टेक्नोलॉजी

WhatsApp Fake File Scam Alert

New APK Scam Alert: WhatsApp पर सीक्रेट फाइल के नाम पर फैल रहा नया साइबर फ्रॉड, एक क्लिक में चोरी हो सकती है आपकी पूरी चैट

surbhi जुलाई 21, 2026 0
WhatsApp Web security warning showing a fake APK file scam that can steal chats and compromise user accounts.
WhatsApp APK Scam Alert 2026

नई दिल्ली: अगर आप WhatsApp Web या WhatsApp Desktop का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए और खतरनाक साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस नए फ्रॉड में हैकर्स फर्जी डॉक्यूमेंट, फोटो या जरूरी फाइल का झांसा देकर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही आपका सिस्टम और व्हाट्सऐप सेशन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला खासतौर पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जो लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web या Desktop App का उपयोग करते हैं।

क्या है नया WhatsApp Scam?

साइबर अपराधी अनजान नंबरों से यूजर्स को PDF, फोटो, इनवॉइस, रिज्यूमे, ऑफिस डॉक्यूमेंट या अन्य जरूरी फाइल का नाम देकर .exe और .dll जैसी एक्सिक्यूटेबल फाइलें भेज रहे हैं।

पहली नजर में ये फाइलें सामान्य डॉक्यूमेंट जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन इन्हें डाउनलोड कर ओपन करते ही इनमें मौजूद खतरनाक कोड एक्टिव हो जाता है। इसके बाद हमलावर आपके सिस्टम और WhatsApp सेशन तक पहुंच बना सकते हैं।

कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड?

स्कैमर्स बेहद चालाकी से यूजर्स को फंसाते हैं।

  • अनजान नंबर से फर्जी डॉक्यूमेंट या फोटो भेजते हैं।
  • फाइल का नाम इस तरह रखा जाता है कि वह असली लगे।
  • फाइल डाउनलोड और ओपन करते ही सिस्टम में मैलवेयर एक्टिव हो सकता है।
  • इसके बाद हमलावर WhatsApp Web या Desktop Session पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं।
  • चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है।
  • कई मामलों में अपराधी आपके अकाउंट से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर पैसों की ठगी भी करते हैं।

किन फाइलों से सबसे ज्यादा खतरा?

Cyber सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन फाइल एक्सटेंशन से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

  • .exe
  • .dll
  • .zip
  • .bat

यदि किसी फाइल का नाम document.pdf.exe या photo.jpg.exe जैसा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी डाउनलोड या ओपन न करें। कई बार फाइल का असली एक्सटेंशन छिपा होता है, जिससे यूजर धोखा खा जाता है।

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

साइबर हमलों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें।

  • किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल डाउनलोड न करें।
  • फाइल का पूरा नाम और एक्सटेंशन जरूर जांचें।
  • WhatsApp के Linked Devices सेक्शन को नियमित रूप से चेक करें।
  • कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत Log Out करें।
  • अपने WhatsApp पर Two-Step Verification (2FA) हमेशा चालू रखें।
  • कंप्यूटर और एंटीवायरस को नियमित रूप से अपडेट रखें।
  • संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले नंबर को ब्लॉक करें।

अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें?

यदि आपको लगता है कि आपका WhatsApp या सिस्टम हैक हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करें।

  • सभी Linked Devices से लॉग आउट करें।
  • WhatsApp का Two-Step Verification सक्रिय करें।
  • अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें।
  • तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।
  • cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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हाईवे लोकल पास: अब मोबाइल से मिनटों में बनाएं स्थानीय टोल पास, जानें राजमार्गयात्रा ऐप का पूरा तरीका

