लिम समुदाय जिस बड़े त्योहार का इंतजार करता है, वह है बकरीद. इसे ईद-उल-अजहा और बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता है. इस्लाम में यह पर्व त्याग, कुर्बानी, इंसानियत और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. 2026 में कब मनाई जाएगी बकरीद? इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अजहा हर साल जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनायी जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक भारत में बकरीद 27 मई 2026, बुधवार को मनाये जाने की संभावना है. हालांकि इस त्योहार की अंतिम तारीख चांद दिखने पर ही तय होती है. इसलिए विभिन्न देशों और क्षेत्रों में तारीख में एक दिन का अंतर भी हो सकता है. क्यों मनायी जाती है ईद-उल-अजहा? बकरीद का संबंध हजरत इब्राहिम की कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनके समर्पण से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की आस्था की परीक्षा ली थी और उन्हें अपने बेटे की कुर्बानी देने का आदेश दिया था. हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए तैयार हो गये. उनकी इसी निष्ठा और समर्पण को देखते हुए अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली. इसी घटना की याद में मुस्लिम समुदाय बकरीद पर कुर्बानी देता है. कुर्बानी का क्या महत्व है? ईद-उल-अजहा पर बकरे, भेड़, ऊंट या अन्य निर्धारित पशुओं की कुर्बानी दी जाती है. इस कुर्बानी का मकसद केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देना भी है. परंपरा के अनुसार कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है– एक हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तीसरा अपने परिवार के लिए रखा जाता है यह परंपरा समाज में भाईचारा और समानता की भावना को मजबूत करती है. कैसे मनाया जाता है यह त्योहार? बकरीद के दिन सुबह लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करते हैं. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. इसके बाद कुर्बानी की रस्म निभायी जाती है और जरूरतमंदों में गोश्त बांटा जाता है. परिवार और रिश्तेदार मिलकर इस पर्व को खुशी और श्रद्धा के साथ मनाते हैं. हज यात्रा से भी जुड़ा है संबंध ईद-उल-अजहा का संबंध हज यात्रा से भी माना जाता है. इस दौरान दुनिया भर से लाखों मुस्लिम सऊदी अरब में हज करने पहुंचते हैं. इसलिए यह पर्व धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. बकरीद इंसानियत, दया, त्याग और सामाजिक सहयोग का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहार माना जाता है.
हिंदू धर्म में समय-समय पर आने वाले विशेष महीनों का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से खास महत्व होता है। इन्हीं में से एक है मलमास, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। साल 2026 में मलमास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है, जो 15 जून 2026 तक रहेगा। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की भक्ति और साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना जाता है। क्या होता है मलमास? हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता, तब उस अवधि को अधिक मास या मलमास कहा जाता है। यह समय खगोलीय संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह सांसारिक और भौतिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। क्यों रुक जाते हैं शुभ कार्य? मलमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को टालने की परंपरा है। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल अपेक्षित नहीं मिलता और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए लोग इस पूरे महीने को धार्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए समर्पित करते हैं। मलमास में क्या करें? यह महीना भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दौरान: रोजाना विष्णु पूजा और व्रत करना शुभ होता है “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है दान-पुण्य, कथा श्रवण और भजन-कीर्तन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है विशेष योग बना रहे हैं मलमास को खास इस बार का अधिक मास और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दो गुरु पुष्य योग का संयोग बन रहा है। आमतौर पर एक महीने में एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस बार दो बार यह शुभ योग बनना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद लाभकारी माना जा रहा है। दुर्लभ संयोग, अगली बार 2037 में ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ है। ऐसा योग अब 2037 में देखने को मिलेगा। इसलिए इस बार मलमास को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
