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Shab-e-Qadr: Ramadan’s Night of Thousand Months

शब-ए-कद्र: हजार महीनों से बेहतर इबादत की रात, जानिए क्यों खास हैं रमजान की आखिरी पाँच विषम रातें

surbhi मार्च 16, 2026 0
Prayers during Shab-e-Qadr, the sacred night of Ramadan with immense blessings.
Shab-e-Qadr Prayers on Ramadan’s Blessed Night

 

रमजान का मुबारक महीना अब अपने अंतिम और सबसे अहम चरण में पहुंच चुका है। जैसे ही तीसरा अशरा शुरू होता है, दुनिया भर के मुसलमान उस मुकद्दस रात की तलाश में इबादत में मशगूल हो जाते हैं, जिसे इस्लाम में Shab-e-Qadr या Laylatul Qadr कहा जाता है। इस रात को इस्लाम में इतनी अहमियत दी गई है कि एक रात की इबादत को हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताया गया है।
 

कुरान के अवतरण से जुड़ी है यह रात

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र रात में अल्लाह ने इंसानियत की रहनुमाई के लिए पवित्र ग्रंथ Quran का अवतरण शुरू किया था। कुरान की Surah Al-Qadr में इस रात की महानता का जिक्र करते हुए कहा गया है- “लैलतुल कद्र खैरुम मिन अल्फि शहर”, यानी कद्र की रात हजार महीनों से बेहतर है।

धार्मिक विद्वानों के मुताबिक यह रात उम्मत-ए-मोहम्मदी के लिए अल्लाह का खास तोहफा है, जिसमें बंदों की दुआएं सीधे कबूल होने की उम्मीद रखी जाती है।

 

आखिरी दस दिनों की विषम रातों में तलाश

इस्लामी विद्वानों का मानना है कि शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दस दिनों की विषम रातों में तलाश करना चाहिए। आम तौर पर इसे 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात में से किसी एक रात में माना जाता है।

हालांकि भारतीय उपमहाद्वीप सहित कई क्षेत्रों में 27वीं रात को सबसे ज्यादा अहम माना जाता है, लेकिन इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार इन सभी पाँच रातों में इबादत करना सुन्नत तरीका माना गया है, ताकि इस बरकत भरी रात का सवाब छूट न जाए।

 

फरिश्तों के उतरने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात फरिश्ते और हजरत Jibreel धरती पर उतरते हैं और सुबह तक उन लोगों के लिए रहमत, सलामती और मगफिरत की दुआ करते हैं जो नमाज, कुरान की तिलावत और तौबा-अस्तगफार में लगे रहते हैं। माना जाता है कि इस रात की हर छोटी नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है और वातावरण में खास रूहानियत महसूस होती है।

 

इबादत और आत्मशुद्धि का खास मौका

उलेमाओं के अनुसार इस मुकद्दस रात में सिर्फ जागना ही काफी नहीं है, बल्कि सच्चे दिल से इबादत करना और आत्ममंथन भी जरूरी है। इस दौरान मुसलमान तहज्जुद, सलातुल तस्बीह जैसी विशेष नमाज अदा करते हैं, अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अपने परिवार, समाज तथा देश की सलामती के लिए दुआ करते हैं।

