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Ram Charan Talks Parenting Style

‘मैं थोड़ा सख्त पिता हूं’: Ram Charan ने पैरेंटिंग को लेकर किया खुलासा, पत्नी को बताया बच्चों की ‘नर्चरिंग पोल’

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Ram Charan with wife Upasana Konidela and children sharing family parenting moments.
Ram Charan Parenting Style Reveal

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Ram Charan ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ और पैरेंटिंग स्टाइल को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने खुद को “रफ (सख्त) पिता” बताते हुए कहा कि वह अपने बच्चों को खुलकर खेलने, गिरने और सीखने का मौका देते हैं, जबकि उनकी पत्नी Upasana Konidela परिवार की “नर्चरिंग पोल” हैं।

तीन बच्चों के पिता बनने के बाद बदली जिंदगी

राम चरण और उपासना ने 31 जनवरी 2026 को हैदराबाद में जुड़वां बच्चों–एक बेटे और एक बेटी–का स्वागत किया। इससे पहले उनकी ढाई साल की बेटी कारा (Kaara) है। अब उनके परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनके नाम हैं:

  • कारा (Kaara)
  • शिवराम (Shivram)
  • अनवीरा देवी (Anveera Devi)

एक इंटरव्यू में राम चरण ने कहा कि बच्चों के आने के बाद उनकी जिंदगी और घर पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने बच्चों को “दिल के बाहर धड़कते दिल” बताया।

“मैं उन्हें रिस्क लेने देता हूं”

राम चरण ने अपने पैरेंटिंग स्टाइल के बारे में कहा:
“मैं रफ तरह का पिता हूं। मैं उन्हें कूदने, गंदा होने, चढ़ने और रिस्क लेने देता हूं।”

उनका मानना है कि बच्चों को अनुभव से सीखने देना जरूरी है, जबकि उपासना बच्चों को प्यार और देखभाल से संभालती हैं।

उपासना हैं परिवार की ‘नर्चरिंग पोल’

राम ने अपनी पत्नी की तारीफ करते हुए कहा:
“उनकी मां नर्चरिंग पोल हैं, और मैं वह हूं जिसके पास बच्चे हिम्मत पाने आते हैं।”

यह संतुलन बच्चों के बेहतर विकास में मदद करता है।

स्टारडम के बीच ‘प्रेजेंट फादर’ बनने की कोशिश

Ram Charan ने बताया कि बिजी शेड्यूल के बावजूद वह एक “प्रेजेंट फादर” बनना चाहते हैं।
उनका कहना है कि:

  • बच्चों के साथ समय बिताना उनकी प्राथमिकता है
  • घर का माहौल बच्चों के आसपास ही घूमता है

उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने बच्चों से जिंदगी को आसान और खुशहाल तरीके से जीना सीखना चाहते हैं।

अलग तरीके से हो रही बच्चों की परवरिश

राम और उपासना अपने बच्चों को एक अलग और खुला माहौल दे रहे हैं:

  • Montessori शिक्षा
  • एक्सप्लोर करने की आजादी
  • सीमित और संतुलित पारिवारिक माहौल

राम चरण अपने पालतू जानवरों को भी परिवार का अहम हिस्सा मानते हैं और अपनी दुनिया को छोटा और संतुलित रखने में विश्वास रखते हैं।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री को लेकर अभिनेत्री एली अवराम ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दोनों इंडस्ट्री के कामकाज के तरीके पर खुलकर बात की और बताया कि उनके अनुभव काफी अलग रहे हैं।   साउथ इंडस्ट्री में मिला शांत और व्यवस्थित माहौल एली अवराम ने कहा कि उन्होंने तमिल, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया है और दोनों ही इंडस्ट्री से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, उनके अनुसार साउथ फिल्म इंडस्ट्री का सेट ज्यादा शांत, व्यवस्थित और सम्मानजनक होता है। वहां लोग संवाद के लिए वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं और काम का माहौल अपेक्षाकृत अनुशासित रहता है।   बॉलीवुड सेट पर जल्दी-जल्दी काम का दबाव एली ने बताया कि बॉलीवुड में काम करने का तरीका काफी तेज और दबाव भरा होता है। उन्होंने कहा कि कई बार शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुविधा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। उनके अनुसार, यहां तक कि अगर कोई कलाकार खाना भी खा रहा हो, तब भी उसे तुरंत शॉट के लिए बुला लिया जाता है। एली ने यह भी कहा, “यहां तक कि अगर आप बेहोश भी हो जाएं, तब भी आपको शॉट देना पड़ सकता है।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह अनुभव हर प्रोडक्शन या टीम के साथ अलग हो सकता है।   हालिया प्रोजेक्ट में बदला अनुभव एली अवराम ने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक नेटफ्लिक्स प्रोजेक्ट पर काम किया, जहां का अनुभव काफी बेहतर रहा। वहां पूरी टीम ने कलाकारों की सुविधा, आराम और खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा, जिसे उन्होंने बेहद सकारात्मक और सुखद अनुभव बताया।   फिल्मी करियर एली अवराम ने 2013 में फिल्म ‘मिक्की वायरस’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस 7’ में भी नजर आईं और बाद में ‘किस किसको प्यार करूं’ जैसी फिल्मों से उन्हें पहचान मिली।