हिंदू धर्म में Shiva की आराधना के लिए प्रदोष व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं। मई 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए खास है, क्योंकि इस बार दोनों प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहे हैं, जिससे Guru Pradosh Vrat का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग विशेष रूप से ज्ञान, सौभाग्य और सफलता देने वाला माना जाता है। मई 2026 प्रदोष व्रत की तिथियां पहला प्रदोष व्रत – 14 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:20 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08:31 बजे इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना सबसे फलदायी रहेगा। दूसरा प्रदोष व्रत – 28 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 मई, सुबह 07:56 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई, सुबह 09:50 बजे इस दिन भी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन Shiva कैलाश पर्वत पर आनंदित होकर नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा और उपासना कई गुना अधिक फल देती है। गुरु प्रदोष व्रत के लाभ: शत्रुओं पर विजय जीवन में सुख-शांति ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करियर और कार्यों में सफलता पूजा विधि (सरल तरीके से) अगर आप प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो इस विधि से पूजा कर सकते हैं: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें दिनभर फलाहार या व्रत रखें शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें अंत में आरती करें
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को तप, त्याग और सेवा का महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में इस पवित्र माह की शुरुआत 2 मई से हो चुकी है और इसका समापन 29 जून को होगा। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से आरंभ हुई, लेकिन उदयातिथि के आधार पर 2 मई से ज्येष्ठ मास की गणना की जाती है। यह हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना है और इस दौरान सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। अधिक मास का विशेष संयोग, बढ़ेगा पुण्य का प्रभाव इस बार ज्येष्ठ माह में Adhik Maas का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे Purushottam Maas भी कहा जाता है। यह 17 मई से 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम काल माना जाता है। नौतपा: तप और सेवा की असली परीक्षा ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला Nautapa वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रचंड होती हैं और तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी पानी के लिए तरसते हैं पेड़-पौधों और प्रकृति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है ऐसे समय में दया और सेवा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में इस माह को “सेवा का महीना” भी कहा गया है। पूजा-पाठ और धार्मिक महत्व ज्येष्ठ माह का आरंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से होता है और समापन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर होता है। पूरे महीने में स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान विशेष रूप से भगवान Vishnu के Vamana Avatar (त्रिविक्रम रूप) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि: भगवान विष्णु की आराधना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं पापों का नाश होता है व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है सिर्फ एक काम–जल दान, मिलेगा महान फल अगर कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो भी इस माह में एक बेहद सरल उपाय करके वह महान पुण्य कमा सकता है–जल दान। जल दान को ज्येष्ठ माह का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ दान माना गया है। आप इन आसान तरीकों से इसे कर सकते हैं: प्यासे लोगों को ठंडा पानी पिलाएं घर या दुकान के बाहर मिट्टी का घड़ा (मटका) रखकर उसमें पानी भरें राहगीरों के लिए छांव और पानी की व्यवस्था करें पक्षियों के लिए छत या आंगन में पानी रखें पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करें धार्मिक मान्यता है कि इस छोटे से कार्य से भी व्यक्ति को अपार पुण्य प्राप्त होता है और भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। सेवा, दया और प्रकृति से जुड़ने का संदेश ज्येष्ठ माह केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का भी समय है। यह हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना ही सच्ची भक्ति है सेवा और दया के जरिए ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है
