Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है। कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे। चैट खत्म होते ही डिलीट हो जाएंगे मैसेज Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा। कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं। क्या है Private Processing टेक्नोलॉजी? Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था। इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है। इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी। Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा। सुरक्षा को लेकर Meta का दावा Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।
देश के बैंकिंग सेक्टर की साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर Anthropic के अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Mythos से उत्पन्न संभावित खतरों पर चर्चा की। क्या है Claude Mythos? Anthropic द्वारा विकसित Claude Mythos को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली AI मॉडल माना जा रहा है। दावा है कि यह हजारों ऐसी सुरक्षा खामियों का पता लगा सकता है, जिन्हें मानव विशेषज्ञ भी नहीं खोज पाए। इसकी क्षमताओं को देखते हुए कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया है। क्यों बढ़ी चिंता? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स Claude Mythos तक पहुंच बनाने में सफल रहे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बैंकिंग नेटवर्क, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम को निशाना बना सकते हैं। वित्त मंत्री ने क्या कहा? बैठक में निर्मला सीतारमण ने कहा कि Claude Mythos से उत्पन्न खतरा अभूतपूर्व है और इससे निपटने के लिए उच्च स्तर की सतर्कता, तैयारी और समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बैंकों को अपने आईटी सिस्टम मजबूत करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस पर जोर वित्त मंत्रालय ने बैंकों, Indian Computer Emergency Response Team और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस साझा करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की सलाह दी है। इससे किसी भी संभावित साइबर हमले का तेजी से पता लगाया जा सकेगा। RBI और IBA भी सक्रिय भारतीय रिजर्व बैंक और Indian Banks' Association को भी इस जोखिम का आकलन करने को कहा गया है। साथ ही, IBA को सभी बैंकों के लिए एक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर भी चिंता Claude Mythos को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में भी चिंता बढ़ी है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन और वॉल स्ट्रीट के बड़े बैंक भी इस AI मॉडल से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।
टेक्नोलॉजी दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म Gmail को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब Gmail में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) का सपोर्ट Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे यूजर्स अपने ईमेल को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकेंगे। क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है जिसमें ईमेल का डेटा भेजने वाले के डिवाइस पर ही एन्क्रिप्ट (कोडेड) हो जाता है और केवल प्राप्तकर्ता ही उसे डिक्रिप्ट (पढ़) कर सकता है। इसका मतलब यह है कि बीच में कोई भी–यहां तक कि सर्वर या कंपनी भी–उस ईमेल को नहीं पढ़ सकती। Gmail में यह फीचर कैसे काम करता है? नए अपडेट के बाद जब यूजर ईमेल लिखेंगे, तो उन्हें एक ‘लॉक’ आइकन दिखाई देगा। इस आइकन पर क्लिक करके एन्क्रिप्शन ऑन किया जा सकता है ईमेल भेजने से पहले ही डिवाइस पर एन्क्रिप्ट हो जाता है रिसीवर के पास पहुंचने के बाद ही यह डिक्रिप्ट होता है अगर सामने वाला व्यक्ति Gmail यूज करता है, तो उसे ईमेल सामान्य थ्रेड की तरह दिखाई देगा। वहीं, अन्य ईमेल यूजर्स इसे सुरक्षित वेब लिंक के जरिए एक्सेस कर सकते हैं। मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा फायदा अब तक इस तरह की सिक्योरिटी के लिए अलग टूल या प्लेटफॉर्म की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब यह सुविधा सीधे मोबाइल ऐप में ही मिल रही है। इससे यूजर्स कहीं से भी अपने संवेदनशील और जरूरी ईमेल सुरक्षित तरीके से भेज और पढ़ सकते हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर Google Workspace के एंटरप्राइज यूजर्स के लिए उपलब्ध है। एडमिन को पहले इसे Admin Console से एक्टिव करना होगा इसके बाद ही यूजर्स इस सुविधा का उपयोग कर पाएंगे धीरे-धीरे इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा क्यों है यह अपडेट खास? डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरे और डेटा लीक के मामलों को देखते हुए यह अपडेट बेहद अहम माना जा रहा है। यह फीचर खासकर बिजनेस, प्रोफेशनल और संवेदनशील जानकारी शेयर करने वाले यूजर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में करियर का सही चुनाव करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। हर साल नई-नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस फील्ड में भविष्य सुरक्षित और मजबूत होगा। अगर आप भी BTech करने की सोच रहे हैं और कन्फ्यूज हैं कि कौन-सी ब्रांच चुनें, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद काम की है। AI और Data Science: टेक इंडस्ट्री का भविष्य वर्तमान समय में Artificial Intelligence (AI) और Data Science टेक सेक्टर के सबसे तेजी से उभरते और हाई-डिमांड क्षेत्रों में शामिल हैं। हेल्थकेयर, बैंकिंग, ई-कॉमर्स से लेकर एंटरटेनमेंट तक, हर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देता है, जबकि Data Science बड़े डेटा का विश्लेषण करके कंपनियों को बेहतर रणनीति बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि कंपनियां इन स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड? ऑटोमेशन का बढ़ता ट्रेंड: कंपनियां मैन्युअल काम को कम करके ऑटोमेशन अपना रही हैं बिग डेटा का विस्तार: हर दिन भारी मात्रा में डेटा तैयार हो रहा है, जिसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत है स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: Chatbots, Self-driving Cars और Recommendation Systems जैसी तकनीकें AI पर आधारित हैं जरूरी स्किल्स क्या हैं? AI और Data Science में करियर बनाने के लिए छात्रों को कुछ प्रमुख स्किल्स सीखनी होंगी: Python जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज Machine Learning और Deep Learning Data Analysis और Visualization Statistics और Mathematics की मजबूत समझ करियर ऑप्शन और सैलरी इस फील्ड में करियर के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं: Data Scientist Machine Learning Engineer AI Engineer Business Analyst शुरुआती स्तर पर सैलरी लगभग 6 से 10 लाख रुपये सालाना हो सकती है, जो अनुभव के साथ 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। अन्य उभरती हुई BTech ब्रांच AI के अलावा भी कई टेक ब्रांच तेजी से आगे बढ़ रही हैं: Cyber Security: डेटा सुरक्षा के लिए Cloud Computing: ऑनलाइन सर्वर और स्टोरेज मैनेजमेंट Blockchain Technology: सुरक्षित डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।