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CNG Prices Jump ₹4 Per Kg Within 8 Days

पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG भी महंगी, 8 दिनों में 4 रुपये तक बढ़े दाम

surbhi मई 23, 2026 0
CNG station fuel dispenser showing revised gas prices amid rising fuel costs in India
CNG Price Hike India May 2026

Compressed Natural Gas की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बने संकट का असर अब भारत के फ्यूल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार, 23 मई को देशभर में CNG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर इजाफा किया गया।

नई दरों के मुताबिक पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। वहीं CNG की कीमत में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है।

दिल्ली में CNG 81 रुपये के पार

ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में Compressed Natural Gas की कीमत 80.09 रुपये से बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है।

वहीं अन्य शहरों में नई कीमतें इस प्रकार हैं:

  • नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा: 89.70 रुपये प्रति किलो
  • गुरुग्राम: 86.12 रुपये प्रति किलो
  • कानपुर: 92.42 रुपये प्रति किलो

Indraprastha Gas Limited के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण यह बढ़ोतरी करनी पड़ी है।

8 दिनों में 4 रुपये तक बढ़े दाम

मई महीने में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। 15 मई से पहले दिल्ली में CNG की कीमत 77.09 रुपये प्रति किलो थी।

  • 15 मई: 2 रुपये की बढ़ोतरी
  • 17 मई: 1 रुपये की बढ़ोतरी
  • 23 मई: 1 रुपये की नई बढ़ोतरी

इस तरह सिर्फ 8 से 10 दिनों के भीतर CNG करीब 4 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इसी दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी लगभग पौने पांच रुपये तक का इजाफा दर्ज किया गया है।

आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

फ्यूल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम लोगों के बजट पर पड़ेगा। रोजाना कार, बाइक, ऑटो और टैक्सी से सफर करने वालों का खर्च बढ़ सकता है।

सबसे ज्यादा असर कमर्शियल वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ने की संभावना है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से आने वाले दिनों में फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं।

हालांकि कंपनियों का कहना है कि मौजूदा बढ़ोतरी के बाद भी CNG से वाहन चलाने का खर्च पेट्रोल और डीजल की तुलना में करीब 45 प्रतिशत तक कम है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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SBI IPO
SBI फंड्स मैनेजमेंट का ₹9,813 करोड़ का IPO 42 गुना सब्सक्राइब, 21 जुलाई को होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग

मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI Funds Management का ₹9,813 करोड़ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेशकों के जबरदस्त उत्साह के साथ बंद हो गया। IPO को कुल करीब 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिससे यह 2026 के सबसे बड़े और सबसे अधिक चर्चित IPO में शामिल हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत निवेशक भागीदारी कंपनी के बिजनेस मॉडल और म्यूचुअल फंड सेक्टर में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।   हर श्रेणी के निवेशकों ने दिखाई मजबूत दिलचस्पी   IPO को रिटेल, गैर-संस्थागत (NII) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) सभी वर्गों से अच्छा समर्थन मिला। अंतिम दिन संस्थागत निवेशकों की ओर से भारी बोली लगने के कारण कुल सब्सक्रिप्शन में तेज़ उछाल दर्ज किया गया।   भारत की सबसे बड़ी AMC में निवेश का मौका   SBI Funds Management, SBI Mutual Fund का निवेश प्रबंधन करती है और लगभग ₹12.5 लाख करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। कंपनी का मजबूत वितरण नेटवर्क, बढ़ता निवेशक आधार और म्यूचुअल फंड उद्योग में नेतृत्व इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।   17 जुलाई को अलॉटमेंट, 21 जुलाई को होगी लिस्टिंग   IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 17 जुलाई को होने की संभावना है। सफल निवेशकों के डिमैट खातों में शेयर 20 जुलाई तक क्रेडिट किए जाएंगे, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई 2026 को BSE और NSE पर सूचीबद्ध होंगे।   बाजार की नजर लिस्टिंग पर   ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) और रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन को देखते हुए बाजार में इस IPO की मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की समग्र स्थिति और निवेशकों की धारणा पर भी निर्भर करेगा।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Indian Stock Market Today

Stock Market: आईटी शेयरों के दम पर शेयर बाजार में तेजी, निवेशकों की नजर रिलायंस, HDFC बैंक और ICICI बैंक के नतीजों पर

Share Market

सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 77,186 पर ठहरा, निफ्टी में मामूली गिरावट

Fuel station displaying petrol and diesel prices as global crude oil rises while Indian fuel rates remain unchanged.

