फोक हॉरर जॉनर की चर्चित फिल्म Keeper अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। इस फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर Osgood Perkins ने किया है, जो अपने डार्क और मनोवैज्ञानिक हॉरर स्टाइल के लिए जाने जाते हैं।
यह फिल्म अब Amazon Prime Video पर उपलब्ध है। दर्शक इसे हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में देख सकते हैं। फिल्म देखने के लिए एक्टिव सब्सक्रिप्शन जरूरी है।
‘Keeper’ की कहानी एक कपल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी एनिवर्सरी मनाने के लिए एक सुनसान और रहस्यमयी केबिन में जाते हैं।
लिज (Tatiana Maslany) और डॉ. मैल्कम वेस्टब्रिज (Rossif Sutherland) का यह ट्रिप धीरे-धीरे एक डरावने अनुभव में बदल जाता है।
केबिन में अजीब घटनाएं, रहस्यमयी माहौल, और अनजानी ताकतों का सामना करते हुए यह कपल उस जगह के अंधेरे अतीत की परतें खोलने लगता है। कहानी में एक अजीब चॉकलेट केक और रिश्तेदार की एंट्री के बाद घटनाएं और भी जटिल हो जाती हैं।
फिल्म सिर्फ हॉरर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गहरे विषयों को भी छूती है:
इसकी डरावनी घटनाएं दर्शकों को लगातार सस्पेंस में रखती हैं।
फिल्म की कहानी Nick Lepard ने लिखी है।
मुख्य कलाकार:
अन्य कलाकारों में Birkett Turton, Eden Weiss, Erin Boyes और Tess Degenstein शामिल हैं।
अगर आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और मनोवैज्ञानिक थ्रिल के साथ गहरी कहानी पसंद करते हैं, तो ‘Keeper’ आपके लिए एक परफेक्ट वॉच हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई। टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी और अभिनेता विवेक दहिया ने शादी के 10 साल बाद माता-पिता बनने की खुशी अपने प्रशंसकों के साथ साझा की है। मई में जुड़वां बेटों के जन्म के बाद अब दिव्यांका ने सोशल मीडिया पर अपने दोनों बच्चों की पहली झलक दिखाई है। इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीर में उन्होंने भावुक संदेश लिखते हुए कहा, "मुझे चुनने के लिए शुक्रिया।" हालांकि, कपल ने अभी अपने बेटों का चेहरा सार्वजनिक नहीं किया है। तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस और टीवी सितारों ने उन्हें बधाइयों और शुभकामनाओं से भर दिया। 'भगवान से मांगी थी एक खुशी, मिली डबल' इससे पहले दिव्यांका और विवेक ने एक संयुक्त पोस्ट के जरिए जुड़वां बेटों के जन्म की खुशखबरी साझा की थी। पोस्ट में लिखा था, "हमने भगवान से एक खुशी मांगी थी, लेकिन उन्होंने हमें डबल दे दी।" विवेक दहिया ने अपने अंदाज में लिखा, "मेरे करण-अर्जुन आ गए।" उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद उनकी जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो गई है। दोनों ने अपने नए पेरेंटहुड सफर के लिए प्रशंसकों से प्यार और आशीर्वाद भी मांगा। मार्च में किया था प्रेग्नेंसी का ऐलान मार्च 2026 में दिव्यांका ने बेबी बंप के साथ तस्वीरें साझा कर अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि शादी के दस साल बाद उनकी जिंदगी में सबसे खूबसूरत मोड़ आया है। दिव्यांका ने अपने पोस्ट में कहा था कि कुछ सफर जल्दी पूरे करने के लिए नहीं होते, बल्कि सही समय आने पर जिंदगी सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ती है। इस पोस्ट को भी सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने पसंद किया था। सेट पर शुरू हुई थी लव स्टोरी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया की मुलाकात टीवी के सुपरहिट शो 'ये हैं मोहब्बतें' के सेट पर हुई थी। साथ काम करते-करते दोनों एक-दूसरे के करीब आए। जनवरी 2016 में दोनों ने सगाई की और जुलाई 2016 में भोपाल में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी कर ली। शादी के एक दशक बाद अब दोनों पहली बार माता-पिता बने हैं। टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं दिव्यांका दिव्यांका त्रिपाठी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2004 में रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज' से की थी। उन्हें 'बनूं मैं तेरी दुल्हन' से घर-घर पहचान मिली, जबकि 'ये हैं मोहब्बतें' ने उन्हें टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। इसके अलावा उन्होंने 'खतरों के खिलाड़ी 11', 'नच बलिए', 'कॉमेडी सर्कस' और हाल ही में वेब सीरीज 'अदृश्यम' में भी अपनी दमदार अभिनय क्षमता का परिचय दिया। अब अपने जुड़वां बेटों के आगमन के साथ दिव्यांका और विवेक अपने जीवन के नए और खूबसूरत अध्याय की शुरुआत कर चुके हैं।
