Kaylee Hottle Death News: हॉलीवुड फिल्म 'Godzilla vs Kong' और 'Godzilla x Kong: The New Empire' में जिया (Jia) का यादगार किरदार निभाने वाली युवा अभिनेत्री Kaylee Hottle का 18 वर्ष की उम्र में एक सड़क हादसे में निधन हो गया। इस दुखद खबर की पुष्टि उनके पिता Joshua Hottle ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) के माध्यम से की। उनके निधन से फिल्म जगत और प्रशंसकों में शोक की लहर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Kaylee Hottle की मौत मैरीलैंड में हुए एक कार हादसे में हुई। उनके पिता ने बताया कि हादसे के समय वह टेक्सास में थे। उन्हें पहले अधिकारियों का फोन आया और बाद में अस्पताल से सूचना मिली कि इलाज के दौरान Kaylee का दिल धड़कना बंद हो गया।
Kaylee Hottle जॉर्जिया के अटलांटा की रहने वाली थीं और एक बधिर (Deaf) परिवार में पली-बढ़ीं। वह स्वयं भी सुन नहीं सकती थीं और उनकी मुख्य भाषा American Sign Language (ASL) थी।
उन्होंने Texas School for the Deaf में शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही अभिनय के प्रति उनका गहरा लगाव था और उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर हॉलीवुड में खास पहचान बनाई।
Kaylee के पिता Joshua Hottle ऐसे परिवार से आते हैं, जहां चार पीढ़ियों से कई सदस्य बधिर रहे हैं। Kaylee की एक बड़ी बहन भी सुन नहीं सकती थीं, जबकि उनके तीन छोटे भाई सुन सकते हैं। परिवार ने अलग-अलग राज्यों में रहने के बाद जॉर्जिया को अपना स्थायी घर बनाया।
Kaylee Hottle को वैश्विक पहचान वर्ष 2021 में रिलीज हुई 'Godzilla vs Kong' से मिली। उन्होंने फिल्म में जिया (Jia) नाम की एक मूक-बधिर बच्ची का किरदार निभाया, जिसका कॉन्ग के साथ बेहद भावनात्मक रिश्ता दिखाया गया था।
इसके बाद वह 2024 में रिलीज हुई 'Godzilla x Kong: The New Empire' में भी इसी भूमिका में नजर आईं। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा।
'Godzilla x Kong: The New Empire' में दमदार अभिनय के लिए Kaylee Hottle को Saturn Awards में Best Performance by a Younger Actor श्रेणी में नामांकन भी मिला था। कम उम्र में ही उन्होंने हॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली थी।
Kaylee Hottle के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत के लोगों ने सोशल Media पर शोक व्यक्त किया। उन्हें एक प्रेरणादायक युवा कलाकार के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से यह साबित किया कि किसी भी चुनौती के बावजूद सपनों को हासिल किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी का लोकप्रिय सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' अपने नए ट्विस्ट और पारिवारिक ड्रामे को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा में बना हुआ है। शो के हालिया एपिसोड में करण के फैसले और मिहिर से जुड़े पुराने राज़ कहानी को नया मोड़ दे रहे हैं, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। करण के फैसले से परिवार में बढ़ा तनाव नए एपिसोड में करण के कुछ फैसलों ने परिवार के रिश्तों में हलचल पैदा कर दी है। कहानी में करण और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच मतभेद देखने को मिल रहे हैं। दर्शक यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि आने वाले एपिसोड में करण का फैसला परिवार को किस दिशा में ले जाएगा। मिहिर की जिंदगी से जुड़े राज़ पर नजर सीरियल में मिहिर और तुलसी की कहानी एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पुराने रिश्तों और छिपे हुए सच को लेकर कहानी में लगातार नए खुलासे किए जा रहे हैं। मिहिर से जुड़े राज़ और परिवार पर उसके असर को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता है। सोशल मीडिया पर भी शो की चर्चा 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय की वापसी के बाद से ही शो को लेकर फैंस में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मेकर्स लगातार कहानी में नए ट्विस्ट जोड़ रहे हैं, ताकि दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहे। आने वाले एपिसोड में बड़े खुलासे की उम्मीद शो की कहानी अब ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां रिश्तों, पुराने विवादों और नए फैसलों का असर पूरे परिवार पर दिखाई देगा। दर्शकों को उम्मीद है कि आने वाले एपिसोड में मिहिर से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