आज 1 मई, शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है, इसलिए इसे “माधव मास” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, दान और भगवान विष्णु के नामों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष फल मिलता है भगवान विष्णु की उपासना से सुख-समृद्धि बढ़ती है पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है कहा जाता है कि इस दिन किया गया जप और पुण्य कई गुना फल देता है। 108 नामों के जाप का महत्व भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मन को शांति मिलती है नकारात्मक विचार दूर होते हैं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि नाम-जप से भगवान नारायण शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भगवान विष्णु के 108 पवित्र नाम नीचे भगवान विष्णु के 108 नाम दिए जा रहे हैं, जिनका जाप आज के दिन विशेष फलदायी माना गया है: ऊँ श्री विष्णवे नमः ऊँ श्री परमात्मने नमः ऊँ श्री विराट पुरुषाय नमः ऊँ श्री क्षेत्र-क्षेत्रज्ञाय नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नमः ऊँ श्री ईश्वराय नमः ऊँ श्री हृषीकेशाय नमः ऊँ श्री पद्मनाभाय नमः ऊँ श्री विश्वकर्मणे नमः ऊँ श्री कृष्णाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नमः ऊँ श्री सर्वेश्वराय नमः ऊँ श्री अच्युताय नमः ऊँ श्री वासुदेवाय नमः ऊँ श्री पुण्डरीकाक्षाय नमः ऊँ श्री नर-नारायणाय नमः ऊँ श्री जनार्दनाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री चतुर्भुजाय नमः ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री माधवाय नमः ऊँ श्री महाबलाय नमः ऊँ श्री गोविन्दाय नमः ऊँ श्री प्रजापतये नमः ऊँ श्री विश्वात्मने नमः ऊँ श्री सहस्राक्षाय नमः ऊँ श्री नारायणाय नमः ऊँ श्री सिद्धसंकल्पाय नमः ऊँ श्री महेन्द्राय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री अनन्तजिते नमः ऊँ श्री महीधराय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नमः ऊँ श्री दामोदराय नमः ऊँ श्री कमलापतये नमः ऊँ श्री परमेश्वराय नमः ऊँ श्री धनेश्वराय नमः ऊँ श्री मुकुन्दाय नमः ऊँ श्री आनन्दाय नमः ऊँ श्री सत्यधर्माय नमः ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः ऊँ श्री चक्रगदाधराय नमः ऊँ श्री भगवते नमः ऊँ श्री शान्तिदाय नमः ऊँ श्री गोपतये नमः ऊँ श्री श्रीपतये नमः ऊँ श्री श्रीहरये नमः ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नमः ऊँ श्री कपिलेश्वराय नमः ऊँ श्री वाराहाय नमः ऊँ श्री नरसिंहाय नमः ऊँ श्री रामाय नमः ऊँ श्री हयग्रीवाय नमः ऊँ श्री शोकनाशनाय नमः ऊँ श्री विशुद्धात्मने नमः ऊँ श्री केशवाय नमः ऊँ श्री धनंजयाय नमः ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः ऊँ श्री यदुश्रेष्ठाय नमः ऊँ श्री लोकनाथाय नमः ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नमः ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नमः ऊँ श्री एकपदे नमः ऊँ श्री सुलोचनाय नमः ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नमः ऊँ श्री सप्तवाहनाय नमः ऊँ श्री वंशवर्धनाय नमः ऊँ श्री योगिने नमः ऊँ श्री धनुर्धराय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः ऊँ श्री अक्रूराय नमः ऊँ श्री दुःस्वप्ननाशनाय नमः ऊँ श्री भूभवे नमः ऊँ श्री प्राणदाय नमः ऊँ श्री देवकीनन्दनाय नमः ऊँ श्री शंखभृते नमः ऊँ श्री सुरेशाय नमः ऊँ श्री कमलनयनाय नमः ऊँ श्री जगतगुरवे नमः ऊँ श्री सनातनाय नमः ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नमः ऊँ श्री द्वारकानाथाय नमः ऊँ श्री दानवेन्द्रविनाशकाय नमः ऊँ श्री दयानिधये नमः ऊँ श्री एकात्मने नमः ऊँ श्री शत्रुजिते नमः ऊँ श्री घनश्यामाय नमः ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः ऊँ श्री जरामरणवर्जिताय नमः ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः ऊँ श्री विराटपुरुषाय नमः ऊँ श्री यशोदानन्दनाय नमः ऊँ श्री परमधार्मिकाय नमः ऊँ श्री गरुड़ध्वजाय नमः ऊँ श्री प्रभवे नमः ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताय नमः ऊँ श्री गगनसदृशाय नमः ऊँ श्री वामनाय नमः ऊँ श्री हंसाय नमः ऊँ श्री व्यासाय नमः ऊँ श्री प्रकटाय नमः
हिंदू धर्म में नरसिंह जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान भगवान नृसिंह की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, आरती और मंत्रों का जाप करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट होकर अधर्म का नाश किया था। इसलिए इस दिन की गई सच्चे मन से उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान नरसिंह की आरती ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी। अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी। दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे। शिवजी जय-जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ श्रद्धापूर्वक करें इन मंत्रों का जाप आपत्ति निवारक नरसिंह मंत्र ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥ नरसिंह गायत्री मंत्र ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नरसिंह प्रचोदयात्॥ संपत्ति बाधा नाशक मंत्र ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूऱय॥ ऋण मोचक नरसिंह मंत्र ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नमः॥ क्या है इस दिन का महत्व? नरसिंह जयंती पर व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भय समाप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान नृसिंह अपने भक्तों की हर बाधा को दूर कर उन्हें साहस और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
