नई दिल्ली: देश में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को तकनीक के जरिए और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को 'अभिज्ञान (Abhigyan) ऐप' लॉन्च किया, जो पुलिसकर्मियों को रियल टाइम में संदिग्धों की पहचान करने और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तक तुरंत पहुंचने की सुविधा देगा।
यह नया सिस्टम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा विकसित किया गया है और इसे देश के विशाल फिंगरप्रिंट डेटाबेस NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) से जोड़ा गया है।
अभिज्ञान ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुलिसकर्मी अब किसी संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट लेकर सीधे अपने स्मार्टफोन पर उसका आपराधिक इतिहास जांच सकेंगे। इसके लिए व्यक्ति को थाने ले जाने की जरूरत नहीं होगी।
यह सिस्टम करीब 1.3 करोड़ आरोपियों, दोषियों और संदिग्धों के राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा हुआ है, जिससे कुछ ही सेकंड में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
नई तकनीक के जरिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़क पर, चेकिंग के दौरान या किसी अभियान में मौके पर ही बायोमेट्रिक सत्यापन कर सकेंगी।
डेमो के दौरान यह दिखाया गया कि फिंगरप्रिंट का मिलान मात्र 35 सेकंड में हो जाता है। इससे फरार अपराधियों और वांटेड आरोपियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से की जा सकेगी।
अब तक फिंगरप्रिंट मिलान की सुविधा देशभर के पुलिस थानों और जिला मुख्यालयों में स्थापित लगभग 1,556 वर्कस्टेशनों तक सीमित थी। किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट की जांच के लिए उसे संबंधित केंद्र तक ले जाना पड़ता था।
अभिज्ञान ऐप आने के बाद यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल आधारित और रियल टाइम हो जाएगी। इसके अलावा ऐप में टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था भी दी गई है।
राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस में विभिन्न प्रकार के अपराधों से जुड़े लाखों रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और जेल रिकॉर्ड से संबंधित बड़ी संख्या में डेटा शामिल है।
अभिज्ञान ऐप लॉन्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से उन्हें सजा दिलाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेस रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से मजबूत चार्जशीट तैयार करने और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी।
यह पहल देश की पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर अब सिर्फ ठंडक ही नहीं, बल्कि बढ़ते बिजली बिल और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी कारण बनते जा रहे हैं। ऐसे में एक नई कूलिंग तकनीक तेजी से चर्चा में है, जिसे प्रोपेन कूलिंग टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके कुछ मॉडल बिना बिजली के भी काम कर सकते हैं, जबकि अन्य मॉडल पारंपरिक AC की तुलना में कम बिजली खर्च करते हैं। क्या है प्रोपेन कूलिंग टेक्नोलॉजी? प्रोपेन कूलिंग तकनीक मुख्य रूप से दो प्रकार के एयर कंडीशनर में इस्तेमाल होती है। 1. एब्जॉर्प्शन AC (Absorption AC) ये ऐसे एयर कंडीशनर होते हैं जो बिजली के बजाय प्रोपेन गैस या अन्य हीट सोर्स की मदद से चलते हैं। इनमें पारंपरिक AC की तरह इलेक्ट्रिक कंप्रेसर नहीं होता, बल्कि एक थर्मल सिस्टम काम करता है। इस प्रक्रिया में अमोनिया और पानी के मिश्रण को प्रोपेन की गर्मी से गर्म किया जाता है, जिससे रेफ्रिजरेंट गैस बनती है और कूलिंग पैदा होती है। इन AC का उपयोग लंबे समय से ऑफ-ग्रिड घरों, होटल, बड़े औद्योगिक प्लांट और RV (Recreational Vehicle) में किया जाता रहा है। 