Naseeruddin Shah on Jantar Mantar Protest: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और लाठीचार्ज को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया और हिंसा की आलोचना की। वीडियो में वे भावुक भी नजर आए और कहा कि छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार से उन्हें गहरा दुख और गुस्सा है। इंस्टाग्राम वीडियो में क्या बोले नसीरुद्दीन शाह? 76 वर्षीय अभिनेता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पूरी सहानुभूति छात्रों के साथ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय जीवन में विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखा है और वे हर शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उन्होंने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील करते हुए कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है। हिंसा की आलोचना अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और किसी भी लोकतांत्रिक समाज में असहमति की आवाज को हिंसा से दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसे लोगों को अपने कर्मों के परिणामों के बारे में भी सोचना चाहिए। वायरल वीडियो पर भी हुई चर्चा सोशल मीडिया पर इससे पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद थे। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो मुंबई में आयोजित एक स्क्रीनिंग कार्यक्रम का था और उसका जंतर-मंतर के प्रदर्शन से संबंध नहीं था। विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ा NEET पेपर लीक मामले से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कई शहरों तक फैल चुका है। दिल्ली के बाद मुंबई में भी प्रदर्शन हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने कुछ दिनों के लिए पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। कई फिल्मी हस्तियों ने भी जताया समर्थन छात्रों के समर्थन में कई फिल्मी हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है। इनमें प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, शबाना आजमी, विशाल ददलानी, अतुल कुलकर्णी, रितेश देशमुख, सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, वीर दास, भूमि पेडनेकर, सोनू सूद, पूजा भट्ट, सोहा अली खान, हुमा कुरैशी और अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं।
नई दिल्ली: सोमवार के वर्किंग डे का असर बॉक्स ऑफिस पर साफ दिखाई दिया। जहां सप्ताहांत में शानदार कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्म 'द ओडिसी' और अजय देवगन की 'धमाल 4' की कमाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं आलिया भट्ट की 'अल्फा' और अक्षय कुमार की 'वेलकम टू द जंगल (वेलकम 3)' अब बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती नजर आ रही हैं। हालांकि, गिरावट के बावजूद 'द ओडिसी' अभी भी सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली फिल्मों में शामिल है। 'द ओडिसी' की कमाई में सोमवार को आई गिरावट क्रिस्टोफर नोलन के निर्देशन में बनी 'द ओडिसी' ने रिलीज के बाद शानदार शुरुआत की थी। फिल्म ने पहले रविवार को 21.90 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था, लेकिन सोमवार को इसकी कमाई घटकर 8.35 करोड़ रुपये रह गई। अब तक फिल्म का कुल भारतीय नेट कलेक्शन 69.65 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। फिल्म में मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, जेंडाया, ऐन हैथवे, रॉबर्ट पैटिनसन और चार्लीज थेरॉन जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। क्या है फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी यूनानी राजा ओडिसियस की है, जो ट्रोजन युद्ध के बाद अपने घर लौटने के लिए 10 साल लंबी खतरनाक यात्रा पर निकलता है। इस दौरान उसे समुद्री राक्षसों, रहस्यमयी शक्तियों और कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 'धमाल 4' की कमाई भी घटी अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी अभिनीत 'धमाल 4' ने दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते ही रफ्तार खो दी। 10वें दिन की कमाई: ₹12.75 करोड़ 11वें दिन की कमाई: ₹3.25 करोड़ फिल्म का कुल भारतीय नेट कलेक्शन अब 127.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि दुनियाभर में फिल्म ने लगभग 174.20 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। फिल्म की कहानी 50 करोड़ रुपये के छिपे खजाने की तलाश और उससे जुड़ी हास्यपूर्ण घटनाओं पर आधारित है। 'अल्फा' का प्रदर्शन लगातार कमजोर यशराज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स की फिल्म 'अल्फा' अब बॉक्स ऑफिस पर लगभग धीमी पड़ चुकी है। रिलीज के 18वें दिन फिल्म ने केवल 18 लाख रुपये का कलेक्शन किया। अब तक फिल्म का— भारतीय नेट कलेक्शन: ₹57.88 करोड़ भारतीय ग्रॉस कलेक्शन: ₹68.96 करोड़ वर्ल्डवाइड कलेक्शन: ₹98.01 करोड़ रहा है। 'वेलकम टू द जंगल' का भी दम निकला अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' भी अब सिनेमाघरों में बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। रिलीज के 25वें दिन फिल्म ने— भारतीय नेट कलेक्शन (दिन): ₹13 लाख भारतीय ग्रॉस कलेक्शन (दिन): ₹15 लाख की कमाई की। फिल्म का— भारतीय ग्रॉस कलेक्शन: ₹133.13 करोड़ वर्ल्डवाइड कलेक्शन: ₹191.62 करोड़ तक पहुंच चुका है। बॉक्स ऑफिस पर किसका पलड़ा भारी? सोमवार को सभी फिल्मों की कमाई में गिरावट देखने को मिली, लेकिन 'द ओडिसी' अभी भी सबसे मजबूत स्थिति में बनी हुई है। वहीं 'धमाल 4' ने 100 करोड़ क्लब पार कर लिया है, जबकि 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' की कमाई अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।