आज मनाई जा रही है सीता नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज, 25 अप्रैल 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं। यह पर्व नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त इस वर्ष नवमी तिथि 24 अप्रैल की शाम 7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल की शाम 6:27 बजे तक रहेगी। माता सीता की पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे करें माता सीता की पूजा सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। जल से भरा कलश रखें। माता सीता को सिंदूर, अक्षत, फूल, माला और श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीराम को चंदन, पुष्प और प्रसाद चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। सीता चालीसा, व्रत कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें। सीता नवमी का धार्मिक महत्व माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भक्त अपने घर की खुशहाली, संतान सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं। नारी शक्ति की प्रेरणा हैं माता सीता माता सीता का जीवन साहस, आत्मसम्मान और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का साथ नहीं छोड़ा। वनवास, रावण द्वारा अपहरण और कठिन परीक्षाओं के बावजूद उन्होंने अद्भुत संयम दिखाया। आत्मनिर्भरता का अद्भुत उदाहरण लव-कुश के पालन-पोषण में माता सीता ने एकल माता के रूप में जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन बताता है कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। सीता नवमी का संदेश सीता नवमी हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन की हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही माता जानकी का अमर संदेश है।
आज श्रद्धा से मनाई जा रही बगलामुखी जयंती आज, 24 अप्रैल 2026 को देशभर में Baglamukhi Jayanti श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं, वाणी में शक्ति आती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी को आठवां स्थान प्राप्त है। मां बगलामुखी को क्यों कहते हैं पीताम्बरा? मां बगलामुखी को 'पीताम्बरा देवी' के नाम से भी जाना जाता है। 'पीत' यानी पीला और 'अम्बर' यानी वस्त्र। मान्यता है कि देवी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और वे सदैव पीले वस्त्र धारण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में जब भयंकर तूफान से सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई थीं। उस समय उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी और पीतवर्ण था। यही कारण है कि उन्हें पीताम्बरा कहा जाता है। पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व मां बगलामुखी की आराधना में पीले रंग का विशेष स्थान है। भक्त पूजा के दौरान: पीले वस्त्र धारण करते हैं पीले फूल अर्पित करते हैं हल्दी की माला चढ़ाते हैं पीले नैवेद्य का भोग लगाते हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीला रंग ऊर्जा, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। बगलामुखी जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष तिथि का समय इस प्रकार है: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 8:49 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 7:21 बजे उदया तिथि: 24 अप्रैल 2026 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक मां बगलामुखी की पूजा से क्या मिलता है? धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं पर विजय मिलती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली बनती है। विशेष रूप से न्यायालय, प्रतियोगी परीक्षा और विवादों में सफलता के लिए उनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
