झारखंड

Jharkhand Faces Severe LPG Supply Crisis

झारखंड में गैस संकट की आहट: कॉमर्शियल LPG सप्लाई 80% घटी, बुकिंग और डिलीवरी में बढ़ा इंतजार

surbhi मार्च 17, 2026 0
LPG cylinders stacked outside gas agency amid supply shortage affecting commercial use in Jharkhand
Jharkhand LPG Supply Crisis 2026

झारखंड में गैस संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों की आपूर्ति में भारी कटौती के कारण होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर सीधा असर पड़ने वाला है। राज्य में इस संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सप्लाई में 80% कटौती, बढ़ेंगी मुश्किलें

झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की ओर से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में 80 प्रतिशत की कमी कर दी गई है। अब राज्य को केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिल पा रही है।

इस फैसले का असर सीधे तौर पर बाजार, होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा।

 

बुकिंग और रिफिलिंग में बढ़ा इंतजार

राज्य में गैस की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले जहां गैस बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, अब डिलीवरी में 3 से 4 दिन लग रहे हैं।

इसके साथ ही घरेलू गैस की बुकिंग अवधि भी बढ़ा दी गई है-

  • शहरी क्षेत्रों में 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक का इंतजार

 

लाखों रिफिल पेंडिंग, स्थिति गंभीर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 मार्च 2026 तक राज्य में करीब 3.27 लाख गैस रिफिल लंबित हैं।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियों ने यह जानकारी साझा की है।

13 मार्च को केंद्र और राज्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल आपूर्ति सीमित रहेगी।

 

जरूरत 2273 MT, मिल रही सिर्फ 20% गैस

मंत्री के अनुसार झारखंड में हर महीने औसतन 2273 मीट्रिक टन कॉमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है। लेकिन कटौती के बाद अब सिर्फ करीब 454 मीट्रिक टन गैस ही उपलब्ध हो पा रही है, जो कुल मांग का मात्र 20 प्रतिशत है।

 

होटल-रेस्तरां और उद्योग पर असर

इस कमी का सबसे ज्यादा असर रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और रामगढ़ जैसे शहरों के होटल, रेस्तरां और औद्योगिक कैंटीन पर पड़ेगा। कॉमर्शियल गैस के बिना इन संस्थानों का संचालन प्रभावित हो सकता है।

 

राज्य के राजस्व पर भी पड़ेगा असर

कॉमर्शियल गैस की कमी से न सिर्फ आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि राज्य सरकार को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। होटल और व्यवसायिक गतिविधियों में कमी आने से GST के जरिए मिलने वाला राजस्व घटने की आशंका है।

 

अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर

मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच की स्थिति का असर गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

 

स्थिति पर नजर, समाधान की कोशिश जारी

राज्य सरकार और गैस कंपनियों के बीच लगातार बातचीत जारी है। हालांकि, फिलहाल आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को गैस की कमी और बढ़े इंतजार का सामना करना पड़ेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंडः पुलिस थानों को अब 90 दिनों में पूरा करना होगा अनुसंधान

रांची। झारखंड के पुलिस थानों को अब मामला दर्ज होने के बाद 60 से 90 दिनों में अनुसंधान पूरा करना होगा। राज्य में नए आपराधिक कानूनों को धरातल पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय अब सख्त हो गया है। डीजीपी द्वारा सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को इस संबंध में निर्देश जारी किया गया है।  आज की बैठक अहम आज यानी 21 मई को दोपहर तीन बजे पुलिस आईजी अभियान की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल ऑनलाइन समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्य के नए आपराधिक कानूनों के परिप्रेक्ष्य में पुलिस की तैयारियों और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। 5 मुख्य बिंदुओं पर होगी समीक्षा – मोबाइल फोनः नए कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिसकर्मियों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की प्रगति की जांच होगी। – ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोडिंग: डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए ‘ई-साक्ष्य’ ऐप और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी। – 60 से 90 दिनों में जांच पूरी करना: नए कानूनों के प्रावधानों के तहत मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए पुलिस को 60 से 90 दिनों के भीतर अपनी जांच अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी, इसकी कार्ययोजना पर बात होगी। – हर जिले में CCTNS ऑपरेटर: क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर जिले में ऑपरेटरों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। – CCTNS में पुराने डेटा की एंट्री: पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और डेटा को डिजिटल सिस्टम में दर्ज करने को लेकर धनबाद एसएसपी द्वारा एक विशेष प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।

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धनबाद में AJSU नेताओं पर हमला, फायरिंग में छात्र नेता समेत कई घायल

धनबाद। धनबाद में आजसू नेताओं पर हमला हुआ है।  लोयाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत बांसजोड़ा में आजसू नेताओं की बैठक के दौरान अचानक हुए हमले से इलाके में सनसनी फैल गई। बैठक के बीच अज्ञात अपराधियों ने हमला बोल दिया जिसके बाद वहां अफरा-तफरी और भगदड़ की स्थिति बन गई। मिली जानकरी के अनुसार घटना के दौरान फायरिंग भी हुई जिसमें एक युवक घायल हो गया, जबकि कई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। बैठक के दौरान हुआ हमला हमले में आजसू छात्र नेता हीरालाल महतो समेत कई समर्थकों को चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में हाल के दिनों में मिल रही धमकियों और इलाके में कथित कोयला कारोबार से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान हमला कर दिया गया। फायरिंग में घायल युवक की पहचान किशन रजवार के रूप में हुई है। उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और लोगों में दहशत देखी जा रही है। पुलिस कर रही मामले की जांच लोयाबाद थाना प्रभारी टीकू प्रसाद ने फायरिंग की घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस मामले की जांच में जुटी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया गया। ग्रामीण एसपी ने कहा कि हमले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और घटना के पीछे की वजहों की भी जांच की जा रही है। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

Anjali Kumari मई 21, 2026 0
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रागिनी सिंह पर टिप्पणी से धनबाद में बवाल, बीजेपी महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय का फूंका पुतला

धनबाद। धनबाद में रागिनी सिंह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विधायक के समर्थकों और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने रणधीर वर्मा चौक पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए बीजेपी महानगर जिला अध्यक्ष श्रवण राय का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग भी की।   प्रदर्शन के दौरान लगे तीखे नारे विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। “श्रवण राय हाय-हाय”, “महिला सम्मान से खिलवाड़ बंद करो” और “रागिनी सिंह के सम्मान में हम सब मैदान में” जैसे नारों से रणधीर वर्मा चौक गूंज उठा। समर्थकों का आरोप है कि श्रवण राय ने सार्वजनिक मंच से महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   आभार यात्रा के दौरान हुई थी कथित टिप्पणी जानकारी के अनुसार, सांसद ढुल्लू महतो की आभार यात्रा के दौरान श्रवण राय ने कथित रूप से रागिनी सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद से ही विधायक समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई थी। मंगलवार को इसी विरोध के तहत बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।   महिला नेताओं ने जताई नाराजगी प्रदर्शन में शामिल बीजेपी नेता रश्मि  और सुनीता साहू ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रागिनी सिंह लगातार क्षेत्र की समस्याओं को उठाती रही हैं और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।   कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी समर्थकों ने बीजेपी नेतृत्व से मांग की कि श्रवण राय सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस घटना के बाद बीजेपी संगठन के भीतर भी हलचल तेज हो गई है।

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