धार्मिक जानकारों का कहना है कि यह रात केवल इबादत का अवसर ही नहीं बल्कि इंसान के लिए अपने जीवन को बेहतर बनाने और कुरान की शिक्षाओं को समझकर उन्हें जीवन में उतारने का भी संदेश देती है। यही शब-ए-कद्र की असली रूह और मकसद माना जाता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु को बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी ग्रह माना जाता है। साल 2026 के अंत में राहु एक बड़ा राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 5 दिसंबर 2026 को सुबह 10:32 बजे राहु Capricorn राशि में प्रवेश करेंगे और करीब 18 महीने तक यहीं रहेंगे। राहु हमेशा वक्री चाल चलते हैं, इसलिए वे Aquarius से निकलकर वापस मकर राशि में आएंगे। इस दौरान राहु और शनि के बीच विशेष ज्योतिषीय योग बनेंगे, जिनका असर देश-दुनिया के साथ कई राशियों पर भी देखने को मिल सकता है। देश-दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार राहु और शनि के बीच बनने वाले योग: त्रिएकादश योग चतुर्थ-दशम योग दुनियाभर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। संभावित प्रभाव: कई देशों में सत्ता परिवर्तन वैश्विक तनाव और संघर्ष आर्थिक अस्थिरता प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं की आशंका हालांकि व्यक्तिगत राशियों पर इसका असर अलग-अलग रहेगा। कुछ राशियों के लिए यह गोचर बेहद शुभ साबित हो सकता है। Leo: मेहनत का मिलेगा पूरा फल राहु का गोचर सिंह राशि से छठे भाव में होगा। यह समय लंबे समय से रुके कार्यों में सफलता दिला सकता है। संभावित लाभ: करियर में अच्छी प्रगति प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता रिश्तों में सुधार परिवार के साथ संबंध बेहतर होंगे यात्राओं से लाभ मिलने के योग जो लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे, उन्हें अब राहत मिल सकती है। Libra: विदेश जाने के बन सकते हैं योग तुला राशि वालों के लिए राहु चौथे भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान: आय के नए स्रोत बन सकते हैं विदेश यात्रा या विदेश में बसने के अवसर मिल सकते हैं प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ संभव है करियर में नई दिशा मिल सकती है हालांकि कुछ संघर्ष भी रहेगा, लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के संकेत हैं। Scorpio: धन लाभ और करियर ग्रोथ वृश्चिक राशि के लिए राहु तीसरे भाव में रहेंगे, जिसे साहस और प्रयास का भाव माना जाता है। संभावित प्रभाव: नए बिजनेस अवसर करियर में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी पुराने निवेश से फायदा आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हालांकि खर्च भी बढ़ सकते हैं, इसलिए आर्थिक प्लानिंग जरूरी होगी। Pisces: बिगड़े काम बनने लगेंगे मीन राशि वालों के लिए राहु 11वें भाव में गोचर करेंगे, जो लाभ और इच्छापूर्ति का भाव माना जाता है। इस दौरान: रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं जमीन या वाहन खरीदने के योग सामाजिक सम्मान बढ़ सकता है मानसिक तनाव में कमी आएगी हालांकि खर्च लगातार बने रह सकते हैं, इसलिए समझदारी से फैसले लेने होंगे। क्या सावधानी रखनी चाहिए? राहु का प्रभाव अचानक बदलाव और भ्रम भी पैदा करता है। इसलिए इस अवधि में: जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें निवेश सोच-समझकर करें मानसिक तनाव को नजरअंदाज न करें रिश्तों में संवाद बनाए रखें ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार सही योजना और धैर्य से इस गोचर के सकारात्मक परिणाम बेहतर तरीके से प्राप्त किए जा सकते हैं।  

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Narad Puran: मृत्यु के बाद यमलोक में कैसे मिलता है पाप और पुण्य का फल? जानिए रहस्यमयी यात्रा का वर्णन