आज, 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में मेष संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी तिथि को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि सूर्य की उच्च राशि मानी जाती है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य अपनी उच्च स्थिति में होते हैं, तो उनका प्रभाव पृथ्वी पर अत्यंत शुभ और शक्तिशाली होता है। यही कारण है कि मेष संक्रांति को कई क्षेत्रों में नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। यह दिन जीवन में नई योजनाओं, नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलावों का प्रतीक माना जाता है। क्या करें इस दिन? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी लाभकारी माना गया है। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है, उनके लिए यह उपाय अत्यंत फलदायी माना गया है। दान-पुण्य का विशेष महत्व इस दिन दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से गेहूं, गुड़, अन्न, मसूर की दाल, लाल वस्त्र और तांबे का दान करना लाभकारी होता है। जरूरतमंदों को संतरे का दान भी शुभ फल देने वाला बताया गया है। मंत्र जाप से मिलेगा लाभ मेष संक्रांति के दिन सूर्य मंत्रों का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं: ॐ घृणि सूर्याय नमः – स्वास्थ्य लाभ के लिए ॐ सूर्याय नमः – सामान्य कल्याण के लिए ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् – जीवन में ऊर्जा और प्रेरणा के लिए आस्था और ज्योतिष का संगम ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि मेष संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी जीवन में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पवित्र Varuthini Ekadashi का सनातन परंपरा में विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान Vishnu को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे विधि-विधान से करने पर साधक के जीवन के दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत फलदायी व्रत बताया गया है, जो बड़े-बड़े यज्ञों से भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इस व्रत का पूर्ण पुण्यफल तभी प्राप्त होता है, जब इसके नियमों का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी से जुड़े 11 प्रमुख नियम: वरुथिनी एकादशी व्रत के 11 जरूरी नियम व्रत के नियमों का पालन एक दिन पहले संध्याकाल से ही शुरू कर देना चाहिए और पारण तक जारी रखना चाहिए। एकादशी व्रत में अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार करें और व्रत से एक दिन पहले ही चावल खाना बंद कर दें। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। केवल शरीर ही नहीं, मन को भी पवित्र रखें। किसी के प्रति गलत विचार न लाएं। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है। चावल और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें तथा जमीन पर शयन करें। अगले दिन शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक पारण करना अनिवार्य है, तभी व्रत पूर्ण माना जाता है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए उन्हें पहले ही तोड़कर रख लें। भगवान विष्णु के साथ माता Lakshmi की पूजा भी करें। अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें। दिनभर वाद-विवाद से बचें और मन में श्रीहरि के मंत्रों का जप करते रहें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का पालन करने से साधक को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। हालांकि, यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।
अप्रैल 2026 में पड़ने वाली कालाष्टमी को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम बना हुआ है। कई लोग 9 अप्रैल को व्रत रखने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ 10 अप्रैल को। ऐसे में पंचांग के आधार पर सही तिथि और पूजा का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है। हिंदू धर्म में हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव का प्राकट्य हुआ था। इस व्रत को रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-शांति आती है। सही तिथि क्या है? वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 10 अप्रैल 2026 की रात 11:15 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत उदयातिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त काल भैरव की पूजा रात में करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार 10 अप्रैल को रात 9:00 बजे से 11:00 बजे तक पूजा का सबसे शुभ समय रहेगा। कालाष्टमी पूजा विधि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। फिर काल भैरव का अभिषेक कर उन्हें तिलक लगाएं। पूजा में काले तिल, सरसों का तेल, गुड़, काली उरद, कच्चा दूध और मीठी रोटी अर्पित करें। दीप जलाकर आरती करें और अंत में शिव चालीसा एवं भैरव चालीसा का पाठ करें। विशेष उपाय इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। (Disclaimer: यह जानकारी सामान्य धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।)
हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे सप्त चिरंजीवियों में शामिल हैं, यानी आज भी जीवित माने जाते हैं। कब है परशुराम जयंती 2026? साल 2026 में परशुराम जयंती 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अक्षय तृतीया का पावन पर्व भी पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। तिथि और समय तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल (शाम का श्रेष्ठ समय): 06:49 PM से 08:12 PM मध्याह्न काल: पूरे दिन अक्षय तृतीया के कारण दान-पुण्य के लिए शुभ मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। परशुराम जयंती का महत्व यह दिन शक्ति, साहस और धर्म के पालन का प्रतीक है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर: जीवन में सुख-समृद्धि आती है साहस और आत्मबल बढ़ता है पापों का नाश होता है दीर्घायु और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है अक्षय तृतीया के साथ होने के कारण इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है। कैसे करें पूजा? सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें घर या मंदिर में भगवान परशुराम और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें पीले पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित करें शाम को घी का दीपक जलाकर मंत्र या चालीसा का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। ऐसे में 5 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत व पूजा करने से जीवन की कठिन बाधाएं दूर होती हैं और करियर व व्यापार में सफलता के नए रास्ते खुलते हैं। क्या है इस दिन का विशेष महत्व? वैशाख मास में आने वाली यह चतुर्थी भगवान गणेश के “विकट” स्वरूप को समर्पित होती है, जो हर प्रकार के संकट को हरने वाले माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा करने से बुध और केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता, निर्णय क्षमता और सफलता में वृद्धि होती है। शुभ मुहूर्त (5 अप्रैल 2026) चतुर्थी प्रारंभ: सुबह 11:59 बजे चतुर्थी समाप्त: 6 अप्रैल, दोपहर 02:10 बजे अमृत काल: शाम 06:20 से रात 08:06 बजे अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से 12:49 बजे तक पूजा विधि इस दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और घर के पूजा स्थान पर स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत से अभिषेक करें सिंदूर, अक्षत, फूल, फल और दूर्वा अर्पित करें मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं आरती करें और रात में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें व्रत कथा का महत्व धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से पूजा का फल दोगुना हो जाता है। कथा के अनुसार, सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान गणेश अपने भक्तों के सबसे बड़े संकट भी दूर कर देते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। क्या मिलता है इस व्रत से? करियर और व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
मेष राशि - आपका उदार स्वभाव आज आपके लिए कई ख़ुशनुमा पल लेकर आएगा। नए क़रार फ़ायदेमंद दिख सकते हैं, लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक़ लाभ नहीं पहुँचाएंगे। निवेश करते समय जल्दबाज़ी में निर्णय न लें। अपने जीवन-साथी के साथ बेहतर समझ ज़िन्दगी में ख़ुशी, सुकून और समृद्धि लाएगी। आपका होना इस दुनिया को आपके प्रिय के लिए रहने के क़ाबिल बनाता है। अंजान लोगों से बात करना ठीक है लेकिन उनकी विश्वसनियता जाने बिना उनको अपने जीवन की बातें बताकर आप अपना वक्त ही जाया करेंगे और कुछ नहीं। आपको महसूस होगा कि शादी के वक़्त किए गए सारे वादे सच्चे हैं। आपका जीवनसाथी ही आपका हमदम है। आज विदेश में रहने वाले किसी शख्स से आपको कोई बुरी खबर मिल सकती है। उपाय :- आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मांस, मदिरा का सेवन न करें। वृषभ राशि - आशावादी बनें और उजले पक्ष को देखें। आपका विश्वास और उम्मीद आपकी इच्छाओं व आशाओं के लिए नए दरवाज़े खोलेंगी। बिना किसी की सलाह लिये बिना आज आपको पैसा कहीं भी इनवेस्ट नहीं करना चाहिए। