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Bharat Kapoor Passes Away at 80

वेटरन एक्टर भरत कपूर का निधन, 80 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; इंडस्ट्री में शोक की लहर

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Veteran Bollywood actor Bharat Kapoor portrait, known for villain roles, passes away at age 80
Bharat Kapoor निधन 80 वर्ष

हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता Bharat Kapoor का सोमवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब बताई जा रही थी। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है।

करीबी दोस्त ने दी निधन की पुष्टि

अभिनेता Avtar Gill ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भरत कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार शाम 6 बजे संपन्न हुआ, जिसमें परिवार के सदस्य, करीबी मित्र और Indian People's Theatre Association से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए।
उनकी प्रार्थना सभा 30 अप्रैल को शाम 5 से 7 बजे के बीच उनके निवास पर आयोजित की जाएगी।

चार दशकों का शानदार करियर

भरत कपूर ने 1970 के दशक में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और करीब चार दशकों तक फिल्मों, टेलीविजन और थिएटर में सक्रिय रहे।
उन्होंने Noorie, Ram Balram, Love Story, Bazaar, Ghulami, Aakhree Raasta, Satyamev Jayate, Swarg, Khuda Gawah और Saajan Chale Sasural जैसी कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
खासतौर पर उनके खलनायक किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे।

आशोक पंडित ने दी भावुक श्रद्धांजलि

फिल्ममेकर Ashoke Pandit ने भरत कपूर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे एक शानदार अभिनेता होने के साथ-साथ बेहद अच्छे इंसान भी थे।
पंडित के अनुसार, एक कलाकार के रूप में उनकी याददाश्त असाधारण थी और वे अपने संवादों को पूरी सटीकता के साथ याद रखते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि भरत कपूर कैमरे के सामने हमेशा चौंकाने वाला प्रदर्शन देते थे। असल जिंदगी में शांत स्वभाव के होने के बावजूद, स्क्रीन पर वे अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को प्रभावित कर देते थे।

परिवार और निजी जीवन

भरत कपूर अपने पीछे पत्नी लोपा, बेटे राहुल और सागर को छोड़ गए हैं। उनकी बेटी कविता का कुछ वर्ष पहले ही निधन हो चुका था।

उनका जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सर्जरी के बाद तेजी से ठीक हो रहे पवन कल्याण, पत्नी एन्ना का भावुक पोस्ट

चेन्नई, एजेंसियां। पवन कल्याण की सेहत को लेकर सामने आई चिंताओं के बीच राहत भरी खबर आई है। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण सर्जरी के बाद तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। उनकी पत्नी एन्ना कोनिडाला ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर फैंस को उनकी सेहत के बारे में जानकारी दी।   परिवार ने दिया भरोसा, मांगी प्राइवेसी एन्ना ने अपने संदेश में सभी शुभचिंतकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि पवन कल्याण की अच्छी देखभाल की जा रही है और उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने फैंस और मीडिया से इस दौरान परिवार की निजता का सम्मान करने की अपील भी की। उन्होंने लिखा कि कभी-कभी पूरी तरह ठीक होने के लिए समय और एकांत जरूरी होता है।   अचानक बिगड़ी थी तबीयत, हुई सर्जरी जानकारी के अनुसार, 18 अप्रैल को एक आधिकारिक बैठक के दौरान पवन कल्याण को अचानक तेज दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने एमआरआई सहित कई जांचें कीं और रिपोर्ट के आधार पर सर्जरी की सलाह दी गई। सर्जरी सफल रही और अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।   डॉक्टरों ने दी आराम की सलाह जन सेना पार्टी के बयान के मुताबिक, पवन कल्याण कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 7 से 10 दिनों तक आराम करने और सावधानियां बरतने की सलाह दी है।   परिजनों और नेताओं ने जताई चिंता उनके भाई और मेगास्टार चिरंजीवी ने भी बताया कि पवन कल्याण सुरक्षित हैं और तेजी से रिकवरी कर रहे हैं। वहीं नरेंद्र मोदी ने भी फोन कर उनका हालचाल जाना और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

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बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता Varun Dhawan की अपकमिंग फिल्म Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। फैंस जिस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उसकी रिलीज डेट में बदलाव किया गया है। पहले यह फिल्म 22 मई 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसे आगे बढ़ाकर 5 जून 2026 कर दिया है। IPL के बाद रिलीज का फैसला फिल्म की रिलीज डेट बदलने के पीछे एक बड़ा कारण Indian Premier League का सीजन माना जा रहा है। मेकर्स का मानना है कि IPL खत्म होने के बाद दर्शकों का फोकस फिल्मों की ओर ज्यादा रहेगा, जिससे बॉक्स ऑफिस पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। रोमांस और कॉमेडी का फुल डोज यह फिल्म एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें रोमांस, कॉमेडी और हल्का-फुल्का ड्रामा देखने को मिलेगा। Mrunal Thakur Pooja Hegde दोनों एक्ट्रेसेस फिल्म में Varun Dhawan के साथ लीड रोल में नजर आएंगी। इस तिकड़ी को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच काफी चर्चा है। David Dhawan की वापसी फिल्म का निर्देशन David Dhawan ने किया है, जो अपनी कॉमिक टाइमिंग और एंटरटेनिंग फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। लंबे समय बाद वह एक बार फिर दर्शकों के लिए फुल-ऑन कॉमेडी और फैमिली ड्रामा लेकर आ रहे हैं। क्या है खास प्रोडक्शन: Tips Films Limited को-प्रोडक्शन: Maximillian Films (UK) जॉनर: फैमिली एंटरटेनर फिल्म की रिलीज आगे बढ़ने से फैंस को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ेगा, लेकिन उम्मीद है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल मचाएगी।  

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तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। साउथ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ एक बार फिर पोस्टपोन हो गई है। पहले यह फिल्म 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाली थी, जिसे बाद में 4 जून 2026 तक टाल दिया गया था। अब मेकर्स ने साफ कर दिया है कि फिल्म 4 जून को भी रिलीज नहीं होगी। नई रिलीज डेट का ऐलान जल्द किया जाएगा।   मेकर्स का बयान: ग्लोबल स्तर पर बड़ी तैयारी फिल्म के निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर एक लंबा बयान जारी करते हुए बताया कि ‘टॉक्सिक’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक खास सिनेमाई यात्रा है। सिनेमाकॉन में फिल्म को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद टीम ने इसे वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर रिलीज करने का फैसला लिया है। इसी वजह से रिलीज डेट को आगे बढ़ाया गया है।   फिल्म पूरी, अब डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस मेकर्स के अनुसार फिल्म पूरी तरह तैयार है और फिलहाल इसका फोकस इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन और साझेदारियों को अंतिम रूप देने पर है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि फिल्म दुनियाभर में एक प्रभावशाली तरीके से रिलीज हो, इसलिए थोड़ा इंतजार जरूरी है।   भारतीय सिनेमा को ग्लोबल पहचान देने की कोशिश Yash ने अपने संदेश में कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाने का अवसर है। उन्होंने दर्शकों से धैर्य रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरेगी।   स्टारकास्ट और डायरेक्शन इस फिल्म में Nayanthara, Kiara Advani, Tara Sutaria और Rukmini Vasanth भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन Geetu Mohandas ने किया है।

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