Narada Purana में जीवन, मृत्यु, कर्म और परलोक से जुड़े कई गूढ़ रहस्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है। पुराणों के अनुसार मनुष्य को मृत्यु के बाद अपने कर्मों के आधार पर फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्म करने वाले जीव जहां सुखपूर्वक धर्मलोक की यात्रा करते हैं, वहीं पाप कर्म करने वालों को कठोर यातनाएं सहनी पड़ती हैं। नारद पुराण में यमलोक के मार्ग और वहां मिलने वाले दंड एवं सुखों का अत्यंत विस्तृत और रहस्यमयी वर्णन किया गया है। छियासी हजार योजन लंबा बताया गया है यमलोक का मार्ग नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग लगभग 86,000 योजन तक फैला हुआ है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर माना जाता है। इस हिसाब से यह दूरी करीब 11 लाख किलोमीटर से भी अधिक बताई गई है। कहा गया है कि: धर्म और दान-पुण्य करने वाले लोग इस मार्ग को सुखपूर्वक पार कर लेते हैं पाप कर्म करने वाले जीव अत्यंत कष्ट झेलते हुए यात्रा करते हैं पापी जीवों के बारे में वर्णन मिलता है कि उनके कंठ सूख जाते हैं, वे भय और पीड़ा से रोते-चिल्लाते हैं और Yamdoot उन्हें चाबुक और अस्त्रों से दंडित करते हुए आगे ले जाते हैं। यमलोक के मार्ग में मिलती हैं भयानक यातनाएं पुराण में यमलोक के रास्ते को बेहद कठिन और भयावह बताया गया है। मार्ग में: जलती हुई अग्नि तपती रेत कांटेदार वृक्ष तीखी धार वाली चट्टानें अंधेरी गुफाएं सुई जैसे कांटे मौजूद रहते हैं। कहीं बाघों की डरावनी गर्जना सुनाई देती है तो कहीं जीवों को रस्सियों और अंकुशों से खींचा जाता है। पाप कर्म करने वाले जीव इन यातनाओं को सहते हुए अपने कर्मों पर पछतावा करते हैं। पुराणों के अनुसार इस यात्रा में न छाया मिलती है और न पानी। पुण्यात्माओं को मिलते हैं दिव्य सुख नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जिन्होंने जीवन में धर्म, दया और दान किया हो, उन्हें यमलोक की यात्रा में विशेष सुख प्राप्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर: अन्न दान करने वालों को स्वादिष्ट भोजन मिलता है जल दान करने वालों को उत्तम पेय प्राप्त होते हैं वस्त्र दान करने वालों को दिव्य वस्त्र मिलते हैं दीपदान करने वालों के मार्ग प्रकाशित रहते हैं गोदान करने वालों को विशेष सुख प्राप्त होते हैं जो व्यक्ति माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों की सहायता करता है तथा सभी जीवों के प्रति दया भाव रखता है, उसे धर्मराज के लोक में सम्मान प्राप्त होता है। धर्मराज पुण्यात्माओं का करते हैं सम्मान Yama पुण्यात्माओं का स्वागत मित्र की तरह करते हैं। पुराण के अनुसार धर्मराज कहते हैं कि मानव जीवन पाकर भी जो व्यक्ति धर्म और पुण्य नहीं करता, उससे बड़ा पापी कोई नहीं। नारद पुराण में धर्म, दान और भगवान के स्मरण को जीवन का सबसे बड़ा साधन बताया गया है। चित्रगुप्त याद दिलाते हैं कर्मों का हिसाब वहीं पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत भयावह रूप में दिखाई देते हैं। पुराण में वर्णन है कि उनकी आंखें लाल होती हैं और वे प्रलयकाल के बादलों जैसी गर्जना करते हैं। इसके बाद Chitragupta जीवों को उनके कर्मों का पूरा हिसाब याद दिलाते हैं और उसी अनुसार उन्हें नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। पुराणों के अनुसार पापों का फल भोगने के बाद जीव फिर पृथ्वी पर विभिन्न योनियों में जन्म लेते हैं। क्या संदेश देता है नारद पुराण? नारद पुराण का मुख्य संदेश यह है कि: मनुष्य को हमेशा धर्म और सद्कर्म करने चाहिए दया, सेवा और दान जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं हर कर्म का फल अवश्य मिलता है मानव जीवन को केवल भौतिक सुखों में नहीं गंवाना चाहिए पुराणों के अनुसार धर्म का मार्ग ही अंततः जीव को सुख, सम्मान और मोक्ष की ओर ले जाता है।  

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मई 2026 में कब रखा जाएगा रोहिणी व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, नियम और धार्मिक महत्व

जैन धर्म में रोहिणी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना को समर्पित होता है और मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में रोहिणी व्रत 18 मई, सोमवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है। रोहिणी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त रोहिणी व्रत किसी निश्चित तिथि पर नहीं बल्कि रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव के अनुसार रखा जाता है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र विद्यमान रहता है, तब यह व्रत किया जाता है। मुख्य व्रत तिथि: 18 मई 2026, सोमवार रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 मई 2026, रात 9:43 बजे रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 मई 2026, शाम 5:55 बजे विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक व्रत पारण का समय: 18 मई को सुबह 11:32 बजे के बाद क्या है रोहिणी व्रत का महत्व? रोहिणी व्रत मुख्य रूप से जैन समुदाय द्वारा रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत आत्मिक शुद्धि, संयम और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। रोहिणी व्रत के प्रमुख नियम यह व्रत लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक किया जाता है। हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन उपवास रखा जाता है। व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली और धार्मिक नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद विधि-विधान से ‘उद्यापन’ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बिना उद्यापन के लंबे समय तक किए गए व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता।  

surbhi मई 16, 2026 0
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