झारखंड

Jharkhand to Support IAS Aspirants with Delhi Flats

झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: दिल्ली में फ्लैट लेकर छात्रों को दिलाई जाएगी IAS की कोचिंग

surbhi मार्च 14, 2026 0
Jharkhand government plans flats in New Delhi to support students preparing for IAS and civil services.
Jharkhand IAS Coaching Scheme

 

विधानसभा में 3568 करोड़ की अनुदान मांग मंजूर

झारखंड विधानसभा में शुक्रवार को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और महिला-बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं के लिए 3568.19 करोड़ रुपये की अनुदान मांग को मंजूरी दे दी गई। इस बजट का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना है।

चर्चा के दौरान सरकार की ओर से मंत्री Chamra Linda ने बताया कि झारखंड सरकार युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी में मदद देने के लिए एक नई योजना शुरू करने जा रही है।

 

दिल्ली में फ्लैट लेकर कराई जाएगी IAS की तैयारी

मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि सरकार राजधानी New Delhi में फ्लैट खरीदने की योजना बना रही है। इन फ्लैटों में झारखंड के चयनित छात्रों को रहने की सुविधा दी जाएगी और उन्हें IAS सहित अन्य सिविल सेवाओं की तैयारी के लिए कोचिंग कराई जाएगी।

सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के आदिवासी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र बेहतर संसाधनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।

 

SC छात्रों के लिए बनेगा पांच मंजिला कोचिंग संस्थान

सरकार की योजना के तहत अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए कमड़े क्षेत्र में पांच मंजिला कोचिंग संस्थान का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा ओबीसी छात्रों के लिए शहीद निर्मल महतो के नाम पर नगड़ा टोली में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं JEE और NEET की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग सेंटर शुरू किया जाएगा।

 

हर जिले में बनेगा ‘धुमकुड़िया’

सरकार ने हर जिले में तीन मंजिला वृहद धुमकुड़िया बनाने की भी योजना बनाई है।

  • पहले तल पर सांस्कृतिक केंद्र
  • दूसरे तल पर कोचिंग की सुविधा
  • तीसरे तल पर लाइब्रेरी

इससे युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ने का अवसर मिलेगा।

 

प्रमंडल स्तर पर आधुनिक अस्पताल की योजना

आदिवासी कल्याण विभाग की ओर से प्रत्येक प्रमंडल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल भी स्थापित किए जाएंगे। इन अस्पतालों में MRI सहित कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

विधानसभा में इस बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दे उठाए। Neera Yadav ने मांग की कि राज्य के सभी जिलों में ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावास बनाए जाएं और दिव्यांग व बुजुर्गों की पेंशन राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किया जाए।

वहीं विधायक Purnima Sahu ने आरोप लगाया कि सर्वजन पेंशन योजना के बजट में पिछले साल की तुलना में करीब 333 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।

 

ट्राइबल छात्रावासों की स्थिति पर भी सवाल

विपक्ष के नेता Babulal Marandi ने ट्राइबल छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि कई छात्रावासों में न तो सुरक्षा गार्ड हैं और न ही रसोइया, जिससे छात्रों को परेशानी होती है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि शिक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि राज्य के वंचित वर्गों को वास्तविक लाभ मिल सके।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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People shielding themselves from intense heat as temperatures cross 44°C in Jharkhand’s Medininagar
झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, मेदिनीनगर में पारा 44 डिग्री के पार

Jharkhand में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। रांची समेत कई जिलों में बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के मुताबिक 23 और 24 मई को Ranchi, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग और कोडरमा में तेज धूप और बढ़ते तापमान से लोगों को परेशानी हो सकती है। हालांकि कुछ इलाकों में दोपहर बाद बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है, लेकिन गर्मी से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इन जिलों में लू का अलर्ट मौसम विभाग ने पलामू, गढ़वा, चतरा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला में लू चलने की आशंका जताई है। लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा 24 और 25 मई को राज्य के उत्तर-पूर्वी और मध्य हिस्सों, खासकर बोकारो और धनबाद में तेज आंधी और वज्रपात की संभावना जताई गई है। 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं कई इलाकों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भी वज्रपात का खतरा मेदिनीनगर सबसे गर्म Medininagar राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अन्य प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार रहा: जमशेदपुर: 38.6 डिग्री सेल्सियस बोकारो: 41.5 डिग्री सेल्सियस चाईबासा: 39.4 डिग्री सेल्सियस रांची: 39.2 डिग्री सेल्सियस लोगों को सतर्क रहने की सलाह भीषण गर्मी और लू को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में बाहर निकलने से बचने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।  

