झारखंड

जसीडीह बाईपास लाइन काम के कारण 22 और 23 जून को कई ट्रेनें रद्द

abhishek singh जून 20, 2026 0
Jasidih Bypass Line
Jasidih Bypass Line

जामताड़ा। आसनसोल मंडल के अंतर्गत देवघर लिंक केबिन और कुमड़ाबाद रोहिणी सेक्शन के बीच जसीडीह बाईपास लाइन निर्माण से जुड़े प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 22 एवं 23 जून को कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। रेलवे प्रशासन ने इस दौरान ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक की घोषणा की है, जिससे विभिन्न पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया जाएगा।


रेलवे के अनुसार 22 जून को प्री-एनआई कार्य तथा 23 जून को एनआई कार्य के दौरान जसीडीह-देवघर, जसीडीह-दुमका और मुख्य रेलखंड पर ट्रैफिक ब्लॉक रहेगा। इसके चलते कई ट्रेनों को रद्द, कुछ को आंशिक रूप से समाप्त या प्रारंभ तथा कुछ ट्रेनों को निर्धारित समय से विलंबित कर चलाया जाएगा।

 

रद्द रहेंगी ये ट्रेनें


22 और 23 जून को अंडाल-जसीडीह, जसीडीह-अंडाल, जसीडीह-बांका एवं बांका-जसीडीह पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहेंगी। इसके अलावा 22 जून को जसीडीह-झाझा, झाझा-जसीडीह, आसनसोल-जसीडीह, जसीडीह-किऊल और किऊल-जसीडीह ट्रेनें भी नहीं चलेंगी। 23 जून को देवघर-झाझा ट्रेन भी रद्द रहेगी।

 

आंशिक रूप से चलेंगी कई ट्रेनें


बर्द्धमान-झाझा ट्रेन 22 जून को केवल आसनसोल तक चलेगी, जबकि झाझा-बर्द्धमान ट्रेन 23 जून को आसनसोल से खुलेगी। इसी प्रकार दुमका-जसीडीह, जसीडीह-दुमका, रामपुरहाट-जसीडीह, जसीडीह-रामपुरहाट तथा पटना-देवघर ट्रेनों का परिचालन भी आंशिक रूप से किया जाएगा। कुछ ट्रेनों को रास्ते में रोका जाएगा


जसीडीह-आसनसोल पैसेंजर को जसीडीह में 20 मिनट तक रोका जाएगा। वहीं धनबाद-पटना एक्सप्रेस, आनंद विहार टर्मिनल-डानकुनी स्पेशल और हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस को भी 20 से 30 मिनट तक नियंत्रित किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले रेलवे पूछताछ माध्यमों से ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है। यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए रेलवे ने खेद व्यक्त किया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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CBSE 12th Result: री-इवैल्यूएशन में रांची की अवनी ने रच दिया इतिहास, हर कोई दंग

रांची। CBSE BOARD 12वीं के री-इवैल्यूएशन रिजल्ट जारी होते ही रांची की अवनी ने कामयाबी का ऐसा परचम लहराया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेल टाउनशिप धुर्वा की कॉमर्स स्ट्रीम की छात्रा अवनी केजरीवाल ने अपनी मार्कशीट से 'परफेक्शन' की एक नई इबारत लिख दी है। अवनी ने परीक्षा में ऐसे ऐतिहासिक अंक हासिल किए हैं, जिसे देख हर कोई दंग है। 13 मई को जब मुख्य रिजल्ट आया, तो अवनी को अपनी उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले थे। लेकिन, अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा होने के कारण उन्होंने मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई किया।  500 में हासिल किया शत-प्रतिशत अंक रांची की रहने वाली अवनी केजरीवाल DPS, सेल टाउनशिप धुर्वा की होनहार छात्रा हैं। अवनी एक साधारण और संस्कारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता मितेश केजरीवाल खाने के तेल एडिबल ऑयल का बिजनेस करते हैं, जबकि उनकी मां पूनम केजरीवाल एक कुशल हाउसवाइफ हैं। अवनी ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता से न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर फक्र से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है।  बिजनेस मैनेजमेंट में बनाना है करियर अवनी की रुचि अपने पिता की तरह ही कॉर्पोरेट और बिजनेस वर्ल्ड में है। वह भविष्य में बिजनेस मैनेजमेंट सेक्टर में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। 12वीं के बाद उनका अगला लक्ष्य BBA करना है। इसके लिए उन्होंने CUET UG 2026 की परीक्षा भी दी है और वे देश के टॉप मैनेजमेंट कॉलेज में एडमिशन लेने की तैयारी कर रही हैं।    इन्हें दिया सफलता का श्रेय अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय अवनी ने सबसे पहले अपने माता-पिता को दिया है, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोचिंग शिक्षक सचित सर का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। अवनी का कहना है कि पढ़ाई के दौरान जब भी उन्हें कोई उलझन होती थी, सचित सर ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उनके कॉन्सेप्ट्स को क्लियर करने में मदद की।  हर विषय में परफेक्ट अवनी की मार्कशीट को देखकर साफ पता चलता है कि उन्होंने हर एक विषय की बारीकी से पढ़ाई की थी। री-इवैल्यूएशन के बाद उनका स्कोर कार्ड किसी सपने जैसा नजर आता है। अंग्रेजी कोर: 100/100 (80 थ्योरी + 20 प्रैक्टिकल), अकाउंटेंसी: 100/100 (80 थ्योरी + 20 प्रैक्टिकल), बिजनेस स्टडीज: 100/100, इकोनॉमिक्स: 100/100, एप्लाइड मैथेमेटिक्स: 100/100, ग्राफिक्स: 99/100 (29 थ्योरी + 70 प्रैक्टिकल)

