नई दिल्ली: पैन-इंडिया स्टार Yash ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic: A Fairy Tale for Grownups को लेकर पहली बार खुलकर बात की है। CinemaCon 2026, लॉस एंजेलिस में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस फिल्म को “महत्वाकांक्षी” और “गैंगस्टर जॉनर की नई परिभाषा” बताया।
फैंडैंगो को दिए इंटरव्यू में यश ने कहा कि पहली नजर में यह फिल्म एक सामान्य गैंगस्टर ड्रामा लग सकती है, लेकिन इसकी कहानी कहीं ज्यादा गहरी और परतदार है। उनके मुताबिक, यह फिल्म केवल एक्शन या अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें मानव मनोविज्ञान और जीवन के जटिल पहलुओं को अनोखे तरीके से दिखाया गया है।
यश ने कहा, “यह फिल्म एक डार्क किरदार को बिल्कुल अलग नजरिए से पेश करती है। इसमें गहरी साइकोलॉजी है और यह दर्शकों के सोचने के तरीके पर असर डालेगी। यह कमर्शियल सिनेमा के साथ एक फ्रेश स्टोरीटेलिंग का उदाहरण है, जो भारतीय दर्शकों के लिए नया अनुभव साबित होगा।”
Toxic: A Fairy Tale for Grownups एक पीरियड गैंगस्टर फिल्म है, जिसका निर्देशन Geetu Mohandas ने किया है। फिल्म में यश डबल रोल में नजर आएंगे।
इस मल्टी-स्टारर फिल्म में Kiara Advani, Nayanthara, Huma Qureshi, Tara Sutaria और Rukmini Vasanth भी अहम भूमिकाओं में हैं।
खास बात यह है कि फिल्म को कन्नड़ और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में एक साथ शूट किया गया है। करीब 700–800 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जा रही है।
CinemaCon 2026 के दौरान यश, प्रोड्यूसर Namit Malhotra के साथ अपनी दूसरी महत्वाकांक्षी फिल्म Ramayana को भी इंटरनेशनल ऑडियंस के सामने पेश करते नजर आए।
इस फिल्म में यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि Ranbir Kapoor भगवान राम के किरदार में दिखेंगे। इसके अलावा Sai Pallavi सीता और Ravie Dubey लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे।
Toxic: A Fairy Tale for Grownups 4 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई: भारतीय टेलीविजन के आइकॉनिक सुपरहीरो ‘शक्तिमान’ को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच अब एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ‘शक्तिमान’ के मूल अभिनेता Mukesh Khanna ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस किरदार के लिए Ranveer Singh को कास्ट करने के पक्ष में नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें भारी आर्थिक नुकसान क्यों न उठाना पड़े। ‘रणवीर बेहतरीन अभिनेता हैं, लेकिन शक्तिमान नहीं’ एक इंटरव्यू में Mukesh Khanna ने Ranveer Singh की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक शानदार और ऊर्जा से भरपूर अभिनेता हैं, जिन्होंने ‘गली बॉय’ और खिलजी जैसे किरदारों में दमदार प्रदर्शन किया है। लेकिन उनके अनुसार, ‘शक्तिमान’ का किरदार निभाने के लिए सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि एक खास व्यक्तित्व और सादगी भरी छवि भी जरूरी है। ‘स्टार नहीं, सही चेहरा चाहिए’ खन्ना ने साफ कहा कि वह इस प्रोजेक्ट में किसी बड़े स्टार को नहीं, बल्कि एक नए चेहरे को मौका देना चाहते हैं। उनका मानना है कि पहले से स्थापित छवि वाला कोई भी अभिनेता इस किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिले, तो वह पूरे देश में ऑडिशन लेकर एक ऐसा चेहरा चुनेंगे जो ‘शक्तिमान’ की सादगी और नैतिकता को सही मायने में दर्शा सके। करोड़ों के ऑफर को भी ठुकराया Mukesh Khanna ने यह भी खुलासा किया कि Sony Pictures इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें करोड़ों रुपये देने को तैयार है। इसके बावजूद वह अपने फैसले पर अडिग हैं। उनका कहना है कि यह उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, लेकिन वह ‘शक्तिमान’ की मूल भावना से समझौता नहीं करेंगे। अक्षय कुमार पर भी साधा निशाना बातचीत के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक किरदारों के संदर्भ में Akshay Kumar पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे रोल में केवल विग या कॉस्ट्यूम काफी नहीं होते, बल्कि किरदार की शख्सियत भी उतनी ही अहम होती है। रणवीर खुद मिलने पहुंचे थे इस विवाद में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि Ranveer Singh खुद ‘शक्तिमान’ का रोल पाने के लिए Mukesh Khanna से मिलने पहुंचे थे। यह मुलाकात Sony Pictures की ओर से आयोजित की गई थी, जहां रणवीर ने इस किरदार के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। आदित्य चोपड़ा ने भी मांगे थे राइट्स खन्ना ने यह भी खुलासा किया कि वर्षों पहले निर्माता Aditya Chopra ने ‘शक्तिमान’ के राइट्स लेने में रुचि दिखाई थी। हालांकि, उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि इस किरदार को उसकी मूल भावना से अलग किसी और दिशा में ले जाया जाए।