surbhi मई 23, 2026 0
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झारखंड में वोटर लिस्ट सुधार अभियान शुरू, फर्जीवाड़ा करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

रांची। झारखंड में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग 20 जून 2026 से ‘विशेष गहन सुधार और जांच कार्यक्रम’ (SIR) शुरू करने जा रहा है। रांची स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करना है, लेकिन किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना जांच और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा।   23 मई से बूथों पर लगेगी अनमैप्ड वोटरों की सूची निर्वाचन आयोग के अनुसार वर्तमान मतदाता सूची का पुरानी सूची से मिलान किया जा रहा है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची 23 मई से अगले दो सप्ताह तक संबंधित बूथों पर चिपकाई जाएगी। ऐसे मतदाता अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर जानकारी सही करा सकेंगे।   5 अगस्त को जारी होगी ASDD सूची 5 अगस्त 2026 को चुनाव आयोग नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। इसी दिन एब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं की ASDD सूची भी प्रकाशित की जाएगी। यह सूची राजनीतिक दलों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी और आम लोग भी इसे आयोग की वेबसाइट पर देख सकेंगे।   झूठी जानकारी देने पर होगी FIR मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने चेतावनी दी कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या सुधार के लिए झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत FIR दर्ज की जाएगी। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच और मतदाताओं की सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।

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हजारीबाग में वन विभाग ने लकड़ी माफियाओं पर कसा शिकंजा, मशीन सेट और 25 पीस चिरान पटरा किया जब्त

हजारीबाग। हजारीबाग  में वन विभाग ने अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बरकट्ठा वन परिसर क्षेत्र के सलैया मौजा में संचालित एक अवैध आरा मशीन पर छापेमारी की। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभागीय टीम ने आरा मशीन का पूरा सेट और 25 पीस चिरान पटरा जब्त किया। कार्रवाई के बाद इलाके में लकड़ी माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।   गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी जानकारी के अनुसार, बरही प्रक्षेत्र के वन क्षेत्र पदाधिकारी को सूचना मिली थी कि सलैया मौजा में बिना अनुमति अवैध रूप से आरा मशीन चलाई जा रही है।यहां जंगलों से काटकर लाई गई लकड़ियों को चिरान कर तैयार किया जा रहा था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर छापेमारी की।   प्रभारी वनपाल के नेतृत्व में चला अभियान इस कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी वनपाल पंकज कुमार ने किया। छापेमारी के दौरान विभागीय टीम ने मशीन सेट और तैयार लकड़ी के पटरे जब्त किए। अभियान में वनरक्षी राजेंद्र कुमार, अमन कुमार, सिकंदर कुमार, कृष्णा प्रसाद, सिकंदर नायक, भोला कुमार, विद्याभूषण, गोपी पासवान, वीरेंद्र कुमार, संजीत कुमार, आशीष कुमार और चेतन कुमार सहित कई कर्मी शामिल रहे।   अवैध कारोबारियों में बढ़ी दहशत स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से चोरी-छिपे लकड़ी कटाई और चिरान का कारोबार चल रहा था। हालांकि हाल के दिनों में वन विभाग की लगातार सक्रियता के कारण अवैध कारोबारियों पर दबाव बढ़ा है।   दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई वन विभाग ने साफ कहा है कि जंगलों की अवैध कटाई और वन संपदा की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने बताया कि मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में लगातार छापेमारी अभियान चलाकर अवैध आरा मशीनों और लकड़ी कारोबार पर कार्रवाई जारी रहेगी।

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