फैशन और ब्यूटी

Janhvi Kapoor's Elegant Saree Look

Janhvi Kapoor का ट्रेडिशनल लुक चर्चा में, असली सोने-चांदी की जरी वाली कोटा सिल्क साड़ी में दिखीं बेहद खूबसूरत

surbhi जून 19, 2026 0
Janhvi Kapoor wears a Kota silk saree with real gold and silver zari during temple visit.
Janhvi Kapoor in Kota Silk Saree

बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर एक बार फिर अपने एथनिक फैशन और आध्यात्मिक जुड़ाव को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचीं, जहां उनका पारंपरिक लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस दौरान जान्हवी ने राजस्थान के कोटा स्थित लेबल Sonchiriya की बेहद खास सिल्क साड़ी पहनी, जिसकी जरी में असली सोने और चांदी का इस्तेमाल किया गया है।

मंदिर दर्शन के दौरान दिखा पारंपरिक अंदाज

जान्हवी कपूर अक्सर भारतीय परिधानों में नजर आती हैं और समय-समय पर देश के विभिन्न मंदिरों में दर्शन करती दिखाई देती हैं। इस बार उन्होंने बोतल ग्रीन और डीप पर्पल रंग की मुलबेरी सिल्क साड़ी चुनी, जो ब्रांड के नवीनतम कलेक्शन 'तारिणी' का हिस्सा है।

इस साड़ी पर सुंदरबन के फूलों और पत्तियों से प्रेरित डिजाइन बनाए गए हैं। खास बात यह है कि इसकी जरी में असली सोने और चांदी का उपयोग किया गया है, जिससे यह और भी खास बन जाती है।

90 के दशक की झलक वाला ब्लाउज

जान्हवी ने साड़ी को पारंपरिक नवी (Nivi) स्टाइल में ड्रेप किया था। इसके साथ उन्होंने मैचिंग ब्लाउज पहना, जिसकी कैप स्लीव्स 90 के दशक के फैशन की याद दिलाती हैं। भारतीय फैशन में इस तरह की स्लीव्स का ट्रेंड एक बार फिर वापसी करता दिखाई दे रहा है।

पोल्की ज्वेलरी ने बढ़ाई खूबसूरती

स्टाइलिस्ट मीगन कंसेसियो और शुभ्रा शर्मा ने जान्हवी के इस लुक को मल्टीकलर जेमस्टोन वाली पोल्की नेकलेस, इयररिंग्स और चूड़ियों के साथ पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने एक स्टेटमेंट कमरबंद और रिंग भी कैरी की, जिसने पूरे लुक को रॉयल टच दिया।

मिनिमल मेकअप और साउथ इंडियन हेयरस्टाइल

मेकअप आर्टिस्ट रिवेरा लिन ने जान्हवी के लिए हल्का ब्लश, पिंक टोन लिप्स और डिफाइंड लैशेज वाला नैचुरल मेकअप चुना। वहीं उनके हाफ-अप, हाफ-डाउन हेयरस्टाइल ने साउथ इंडियन ट्रेडिशनल लुक को और भी आकर्षक बना दिया।

जान्हवी कपूर का यह एथनिक अवतार एक बार फिर साबित करता है कि पारंपरिक भारतीय पहनावा आधुनिक फैशन के साथ भी शानदार तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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स्किनकेयर में इन 6 खतरनाक इंग्रीडिएंट्स से रहें दूर, वरना त्वचा को हो सकता है गंभीर नुकसान

नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल ग्लोइंग और बेदाग त्वचा पाने की चाह में लोग कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इनमें मौजूद कुछ रसायन लंबे समय में त्वचा के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स तुरंत नतीजे तो देते हैं, लेकिन बाद में स्किन थिनिंग, एलर्जी, पिगमेंटेशन और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।   स्टेरॉयड युक्त क्रीम से बढ़ता खतरा स्टेरॉयड युक्त क्रीम त्वचा को अस्थायी रूप से चमकदार बना सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग से त्वचा पतली हो सकती है। इसके अलावा मुंहासे, अनचाहे बाल और स्किन डैमेज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञ बिना डॉक्टर की सलाह के इनके इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं।   मरकरी और हाइड्रोक्विनोन से गंभीर नुकसान मरकरी एक जहरीला तत्व है, जो स्किन ब्राइटनिंग प्रोडक्ट्स में पाया जा सकता है। यह त्वचा का रंग असमान करने के साथ-साथ किडनी और नर्वस सिस्टम पर भी असर डाल सकता है। वहीं हाइड्रोक्विनोन के अनियंत्रित उपयोग से स्थायी काले धब्बे और पिगमेंटेशन बढ़ने का खतरा रहता है।   पैराबेन्स और सल्फेट्स पर भी सावधानी जरूरी पैराबेन्स कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में प्रिजर्वेटिव के रूप में इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इनके संभावित हार्मोनल प्रभावों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। वहीं सल्फेट्स त्वचा की प्राकृतिक नमी को खत्म कर सकते हैं, जिससे रूखापन, जलन और संवेदनशीलता बढ़ सकती है।   फ्रेगरेंस और परफ्यूम से एलर्जी का खतरा स्किनकेयर प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाली खुशबू या परफ्यूम कई रसायनों का मिश्रण हो सकता है, जो संवेदनशील त्वचा में एलर्जी, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्किनकेयर प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी सामग्री सूची (इंग्रीडिएंट्स) जरूर जांचनी चाहिए और सुरक्षित विकल्पों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

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मोनाको में अनन्या पांडे का ग्लैमरस अंदाज, गौरव गुप्ता की कॉपर साड़ी-गाउन में बिखेरा जलवा

बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे का ग्लोबल फैशन जगत में प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड्स की ग्लोबल एंबेसडर बनने के बाद अब वह दुनिया के प्रतिष्ठित फैशन और ज्वेलरी आयोजनों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। हाल ही में अनन्या मोनाको के प्रतिष्ठित विला साइप्रिस में आयोजित स्विस लक्जरी वॉचमेकर Piaget के 150वें वर्ष के विशेष हाई ज्वेलरी शोकेस 'Colours of Extraleganza' में शामिल हुईं। इस खास मौके पर अनन्या पांडे ने भारतीय डिजाइनर गौरव गुप्ता की कस्टम-निर्मित कॉपर रंग की साड़ी-गाउन पहनकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पेरिस कॉउचर कलेक्शन से था खास आउटफिट अनन्या का यह शानदार आउटफिट 'Soft Armour' नाम से गौरव गुप्ता के Paris Couture 2026 कलेक्शन 'The Divine Androgyne' का हिस्सा है। यह कलेक्शन पारंपरिक स्त्री और पुरुष डिजाइन तत्वों के मेल को दर्शाता है और सामाजिक सीमाओं से परे फैशन की नई परिभाषा पेश करता है। वन-शोल्डर डिजाइन वाली इस साड़ी-गाउन में स्ट्रक्चर्ड कॉर्सेट बॉडी और फ्लोइंग ड्रेपिंग का खूबसूरत संयोजन देखने को मिला। हाई-शाइन सैटिन फैब्रिक से तैयार इस ड्रेस में थाई-हाई स्लिट और पीछे की ओर लंबा प्लीटेड ट्रेल इसे और भी आकर्षक बना रहा था। क्रिस्टल टैसल्स ने बढ़ाई खूबसूरती इस लुक की सबसे खास बात थी नेकलाइन और शोल्डर पर लगे कैस्केडिंग क्रिस्टल टैसल्स, जो ज्वेलरी जैसे फिनिश के साथ पूरे आउटफिट को रॉयल टच दे रहे थे। Piaget की हाई ज्वेलरी वॉच और Louboutin हील्स से पूरा किया लुक अनन्या की स्टाइलिस्ट प्रियंका कपाड़िया ने इस आउटफिट के साथ Piaget की स्टेटमेंट कफ-स्टाइल हाई ज्वेलरी वॉच को पेयर किया। वहीं फुटवियर के लिए उन्होंने Christian Louboutin की Follies Strass पंप्स चुनीं, जो ड्रेस की चमकदार डिटेलिंग के साथ बेहतरीन तालमेल बिठा रही थीं। अनन्या ने अपने बालों को स्लीक बन में स्टाइल किया और मेकअप को मिनिमल रखा। ब्राउन स्मोकी आईज और न्यूड लिप्स ने उनके पूरे लुक को एलिगेंट और क्लासी फिनिश दिया। अनन्या पांडे का यह मोनाको लुक एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय फैशन का मेल वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।  