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार Virat Kohli से जुड़ी एक छोटी-सी सोशल मीडिया गतिविधि ने इंटरनेट पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। जर्मन इन्फ्लुएंसर LizLaz की इंस्टाग्राम पोस्ट पर कोहली के ‘लाइक’ और फिर ‘अनलाइक’ करने की खबर देखते ही देखते वायरल हो गई, जिससे सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? बताया जा रहा है कि एक फोटोग्राफर ने दावा किया कि कोहली ने LizLaz की तस्वीरों को लाइक किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगे। हालांकि, कुछ ही समय बाद यह भी सामने आया कि कोहली ने उस पोस्ट को अनलाइक कर दिया। रातोंरात वायरल हुईं LizLaz इस घटना के बाद LizLaz अचानक इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। खुद इन्फ्लुएंसर ने बताया कि जब यह सब हुआ, तब वह सो रही थीं और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और डायरेक्ट मैसेज के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें लगातार मैसेज कर इस खबर के बारे में बताया और सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। “मुझे उनके लिए बुरा लगा” इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए LizLaz ने हैरानी जताई कि आखिर यह इतना बड़ा मुद्दा कैसे बन गया। उन्होंने कहा कि उन्हें कोहली के अनलाइक करने से कोई दुख नहीं हुआ, बल्कि उन्हें उनके लिए थोड़ा बुरा लगा। उनके मुताबिक, “शायद यह उनका इरादा नहीं था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बने, लेकिन मैं उनके सपोर्ट के लिए आभारी हूं।” क्रिकेट से जुड़ा खास कनेक्शन LizLaz ने यह भी बताया कि उन्हें क्रिकेट का शौक भारत आने के बाद लगा। दक्षिण अफ्रीका में जन्मी और जर्मनी में पली-बढ़ी LizLaz के लिए यह खेल नया था, क्योंकि वहां फुटबॉल ज्यादा लोकप्रिय है। आईपीएल के दौरान दोस्तों के साथ मैच देखते-देखते वह Royal Challengers Bangalore की फैन बन गईं। उन्होंने कहा कि अगर आप RCB को सपोर्ट करते हैं, तो Virat Kohli को खेलते देखना सबसे रोमांचक अनुभव होता है।
मुंबई: साउथ अभिनेता Adivi Sesh और अभिनेत्री Mrunal Thakur की बहुप्रतीक्षित फिल्म Dacoit: A Love Story बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। रिलीज के महज एक हफ्ते के भीतर ही फिल्म की कमाई में लगातार गिरावट देखी जा रही है और अब यह फ्लॉप होने की कगार पर पहुंचती नजर आ रही है। 7वें दिन भी नहीं संभली रफ्तार Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के सातवें दिन यानी गुरुवार को सिर्फ 1.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके साथ ही एक हफ्ते में फिल्म का कुल इंडिया नेट कलेक्शन 28.30 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाया है। बुधवार के मुकाबले गुरुवार को कमाई में करीब 19.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो फिल्म के कमजोर ट्रेंड की ओर इशारा करता है। ‘धुरंधर 2’ के आगे फीकी पड़ी ‘डकैत’ बॉक्स ऑफिस पर Dhurandhar 2 का दबदबा ‘डकैत’ के लिए भारी पड़ रहा है। Ranveer Singh की इस फिल्म के क्रेज के चलते दर्शकों का रुझान ‘डकैत’ की ओर कम देखने को मिला है। वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी उम्मीद से कम फिल्म ने अब तक वैश्विक स्तर पर करीब 45.33 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है, जिसमें 12.40 करोड़ रुपये विदेशों से आए हैं। हालांकि, यह आंकड़े भी फिल्म के बजट के मुकाबले काफी कम हैं। 70 करोड़ बजट, आधी कमाई भी नहीं करीब 70 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘डकैत’ एक हफ्ते में अपनी लागत का आधा हिस्सा भी नहीं निकाल पाई है। ऐसे में फिल्म के लिए आगे का रास्ता और मुश्किल होता जा रहा है। ‘भूत बंगला’ से बढ़ी चुनौती 17 अप्रैल को Bhoot Bungla रिलीज हो चुकी है, जिसमें Akshay Kumar नजर आ रहे हैं। इस नई रिलीज के बाद ‘डकैत’ के लिए बॉक्स ऑफिस पर टिके रहना और भी कठिन हो सकता है। फिल्म की कहानी क्या है? इस फिल्म का निर्देशन Shaneil Deo ने किया है। कहानी एक ऐसे कैदी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पूर्व प्रेमिका से बदला लेने के लिए जेल से भाग जाता है और कई डकैतियों को अंजाम देता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब उसका सामना दोबारा अपनी पुरानी मोहब्बत से होता है। फिल्म में Anurag Kashyap, Prakash Raj और Atul Kulkarni भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।