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास रहने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में लगने या कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजमार्गयात्रा ऐप में नया स्थानीय टोल पास फीचर शुरू किया है। इसकी मदद से पात्र लोग घर बैठे अपने मोबाइल फोन से ही स्थानीय टोल पास बनवा सकेंगे। इस नई डिजिटल सुविधा में फास्टैग, डिजिलॉकर, वाहन पोर्टल और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से स्वतः सत्यापन किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान, तेज और पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। कौन बनवा सकता है स्थानीय टोल पास? यह सुविधा उन वाहन मालिकों के लिए है, जिनका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। स्थानीय टोल पास बनने के बाद वाहन चालक एक महीने तक उसी टोल प्लाजा से असीमित बार आवागमन कर सकेंगे। फिलहाल इस सुविधा की शुरुआत दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से की गई है। आने वाले समय में इसे देशभर के अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू किया जाएगा। अब नहीं होगी कागजी कार्रवाई पहले स्थानीय टोल पास बनवाने के लिए लोगों को टोल प्लाजा पर जाकर आवेदन करना पड़ता था और कई दस्तावेज जमा करने होते थे। अब नई व्यवस्था में आपकी अनुमति मिलने के बाद ऐप स्वयं आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करेगा। डिजिलॉकर के माध्यम से पते का सत्यापन होगा। वाहन पोर्टल से वाहन का विवरण प्राप्त किया जाएगा। फास्टैग की वैधता स्वतः जांची जाएगी। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) यह पुष्टि करेगी कि आपका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर की सीमा के भीतर है या नहीं। इससे पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित हो जाएगी। राजमार्गयात्रा ऐप से स्थानीय टोल पास कैसे बनाएं? यदि आप इस सुविधा के पात्र हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। चरण 1 गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से राजमार्गयात्रा ऐप डाउनलोड करें। चरण 2 मोबाइल नंबर और ओटीपी की सहायता से लॉग इन करें। चरण 3 मुख्य पृष्ठ पर स्थानीय पास विकल्प चुनें। चरण 4 अपने वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज करें। चरण 5 ऐप वाहन पोर्टल के माध्यम से आपके वाहन का विवरण और फास्टैग की स्थिति स्वतः सत्यापित करेगा। चरण 6 डिजिलॉकर के माध्यम से अपने पते का स्वतः सत्यापन पूरा करें। चरण 7 भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) यह जांच करेगी कि आपका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में है या नहीं। चरण 8 पात्रता की पुष्टि होने के बाद यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से निर्धारित मासिक शुल्क का भुगतान करें। चरण 9 भुगतान सफल होते ही आपका डिजिटल स्थानीय टोल पास जारी हो जाएगा और वह सीधे आपके फास्टैग से जुड़ जाएगा। राजमार्गयात्रा ऐप में आया 'मार्गमित्र' कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक एनएचएआई ने राजमार्गयात्रा ऐप में 'मार्गमित्र' नाम का नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सहायक भी जोड़ा है। यह सुविधा 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करती है और यात्रियों को कई सेवाओं में तत्काल सहायता प्रदान करती है। मार्गमित्र के माध्यम से आप— फास्टैग रिचार्ज फास्टैग केवाईसी धनवापसी (रिफंड) की स्थिति स्थानीय टोल पास से जुड़ी जानकारी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े सवालों के जवाब एक ही मंच पर प्राप्त कर सकते हैं। इस नई सुविधा के प्रमुख लाभ टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कागजरहित। डिजिलॉकर, वाहन पोर्टल और फास्टैग के माध्यम से स्वतः सत्यापन। घर बैठे कुछ ही मिनटों में पास जारी। एक महीने तक पात्र टोल प्लाजा पर असीमित आवागमन। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायक से तुरंत सहायता।

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Claude AI का इस्तेमाल करने वाले लाखों यूजर्स के लिए 20 जुलाई से महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। AI कंपनी Anthropic ने अपने नए Claude Fable 5 मॉडल के एक्सेस सिस्टम में बदलाव करते हुए अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्लान के अनुसार नई उपयोग सीमा (Usage Limits) और प्राथमिकता (Priority Access) तय की है। यदि आप Claude AI का उपयोग पढ़ाई, कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, रिसर्च या ऑफिस के कामों के लिए करते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि नए बदलावों का आपके अनुभव पर क्या असर पड़ेगा। Claude Fable 5 में क्या हुए नए बदलाव? Anthropic ने बताया कि बढ़ती AI मांग और सर्वर लोड को संतुलित करने के लिए एक्सेस सिस्टम को अपडेट किया गया है। अब Free, Pro और Max प्लान के यूजर्स को उनके सब्सक्रिप्शन के अनुसार अलग-अलग सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अधिक उपयोग करने वाले प्रोफेशनल यूजर्स को बेहतर प्रदर्शन मिलेगा, जबकि सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। Free प्लान यूजर्स पर क्या होगा असर? Free प्लान का उपयोग करने वाले यूजर्स पहले की तरह Claude Fable 5 का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन अधिक ट्रैफिक या सर्वर लोड के समय उन्हें कुछ सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में– रिक्वेस्ट की संख्या सीमित हो सकती है। जवाब मिलने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। सामान्य AI कार्य, जैसे नोट्स बनाना, ईमेल लिखना और बेसिक कंटेंट तैयार करना, पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। Pro और Max प्लान यूजर्स को मिलेगा प्रायोरिटी एक्सेस Anthropic ने अपने Pro और Max सब्सक्रिप्शन यूजर्स के लिए प्राथमिकता वाला एक्सेस उपलब्ध कराया है। इन प्लान्स के तहत यूजर्स को– लंबे चैट सेशन बड़े दस्तावेज़ों का विश्लेषण जटिल कोडिंग कार्य रिसर्च और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स जैसे कार्यों के दौरान बेहतर स्पीड और कम व्यवधान का अनुभव मिलेगा। कंपनी ने क्यों किया यह बदलाव? Anthropic के अनुसार, आधुनिक AI मॉडल पहले की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग करते हैं। लगातार बढ़ते उपयोग के कारण सभी यूजर्स को समान अनुभव देना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। नई एक्सेस नीति का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और पेड सब्सक्राइबर्स को उनकी आवश्यकता के अनुसार अधिक स्थिर सेवा उपलब्ध कराना है। किस यूजर के लिए कौन-सा प्लान बेहतर? यदि आप Claude AI का उपयोग केवल कभी-कभार जानकारी खोजने, पढ़ाई, ईमेल लिखने या सामान्य कार्यों के लिए करते हैं, तो Free प्लान पर्याप्त हो सकता है। वहीं यदि आप– कंटेंट क्रिएटर सॉफ्टवेयर डेवलपर रिसर्चर बिजनेस प्रोफेशनल या रोजाना AI का व्यापक उपयोग करने वाले यूजर हैं, तो Pro या Max प्लान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनमें अधिक उपयोग सीमा और प्राथमिकता वाला एक्सेस मिलता है। कितनी है कीमत? Anthropic के नए एक्सेस नियम 20 जुलाई 2026 से लागू हो चुके हैं। वर्तमान में कंपनी के सब्सक्रिप्शन प्लान इस प्रकार हैं– Pro Plan: 20 डॉलर (लगभग ₹1,700 प्रति माह) Max Plan: 100 डॉलर (लगभग ₹8,500 प्रति माह) Max Premium Plan: 200 डॉलर (लगभग ₹17,000 प्रति माह) अलग-अलग देशों में टैक्स और स्थानीय मुद्रा के अनुसार कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।  

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Google Pixel 11
Google ने Pixel 11 सीरीज़ का पहला आधिकारिक टीज़र जारी किया, नए 'Pixel Glow' डिज़ाइन की दिखाई झलक

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपनी आगामी Pixel 11 स्मार्टफोन सीरीज़ का पहला आधिकारिक टीज़र जारी कर दिया है। टीज़र में कंपनी ने नए 'Pixel Glow' डिज़ाइन की झलक दिखाई है, जिसमें पहले के मुकाबले अधिक प्रीमियम फिनिश, नए कैमरा मॉड्यूल और आकर्षक रंग विकल्प देखने को मिले हैं। टीज़र सामने आने के बाद Pixel 11 सीरीज़ को लेकर टेक जगत में उत्सुकता काफी बढ़ गई है। कंपनी पहले ही पुष्टि कर चुकी है कि Pixel 11 सीरीज़ को 12 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले 'Made by Google' इवेंट में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा।   नए डिज़ाइन पर रहेगा खास फोकस   जारी किए गए टीज़र के अनुसार Pixel 11 सीरीज़ में Google ने डिज़ाइन को पहले से अधिक आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। 'Pixel Glow' फिनिश के कारण फोन की बैक पैनल लाइट के अनुसार अलग-अलग शेड में चमकती नजर आएगी। कैमरा बार को भी नया लुक दिया गया है, जबकि प्रीमियम मेटल फ्रेम और स्लिम प्रोफाइल इसकी खासियत मानी जा रही है।   AI फीचर्स भी होंगे पहले से बेहतर   रिपोर्ट्स के मुताबिक Pixel 11 सीरीज़ में Google का नया Tensor G6 चिपसेट, उन्नत Gemini AI फीचर्स, बेहतर कैमरा प्रोसेसिंग और ऑन-डिवाइस AI क्षमताएं मिल सकती हैं। कंपनी इस सीरीज़ के जरिए AI आधारित स्मार्टफोन अनुभव को और बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।   12 अगस्त को होंगे कई बड़े ऐलान   'Made by Google' इवेंट में Pixel 11 के साथ Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL, Pixel 11 Pro Fold और Pixel Watch 5 जैसे नए डिवाइस भी पेश किए जाने की उम्मीद है। लॉन्च के तुरंत बाद कई बाजारों में प्री-ऑर्डर भी शुरू हो सकते हैं।   लॉन्च से पहले बढ़ी उत्सुकता   आधिकारिक टीज़र जारी होने के बाद Pixel 11 सीरीज़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में Google इसके कैमरा, AI फीचर्स, कीमत और उपलब्धता से जुड़ी अन्य जानकारियों का भी खुलासा कर सकता है।

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