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। आज प्रेम-संबंधों में अपने स्वतन्त्र विवेक का इस्तेमाल कीजिए। आज लोग आपकी वह प्रशंसा करेंगे, जिसे आप हमेशा से सुनना चाहते थे। आप एक बेहतरीन जीवनसाथी होने की ख़ुशक़िस्मती को शिद्दत से महसूस कर पाएंगे। आपके मन में आज अपने किसी खास को लेकर निराशा रेहेगी। उपाय :- चाँदी के टुकड़े पर शुक्र का यंत्र खुदवाकर पूजा करने से पारिवारिक जीवन खुशहाल बना रहेगा। मिथुन राशि - आज के रोज़ जो भावुक मिज़ाज आप पर छाया हुआ है, उससे निकलने के लिए बीती बातों को दिल से निकाल दीजिए। हालाँकि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, लेकिन पैसे का लगातार पानी की तरह बहते जाना आपकी योजनाओं में रुकावट पैदा कर सकता है। पारंपरिक रस्में या कोई पावन आयोजन घर पर किया जाना चाहिए। आपका प्रिय आज कुछ खीझा हुआ महसूस कर सकता है, जो आपके दिमाग़ पर दबाव और बढ़ा देगा। आपका कम्यूनिकेशन और काम करने की क्षमता असरदार सिद्ध होंगे। जन्मदिन भूलने जैसी किसी छोटी-सी बात को लेकर जीवनसाथी से तक़रार मुमकिन है। लेकिन अन्ततः सब ठीक हो जाएगा। आज परिवार या मित्रों के साथ समय व्यतीत होगा। मुमकिन है कि आप झुंझलाहट या ख़ुद को फँसा हुआ महसूस करें, क्योंकि दूसरे ख़रीदारी में पूरी तरह मशगूल रह सकते हैं। उपाय :- अच्छी सेहत के लिए सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार करें। कर्क राशि - जब आप कोई फ़ैसला लें, तो दूसरों की भावनाओं का ख़ास ख़याल रखें। आपका कोई भी ग़लत निर्णय न केवल उनपर ख़राब असर डालेगा, बल्कि आपको भी मानसिक तनाव देगा। आज आप अपना धन धार्मिक कार्यों में लगा सकते हैं जिससे आपको मानसिक शांति मिलने की पूरी संभावना है। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। आपकी ओर से की गयी लापरावाही महंगी साबित हो सकती है। आपके ज़हन में काम का दबाव होने के बावजूद आपका प्रिय आपके लिए ख़ुशी के पलों को लाएगा। खाली समय में आज आप अपने मोबाइल पर कोई वेब सीरीज देख सकते हैं। अपने साथी पर किया गया संदेह एक बड़ी लड़ाई का रूप ले सकता है। ऑफिस के दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताना आपके लिए अच्छा नहीं है ऐसा करके आप अपने घर वालों के गुस्से का शिकार हो सकते हैं। उपाय :- 'मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।' सिंह राशि - व्यस्त दिनचर्या के बावजूद सेहत अच्छी रहेगी। लेकिन इसे हमेशा के लिए सच मानने की ग़लती न करें। अपनी ज़िंदगी और सेहत का सम्मान करें। आज आप अच्छा पैसा कमाएंगे- लेकिन ख़र्च में इज़ाफ़ा आपके लिए बचत को और ज़्यादा मुश्किल बना देगा। जिन लोगों के साथ आप रहते हैं वे आपसे बहुत ख़ुश नहीं होंगे, चाहे आपने इसके लिए कुछ भी क्यों न किया हो। सोशल मीडिआ पर अपने प्रिय के पिछले 2-3 संदेश देखिए, आपको एक ख़ूबसूरत ताज्जुब का एहसास होगा। वक्त से बढ़कर कुछ नहीं होता। इसलिए आप वक्त का सदुपयोग करते हैं लेकिन कई बार आपको जीवन को लचीला बनाने की जरुरत भी होती है और अपने घर परिवार के साथ समय बिताने की जरुरत होती है। आज आपका जीवनसाथी आपको प्यार और सुख के लोक की सैर करा सकता है। बहुत ज्यादा बातें करके आज आपको सिर में दर्द हो सकता है। इसलिए जितनी आवश्यकता हो उतनी ही बातें करें। उपाय :- सदा साफ़-सुथरे, प्रेस किये हुए कपड़े पहनना यह दर्शाता है कि आप अपनी जीवनशैली के प्रति जागरुक हैं। कन्या राशि - आपकी ऊँची बौद्धिक क्षमताएँ आपको कमियों से लड़ने में सहायता करेंगी। सिर्फ़ सकारात्मक विचारों के ज़रिए इन समस्याओं से निजात पायी जा सकती है। लम्बे अरसे को मद्देनज़र रखते हुए निवेश करें। बच्चे आपको घरेलू काम-काज निबटाने में मदद करेंगे। प्रेम के दृष्टिकोण से उत्तम दिन है। आज के दिन घटनाएँ अच्छी तो होंगी, लेकिन तनाव भी देंगी – जिसके चलते आप थकान और दुविधा महसूस करेंगे। आपका जीवनसाथी आपको पाकर ख़ुद को ख़ुशनसीब समझता है; इन पलों का भरपूर उपयोग करें। अगर कोई छोटा व्यक्ति भी आपको सलाह दे तो उसे सुनें क्योंकि कई बार छोटे लोगों से आपको जीवन को जीने की बड़ी सीख मिल जाती है। उपाय :- छुट्टी के दिन अगर बोर हो रहे हैं तो बहते पानी की मछलियों को चारा खिलाएं। तुला राशि - ख़ुद को ज़्यादा आशावादी बनने के लिए प्रेरित करें। इससे न सिर्फ़ आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और व्यवहार लचीला होगा, बल्कि डर, ईर्ष्या और नफ़रत जैसे नकारात्मक मनोभावों में भी कमी आएगी। इस राशि के विवाहित जातकों को आज ससुराल पक्ष से धन लाभ होने की संभावना है। एक नज़दीकी रिश्तेदार ख़ुद के लिए आपका ज़्यादा ध्यान चाहेगा, हालाँकि वह काफ़ी मददगार और ख़याल रखने वाला होगा। बेवजह का शक रिश्तों को खराब करने का काम करता है। आपको भी अपने प्रेमी पर शक नहीं करना चाहिए। यदि किसी बात को लेकर आपके मन में उनके प्रति संशय है तो उनके साथ बैठकर हल निकालने की कोशिश करें। आज आप सारे रिश्तों और रिश्तेदारों से दूर होकर अपना दिन किसी ऐसी जगह पर बिताना पसंद करेंगे जहां जाकर आपको शांति प्राप्त होती है। जीवनसाथी के साथ एक आरामदायक दिन बीतेगा। आज आप सब चिंताओं को भुलाकर अपनी रचनात्मकता को बाहर निकाल सकते हैं। उपाय :- गणेश जी पर हरी दूर्वा (घास) चढ़ाने से प्रेम सम्बन्ध अच्छे रहेंगे। वृश्चिक राशि - शारीरिक तौर पर तंदुरुस्त रहने के लिए धूम्रपान की आदत छोड़ दें। आपके पिता की कोई सलाह आज कार्यक्षेत्र में आपको धन लाभ करा सकती है. आज के दिन बिना कुछ ख़ास किए आप आसानी से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में