अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सम्मेलन ESCMID Global 2026 में पेश एक नए अध्ययन ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। शोध के अनुसार, नवजात शिशुओं में जन्म के कुछ घंटों के भीतर ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन (ARGs) पाए जा रहे हैं, जो भविष्य में संक्रमण के इलाज को जटिल बना सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने 105 नवजात शिशुओं के meconium (पहला मल) के नमूनों का विश्लेषण किया, जिन्हें जन्म के 72 घंटों के भीतर नवजात गहन देखभाल इकाई (NICU) में भर्ती किया गया था।
इन नमूनों में 56 प्रकार के एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन की जांच की गई।
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता Argyro Ftergioti ने बताया कि यह अपने प्रकार का सबसे बड़ा अध्ययन है, जो नवजातों में शुरुआती माइक्रोबियल और जेनेटिक एक्सपोजर को समझने के लिए किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि:
ये दोनों जीन आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स के खिलाफ बैक्टीरिया को मजबूत बनाते हैं।
इसके अलावा, कई नमूनों में beta-lactamase एंजाइम बनाने वाले जीन भी पाए गए, जैसे:
ये एंजाइम महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स को निष्क्रिय कर सकते हैं।
चौंकाने वाली बात यह रही कि 21% नमूनों में carbapenem रेजिस्टेंस से जुड़े जीन भी मिले–ये एंटीबायोटिक्स आमतौर पर “last-resort” मानी जाती हैं।
हर नमूने में औसतन 8 अलग-अलग रेजिस्टेंस जीन पाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि नवजात का आंत (gut) पहले से ही “resistome” यानी रेजिस्टेंस जीन के संग्रह से भरा हो सकता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि:
इससे साफ होता है कि अस्पताल का वातावरण और शुरुआती मेडिकल हस्तक्षेप भी इन जीन के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजातों में इतनी जल्दी रेजिस्टेंस जीन का पाया जाना चिंताजनक है। इससे भविष्य में संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ये जीन आगे चलकर बच्चों के माइक्रोबायोम और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करेंगे। इसके लिए और रिसर्च की जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हम अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट तभी शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं जब उन्हें सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। फैमिली फिजिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सिल्जा शेफर के मुताबिक, कोई एक सुपरफूड या फूड कॉम्बिनेशन खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन कुछ खास संयोजन शरीर को पोषक तत्वों का अधिक लाभ दिलाने में मदद करते हैं। 1. गाजर या कद्दू के साथ ऑलिव ऑयल गाजर और कद्दू में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। यह पोषक तत्व वसा की मौजूदगी में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। फायदा: आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी। 2. टमाटर के साथ एवोकाडो या अच्छा तेल टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। इसे शरीर में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। फायदा: हृदय और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद। 3. सब्जियों पर नट्स और बीजों की टॉपिंग बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट और फाइबर प्रदान करती हैं। फायदा: फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में मदद और अतिरिक्त पोषण। 4. प्रोटीन और विटामिन C का संयोजन कोलेजन के निर्माण के लिए शरीर को प्रोटीन के साथ विटामिन C की भी आवश्यकता होती है। बेहतरीन उदाहरण: दही और बेरीज दाल और शिमला मिर्च मछली और नींबू फायदा: त्वचा, कनेक्टिव टिश्यू और घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन। 5. ओट्स के साथ बेरीज या सेब ओट्स में मौजूद प्लांट-बेस्ड आयरन विटामिन C के साथ ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित होता है। फायदा: आयरन की कमी से बचाव में मदद। 6. दाल या बीन्स के साथ टमाटर और शिमला मिर्च दालों में मौजूद नॉन-हीम आयरन को शरीर बेहतर तरीके से उपयोग कर सके, इसके लिए विटामिन C जरूरी है। फायदा: शाकाहारी लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी। 7. हल्दी के साथ काली मिर्च हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने आप में कम अवशोषित होता है, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन इसकी जैव उपलब्धता को कई गुना बढ़ा देता है। फायदा: सूजन और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं में मददगार। 8. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का साथ प्रीबायोटिक्स (फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ) अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं, जबकि प्रोबायोटिक्स सीधे फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। बेहतरीन उदाहरण: दही या केफिर के साथ फल दलिया और योगर्ट फायदा: आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद। सिर्फ फूड कॉम्बिनेशन ही नहीं, संतुलित जीवनशैली भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि पोषक तत्वों का अवशोषण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। आंतों का स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ बीमारियां भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन, थकान और स्किन संबंधी समस्याएं आम बात हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार, अत्यधिक गर्मी तनाव, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और मानसिक थकान को बढ़ा सकती है। क्यों बिगड़ सकता है मानसिक स्वास्थ्य? विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है तो शरीर को अपना सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसका असर दिमाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। गर्मी के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति बेचैनी, गुस्सा या मानसिक थकान महसूस कर सकता है। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। नींद और डिहाइड्रेशन भी बनते हैं समस्या गर्मी के मौसम में पर्याप्त नींद न मिलना, मूड स्विंग्स और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं डिहाइड्रेशन के कारण कमजोरी, एकाग्रता में कमी और काम पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग पहले से मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दवाएं ले रहे हैं, वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे रखें मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। संतुलित और हल्का भोजन करें। मौसमी फलों और ताजे खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें। नियमित योग, व्यायाम और मेडिटेशन करें। दोपहर की तेज धूप से बचें। प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें। सेल्फ-केयर भी है जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सेल्फ-केयर केवल आराम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि लंबे समय तक तनाव, चिंता या उदासी महसूस हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। चिलचिलाती गर्मी में लोग अक्सर नींबू पानी या आम पन्ना पीकर राहत पाते हैं, लेकिन अगर आप कुछ नया और अलग स्वाद ट्राई करना चाहते हैं तो इस समर सीजन में तीन खास और रंग-बिरंगे ड्रिंक्स आपकी पार्टी और वीकेंड ब्रंच का आकर्षण बन सकते हैं। ये ड्रिंक्स न केवल दिखने में शानदार हैं, बल्कि शरीर को ठंडक और ताजगी भी देते हैं। ओशन ब्लू मॉकटेल बनेगा पार्टी की शान ओशन ब्लू मॉकटेल अपने आकर्षक नीले रंग के कारण लोगों का ध्यान तुरंत खींच लेता है। इसे बनाने के लिए गिलास में पुदीने की पत्तियां और नींबू के टुकड़े डालकर हल्का मसलें। इसके बाद बर्फ, ब्लू कुराकाओ सिरप, नींबू का रस और सोडा या स्प्राइट मिलाएं। तैयार ड्रिंक समुद्र जैसी ठंडक और ताजगी का एहसास कराता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इसे पसंद करते हैं। सनसेट मैंगो पपाया पंच का लाजवाब स्वाद आम और पपीते का मिश्रण इस ड्रिंक को स्वाद और सेहत दोनों के लिहाज से खास बनाता है। इसका पीला-नारंगी रंग ढलते सूरज की खूबसूरती की याद दिलाता है। पके आम और पपीते को शहद या चीनी, भुना जीरा, काला नमक और बर्फ के साथ ब्लेंड कर स्मूद ड्रिंक तैयार किया जाता है। यह गाढ़ा और पौष्टिक पेय गर्मियों के लिए बेहतरीन विकल्प है। रूबी रेड वॉटरमेलन रिफ्रेशर देगा तुरंत राहत तरबूज से बना यह ड्रिंक गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है। तरबूज का ताजा रस निकालकर उसमें नींबू का रस, चाट मसाला और बर्फ मिलाई जाती है। चाहें तो थोड़ा सोडा भी डाल सकते हैं। इसका गहरा लाल रंग और हल्का मीठा स्वाद इसे बेहद खास बनाता है। स्वाद के साथ सेहत भी ये तीनों ड्रिंक्स प्राकृतिक फलों और ताजगी भरे फ्लेवर से तैयार होते हैं। गर्मियों में मेहमानों को कुछ नया परोसना हो या खुद को ठंडक पहुंचानी हो, तो ये यूनिक और कलरफुल समर ड्रिंक्स बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।