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फादर्स डे पर सीएम हेमंत दो बार हुए भावुक, पहले पिता को याद कर फिर बच्चों की गिफ्ट देख कर

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस फादर्स डे के मौके पर दो-दो बार भावुक हो गये। पहले तो पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद कर वह भावुक हुए और उनकी याद में एक पोस्ट शेयर किया, जिसने झारखंड वासियों का दिल छू लिया। इसके बाद उनके अपने बच्चों ने उन्हें जो सरप्राइज गिफ्ट किया, जिसे देख कर वह खुद को भावुक होने से रोक नहीं सके।  सोशल मीडिया पर शेयर की बच्चों की सरप्राइज गिफ्ट सीएम हेमंत ने सोशल मीडिया पर एक प्यारी तस्वीर साझा की। सीएम होने के नाते जहां हेमंत सोरेन के कंधों पर राज्य की जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ है, वहीं एक पिता के रूप में भी वे अपने परिवार और बच्चों के लिए समय निकालते हैं। खास पेंटिंग और संदेश तैयार कर उपहार में दिया फादर्स डे पर हेमंत सोरेन के दोनों बच्चों ने अपने हाथों से एक खास पेंटिंग और संदेश तैयार कर उन्हें उपहार में दिया। इस कलाकृति में गूगल सर्च का एक रचनात्मक चित्र बनाया गया है, जिसमें सवाल पूछा गया है, Who is the Best Father? और उसका जवाब दिखाया गया है, The Best Father is Hemant Soren . हेमंत सोरेन की पेंटिंग भी बनाई गई खास बात यह है कि इस पेंटिंग में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का चित्र भी बनाया गया है, जिसने इसे और अधिक आकर्षक और भावनात्मक बना दिया है। हेमंत सोरेन ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी याद किया इससे पहले हेमंत सोरेन ने फादर्स डे के मौकै पर अपने पिता शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा था- तपती धूप में बरगद-सी छाया हैं बाबा, संघर्ष की राह में अटूट हौसला हैं बाबा। हमारी सोच, हमारे संस्कार, हमारी पहचान हैं बाबा, एक पिता ही नहीं, पूरे समाज का स्वाभिमान हैं बाबा। कल्पना सोरेन ने भी फादर्स डे पर पिता को याद किया उधर, सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन अपने पिता और शिबू सोरेन की तस्वीर साझा करते हुए कहा- एक पिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, वे वह विश्वास होते हैं जो हर कठिन राह को आसान बना देता है। जीवन की हर चुनौती में उनका अनुभव और मार्गदर्शन हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। फादर्स डे के अवसर पर सभी पिताओं को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार। आपका योगदान अनमोल है।

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जामताड़ा में 103 दिन बाद फिर पटरी पर लौटी मनरेगा व्यवस्था, रोजगार सेवकों ने संभाला कामकाज

जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले में 103 दिनों से चली आ रही मनरेगा रोजगार सेवकों की हड़ताल सोमवार को समाप्त हो गई। लंबे समय से ठप पड़े कामकाज के बाद सभी रोजगार सेवकों ने नारायणपुर प्रखंड कार्यालय पहुंचकर दोबारा कार्यभार संभाल लिया। उनकी वापसी से मनरेगा से जुड़ी लंबित योजनाओं के फिर से गति पकड़ने की उम्मीद बढ़ गई है।   हड़ताल से प्रभावित हुई थीं विकास योजनाएं लंबे समय तक चली हड़ताल के कारण प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा की कई महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित रहीं। मजदूरों को समय पर काम नहीं मिल पा रहा था, वहीं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य भी धीमे पड़ गए थे। इसके चलते लाभुकों और मजदूरों को आर्थिक व रोजगार संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा।   प्रशासन की लगातार अपील के बाद वापसी हड़ताल के दौरान प्रशासन की ओर से रोजगार सेवकों को कई बार पत्र भेजकर काम पर लौटने की अपील की गई थी। संवाद और वार्ता की प्रक्रिया के बाद अंततः सोमवार को रोजगार सेवकों ने सामूहिक रूप से प्रखंड कार्यालय पहुंचकर अपनी वापसी की घोषणा की और आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया।   राधेश्याम पंडित के नेतृत्व में लौटे काम पर मनरेगा कर्मी संघ के नेता राधेश्याम पंडित के नेतृत्व में रोजगार सेवकों ने काम पर वापसी की। इस दौरान अनिल चौधरी, अब्दुल्लाह, मेघलाल रजक, सरीफ आलम, सुमंतो दास सहित कई कर्मी मौजूद रहे। सभी ने प्रखंड कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपने दायित्वों का पुनः निर्वहन शुरू किया।   योजनाओं में आएगी तेजी रोजगार सेवकों की वापसी से अब मनरेगा की रुकी हुई योजनाओं के दोबारा शुरू होने और ग्रामीण विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन को भी भरोसा है कि आने वाले दिनों में योजनाएं सामान्य गति से आगे बढ़ेंगी और मजदूरों को समय पर रोजगार मिल सकेगा।

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