2. R290 प्रोपेन गैस वाले एडवांस AC यह तकनीक सामान्य एयर कंडीशनर जैसी ही होती है, लेकिन इनमें पारंपरिक रेफ्रिजरेंट गैस R22 या R410A की जगह R290 (शुद्ध प्रोपेन) का इस्तेमाल किया जाता है। R290 एक प्राकृतिक रेफ्रिजरेंट है, जो: कम बिजली खर्च करता है। तेजी से कूलिंग प्रदान करता है। पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाता है। कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, R290 आधारित AC पारंपरिक मॉडल की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बिजली की बचत कर सकते हैं। क्या प्रोपेन AC में आग लगने का खतरा होता है? प्रोपेन एक ज्वलनशील गैस है, लेकिन आधुनिक AC को विशेष सुरक्षा मानकों के साथ डिजाइन किया जाता है। इनमें गैस की मात्रा सीमित रखी जाती है और यूनिट को पूरी तरह सील और लीक-प्रूफ बनाया जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना बेहद कम हो जाती है। पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प दुनियाभर में हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) गैसों को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी वजह से R290 जैसी प्राकृतिक गैसों पर आधारित तकनीकों को बढ़ावा मिल रहा है। भारत में भी कई कंपनियां, खासकर गोदरेज, R290 रेफ्रिजरेंट वाले एयर कंडीशनर को बढ़ावा दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारतीय बाजार में और तेजी से लोकप्रिय हो सकती है। क्या सच में बिना बिजली के घर बन जाएगा "कश्मीर"? हालांकि एब्जॉर्प्शन AC बिना बिजली के काम कर सकते हैं, लेकिन यह तकनीक फिलहाल घरेलू उपयोग में बहुत आम नहीं है। वहीं R290 आधारित AC बिजली का उपयोग करते हैं, लेकिन कम ऊर्जा खर्च के साथ बेहतर कूलिंग देने का दावा करते हैं। इसलिए यह कहना कि हर प्रोपेन AC पूरी तरह बिना बिजली के चलता है, सही नहीं होगा। तकनीक के प्रकार के अनुसार इसकी कार्यप्रणाली अलग होती है।
भारतीय स्मार्ट टीवी बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए-नए फीचर्स वाले प्रीमियम मॉडल पेश कर रही हैं। इसी कड़ी में Hisense ने भारत में अपनी नई E8S ULED Mini-LED TV सीरीज लॉन्च कर दी है। यह नई सीरीज हाई रिफ्रेश रेट, AI आधारित पिक्चर प्रोसेसिंग और प्रीमियम ऑडियो अनुभव के साथ आती है, जिससे यह गेमिंग और एंटरटेनमेंट दोनों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है। कंपनी ने इस सीरीज को Mini-LED तकनीक के साथ पेश किया है, जो बेहतर ब्राइटनेस, गहरे ब्लैक लेवल और शानदार कॉन्ट्रास्ट प्रदान करती है। Hisense E8S सीरीज फिलहाल केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। ULED Mini-LED पैनल और फुल-अरे लोकल डिमिंग Hisense E8S सीरीज में ULED Mini-LED डिस्प्ले दिया गया है। इसके साथ Full-Array Local Dimming तकनीक मिलती है, जो स्क्रीन के अलग-अलग हिस्सों की बैकलाइट को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित करती है। इसका फायदा यह होता है कि डार्क सीन में ब्लैक कलर ज्यादा गहरा और ब्राइट हिस्से अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं। Pantone कलर एक्यूरेसी और 144Hz रिफ्रेश रेट टीवी में Pantone-Validated Color Accuracy और Hi-QLED तकनीक दी गई है, जिससे रंग अधिक प्राकृतिक और वास्तविक नजर आते हैं। गेमर्स और स्पोर्ट्स कंटेंट पसंद करने वाले यूजर्स के लिए इसमें 144Hz का नैटिव रिफ्रेश रेट दिया गया है, जो स्मूथ विजुअल अनुभव प्रदान करता है। AI इंजन करेगा पिक्चर क्वालिटी को बेहतर Hisense ने इस सीरीज में अपना Hi-View AI Engine शामिल किया है, जो कंटेंट के अनुसार रियल टाइम में कॉन्ट्रास्ट, कलर और शार्पनेस को ऑटोमैटिक रूप से एडजस्ट करता है। वहीं, 85 इंच वाले प्रीमियम मॉडल में Hi-View AI Engine Pro दिया गया है, जो और अधिक एडवांस प्रोसेसिंग क्षमता के साथ आता है। दमदार ऑडियो और स्मार्ट फीचर्स बेहतर साउंड अनुभव के लिए टीवी में Devialet द्वारा ट्यून किया गया बिल्ट-इन सबवूफर मौजूद है। स्मार्ट फीचर्स के लिए इसमें VIDAA Smart OS दिया गया है। यह टीवी HDR10+ Adaptive, Dolby Vision IQ और Filmmaker Mode जैसे लोकप्रिय HDR फॉर्मेट्स को सपोर्ट करता है। इसके अलावा AI RGB Light Sensor कमरे की रोशनी के अनुसार पिक्चर सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट करता है। हैंड्स-फ्री वॉइस कंट्रोल की सुविधा भी इसमें उपलब्ध है। Hisense E8S ULED Mini-LED TV की कीमत स्क्रीन साइज कीमत 55 इंच ₹57,990 65 इंच ₹76,990 75 इंच ₹99,990 85 इंच ₹1,59,990 उपलब्धता और लॉन्च ऑफर्स Hisense E8S सीरीज को Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खरीदा जा सकेगा। कंपनी ग्राहकों के लिए No-Cost EMI विकल्प के साथ शुरुआती खरीद पर विशेष डिस्काउंट ऑफर भी दे रही है।
भारत में 5G तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और व्यापक होने वाला है। दूरसंचार उपकरण निर्माता एरिक्सन की ताजा मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2031 तक देश में 5G उपयोगकर्ताओं की संख्या 110 करोड़ से अधिक पहुंच सकती है। इसका मतलब होगा कि भारत के कुल मोबाइल कनेक्शनों में लगभग 81 प्रतिशत हिस्सेदारी 5G की होगी। सस्ते 5G स्मार्टफोन्स, तेजी से बढ़ता नेटवर्क कवरेज और हाई-स्पीड इंटरनेट की बढ़ती मांग इस बदलाव को गति दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 5G केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 2025 के अंत तक 43 करोड़ पहुंच सकते हैं 5G ग्राहक एरिक्सन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के आखिर तक भारत में 5G ग्राहकों की संख्या करीब 43 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो कुल मोबाइल कनेक्शनों का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा होगी। अगले छह वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 110 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग सभी जिलों तक 5G नेटवर्क का विस्तार हो चुका है। बेहतर नेटवर्क अनुभव और किफायती स्मार्टफोन लोगों को तेजी से नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मोबाइल डेटा खपत में दुनिया के अग्रणी देशों में भारत भारत पहले से ही प्रति स्मार्टफोन डेटा उपयोग के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। वर्तमान में एक भारतीय उपयोगकर्ता औसतन हर महीने लगभग 37 जीबी डेटा खर्च करता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप्लिकेशन और हाई-रिजॉल्यूशन कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता इसके पीछे प्रमुख कारण मानी जा रही है। 4G की हिस्सेदारी धीरे-धीरे होगी कम हालांकि 5G तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन फिलहाल 4G भारत की सबसे बड़ी मोबाइल तकनीक बनी हुई है। वर्तमान में कुल मोबाइल कनेक्शनों में 4G की हिस्सेदारी लगभग 46 प्रतिशत है। अनुमान है कि 2025 में 4G ग्राहकों की संख्या करीब 57 करोड़ होगी, लेकिन 2031 तक यह घटकर लगभग 16 करोड़ रह सकती है क्योंकि अधिकतर उपयोगकर्ता 5G नेटवर्क की ओर शिफ्ट होंगे। 5G नेटवर्क में जुड़ रहे हैं नए फीचर्स रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की एक प्रमुख टेलीकॉम कंपनी ने अपने पोस्टपेड 5G ग्राहकों के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग आधारित सेवाएं शुरू की हैं। यह तकनीक अलग-अलग जरूरतों के अनुसार नेटवर्क को अनुकूलित करने में सक्षम बनाती है। भविष्य में यही तकनीक इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस जैसी तकनीकें देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। डिजिटल इंडिया को मिलेगा बड़ा फायदा एरिक्सन इंडिया के अनुसार, भारत में 5G अपनाने की रफ्तार दुनिया के कई बड़े बाजारों से तेज है। मजबूत और सुरक्षित 5G इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल समावेशन, ई-गवर्नेंस और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। आने वाले वर्षों में यही तकनीक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगी।