फैशन और ब्यूटी

Best Long-Lasting Summer Fragrances

गर्मियों में टिके रहने वाले 11 बेस्ट फ्रेग्रेंस, उमस में भी नहीं होंगे फीके

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Collection of summer perfumes with citrus, floral and woody notes suitable for humid weather
Best Summer Fragrances for Humid Weather

भारतीय गर्मी और उमस में परफ्यूम चुनना आसान नहीं होता। ऐसे मौसम में वही फ्रेग्रेंस काम आते हैं जो हल्के, फ्रेश होने के साथ लंबे समय तक टिके रहें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिट्रस, टी, फ्लोरल और हल्के वुडी नोट्स गर्मियों के लिए सबसे बेहतर होते हैं, जबकि रात के लिए वनीला, एंबर और ऊद जैसे नोट्स परफेक्ट रहते हैं।

यहां जानिए ऐसे 11 परफ्यूम जो उमस भरे मौसम में भी शानदार परफॉर्म करते हैं:

दिन और खास मौकों के लिए

  • Amouage Jubilation 25
    सिट्रस और एंबर का बैलेंस, खास शाम और फॉर्मल मौकों के लिए बेहतरीन।
  • Kayali Eden Plush Pear 23
    पियर और सिट्रस की फ्रेशनेस के साथ हल्का वनीला टच, डेली वियर के लिए परफेक्ट।
  • Givenchy Irresistible Rose Velvet
    रोज़ बेस्ड फ्रेग्रेंस जिसमें मॉडर्न ट्विस्ट और लॉन्ग लास्टिंग इफेक्ट है।

ऑफिस और डे टाइम के लिए

  • Bvlgari Eau Parfumée Thé Impérial
    टी और सिट्रस का कूलिंग ब्लेंड, ऑफिस के लिए सटल और एलिगेंट।
  • Michael Kors Pour Femme Absolu
    फ्लोरल और वनीला का स्मूद कॉम्बिनेशन, दिन से रात तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • Jo Malone London Orange Marmalade
    ऑरेंज सिट्रस की ताजगी, ब्रंच और कैजुअल आउटिंग के लिए परफेक्ट।

यूनिक और स्टेटमेंट फ्रेग्रेंस

  • Dior Cuir Saddle
    लेदर और वुडी नोट्स का हल्का लेकिन क्लासी मिश्रण, खास मौकों के लिए।
  • Sol de Janeiro Cheirosa 91
    पैशनफ्रूट और कारमेल का स्वीट-समर वाइब, बीच डे फील देता है।
  • Kylie Cosmetics Cosmic Kylie Jenner
    फ्रूटी और एंबर फ्लोरल का बैलेंस, डे-टू-नाइट के लिए बढ़िया।

बजट और नाइट वियर ऑप्शन

  • Secret Alchemist Rare Vanilla
    हल्का वनीला और फ्लोरल नोट्स, सॉफ्ट और लॉन्ग लास्टिंग।
  • Ahmed Al Maghribi Summer Oud
    ऊद और सैफरन के साथ स्ट्रॉन्ग लेकिन बैलेंस्ड खुशबू, नाइट वियर के लिए परफेक्ट।

क्यों जरूरी है सही फ्रेग्रेंस?

गर्मियों में गलत परफ्यूम या तो बहुत तेज लगने लगता है या जल्दी गायब हो जाता है। सही फ्रेग्रेंस वही है जो:

  • हल्का और सांस लेने जैसा लगे
  • लंबे समय तक टिका रहे
  • दिनभर की अलग-अलग गतिविधियों में फिट बैठे
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लंदन क्राफ्ट वीक 2026 में खास प्रदर्शनी: कैसे वेनेशियन ग्लास बीड्स ने राजस्थान में पाई नई पहचान

