झारखंड

BJP Targets Deputy Mayor Posts in Jharkhand

झारखंड में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की नजर, जानिए नगर निकायों में कैसे होता है

surbhi मार्च 6, 2026 0
Jharkhand Deputy Mayor Election
Jharkhand municipal councillors meeting ahead of deputy mayor and vice chairman elections amid BJP strategy discussions.

डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की नजर, जानिए नगर निकायों में कैसे होता है चुनाव

झारखंड में नगर निकाय चुनाव में महापौर और पार्षद के परिणाम आने के बाद अब डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के पदों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी इन पदों पर अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए संगठन स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि राज्य के सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी काबिज हों।

इसके लिए महापौर, अध्यक्ष और पार्षद के रूप में निर्वाचित भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है, ताकि चुनाव के दौरान उन्हें समर्थन मिल सके।

भाजपा को जीत की उम्मीद

प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक का कहना है कि महापौर और पार्षद चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को अन्य दलों की तुलना में बेहतर सफलता मिली है। उनका दावा है कि राज्य के नौ नगर निगमों में से पांच में भाजपा समर्थित उम्मीदवार महापौर बने हैं। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि जहां महापौर उनके समर्थन से चुने गए हैं, वहां डिप्टी मेयर भी भाजपा समर्थित ही होगा। वहीं जिन निकायों में महापौर या अध्यक्ष भाजपा के नहीं हैं, वहां भी पार्टी अपने समर्थकों को डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष बनाने का प्रयास करेगी।

नगर निकाय चुनाव में उम्मीद से कम सफलता

हालांकि भाजपा को इस बार शहरी क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। राज्य के 48 नगर निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित करीब 16 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके। नौ नगर निगमों में से रांची, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीतने में सफल रहे।

नगर परिषद की 20 सीटों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को तीन सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस समर्थित दो, झामुमो समर्थित चार और 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

नगर पंचायतों में भाजपा का पलड़ा भारी

नगर पंचायतों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखे। यहां छह सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते, जबकि झामुमो समर्थित चार और आठ निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए। एक सीट पर भाकपा माले समर्थित उम्मीदवार धनवार से अध्यक्ष पद पर चुने गए।

रांची में महापौर पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो ने जीत दर्ज की, हालांकि गिरिडीह और देवघर जैसे महत्वपूर्ण नगर निगम भाजपा के हाथ से निकल गए। गिरिडीह नगर निगम में पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जीत हासिल की, जबकि देवघर में भी झामुमो समर्थित उम्मीदवार को सफलता मिली।

पार्षद निभाते हैं अहम भूमिका

डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव में निर्वाचित पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के तौर पर रांची नगर निगम में 53 वार्ड हैं और सभी वार्डों से चुने गए पार्षद ही डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करेंगे। जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही डिप्टी मेयर चुना जाएगा।

10 से 20 मार्च तक पूरी होगी प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 10 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के मुताबिक सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए तिथिवार कार्यक्रम तय कर दिया गया है।

ऐसे होता है डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव

नगर निगमों में डिप्टी मेयर और नगर परिषद व नगर पंचायतों में उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। इसमें आम मतदाता हिस्सा नहीं लेते, बल्कि केवल निर्वाचित वार्ड पार्षद ही मतदान करते हैं।

मेयर या अध्यक्ष इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेते। पार्षदों में से कोई भी उम्मीदवार डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकता है और इस पद के लिए किसी प्रकार का आरक्षण भी नहीं होता।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले सभी वार्ड पार्षदों का शपथ ग्रहण कराया जाता है। इसके बाद डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन और मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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रांची। UPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को रांची में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और प्रमंडलीय अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस संबंध में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त Manoj Kumar की अध्यक्षता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।   अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारियों की जानकारी बैठक में आयुक्त के सचिव अलोक कुमार ने परीक्षा कार्य में प्रतिनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान प्रत्येक केंद्र पर प्रशासनिक निगरानी रखी जाएगी और सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।   मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश आयुक्त मनोज कुमार ने सभी केंद्र अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।   दो पालियों में आयोजित होगी परीक्षा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। पहला पेपर सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक लिया जाएगा। रांची के 36 परीक्षा केंद्रों पर कुल 16,531 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे।   परीक्षा अवधि में अधिकारी रहेंगे अलर्ट आयुक्त ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के एक दिन पहले से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सभी अधिकारी अलर्ट मोड में रहेंगे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है।

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