देशभर में 2 अप्रैल 2026 की सुबह तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। हर दिन की तरह आज भी फ्यूल की कीमतों में कुछ शहरों में स्थिरता रही, जबकि कुछ इलाकों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अगर आप आज गाड़ी की टंकी फुल कराने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले अपने शहर के लेटेस्ट रेट जरूर चेक कर लें। बड़े शहरों में क्या है पेट्रोल का हाल? देश के प्रमुख महानगरों में आज पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 प्रति लीटर पर स्थिर है। नई दिल्ली में ₹94.77 प्रति लीटर बना हुआ है। कोलकाता ₹105.41 और चेन्नई ₹101.23 प्रति लीटर पर स्थिर हैं। हालांकि, NCR के शहरों में हल्की राहत देखने को मिली है। गुरुग्राम में ₹0.12 और नोएडा में ₹0.14 की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, बिहार के कुछ शहरों में कीमतों में बढ़ोतरी हुई है- भागलपुर में ₹0.64 और पटना में ₹0.12 की बढ़त दर्ज की गई। डीजल की कीमतों में क्या बदलाव? डीजल के दाम भी आज अधिकतर बड़े शहरों में स्थिर बने हुए हैं। दिल्ली में डीजल ₹87.67 और मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर है। लेकिन बिहार और झारखंड के कुछ जिलों में डीजल महंगा हुआ है- भागलपुर में ₹0.60 और पटना में ₹0.11 की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर, कुछ शहरों में राहत भी मिली है- नोएडा और मुजफ्फरपुर में डीजल के दामों में गिरावट दर्ज की गई। क्यों बदलते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई अहम कारकों पर निर्भर करता है- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (VAT और Excise Duty) इन्हीं वजहों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं। SMS से ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट आप घर बैठे मोबाइल से भी पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जान सकते हैं- Indian Oil: “RSP <शहर कोड>” लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर SMS करें
अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों के बीच देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर भारतीय तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। कंपनियों ने क्या कहा? तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से कहा: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है लोगों को घबराकर खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं BPCL का बयान भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने कहा कि: पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें पूरी तरह गलत हैं कंपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी है HPCL ने भी किया साफ हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने ग्राहकों से अपील की: “देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य खपत जारी रखें।” क्यों फैली अफवाह? 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तेल और गैस टैंकरों में देरी की खबरें आईं इसी के चलते लोगों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ने लगी। सरकार और पीएम का संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में कहा था कि: खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं हालांकि, फिलहाल देश में सप्लाई सामान्य बनी हुई है। क्या करें उपभोक्ता? अफवाहों पर भरोसा न करें घबराकर ज्यादा ईंधन खरीदने से बचें सामान्य तरीके से ही उपयोग जारी रखें
झारखंड में गैस संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों की आपूर्ति में भारी कटौती के कारण होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर सीधा असर पड़ने वाला है। राज्य में इस संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। सप्लाई में 80% कटौती, बढ़ेंगी मुश्किलें झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की ओर से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में 80 प्रतिशत की कमी कर दी गई है। अब राज्य को केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिल पा रही है। इस फैसले का असर सीधे तौर पर बाजार, होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा। बुकिंग और रिफिलिंग में बढ़ा इंतजार राज्य में गैस की उपलब्धता कम होने से उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले जहां गैस बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर मिल जाता था, अब डिलीवरी में 3 से 4 दिन लग रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू गैस की बुकिंग अवधि भी बढ़ा दी गई है- शहरी क्षेत्रों में 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक का इंतजार लाखों रिफिल पेंडिंग, स्थिति गंभीर सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 मार्च 2026 तक राज्य में करीब 3.27 लाख गैस रिफिल लंबित हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियों ने यह जानकारी साझा की है। 