फाइनेंस

जुलाई के पहले दिन सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Gold Silver Rate
Gold Silver Rate Update

नई दिल्ली, एजेंसियां। जुलाई महीने की शुरुआत सर्राफा बाजार में गिरावट के साथ हुई है। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का असर घरेलू बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) दोनों पर देखने को मिला। शादी-ब्याह के सीजन के बीच आई इस नरमी से ग्राहकों को राहत मिली है, जबकि निवेशक बाजार की अगली चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

 

एमसीएक्स पर सोना-चांदी में तेज गिरावट


एमसीएक्स पर सुबह के कारोबार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.08 फीसदी से अधिक टूटकर 1,40,998 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2.24 फीसदी की गिरावट के साथ 2,23,451 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली के कारण घरेलू कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

 

देशभर में खुदरा कीमतों में भी नरमी


इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिला। वहीं खुदरा बाजार में चांदी का भाव करीब 2,24,460 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि कुछ बाजारों में इसकी कीमत 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक रही।

 

खरीदारों के लिए अच्छा अवसर, विशेषज्ञों की सलाह


बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहा है तो मौजूदा गिरावट उसके लिए अच्छा अवसर हो सकती है। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में ताजा भाव की जानकारी लेना, हॉलमार्क की जांच करना और केवल विश्वसनीय जौहरियों से ही खरीदारी करना जरूरी है। इससे ग्राहकों को सही गुणवत्ता और उचित कीमत का लाभ मिल सकेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Share Market
जोरदार उछाल  के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। दो दिन की लगातार गिरावट के बाद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में जोरदार उछाल देखा गया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 443.97 अंक या 0.58 फीसदी बढ़कर 76,922.64 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 140.10 अंक या 0.59 फीसदी की तेजी के साथ 24,005.85 के स्तर पर पहुंच गया।   इंट्रा-डे में 631 अंक तक चढ़ा सेंसेक्स, कई बड़े शेयरों में खरीदारी दिन के दौरान सेंसेक्स में मजबूत तेजी देखने को मिली और यह 631.41 अंक तक उछलकर 77,110.08 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार को एटरनल, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी से सपोर्ट मिला। हालांकि, आईटी सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला, जहां एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे स्टॉक्स गिरावट में रहे।   वैश्विक बाजार और कच्चे तेल ने दिया सहारा वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में मिलाजुला लेकिन सकारात्मक रुख रहा। अमेरिका और एशियाई बाजारों में मजबूती ने भारतीय बाजार को सपोर्ट किया। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.07 फीसदी गिरकर 72.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे महंगाई की आशंका कम हुई और निवेशकों का भरोसा बढ़ा।   विशेषज्ञों की राय और निवेशकों की भावना विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में H2CY26 को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की उम्मीद, मध्य पूर्व में तनाव में कमी और कच्चे तेल की नरम कीमतें बाजार के लिए अनुकूल माहौल बना रही हैं।   FIIs की बिकवाली के बावजूद बाजार मजबूत हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को 2,556 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की थी, लेकिन इसके बावजूद बुधवार को घरेलू बाजार में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे, लेकिन अगले ही सत्र में निवेशकों ने मजबूत खरीदारी दिखाकर बाजार को ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Gold Silver Rate

जुलाई के पहले दिन सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

GST Collection

सरकार की टैक्स कमाई में बड़ा उछाल, जून में GST संग्रह 13.9% बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़

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LPG Price Update: जुलाई के पहले दिन मिली राहत, कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹183.50 और 5 किलो 'छोटू' सिलेंडर ₹13 हुआ सस्ता

Advit Jewels IPO shares debut with a strong premium, delivering impressive listing gains to investors on stock exchanges.
Advit Jewels IPO Listing: निवेशकों की पहले ही दिन हुई शानदार कमाई, 36% प्रीमियम पर लिस्ट हुए शेयर