Petrol Price Today: अमेरिका में क्रूड ऑयल स्टॉक घटने से कच्चा तेल महंगा, भारत में 51वें दिन भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

EPFO digital claim processing dashboard highlighting record PF claim settlements and interest credited to millions of member accounts.
EPFO का बड़ा रिकॉर्ड: एक दिन में ₹3,000 करोड़ के 11 लाख PF क्लेम निपटाए, 34 करोड़ खातों में 8.25% ब्याज भी जमा

नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने डिजिटल सिस्टम में बड़ा बदलाव करते हुए क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी बना दिया है। संगठन ने हाल ही में Centralised IT Enabled Services (CITES) 2.01 का नया वर्जन लागू किया है, जिसके बाद रिकॉर्ड स्तर पर एक ही दिन में करीब 11 लाख क्लेम प्रोसेस किए गए। इन क्लेम्स की कुल राशि लगभग 3,000 करोड़ रुपये रही। नई तकनीक के लागू होने से न केवल लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो रहा है, बल्कि करोड़ों EPF खाताधारकों के खातों में ब्याज जमा करने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है। एक दिन में रिकॉर्ड 11 लाख क्लेम हुए प्रोसेस EPFO अधिकारियों के अनुसार, 3 जुलाई को CITES 2.01 लॉन्च होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग की गति में उल्लेखनीय सुधार आया है। मंगलवार को संगठन ने एक ही दिन में 11 लाख क्लेम का निपटारा किया, जिनकी कुल राशि लगभग ₹3,000 करोड़ थी। इससे लंबे समय से लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा भी साफ हो गया। अब 83% क्लेम हो रहे हैं ऑटो-प्रोसेस नई व्यवस्था लागू होने के बाद EPFO की ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग क्षमता में भी बड़ा सुधार हुआ है। पहले जहां लगभग 70% क्लेम स्वतः प्रोसेस होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 83% तक पहुंच गया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शिक्षा, चिकित्सा या अन्य पात्र कारणों से आंशिक PF निकासी (Partial Withdrawal) के कई क्लेम अब एक ही दिन में निपटाए जा सकते हैं। CITES 2.01 से क्या बदला? नई CITES 2.01 प्रणाली के तहत EPFO ने अपने डेटाबेस और क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम को पूरी तरह केंद्रीकृत (Centralised) किया है। इससे देशभर के किसी भी क्षेत्र से आने वाले क्लेम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोसेस किया जा सकता है। नई व्यवस्था के प्रमुख लाभ: पूरे देश में केंद्रीकृत क्लेम प्रोसेसिंग। क्लेम निपटान की तेज और पारदर्शी प्रक्रिया। मेंबर्स आसानी से जान सकेंगे कि वे अपने PF खाते से कितनी राशि निकाल सकते हैं। लंबित मामलों के निपटान में तेजी। ऑटोमेशन के जरिए मानवीय हस्तक्षेप में कमी। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम अपग्रेड के दौरान रुके हुए शेष 6–7 लाख मामलों का भी जल्द निपटारा किए जाने की उम्मीद है। 34 करोड़ खातों में 8.25% ब्याज जमा नई डिजिटल व्यवस्था का असर केवल क्लेम सेटलमेंट तक सीमित नहीं है। EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज भी लगभग 34 करोड़ सदस्यों के खातों में 15 जुलाई तक जमा कर दिया है। तेज ऑटोमेशन के कारण ब्याज क्रेडिट की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेजी से पूरी हुई। कर्मचारियों और सदस्यों को होगा बड़ा फायदा EPFO का मानना है कि ऑटोमेशन और डिजिटल प्रोसेसिंग से कर्मचारियों का समय बचेगा, जिससे वे पेंशन से जुड़े मामलों और अन्य सेवाओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। वहीं, करोड़ों EPF सदस्यों को क्लेम, ब्याज और अन्य सेवाओं के लिए पहले की तुलना में कम इंतजार करना पड़ेगा। नई CITES 2.01 प्रणाली को EPFO की डिजिटल सेवाओं में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जिससे भविष्य में क्लेम सेटलमेंट और सदस्य सेवाएं और अधिक तेज, पारदर्शी और आसान होने की उम्मीद है.  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Indian stock market display showing Sensex and Nifty trading higher during opening session

Share Market Opening: लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 250 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,150 के पार

NPS PRIDE-Disha dashboard displaying SIP return analysis, NAV history and pension fund comparison

NPS में बड़ा बदलाव: अब SIP का पूरा रिटर्न देख सकेंगे निवेशक, PFRDA ने लॉन्च किया PRIDE-Disha टूल

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NPS निवेशकों के लिए PFRDA का बड़ा कदम, अब SIP रिटर्न और 5,000 दिनों का NAV डेटा देख सकेंगे सब्सक्राइबर

Gold-Silver Price
Gold-Silver Price: सोना-चांदी हुआ सस्ता, खरीदारी का सुनहरा मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने या इनमें निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा बाजार में गिरावट के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आ गए हैं। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और घरेलू निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।   इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 680 रुपये की गिरावट आई है। इसके बाद सोने का औसत भाव घटकर ₹1,41,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण विभिन्न शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है।   वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। प्रति किलोग्राम चांदी का भाव करीब ₹1,320 घटकर ₹2,18,690 के स्तर पर आ गया है। कुछ शहरों में खुदरा मांग बेहतर रहने के कारण चांदी के दाम ₹2,19,800 प्रति किलो तक बने हुए हैं।   अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते सोना करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 0.34 प्रतिशत टूटकर 57.235 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।   बाजार विशेषज्ञों का कहना  बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी कीमतों में नरमी का एक प्रमुख कारण बनी है।   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव जारी रहता है तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को बाजार की चाल पर नजर रखते हुए ही खरीदारी का फैसला करना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
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