क़ामयाब रहेंगे। आपके जीवन में प्रेम की बहार आ सकती है; आपको ज़रूरत है तो बस अपने आँख-कान खुले रखने की। ऑफिस से जल्दी घर जाने का प्लान आज आप ऑफिस पहुंचकर ही कर सकते हैं। घर पहुंचकर आप मूवी देखने या किसी पार्क में परिवार के लोगों के साथ जाने का प्लान बना सकते हैं। कई लोग साथ तो रहते हैं, लेकिन उनके जीवन में रोमांस नहीं होता। लेकिन यह दिन आपके लिए बेहद रोमानी होने वाला है। माता के साथ आज आप अच्छा समय बिता सकते हैं, आज वो आपसे आपकी बचपन की बातें शेयर कर सकती हैं। उपाय :- केसर लगी पीली मिठाई, केसरी हलवा खुद भी खाएं और गरीबों में भी बाँटने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। धनु राशि - आपका आकर्षक बर्ताव दूसरों का ध्यान आपकी तरफ़ खींचेगा। आर्थिक रुप से आज आप काफी मजबूत नजर आएंगे, ग्रह नक्षत्रों की चाल से आज आपके लिए धन कमाने के कई मौके बनेंगे. आपका ज्ञान और हास-परिहास आपके चारों ओर लोगों को प्रभावित करेगा। आप इस दिन को अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं भूलेंगे, अगर आप प्यार में डूबने के मौक़े को आज यूँ ही न गवाएँ तो। इस राशि के लोगों को आज अपने आप को समझने की जरुरत है। यदि आपको लगता है कि आप दुनिया की भीड़ में कहीं खो गये हैं तो अपने लिए वक्त निकालें और अपने व्यक्तित्व का आकलन करें। आपका जीवनसाथी आपको प्यार का एहसास देना चाहता है, उसकी मदद करें। धन को इतनी अहमियत न दें कि आपके रिश्ते ही खराब हो जाएँ। यह बात याद रखें कि धन मिल सकता है लेकिन रिश्ते नहीं। उपाय :- मानसिक शान्ति बहुत महत्वपूर्ण है, इसके लिए चाँदी का कड़ा या चाँदी की चैन धारण करें। मकर राशि - हर इंसान को ग़ौर से सुनें, हो सकता है आपको अपनी समस्या का समाधान मिल जाए। आपका धन आपके काम तभी आता है जब आप फिजूलखर्ची करने से खुद को रोकते हैं आज ये बात आपको अच्छी तरह से समझ में आ सकती है। अपने घर के वातावरण में कुछ बदलाव करने से पहले आपको सभी की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप हुक़्म चलाने की कोशिश करेंगे, तो आपके और आपके प्रिय के बीच काफ़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। घर से बाहर निकलकर आज आप खुली हवाओं में टहलना पसंद करेंगे। आज आपका मन शांत होगा जिसका फायदा आपको पूरे दिन मिलेगा। लंबे समय से कामकाज का दबाव आपके वैवाहिक जीवन के लिए कठिनाई खड़ा कर रहा है। लेकिन आज सारी शिकायतें दूर हो जाएंगी। कहीं से उधार वापस मिल सकता है जिससे आपकी कुछ आर्थिक समस्याएं दूर हो जाएंगी। उपाय :- सर्पाकार चांदी की अंगूठी धारण करने से पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा। कुम्भ राशि - आपकी ओर से समर्पित दिल और बहादुरी का जज़्बा आपके जीवन-साथी को ख़ुशी दे सकता है। बिना बताये आज कोई देनदार आपके अकाउंट में पैसे डाल सकता है जिसके बारे में जानकर आपको अचंभा भी होगा और खुशी भी। जीवनसाथी से झगड़ा मानसिक तनाव की ओर ले जा सकता है। बेकार का तनाव लेने की ज़रूरत नहीं है। ज़िंदगी का एक बड़ा सबक़ इस बात को मान लेना है कि बहुत-सी चीज़ों को बदलना नामुमकिन है। जिनकी सगाई हो चुकी है, वे अपने मंगेतर से बहुत-सी ख़ुशियाँ पाएंगे। आज टीवी या मोबाइल पर कोई मूवी देखने में आप इतना व्यस्त हो सकते हैं कि आप जरुरी कामों को करना भी भूल जाएंगे। आपको महसूस होगा कि आपका वैवाहिक जीवन बहुत ख़ूबसूरत है। आज आप अपने देश से जुड़ी कुछ जानकारियों को जानकर चकित हो सकते हैं। उपाय :- श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में प्रसाद चढ़ा कर ग़रीबों को खाने की सामग्री बांटने से फैमिली लाइफ अच्छी रहेगी। मीन राशि - आपमें से जो दफ़्तर में ओवरटाइम कर रहे थे और ऊर्जा की कमी से जूझ रहे थे, आज उन्हें फिर वैसी ही समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है। आज के दिन भूलकर भी किसी को पैसे उधार न दें और यदि देना जरुरी हो तो देने वाले से लिखित में लें कि वो पैसा वापस कब करेगा। किसी दूर के रिश्तेदार के यहाँ से मिली आकस्मिक अच्छी ख़बर आपके पूरे परिवार के लिए ख़ुशी के लम्हे लाएगी। एक प्यारी-सी मुस्कुराहट से अपने प्रेमी का दिन रोशन करें। आज आप अपना खाली समय अपनी माता की सेवा में बिताना चाहेंगे लेकिन ऐन मौके पर किसी काम के आ जाने की वजह से ऐसा नहीं हो पाएगा। इससे आपको परेशानी होगी। क्या आपको लगता है कि शादी महज़ समझौतों का नाम है? अगर हाँ, तो आप आज हक़ीक़त महसूस करेंगे और जानेंगे कि यह आपके जीवन की सबसे अच्छी घटना थी। आज विदेश में रहने वाले किसी शख्स से आपको कोई बुरी खबर मिल सकती है। उपाय :- अगर आज आप उमंग व उत्साह की कमी महसूस कर रहे हैं तो गमलों में काले-सफेद मार्बल के दाने रखें। कृपया ध्यान दें यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए IDTV इन्द्रधनुष उत्तरदायी नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।