मुंबई, एजेंसियां। कॉमेडी और एक्शन से भरपूर 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'Welcome To The Jungle' का ट्रेलर 11 जून को रिलीज कर दिया गया। करीब 4 मिनट 10 सेकंड लंबे इस ट्रेलर ने रिलीज होते ही दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। ट्रेलर में कॉमेडी, एक्शन, रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस का भरपूर मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसे एक फैमिली एंटरटेनर बनाता है। मुंबई के YRF स्टूडियो में होगा ट्रेलर लॉन्च फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के लिए मुंबई के YRF स्टूडियो में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां फिल्म की विशाल स्टारकास्ट ने भी जमकर मस्ती की। ट्रेलर की शुरुआत एक दिलचस्प लाइन से होती है "इंडिया की पहली 2000 करोड़ की फेक फिल्म", जो दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा देती है। कहानी में फिल्म निर्माण की दुनिया और उससे जुड़ी मजेदार परिस्थितियों को हास्यपूर्ण अंदाज में पेश किया गया है। परेश रावल ट्रेलर में टीम को समझाते नजर आते हैं कि उनकी फिल्म "आर्मी वाली" है, जिसके बाद हास्यास्पद घटनाओं की लंबी श्रृंखला शुरू होती है। ट्रेलर में कई ऐसे दृश्य हैं जो दर्शकों को लगातार हंसाने का वादा करते हैं। अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी भी लंबे समय बाद पुराने अंदाज में नजर आ रही है। दोनों कलाकारों की नोकझोंक दर्शकों को उनकी लोकप्रिय फिल्म 'हेरा फेरी' की याद दिला सकती है। ट्रेलर में कलाकारों की रियल लाइफ से जुड़े कुछ हल्के-फुल्के संदर्भ भी शामिल किए गए हैं, जो मनोरंजन को और बढ़ाते हैं। फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया है और यह 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, दिशा पटानी, जैकलीन फर्नांडिस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, उर्वशी रौतेला, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कई सितारे नजर आएंगे। विशाल स्टारकास्ट और दमदार कॉमेडी के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर गुरु रंधावा के दिल्ली स्थित जिम पर गुरुवार सुबह फायरिंग की घटना सामने आने के बाद सनसनी फैल गई। पश्चिम विहार इलाके के पुष्कर एन्क्लेव में स्थित ‘24 HS Fitness Delhi’ जिम के बाहर बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने कई राउंड गोलियां चलाईं। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और जिला पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और आरोपियों की पहचान के लिए कई टीमों को लगाया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी घटना के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे अनिल पंडित के नाम से एक पोस्ट वायरल हुआ, जिसमें फायरिंग की जिम्मेदारी ली गई। पोस्ट में दावा किया गया कि गुरु रंधावा को पहले भी सलमान खान से दूरी बनाने की चेतावनी दी गई थी। पोस्ट में कहा गया कि गुरु रंधावा सलमान खान के करीब थे और चेतावनी के बावजूद उन्होंने दूरी नहीं बनाई। साथ ही गैंग की ओर से दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की धमकी भी दी गई। पुलिस कर रही है दावों की जांच हालांकि, पुलिस अभी सोशल मीडिया पर किए गए दावों की सत्यता की जांच कर रही है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की गई है कि फायरिंग के पीछे वास्तव में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का ही हाथ है। सलमान खान विवाद से जुड़ रहा मामला लॉरेंस बिश्नोई गैंग लंबे समय से अभिनेता सलमान खान को धमकियां देता रहा है। 1998 के काले हिरण शिकार मामले को लेकर बिश्नोई समाज की नाराजगी और लॉरेंस गैंग की ओर से बार-बार दी जाने वाली धमकियों के कारण सलमान खान को पहले से ही Z+ सुरक्षा प्रदान की गई है। इसी कड़ी में हाल के वर्षों में सलमान खान और उनके करीबी लोगों से जुड़े कई मामलों में धमकी और फायरिंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब गुरु रंधावा के जिम पर हुई गोलीबारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।