लंदन: सदियों पुराने शिल्प और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की कहानी को नई दृष्टि से पेश करती एक अनोखी प्रदर्शनी London Craft Week 2026 में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ‘Unbound by Beads: Migration, Memory & Material’ नामक यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कैसे वेनेशियन ग्लास बीड्स ने राजस्थान की पारंपरिक कला और पहचान को नया अर्थ दिया। यह प्रदर्शनी MOI Fine Jewellery, Princess Gauravi Kumari और Princess Diya Kumari Foundation के आर्टिजन कलेक्टिव के सहयोग से तैयार की गई है। 12वीं सदी से राजस्थान तक का सफर वेनेशियन कारीगर 12वीं सदी से ग्लास बीड्स बनाने की कला में माहिर रहे हैं। 16वीं सदी तक यह शिल्प इतना विकसित हो चुका था कि इन मोतियों का उपयोग व्यापार में मुद्रा के रूप में होने लगा। समुद्री व्यापार मार्गों के जरिए ये बीड्स यूरोप से अफ्रीका और फिर गुजराती व्यापारियों के माध्यम से भारत पहुंचे। समय के साथ, ये बीड्स पश्चिमी और उत्तरी भारत की स्थानीय परंपराओं का हिस्सा बन गए–खासतौर पर राजस्थान के बाड़मेर जिले में रहने वाले मेघवाल समुदाय में। महिलाओं की परंपरा और पहचान प्रदर्शनी का मुख्य फोकस इसी बात पर है कि कैसे इन बीड्स ने मेघवाल समुदाय की मातृसत्तात्मक परंपराओं में जगह बनाई। यहां युवा महिलाएं शादी से पहले अपनी मां और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बीडवर्क तैयार करती हैं, जिसे वे अपने ससुराल लेकर जाती हैं। यह शिल्प केवल सजावट नहीं, बल्कि पहचान, स्मृति और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। ‘कलेक्टेबल’ की नई परिभाषा MOI Fine Jewellery के संस्थापक पुजा और कुनाल शाह के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़े सवाल से शुरू हुआ–आखिर कोई वस्तु ‘कलेक्टेबल’ कब बनती है? उनके शोध में यह सामने आया कि असली मूल्य केवल सोना-हीरा नहीं, बल्कि उस वस्तु की कहानी, परंपरा और भावनात्मक महत्व भी होता है। तीन भागों में सजी प्रदर्शनी यह प्रदर्शनी तीन हिस्सों में विभाजित है: Material Histories: बीड्स के वैश्विक सफर की कहानी Living Practice: आज भी जीवित परंपराओं का दस्तावेज़ Serai Collection: फाइन ज्वेलरी कलेक्शन, जो इन ऐतिहासिक यात्राओं से प्रेरित है कारीगरों की दुनिया: बिना बाज़ार के भी जीवित कला इस प्रोजेक्ट के दौरान एक खास बात सामने आई–यह बीडवर्क पूरी तरह व्यावसायिक नहीं है। मेघवाल समुदाय में इसे खुद के उपयोग और अभिव्यक्ति के लिए बनाया जाता है, न कि बाजार में बेचने के लिए। यह पहल भारतीय हस्तशिल्प को केवल निर्यात या व्यापार के नजरिए से देखने की सोच को चुनौती देती है। लक्ज़री की नई सोच Gauravi Kumari के अनुसार, असली लक्ज़री वह है जो समय, मेहनत और कौशल से बनी हो। यह प्रदर्शनी इसी विचार को मजबूती देती है। पहचान और विरासत पर नई बहस ‘Unbound by Beads’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यह दर्शकों को अपनी पहचान और विरासत पर नए सिरे से सोचने का मौका देती है। यह दिखाती है कि एक छोटा सा ग्लास बीड भी सदियों की यात्रा और संस्कृति को अपने भीतर समेट सकता है। यह प्रदर्शनी 13 से 16 मई तक लंदन के The Lavery, Hazel Studio में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित की जाएगी।  

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बालों की सही देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि सही तकनीक और छोटे-छोटे स्मार्ट हैक्स से भी संभव है। हेयर एक्सपर्ट्स द्वारा सुझाए गए ये 6 आसान और असरदार हैक्स न सिर्फ आपके बालों की चमक और टेक्सचर सुधारते हैं, बल्कि उन्हें हेल्दी और मैनेजेबल भी बनाते हैं। 1. सेकंड-डे हेयर को करें रिवाइव अगर अगले दिन बाल बेजान और फ्लैट लगते हैं, तो leave-in conditioner और पानी का मिक्स बनाकर स्प्रे करें और हल्के हाथ से scrunch करें। इससे बालों में फिर से वेव्स और वॉल्यूम आ जाता है। 2. ड्राई शैम्पू का सही इस्तेमाल ड्राई शैम्पू को पूरे बालों में लगाने के बजाय सिर्फ oily हिस्सों (जैसे hairline, parting) पर लगाएं। इससे बाल हल्के, फ्रेश और नैचुरल मूवमेंट वाले बने रहते हैं। 3. Leave-in conditioner ऐसे लगाएं जैसे हैंड क्रीम Leave-in या हेयर ऑयल को सीधे बालों पर लगाने के बजाय पहले हाथों पर फैलाएं, फिर उंगलियों से बालों में लगाएं। इससे प्रोडक्ट बराबर फैलेगा और बाल greasy नहीं होंगे। 4. बालों का रंग ऐसे रखें सुरक्षित हार्ड वॉटर और क्लोरीन बालों के रंग को खराब कर सकते हैं। इसके लिए: शावर में फिल्टर का इस्तेमाल करें स्विमिंग से पहले बालों में ऑयल लगाएं इससे बालों का रंग लंबे समय तक चमकदार बना रहता है। 5. ज्यादा शैम्पू नहीं, ज्यादा पानी बाल धोते समय ज्यादा शैम्पू की जगह ज्यादा पानी का इस्तेमाल करें। खासकर sulfate-free shampoo के साथ, इससे बेहतर झाग बनेगा और बालों की नैचुरल नमी भी बरकरार रहेगी। 6. फ्लायअवे बालों को करें सेट छोटे-छोटे उड़ते बालों (flyaways) को सेट करने के लिए clear brow gel का इस्तेमाल करें। यह एक क्विक और प्रोफेशनल फिनिश देने वाला आसान ट्रिक है।  

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surbhi अप्रैल 18, 2026 0

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