पुरी: विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक उत्सव 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा करेंगे। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और रथ की रस्सियां खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम भी है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण और रोचक बातें।
1. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होती है शुरुआत
जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है। इसकी शुरुआत ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से होती है।
2. तीन देवता, तीन अलग-अलग रथ
भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भगवान के अपनी बुआ के घर जाने का प्रतीक मानी जाती है।
3. विशेष लकड़ी से बनते हैं रथ
रथ निर्माण के लिए विशेष प्रकार की पवित्र नीम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसे 'दारु' कहा जाता है। शुभ वृक्षों का चयन परंपरागत विधि से किया जाता है।
4. हर रथ का अलग नाम और पहचान
5. बिना लोहे की कीलों के बनता है रथ
मान्यता है कि रथ निर्माण में लोहे की कीलों का उपयोग नहीं किया जाता। रथ निर्माण की प्रक्रिया वसंत पंचमी से शुरू होती है और अक्षय तृतीया से निर्माण कार्य औपचारिक रूप से आरंभ होता है।
6. हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा
रथ यात्रा के पांचवें दिन 'हेरा पंचमी' मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिये को सांकेतिक रूप से क्षति पहुंचाती हैं। यह भगवान के बिना उन्हें साथ लिए चले जाने का प्रतीक है।
7. बहुड़ा यात्रा से होती है वापसी
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा लगभग एक सप्ताह गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को उनकी वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है।
8. नीलाद्रि विजय की परंपरा
वापसी के बाद भी भगवान जगन्नाथ को माता लक्ष्मी की नाराजगी दूर करनी पड़ती है। जब देवी प्रसन्न होती हैं, तभी भगवान को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है। इस रस्म को नीलाद्रि विजय कहा जाता है।
9. सालबेग की मजार पर रुकता है रथ
लोकमान्यता के अनुसार रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ मुस्लिम भक्त सालबेग की मजार के पास कुछ समय के लिए रुकता है। यह भगवान की समभाव और सर्वधर्म सम्मान की परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
10. रथ की रस्सी खींचना माना जाता है पुण्य
धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु के धाम में स्थान प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस सेवा का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
पुरी की यह विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा लगभग तीन किलोमीटर लंबी होती है। भीड़ और श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण कई बार रथों को गुंडिचा मंदिर तक पहुंचने में पूरा दिन या उससे अधिक समय भी लग जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Horoscope Today 16 July 2026: 16 जुलाई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। आज चंद्रमा कर्क राशि में आश्लेषा नक्षत्र से मघा नक्षत्र की ओर गोचर करेंगे। वहीं सूर्यदेव मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे कर्क संक्रांति और दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है। इसके साथ ही आज भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा भी मनाई जा रही है। इन महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तनों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। आइए जानते हैं कि आज का दिन आपके लिए क्या संदेश लेकर आया है। मेष राशि घर-परिवार से जुड़ा कोई पुराना मामला सुलझने की दिशा में बढ़ सकता है। माता का आशीर्वाद और सलाह आपके लिए लाभदायक रहेगी। संपत्ति या वाहन से जुड़े मामलों में सावधानी रखें। करियर में अधूरे कार्य पूरे करने पर ध्यान दें। शुभ रंग: केसरिया शुभ अंक: 4 उपाय: भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। वृषभ राशि आर्थिक मामलों में दिन अनुकूल रहेगा। भाई-बहनों या करीबी लोगों के साथ पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। छोटी यात्राओं में सावधानी रखें। जीवनसाथी के साथ संवाद रिश्तों को मजबूत करेगा। शुभ रंग: सफेद शुभ अंक: 3 उपाय: सुगंधित इत्र या चंदन का प्रयोग करें। मिथुन राशि धन संबंधी मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। खान-पान पर विशेष ध्यान दें और अनावश्यक विवाद से बचें। परिवार में किसी पुराने विषय पर चर्चा हो सकती है। शुभ रंग: हरा शुभ अंक: 6 उपाय: किसी महत्वपूर्ण कार्य पर निकलने से पहले सौंफ खाकर जाएं। कर्क राशि आज आत्मविश्लेषण का दिन है। कोई बड़ा निवेश या नई शुरुआत फिलहाल टालना बेहतर रहेगा। जीवनसाथी के साथ शांतिपूर्ण संवाद लाभदायक रहेगा। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 7 उपाय: भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करें। सिंह राशि आज खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आध्यात्मिक गतिविधियों और आत्मचिंतन में समय बिताना लाभकारी रहेगा। करियर में धैर्य बनाए रखें। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 2 उपाय: अपने पिता का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। कन्या राशि लंबे समय से रुका कोई कार्य आगे बढ़ सकता है। मित्रों और बड़े भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा। नई आर्थिक योजना में निवेश करने से पहले विचार करें। शुभ रंग: नीला शुभ अंक: 11 उपाय: भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। तुला राशि करियर में पुराने प्रयासों का लाभ मिलने की संभावना है। सरकारी कार्यों में सावधानी बरतें। वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह को गंभीरता से लें। शुभ रंग: आसमानी शुभ अंक: 10 उपाय: जरूरतमंद सुहागिन महिला को श्रृंगार सामग्री दान करें। वृश्चिक राशि भाग्य आपका साथ देगा। धार्मिक कार्यों, तीर्थ यात्रा की योजना या गुरुजनों का मार्गदर्शन लाभदायक रहेगा। जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। शुभ रंग: रूबी रेड शुभ अंक: 12 उपाय: अपने पास लाल रंग का रुमाल या धागा रखें। धनु राशि गोपनीय मामलों और आर्थिक दस्तावेजों पर विशेष ध्यान दें। स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में संतुलन बनाए रखें। किसी भी नए निवेश में जल्दबाजी न करें। शुभ रंग: नारंगी शुभ अंक: 8 उपाय: भगवान विष्णु और केले के वृक्ष की पूजा करें। मकर राशि जीवनसाथी और व्यापारिक साझेदार के साथ संवाद में धैर्य रखें। साझेदारी से जुड़े मामलों में समझदारी दिखाएं। भाग्य का साथ मिलने से कई कार्य आसानी से पूरे होंगे। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 7 उपाय: शनिदेव की पूजा करें और शनि चालीसा का पाठ करें। कुंभ राशि स्वास्थ्य विशेषकर पाचन तंत्र का ध्यान रखें। नौकरी और कार्यस्थल पर पुराने मुद्दे सुलझ सकते हैं। अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार करें। शुभ रंग: जामुनी शुभ अंक: 6 उपाय: जरूरतमंद कर्मचारियों और सेवकों की सहायता करें। मीन राशि प्रेम संबंधों और पारिवारिक मामलों में खुलकर बातचीत करें। बच्चों और रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। करियर में भी सकारात्मक अवसर प्राप्त हो सकते हैं। शुभ रंग: गुलाबी शुभ अंक: 9 उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और पीले पुष्प अर्पित करें। आज का संदेश 16 जुलाई 2026 का दिन धैर्य, आत्मचिंतन और संतुलित निर्णय लेने का संकेत देता है। कर्क संक्रांति, दक्षिणायन की शुरुआत और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का यह शुभ अवसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। सकारात्मक सोच, संयम और परिवार के साथ समय बिताकर आप इस दिन का सर्वोत्तम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पुरी: विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक उत्सव 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा करेंगे। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और रथ की रस्सियां खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम भी है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण और रोचक बातें। जगन्नाथ रथ यात्रा की 10 खास बातें 1. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होती है शुरुआत जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है। इसकी शुरुआत ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से होती है। 2. तीन देवता, तीन अलग-अलग रथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भगवान के अपनी बुआ के घर जाने का प्रतीक मानी जाती है। 3. विशेष लकड़ी से बनते हैं रथ रथ निर्माण के लिए विशेष प्रकार की पवित्र नीम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसे 'दारु' कहा जाता है। शुभ वृक्षों का चयन परंपरागत विधि से किया जाता है। 4. हर रथ का अलग नाम और पहचान भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष (गरुड़ध्वज) भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (पद्म रथ) 5. बिना लोहे की कीलों के बनता है रथ मान्यता है कि रथ निर्माण में लोहे की कीलों का उपयोग नहीं किया जाता। रथ निर्माण की प्रक्रिया वसंत पंचमी से शुरू होती है और अक्षय तृतीया से निर्माण कार्य औपचारिक रूप से आरंभ होता है। 6. हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा रथ यात्रा के पांचवें दिन 'हेरा पंचमी' मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिये को सांकेतिक रूप से क्षति पहुंचाती हैं। यह भगवान के बिना उन्हें साथ लिए चले जाने का प्रतीक है। 7. बहुड़ा यात्रा से होती है वापसी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा लगभग एक सप्ताह गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को उनकी वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। 8. नीलाद्रि विजय की परंपरा वापसी के बाद भी भगवान जगन्नाथ को माता लक्ष्मी की नाराजगी दूर करनी पड़ती है। जब देवी प्रसन्न होती हैं, तभी भगवान को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है। इस रस्म को नीलाद्रि विजय कहा जाता है। 9. सालबेग की मजार पर रुकता है रथ लोकमान्यता के अनुसार रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ मुस्लिम भक्त सालबेग की मजार के पास कुछ समय के लिए रुकता है। यह भगवान की समभाव और सर्वधर्म सम्मान की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। 10. रथ की रस्सी खींचना माना जाता है पुण्य धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु के धाम में स्थान प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस सेवा का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व पुरी की यह विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा लगभग तीन किलोमीटर लंबी होती है। भीड़ और श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण कई बार रथों को गुंडिचा मंदिर तक पहुंचने में पूरा दिन या उससे अधिक समय भी लग जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
पूजा-पाठ में भगवान को फल अर्पित करना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बीज वाले फल भगवान को चढ़ाए जा सकते हैं या नहीं। खासकर आम, तरबूज, लीची या अन्य बड़े बीज वाले फलों को लेकर लोगों में अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विषय में क्या माना जाता है और भोग लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए। क्या भगवान को बीज वाले फल चढ़ा सकते हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को बीज वाले फल अर्पित करना पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है। फल को सात्विक और पवित्र भोग माना गया है तथा मौसमी फलों का भोग विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, यदि फल में बड़ा बीज हो, जैसे आम, तरबूज या अन्य ऐसे फल, तो भोग लगाने से पहले उसका बीज निकाल देना उचित माना जाता है। मान्यता है कि भगवान को वही स्वरूप में भोग अर्पित करना चाहिए, जैसा भोजन सामान्य रूप से ग्रहण किया जाता है। भोग लगाने से पहले इन नियमों का रखें ध्यान भगवान को फल अर्पित करते समय केवल फल का चयन ही नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और प्रस्तुत करने का तरीका भी महत्वपूर्ण माना गया है। भोग में शामिल किए जाने वाले फलों को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। पूजा से काफी पहले फल काटकर न रखें। भोग से ठीक पहले ही फल धोकर या काटकर अर्पित करें। यदि फल बड़ा है तो उसे स्वच्छ चाकू से काटकर भगवान के सामने रखें। भोग में संभव हो तो तुलसी दल भी शामिल करें, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भोग लगाते समय मन शांत रखें और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करें। श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण भक्त की सच्ची भावना और श्रद्धा होती है। भोग कितना बड़ा या महंगा है, इससे अधिक महत्व उसे अर्पित करने के भाव का माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान अहंकार छोड़कर पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ भगवान को भोग अर्पित करना चाहिए। बड़े बीज वाले फलों के लिए क्या करें? यदि किसी फल में बड़ा और कठोर बीज हो, तो उसे निकालकर फल भगवान को अर्पित करना बेहतर माना जाता है। वहीं छोटे बीज वाले फलों को सामान्य रूप से भी चढ़ाया जा सकता है। उद्देश्य यह माना जाता है कि भगवान को वही भोजन प्रेमपूर्वक अर्पित किया जाए, जिसे आसानी से ग्रहण किया जा सके। ध्यान रखें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। ऐसे में यदि आपके परिवार या गुरु द्वारा बताए गए विशेष पूजा-विधान हैं, तो उनका पालन करना अधिक उचित माना जाता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा, पवित्रता और सच्ची आस्था ही मानी जाती है।