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Woman applying sunscreen indoors near a window to protect skin from harmful UVA rays
घर के अंदर भी जरूरी है सनस्क्रीन! एक्सपर्ट्स ने बताया खिड़की के पीछे भी कैसे पहुंचती हैं UV किरणें

क्या आप भी घर में सनस्क्रीन लगाना छोड़ देते हैं? अधिकांश लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन केवल बाहर धूप में निकलने, बीच पर जाने या आउटडोर गतिविधियों के दौरान ही जरूरी होती है। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। अगर आप घर के अंदर हैं, ऑफिस में काम कर रहे हैं या खिड़की के पास लंबे समय तक बैठते हैं, तब भी आपकी त्वचा हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन केवल गर्मियों या धूप वाले दिनों के लिए नहीं, बल्कि हर मौसम और हर दिन की स्किनकेयर रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए। खिड़की के शीशे भी नहीं रोक पाते सभी UV किरणें त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य कांच की खिड़कियां अधिकांश UVB किरणों को रोक देती हैं, जो सनबर्न का कारण बनती हैं। लेकिन UVA किरणें आसानी से कांच के आर-पार होकर त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यही UVA किरणें समय से पहले झुर्रियां, पिग्मेंटेशन, डार्क स्पॉट्स और त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। घर के अंदर भी क्यों बढ़ सकता है स्किन डैमेज? यदि आपका कार्यस्थल खिड़की के पास है, आप लंबे समय तक प्राकृतिक रोशनी वाले कमरे में बैठते हैं या अक्सर कार चलाते हैं, तो आपकी त्वचा पूरे दिन धीरे-धीरे UVA एक्सपोजर प्राप्त कर सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट लंबे समय में पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग की समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसे में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है। किन लोगों के लिए घर के अंदर सनस्क्रीन ज्यादा जरूरी? कुछ लोगों को घर के अंदर भी नियमित रूप से सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे: जो लोग खिड़की के पास लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। जिनकी त्वचा पर पिग्मेंटेशन, मेलाज्मा या एक्ने के निशान हैं। जो रेटिनॉल, AHA या BHA जैसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। जो समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करना चाहते हैं। घर के अंदर UV एक्सपोजर कम करने के आसान उपाय 1. सीधे धूप वाले स्थान से दूरी बनाएं जहां तक संभव हो, खिड़कियों से कुछ दूरी पर बैठें। इससे UV किरणों का प्रभाव काफी कम हो सकता है। 2. UV-ब्लॉकिंग विंडो फिल्म लगाएं विशेष प्रकार की पारदर्शी विंडो फिल्म 99 प्रतिशत तक UVA और UVB किरणों को रोकने में मदद कर सकती है। 3. पीक सनलाइट के समय पर्दे बंद रखें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। इस दौरान पर्दे या ब्लाइंड्स का उपयोग लाभदायक हो सकता है। 4. सही प्रकार के ग्लास का उपयोग करें लो-ई (Low-E) या लैमिनेटेड ग्लास सामान्य कांच की तुलना में अधिक UV सुरक्षा प्रदान करते हैं। 5. सुरक्षात्मक कपड़े पहनें यदि आपको लंबे समय तक खिड़की के पास बैठना पड़ता है, तो फुल स्लीव कपड़े या UV प्रोटेक्शन वाले फैब्रिक उपयोगी हो सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का मानना है कि SPF 30 या उससे अधिक और PA+++ या PA++++ रेटिंग वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का नियमित उपयोग त्वचा को UVA और UVB दोनों प्रकार की किरणों से बचाने में मदद करता है। घर के अंदर हों या बाहर, त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन को अपनी रोजाना की आदत बनाना लंबे समय में आपकी त्वचा को स्वस्थ, युवा और सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  

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