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  मुंबई: बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक ‘हेरा फेरी’ के तीसरे पार्ट का इंतजार कर रहे फैंस के लिए बड़ा झटका सामने आया है। अभिनेता Akshay Kumar ने साफ कर दिया है कि ‘Hera Pheri 3’ फिलहाल नहीं बन रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी फिल्म Bhoot Bangla रिलीज हो चुकी है और फैंस उनसे लगातार इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर सवाल कर रहे थे। क्या बोले अक्षय कुमार? एक इंटरव्यू के दौरान अक्षय कुमार ने कहा कि “दुर्भाग्यवश, ‘हेरा फेरी 3’ अभी नहीं बन रही है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस खबर से उन्हें खुद भी झटका लगा था। अक्षय ने संकेत दिया कि फिल्म कई तरह की जटिलताओं में उलझी हुई है–हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ बातें वह सार्वजनिक तौर पर नहीं बता सकते। उनके मुताबिक, “ऐसा नहीं है कि हम तीनों साथ नहीं हैं। हम साथ हैं, लेकिन कई समझौते और मुद्दे हैं जो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।” विवादों में फंसी रही फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ लंबे समय से विवादों में घिरी हुई है। खासकर Paresh Rawal के अचानक प्रोजेक्ट से अलग होने की खबर ने सभी को चौंका दिया था। इसके अलावा, फिल्म के कॉपीराइट को लेकर निर्माता Firoz Nadiadwala और एक साउथ फिल्म प्रोड्यूसर के बीच कानूनी विवाद भी सामने आया, जिससे प्रोजेक्ट और अटक गया। फेमस तिकड़ी का क्या होगा? फैंस लंबे समय से Suniel Shetty, अक्षय कुमार और परेश रावल की आइकॉनिक तिकड़ी को फिर से पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। 2000 में रिलीज हुई Hera Pheri और 2006 की Phir Hera Pheri ने बाबूराव, राजू और श्याम के किरदारों को अमर बना दिया था। “बुढ़ापा न आ जाए…” अक्षय कुमार ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उम्मीद है फिल्म बनने में इतनी देरी न हो जाए कि “बुढ़ापा आ जाए।” उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सही समय आने पर फिल्म जरूर बनेगी, लेकिन फिलहाल इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा। फैंस को बड़ा झटका इस अपडेट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की निराशा साफ दिखाई दे रही है। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे फिलहाल टूटती नजर आ रही हैं।  

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मुंबई: हिंदी सिनेमा के दमदार कॉमिक अभिनेता राजपाल यादव ने अपने करियर, फिल्मी सफर और भविष्य की योजनाओं को लेकर एक खास बातचीत में दिलचस्प खुलासे किए हैं। अपनी आने वाली फिल्म भूत बंगला के प्रमोशन के दौरान उन्होंने न सिर्फ अपने सफर को याद किया, बल्कि अक्षय कुमार के साथ एक खास तरह की एक्शन फिल्म करने की इच्छा भी जाहिर की। करियर को आकार देने वाले तीन निर्देशक राजपाल यादव ने अपने 25 साल लंबे करियर में जिन निर्देशकों का सबसे बड़ा योगदान माना, उनमें राम गोपाल वर्मा, प्रियदर्शन और डेविड धवन का नाम प्रमुख रूप से लिया। उन्होंने कहा कि इन तीनों निर्देशकों ने उनके अंदर के कलाकार को निखारने में अहम भूमिका निभाई। छोटे-बड़े किरदारों में लगातार प्रयोगों के जरिए उन्हें अपने अभिनय की कई परतें दिखाने का मौका मिला। उनके मुताबिक, इन निर्देशकों ने उन्हें न सिर्फ 25 तरह के किरदार निभाने का अवसर दिया, बल्कि 250 नए अंदाज गढ़ने की प्रेरणा भी दी। ‘टॉम एंड जेरी’ जैसी जोड़ी बनाना चाहते हैं राजपाल यादव ने खुलकर कहा कि उनकी और अक्षय कुमार की जोड़ी को अक्सर ‘टॉम एंड जेरी’ से जोड़ा जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने अपनी बड़ी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि अगर वे दोनों इस तरह की जोड़ी हैं, तो उन्हें दुनिया का सबसे बेहतरीन ‘टॉम एंड जेरी’ बनकर दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह और अक्षय कुमार एक ऐसी फिल्म की तलाश में हैं, जिसमें दोनों का फुल-ऑन एक्शन और कॉमिक टकराव देखने को मिले। उनका मानना है कि दर्शक भी इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर जबरदस्त एक्शन अंदाज में देखने के लिए उत्सुक हैं। एक्शन फिल्म के बाद मिलेगी संतुष्टि राजपाल यादव का कहना है कि अक्षय कुमार के साथ एक पूरी तरह एक्शन फिल्म करने के बाद ही उन्हें एक अलग तरह की संतुष्टि मिलेगी। यह उनके करियर का एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।  

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