13 मार्च को केंद्र और राज्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि फिलहाल आपूर्ति सीमित रहेगी। जरूरत 2273 MT, मिल रही सिर्फ 20% गैस मंत्री के अनुसार झारखंड में हर महीने औसतन 2273 मीट्रिक टन कॉमर्शियल गैस की आवश्यकता होती है। लेकिन कटौती के बाद अब सिर्फ करीब 454 मीट्रिक टन गैस ही उपलब्ध हो पा रही है, जो कुल मांग का मात्र 20 प्रतिशत है। होटल-रेस्तरां और उद्योग पर असर इस कमी का सबसे ज्यादा असर रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर और रामगढ़ जैसे शहरों के होटल, रेस्तरां और औद्योगिक कैंटीन पर पड़ेगा। कॉमर्शियल गैस के बिना इन संस्थानों का संचालन प्रभावित हो सकता है। राज्य के राजस्व पर भी पड़ेगा असर कॉमर्शियल गैस की कमी से न सिर्फ आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि राज्य सरकार को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। होटल और व्यवसायिक गतिविधियों में कमी आने से GST के जरिए मिलने वाला राजस्व घटने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच की स्थिति का असर गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। स्थिति पर नजर, समाधान की कोशिश जारी राज्य सरकार और गैस कंपनियों के बीच लगातार बातचीत जारी है। हालांकि, फिलहाल आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को गैस की कमी और बढ़े इंतजार का सामना करना पड़ेगा।
एक हफ्ते की परेशानी के बाद सुधरने लगी स्थिति बिहार में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की कमी को लेकर पैदा हुई परेशानी अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। राज्य के कई जिलों में LPG सिलिंडरों की आपूर्ति में रविवार से सुधार दर्ज किया गया है। तेल कंपनियों ने बॉटलिंग प्लांटों में रिफिलिंग बढ़ा दी है, जिससे वितरकों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने लगी है। तेल कंपनियों ने बढ़ाई रिफिलिंग क्षमता राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां - Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum - मिलकर कुल नौ बॉटलिंग प्लांट संचालित करती हैं। सामान्य हालात में इन प्लांटों से रोजाना छह लाख से अधिक LPG सिलिंडरों की रिफिलिंग और आपूर्ति की जाती है। हाल के दिनों में संकट गहराने के बाद कंपनियों ने रिफिलिंग और सप्लाई में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती कर दी थी। इसके कारण कई जिलों में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई और उपभोक्ताओं को सिलिंडर मिलने में परेशानी होने लगी। अब रिफिलिंग बढ़ने के बाद आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई भी बहाल सरकार ने कुल उत्पादन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा कॉमर्शियल सिलिंडरों के लिए निर्धारित किया है। इसके तहत अस्पतालों, रेलवे, शिक्षण संस्थानों, कैटरिंग सेवाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी गैस की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। शनिवार देर रात बक्सर, कोइलवर और पटना जैसे इलाकों में कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई की गई, जिससे इन संस्थानों को राहत मिली है। कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी गैस संकट के दौरान कालाबाजारी की शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। Dr. Thyagarajan SM ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सिलिंडरों की अवैध बिक्री या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार दोषी पाए जाने पर सीधे प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। साथ ही लापरवाही करने वाले वितरकों पर Essential Services Maintenance Act (ESMA) के तहत भी कार्रवाई की तैयारी है, ताकि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। पटना में लाखों उपभोक्ताओं का दबाव राजधानी पटना में गैस वितरण व्यवस्था पर काफी दबाव है। यहां करीब 145 गैस वितरकों के जरिए लगभग 16.96 लाख सक्रिय उपभोक्ताओं को LPG सिलिंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक अकेले इंडियन ऑयल के पास करीब 9.88 लाख उपभोक्ता हैं। औसतन एक गैस एजेंसी पर 11 से 12 हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में आपूर्ति में थोड़ी भी कमी होने पर पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। प्रशासन की निगरानी से मिलने लगी राहत तेल कंपनियों द्वारा रिफिलिंग क्षमता बढ़ाने और प्रशासन की सख्त निगरानी के बाद राज्य में LPG आपूर्ति व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में गैस की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।