आईपीओ बाजार में एक बार फिर निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिला है। राजस्थान के जयपुर स्थित हैंडक्राफ्टेड ज्वैलरी निर्माता Advit Jewels के शेयरों ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत करते हुए पहले ही दिन निवेशकों को करीब 36 फीसदी का मुनाफा दे दिया। कंपनी के शेयर बुधवार को BSE और NSE पर अपने इश्यू प्राइस से काफी ऊपर सूचीबद्ध हुए, जिससे आईपीओ में निवेश करने वाले शेयरधारकों की अच्छी कमाई हुई। किस भाव पर हुई लिस्टिंग? NSE पर Advit Jewels का शेयर ₹188.90 प्रति शेयर पर सूचीबद्ध हुआ। कंपनी का इश्यू प्राइस ₹138 था, यानी शेयर ने लगभग 36.8% प्रीमियम के साथ बाजार में एंट्री की। वहीं BSE पर शेयर ₹187 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 35.5% की बढ़त दर्शाता है। ग्रे मार्केट के अनुमान पर खरी उतरी लिस्टिंग शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट की उम्मीदों के अनुरूप रही। लिस्टिंग से पहले कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब ₹50 चल रहा था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि शेयर लगभग 36% प्रीमियम पर सूचीबद्ध हो सकता है। वास्तविक लिस्टिंग भी लगभग इसी स्तर पर रही। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स Advit Jewels के आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। आंकड़ों के अनुसार, यह इश्यू कुल मिलाकर 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशक श्रेणी: 95.30 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 536.38 गुना इतनी मजबूत सब्सक्रिप्शन ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि शेयर की लिस्टिंग दमदार हो सकती है। कंपनी जुटाई गई राशि का क्या करेगी? यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसमें 1.20 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए गए। इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं था। कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा— वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने के लिए मौजूदा कर्ज का भुगतान सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए निवेशकों के लिए क्या संकेत? Advit Jewels की मजबूत लिस्टिंग एक बार फिर यह दिखाती है कि जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिलता है, वे लिस्टिंग के दिन बेहतर रिटर्न दे सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि केवल लिस्टिंग गेन के आधार पर निवेश का निर्णय लेने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करें।  

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Gold Silver Price Today, 1 July 2026: जुलाई के पहले दिन सोना ₹1,600 तक टूटा, चांदी ₹5,700 सस्ती; जानें ताजा भाव

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शेयर बाजार में दो दिनों की गिरावट के बाद शानदार वापसी, सेंसेक्स 150 अंक से अधिक चढ़ा; निफ्टी 23,900 के पार

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Stock Market: गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 250 अंक टूटा

Rajeev Kumar
HDFC Bank के नए चेयरमैन बने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, RBI की मंजूरी का इंतजार

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को पार्ट-टाइम (गैर-कार्यकारी) चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। हालांकि उनका कार्यभार संभालना अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगा।   चार साल के लिए स्वतंत्र निदेशक भी नियुक्त   बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि 30 जून 2026 से राजीव कुमार को चार वर्ष के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त किया गया है। वहीं, चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जो RBI की मंजूरी मिलने की तारीख से प्रभावी होगा।   अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी   यह नियुक्ति पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty के मार्च 2026 में अचानक इस्तीफा देने के बाद हुई है। उनके इस्तीफे के बाद बैंक में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इस दौरान Keki Mistry अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।   बैंकिंग सुधारों का लंबा अनुभव   राजीव कुमार 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी हैं। वे वित्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और बाद में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।   निवेशकों की नजर आगे के फैसलों पर   विश्लेषकों का मानना है कि राजीव कुमार की नियुक्ति से HDFC Bank में नेतृत्व को स्थिरता मिलेगी। अब निवेशकों की नजर RBI की मंजूरी और बैंक के MD एवं CEO Sashidhar Jagdishan के कार्यकाल बढ़ाने के फैसले पर रहेगी।

abhishek singh जून 30, 2026 0
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